भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं को लेकर एक बार फिर नियमों में सख्ती देखने को मिल रही है। पाकिस्तान में सामने आए जासूसी मामले के बाद अब धार्मिक यात्रियों की आवाजाही और उनके दस्तावेजों की जांच को लेकर व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबर है। खास तौर पर सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्राओं को लेकर Private Tour के बजाय अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा कराने पर जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत से पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा में SGPC (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) और HSGMC (Haryana Sikh Gurdwara Management Committee) जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम हो सकती है। यानी श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के लिए तय संस्थागत प्रक्रिया का पालन करना होगा।
जासूसी मामले के बाद Security पर फोकस
पाकिस्तान में सामने आए कथित जासूसी मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियां धार्मिक यात्राओं को लेकर भी ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं। यात्रियों की पहचान, यात्रा का उद्देश्य, दस्तावेज और उनके यात्रा कार्यक्रम की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, नियमों में बदलाव को किसी एक जासूसी मामले से सीधे जोड़ने को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे फिलहाल पाकिस्तान की बढ़ी हुई Security और Documentation प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
Private Tour पर क्यों बढ़ी सख्ती?
निजी स्तर पर धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों की जानकारी और यात्रा कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी मुश्किल हो सकती है। इसके मुकाबले SGPC या HSGMC जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से जत्थे जाने पर यात्रियों की सूची और यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले से व्यवस्थित रहती है।
यही वजह है कि धार्मिक यात्राओं को एक निर्धारित चैनल के जरिए संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे यात्रियों के दस्तावेजों और यात्रा कार्यक्रम की जांच भी पहले से की जा सकती है।
श्रद्धालुओं के लिए क्या बदलेगा?
अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो पाकिस्तान जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को निजी तौर पर Travel Plan बनाने के बजाय अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से यात्रा की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए Private Tour या व्यक्तिगत व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं। अब उन्हें जत्थे या अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर भी विवाद
इसी बीच पाकिस्तान में धार्मिक यात्रियों से जुड़ा एक और मामला सामने आया। फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पाकिस्तान से भारत के हेमकुंड साहिब जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को कथित तौर पर यात्रा की अनुमति नहीं मिली। अधिकारियों की ओर से NOC यानी No Objection Certificate को लेकर सवाल उठाए गए।
इस घटना के बाद धार्मिक यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेजों और दोनों देशों के बीच लागू नियमों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
भारत-पाकिस्तान के बीच Religious Travel का पुराना Protocol
भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं के लिए लंबे समय से एक निर्धारित व्यवस्था मौजूद है। 1974 Religious Shrines Protocol के तहत दोनों देशों के श्रद्धालुओं को कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की अनुमति दी जाती है।
पाकिस्तान में ननकाना साहिब, पंजा साहिब और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारे भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक महत्व रखते हैं। हर साल अलग-अलग मौकों पर श्रद्धालुओं के जत्थे इन धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं।
वहीं, पाकिस्तान के सिख श्रद्धालु भी भारत में हेमकुंड साहिब समेत दूसरे धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं।
Wagah-Attari Route को लेकर भी उठी मांग
पाकिस्तानी श्रद्धालुओं की भारत यात्रा को लेकर Wagah-Attari Land Route का मुद्दा भी सामने आया है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने पाकिस्तान के हाई कमिश्नर को पत्र लिखकर पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए जमीन के रास्ते भारत आने की अनुमति देने की मांग की थी।
धार्मिक यात्राओं को लेकर लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी चिंता यही है कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर उनकी आस्था और यात्रा पर न पड़े।
फिलहाल तस्वीर यही है कि India-Pakistan Religious Yatra को लेकर सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में अधिकृत संस्थाओं के जरिए यात्रा करना और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखना बेहद जरूरी हो सकता है।
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