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India First Medal in Commonwealth Games 2026: झंडू कुमार का कमाल, Boxing में जादुमणि की जीत

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Commonwealth Games 2026 में भारत का पदकों का इंतजार खत्म हो गया है। भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार (Jhandu Kumar) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को पहला Bronze Medal दिलाया। उन्होंने पुरुषों की पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, बॉक्सिंग रिंग से भी अच्छी खबर आई, जहां भारतीय मुक्केबाज जादुमणि सिंह (Jadumani Singh) ने अपना पहला मुकाबला जीतकर अगले दौर में जगह बना ली।

190 Kg वजन उठाकर रचा इतिहास

झंडू कुमार ने प्रतियोगिता के दौरान अपने दमदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और कांस्य पदक अपने नाम किया। यह केवल उनके करियर की बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि Commonwealth Games 2026 में भारत का पहला मेडल भी है। इस सफलता के साथ भारतीय दल का मनोबल भी काफी बढ़ गया है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

झंडू कुमार की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। बिहार के रहने वाले झंडू ने आर्थिक तंगी के बीच अपना सपना जिंदा रखा। परिवार की मदद के लिए उन्होंने कभी सब्जियां बेचीं तो कभी ई-रिक्शा चलाया। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। लगातार मेहनत और मजबूत इरादों का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है।

उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी प्रतिभा को नहीं रोक सकती। यही वजह है कि उनकी जीत को सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष और हौसले की जीत भी माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

झंडू कुमार की ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने झंडू के संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देगी।

Boxing में भी भारत की मजबूत शुरुआत

पैरा पावरलिफ्टिंग के बाद भारतीय बॉक्सिंग टीम ने भी शानदार शुरुआत की। मुक्केबाज जादुमणि सिंह ने अपने पहले मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। उनकी जीत से भारत की पदक उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

अब इन खेलों पर रहेगी नजर

भारत की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही है। आने वाले दिनों में कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से कई और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि शुरुआती प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो भारत इस बार भी पदक तालिका में मजबूत स्थिति बना सकता है।

Commonwealth Games 2026 का पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। वहीं, जादुमणि सिंह की जीत ने भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

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Yukta

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Sikh Pilgrims

Sikh Pilgrims पाकिस्तान ने बदले Religious Yatra Rules, Private Travel पर सख्ती

भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं को लेकर एक बार फिर नियमों में सख्ती देखने को मिल रही है। पाकिस्तान में सामने आए जासूसी मामले के बाद अब धार्मिक यात्रियों की आवाजाही और उनके दस्तावेजों की जांच को लेकर व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबर है। खास तौर पर सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्राओं को लेकर Private Tour के बजाय अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा कराने पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत से पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा में SGPC (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) और HSGMC (Haryana Sikh Gurdwara Management Committee) जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम हो सकती है। यानी श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के लिए तय संस्थागत प्रक्रिया का पालन करना होगा। जासूसी मामले के बाद Security पर फोकस पाकिस्तान में सामने आए कथित जासूसी मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियां धार्मिक यात्राओं को लेकर भी ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं। यात्रियों की पहचान, यात्रा का उद्देश्य, दस्तावेज और उनके यात्रा कार्यक्रम की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, नियमों में बदलाव को किसी एक जासूसी मामले से सीधे जोड़ने को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे फिलहाल पाकिस्तान की बढ़ी हुई Security और Documentation प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। Private Tour पर क्यों बढ़ी सख्ती? निजी स्तर पर धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों की जानकारी और यात्रा कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी मुश्किल हो सकती है। इसके मुकाबले SGPC या HSGMC जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से जत्थे जाने पर यात्रियों की सूची और यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले से व्यवस्थित रहती है। यही वजह है कि धार्मिक यात्राओं को एक निर्धारित चैनल के जरिए संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे यात्रियों के दस्तावेजों और यात्रा कार्यक्रम की जांच भी पहले से की जा सकती है। श्रद्धालुओं के लिए क्या बदलेगा? अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो पाकिस्तान जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को निजी तौर पर Travel Plan बनाने के बजाय अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से यात्रा की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए Private Tour या व्यक्तिगत व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं। अब उन्हें जत्थे या अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर भी विवाद इसी बीच पाकिस्तान में धार्मिक यात्रियों से जुड़ा एक और मामला सामने आया। फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पाकिस्तान से भारत के हेमकुंड साहिब जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को कथित तौर पर यात्रा की अनुमति नहीं मिली। अधिकारियों की ओर से NOC यानी No Objection Certificate को लेकर सवाल उठाए गए। इस घटना के बाद धार्मिक यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेजों और दोनों देशों के बीच लागू नियमों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। भारत-पाकिस्तान के बीच Religious Travel का पुराना Protocol भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं के लिए लंबे समय से एक निर्धारित व्यवस्था मौजूद है। 1974 Religious Shrines Protocol के तहत दोनों देशों के श्रद्धालुओं को कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की अनुमति दी जाती है। पाकिस्तान में ननकाना साहिब, पंजा साहिब और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारे भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक महत्व रखते हैं। हर साल अलग-अलग मौकों पर श्रद्धालुओं के जत्थे इन धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। वहीं, पाकिस्तान के सिख श्रद्धालु भी भारत में हेमकुंड साहिब समेत दूसरे धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। Wagah-Attari Route को लेकर भी उठी मांग पाकिस्तानी श्रद्धालुओं की भारत यात्रा को लेकर Wagah-Attari Land Route का मुद्दा भी सामने आया है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने पाकिस्तान के हाई कमिश्नर को पत्र लिखकर पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए जमीन के रास्ते भारत आने की अनुमति देने की मांग की थी। धार्मिक यात्राओं को लेकर लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी चिंता यही है कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर उनकी आस्था और यात्रा पर न पड़े। फिलहाल तस्वीर यही है कि India-Pakistan Religious Yatra को लेकर सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में अधिकृत संस्थाओं के जरिए यात्रा करना और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखना बेहद जरूरी हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bank Holiday

Bank Holiday: 5-Day Working की मांग को लेकर हड़ताल, शनिवार-रविवार से लगातार 3 दिन असर

देशभर के Bank Holiday 5-Day Working की मांग को लेकर आज हड़ताल का रुख अपनाया है। बैंककर्मियों की मांग है कि बैंकों में सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम हो और शनिवार-रविवार को नियमित छुट्टी दी जाए। हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी होने से बैंक शाखाओं की सेवाओं पर लगातार तीन दिनों तक असर पड़ सकता है। बैंक यूनियनों की ओर से लंबे समय से 5-Day Banking System लागू करने की मांग उठाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में पांच दिन काम और दो दिन की छुट्टी से कर्मचारियों को आराम के साथ परिवार के लिए भी समय मिल सकेगा। Bank Strike का ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में होने वाले रोजमर्रा के कई काम प्रभावित हो सकते हैं। कैश जमा करना, नकद निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक ड्राफ्ट और दूसरी branch-related services के लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम परेशानी होगी। UPI, ATM, Internet Banking और Mobile Banking जैसी सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है। किसी तकनीकी समस्या या बैंक की अपनी व्यवस्था के कारण इनमें अस्थायी दिक्कत अलग बात हो सकती है। क्यों हो रही है 5-Day Working की मांग? बैंक कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिन की working व्यवस्था से कर्मचारियों को बेहतर Work-Life Balance मिल सकता है। उनका मानना है कि लगातार दो दिन की छुट्टी मिलने से कर्मचारी अगले सप्ताह बेहतर ऊर्जा और क्षमता के साथ काम कर पाएंगे। यह मांग बैंकिंग कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चर्चा में रही है। यूनियनों का जोर है कि बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक कामकाजी माहौल के अनुरूप बनाया जाए। शनिवार-रविवार की छुट्टी से बढ़ेगा असर आज की हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण कई बैंक शाखाएं लगातार तीन दिन प्रभावित रहेंगी। ऐसे में जिन ग्राहकों का कोई जरूरी branch work है, उन्हें अगले working day तक इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर महीने या सप्ताह के जरूरी भुगतान, चेक क्लियरेंस या दूसरे शाखा संबंधी काम वाले ग्राहकों को पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा। Digital Banking से राहत की उम्मीद आज बैंकिंग का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है। मोबाइल से पैसे ट्रांसफर करने से लेकर बिल भुगतान और UPI transaction तक कई काम घर बैठे किए जा सकते हैं। इसलिए हड़ताल का असर मुख्य रूप से physical bank branches पर देखने को मिल सकता है। फिर भी जिन लोगों को बैंक शाखा में जाकर काम कराना जरूरी है, उन्हें बैंक दोबारा खुलने के बाद भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। अब सरकार और बैंकिंग संगठनों पर नजर बैंक कर्मचारियों की 5-Day Working की मांग के बीच अब सभी की नजर आगे होने वाली बातचीत पर है। कर्मचारियों की मांग और बैंकिंग सेवाओं की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना अहम होगा। फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि जरूरी branch-related काम को ध्यान में रखकर अपनी banking plan करें और जहां संभव हो, Digital Banking Services का इस्तेमाल करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hezbollah

Hezbollah Tunnel Blast: इजराइल ने उड़ाया 2 KM लंबा सुरंग नेटवर्क, दर्ज हुआ 4.1 Magnitude का कंपन

इजराइल और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान में बड़ी सैन्य कार्रवाई हुई है। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के एक बड़े Underground Tunnel Network को विस्फोट कर ध्वस्त करने का दावा किया है। यह सुरंग करीब 2 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है। इसे उड़ाने के बाद इलाके में इतना तेज कंपन महसूस हुआ कि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 4.1 Magnitude की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की। इजराइल के मुताबिक यह कोई सामान्य सुरंग नहीं थी, बल्कि हिजबुल्लाह का एक बड़ा भूमिगत सैन्य परिसर था। सेना का दावा है कि यहां हथियारों के साथ-साथ कमांड और ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए भी इंतजाम किए गए थे। इजराइल ने क्यों उड़ाई हिजबुल्लाह की सुरंग? इजराइली सेना के अनुसार यह Underground Complex दक्षिणी लेबनान के Ali al-Taher Ridge क्षेत्र में बनाया गया था। सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह ने इस इलाके में अपनी सैन्य क्षमता को छिपाने के लिए जमीन के नीचे लंबा नेटवर्क तैयार किया था। इजराइल का कहना है कि इस सुरंग के भीतर हथियार रखने की जगह, कमांड सेंटर और लड़ाकों के लंबे समय तक भूमिगत रहने के इंतजाम मौजूद थे। यही वजह है कि इसे नष्ट करना इजराइली सेना के लिए एक अहम ऑपरेशन माना जा रहा है। जोरदार Blast के बाद आया 4.1 का कंपन सुरंग को नष्ट करने के लिए किए गए विस्फोट के बाद आसपास के इलाके में जोरदार कंपन महसूस किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इस दौरान 4.1 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की। इस घटना ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि यह कंपन प्राकृतिक भूकंप के बजाय बड़े सैन्य विस्फोट के बाद दर्ज किया गया था। धमाके की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका असर आसपास के क्षेत्र में महसूस किया गया। Tunnel के अंदर हथियारों का जखीरा होने का दावा इजराइली सेना ने दावा किया है कि इस भूमिगत परिसर में रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन और एंटी-टैंक हथियारों समेत कई तरह की सैन्य सामग्री मौजूद थी। यहां हिजबुल्लाह की Badr Unit से जुड़ा कमांड ढांचा होने की बात भी कही गई है। इजराइल लंबे समय से हिजबुल्लाह के Underground Infrastructure को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। ऐसे में इस सुरंग का नष्ट किया जाना इजराइल की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। Netanyahu का बड़ा बयान, बोले- Mission Complete कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ऑपरेशन को लेकर संतोष जताया। इजराइली नेतृत्व ने संकेत दिया कि इलाके में सुरक्षा से जुड़े अभियान का अहम लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दक्षिणी लेबनान में तनाव खत्म हो गया है। इजराइल की ओर से साफ कहा गया है कि इलाके पर निगरानी जारी रहेगी और हिजबुल्लाह को दोबारा अपना सैन्य ढांचा खड़ा करने से रोकने की कोशिश की जाएगी। South Lebanon में अभी भी तनाव बरकरार दक्षिणी लेबनान लंबे समय से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव का प्रमुख क्षेत्र रहा है। यहां जमीन के ऊपर सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ Underground Networks को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबे सुरंग नेटवर्क का ध्वस्त किया जाना इस बात का संकेत है कि जमीन के नीचे बनाए गए सैन्य ढांचे को लेकर इजराइल कितना गंभीर है। अब इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्षेत्र में तनाव कम होगा या आने वाले दिनों में Israel-Hezbollah Conflict और बढ़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Delhi पहुंचे Putin, Modi से Meeting पर नजर; Su-57 Deal की भी चर्चा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS Summit 2026 में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। उनके भारत दौरे को लेकर पहले से ही काफी चर्चा थी। अब पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली उनकी मुलाकात पर है। भारत और रूस के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है, पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है। Putin-Modi Meeting पर सबकी नजर पुतिन के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है। इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लगातार अपनी Strategic Autonomy पर जोर देता रहा है। वहीं रूस भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल है। Su-57 को लेकर भी चर्चा तेज पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस के Su-57 Fighter Jet को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच इस विमान से संबंधित संभावित सहयोग पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, अभी इसे किसी पक्की डील के तौर पर नहीं देखा जा सकता। किसी संभावित समझौते की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही इसकी तस्वीर साफ होगी। इसलिए फिलहाल Su-57 को लेकर चल रही खबरों को संभावित बातचीत के तौर पर ही देखना बेहतर है। 2016 Goa Summit में हुआ था S-400 Agreement भारत और रूस के संबंधों में साल 2016 का Goa BRICS Summit भी काफी अहम रहा था। उस समय दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। इनमें S-400 सिस्टम से जुड़ा अंतर-सरकारी समझौता भी शामिल था। अब करीब दस साल बाद एक बार फिर BRICS के मंच पर भारत और रूस की मुलाकात हो रही है। यही वजह है कि इस बार दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलकों में खास दिलचस्पी है। BRICS Summit में कई Global Issues पर होगी चर्चा BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में कई मोर्चों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। रूस-यूक्रेन संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया की स्थिति और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, कई मुद्दे अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में हैं। भारत के लिए BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है। यह ऐसा प्लेटफॉर्म भी है जहां नई दिल्ली अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करते हुए वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखती है। India-Russia Relations के लिए क्यों खास है दौरा? पुतिन की दिल्ली यात्रा को केवल एक BRICS दौरे के रूप में देखना आसान होगा, लेकिन इसके पीछे भारत-रूस संबंधों का बड़ा संदर्भ भी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से भरोसे और रणनीतिक सहयोग की परंपरा रही है। अब देखना होगा कि Modi-Putin Meeting से दोनों देशों के रिश्तों को लेकर क्या नए संकेत मिलते हैं। खासकर व्यापार, ऊर्जा और भविष्य के रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल पुतिन के दिल्ली पहुंचने के साथ ही BRICS Summit 2026 की हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में भारत-रूस बातचीत से निकलने वाले संदेश पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की नजर भी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kedarnath

Weather Update: Kedarnath में Cloudburst से पैदल मार्ग बंद, UP-MP में Flood जैसे हालात

देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही तेज बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। उत्तराखंड के केदारनाथ (Kedarnath) से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। कहीं बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड से रास्ते बंद हो गए हैं, तो कहीं पुल और हाईवे पानी में डूब गए हैं। मौसम की इस मार से सबसे ज्यादा परेशानी पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को हो रही है। Kedarnath में Cloudburst, पैदल मार्ग पर आया मलबा उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र में भारी बारिश के बीच Cloudburst की घटना सामने आई है। इसके बाद पहाड़ी रास्ते पर मलबा आने से पैदल यात्रा मार्ग प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के कारण लैंडस्लाइड का खतरा भी बना हुआ है। केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले इलाके में मौसम अचानक बदलने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। प्रशासन के सामने फिलहाल रास्ते को सुरक्षित बनाने और यात्रियों की आवाजाही को लेकर चुनौती बनी हुई है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा विशेष रूप से बढ़ जाता है।  Mirzapur में पुल पर बारिश का असर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। तेज बारिश और बढ़ते पानी के कारण पुल और आसपास के इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर पानी भरने से स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण सड़क और पुलों पर पानी बढ़ने से प्रशासन को भी लगातार स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है। Farrukhabad में Highway पर भरा पानी फर्रुखाबाद में भारी बारिश के बाद हाईवे पर जलभराव की स्थिति बन गई। सड़क पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई और यात्रियों को परेशानी हुई। हाईवे पर पानी बढ़ने के कारण कई जगह यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी रही। बारिश का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में दिखाई दे रहा है जहां पहले से जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर है। Damoh में बाढ़ जैसे हालात मध्य प्रदेश के दमोह में भी लगातार बारिश के बाद हालात चिंताजनक हो गए हैं। कई इलाकों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीण और निचले क्षेत्रों में बारिश का पानी पहुंचने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। प्रशासन की नजर जलस्तर और प्रभावित इलाकों पर बनी हुई है। कई राज्यों में बारिश बनी आफत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि इस समय बारिश सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि कई इलाकों में बड़ी चुनौती बन चुकी है। पहाड़ों में Cloudburst और Landslide का खतरा है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में Waterlogging और Flood-like Situation लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। ऐसे मौसम में सबसे जरूरी लोगों की सुरक्षा है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने और जोखिम वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। केदारनाथ जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम साफ होने और रास्तों की स्थिति सामान्य होने तक अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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