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Hezbollah Tunnel Blast: इजराइल ने उड़ाया 2 KM लंबा सुरंग नेटवर्क, दर्ज हुआ 4.1 Magnitude का कंपन

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इजराइल और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान में बड़ी सैन्य कार्रवाई हुई है। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के एक बड़े Underground Tunnel Network को विस्फोट कर ध्वस्त करने का दावा किया है। यह सुरंग करीब 2 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है। इसे उड़ाने के बाद इलाके में इतना तेज कंपन महसूस हुआ कि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 4.1 Magnitude की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की।

इजराइल के मुताबिक यह कोई सामान्य सुरंग नहीं थी, बल्कि हिजबुल्लाह का एक बड़ा भूमिगत सैन्य परिसर था। सेना का दावा है कि यहां हथियारों के साथ-साथ कमांड और ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए भी इंतजाम किए गए थे।

इजराइल ने क्यों उड़ाई हिजबुल्लाह की सुरंग?

इजराइली सेना के अनुसार यह Underground Complex दक्षिणी लेबनान के Ali al-Taher Ridge क्षेत्र में बनाया गया था। सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह ने इस इलाके में अपनी सैन्य क्षमता को छिपाने के लिए जमीन के नीचे लंबा नेटवर्क तैयार किया था।

इजराइल का कहना है कि इस सुरंग के भीतर हथियार रखने की जगह, कमांड सेंटर और लड़ाकों के लंबे समय तक भूमिगत रहने के इंतजाम मौजूद थे। यही वजह है कि इसे नष्ट करना इजराइली सेना के लिए एक अहम ऑपरेशन माना जा रहा है।

जोरदार Blast के बाद आया 4.1 का कंपन

सुरंग को नष्ट करने के लिए किए गए विस्फोट के बाद आसपास के इलाके में जोरदार कंपन महसूस किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इस दौरान 4.1 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की।

इस घटना ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि यह कंपन प्राकृतिक भूकंप के बजाय बड़े सैन्य विस्फोट के बाद दर्ज किया गया था। धमाके की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका असर आसपास के क्षेत्र में महसूस किया गया।

Tunnel के अंदर हथियारों का जखीरा होने का दावा

इजराइली सेना ने दावा किया है कि इस भूमिगत परिसर में रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन और एंटी-टैंक हथियारों समेत कई तरह की सैन्य सामग्री मौजूद थी। यहां हिजबुल्लाह की Badr Unit से जुड़ा कमांड ढांचा होने की बात भी कही गई है।

इजराइल लंबे समय से हिजबुल्लाह के Underground Infrastructure को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। ऐसे में इस सुरंग का नष्ट किया जाना इजराइल की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

Netanyahu का बड़ा बयान, बोले- Mission Complete

कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ऑपरेशन को लेकर संतोष जताया। इजराइली नेतृत्व ने संकेत दिया कि इलाके में सुरक्षा से जुड़े अभियान का अहम लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दक्षिणी लेबनान में तनाव खत्म हो गया है। इजराइल की ओर से साफ कहा गया है कि इलाके पर निगरानी जारी रहेगी और हिजबुल्लाह को दोबारा अपना सैन्य ढांचा खड़ा करने से रोकने की कोशिश की जाएगी।

South Lebanon में अभी भी तनाव बरकरार

दक्षिणी लेबनान लंबे समय से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव का प्रमुख क्षेत्र रहा है। यहां जमीन के ऊपर सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ Underground Networks को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

2 किलोमीटर से ज्यादा लंबे सुरंग नेटवर्क का ध्वस्त किया जाना इस बात का संकेत है कि जमीन के नीचे बनाए गए सैन्य ढांचे को लेकर इजराइल कितना गंभीर है। अब इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्षेत्र में तनाव कम होगा या आने वाले दिनों में Israel-Hezbollah Conflict और बढ़ सकता है।

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Government Job

UP Government Job Rules: प्रदर्शन में शामिल होने पर जाएगी नौकरी? जानें नए नियम

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी (Government Job) की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच Character Certificate और Police Verification को लेकर चर्चा तेज है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी नौकरियों में अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन से जुड़े नियम सख्त किए हैं। नई व्यवस्था में हिंसक गतिविधियों, गंभीर अपराधों और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस खबर के सामने आने के बाद युवाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या किसी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से सरकारी नौकरी का सपना टूट सकता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने, राजनीतिक विचार रखने या FIR दर्ज होने से कोई अभ्यर्थी अपने-आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं हो जाता। मामले की प्रकृति और लागू नियमों के आधार पर फैसला लिया जाएगा। UP Character Verification Rules: किन मामलों में बढ़ सकती है परेशानी? नई नीति के तहत सरकारी नौकरी के लिए चयनित उम्मीदवारों के पुराने रिकॉर्ड और उनके आचरण की जांच की जाएगी। हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता, गंभीर आपराधिक मामलों और भर्ती में धोखाधड़ी जैसी स्थितियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इन मामलों में उम्मीदवार की पात्रता प्रभावित हो सकती है: हालांकि, हर मामले में संबंधित कानून, उपलब्ध तथ्यों और लागू सेवा नियमों को ध्यान में रखा जाएगा। क्या Protest करने पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? इस नियम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले युवाओं को लेकर हो रही है। लोकतंत्र में अपनी बात रखना और शांतिपूर्ण विरोध करना अपने-आप में किसी उम्मीदवार को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं बनाता। लेकिन अगर किसी मामले में हिंसक गतिविधियों या गंभीर अपराध में संलिप्तता सामने आती है, तो उसका असर चरित्र सत्यापन पर पड़ सकता है। नीति में कुछ विशेष गतिविधियों के लिए पिछले तीन वर्षों की अवधि को भी महत्व दिया गया है। ऐसे मामलों में उम्मीदवार के आचरण और उसमें आए बदलाव के प्रमाण भी प्रासंगिक हो सकते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने या किसी आंदोलन में हिस्सा लेने वाले हर युवा को नौकरी नहीं मिलेगी। FIR दर्ज होने पर क्या रुक जाएगी सरकारी नौकरी? कई बार किसी प्रदर्शन या विवाद के बाद युवाओं के खिलाफ FIR दर्ज हो जाती है। ऐसे में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को चिंता होने लगती है कि कहीं उनका चयन रद्द न हो जाए। नई व्यवस्था में केवल FIR दर्ज होना या जांच लंबित रहना अपने-आप अयोग्यता का आधार नहीं है। संबंधित अधिकारियों को मामले की परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेना होगा। यदि चरित्र सत्यापन रिपोर्ट में प्रतिकूल जानकारी मिलती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा सकता है। इसलिए केवल FIR की जानकारी के आधार पर नौकरी जाने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। Police Verification के लिए तय हुई 30 दिन की समयसीमा नई नीति में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) के सत्यापन को समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया है। निर्धारित व्यवस्था के तहत संबंधित एजेंसियों को सत्यापन का अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इसका उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम करना है। सामान्य मामलों में पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा सकती है, जबकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी भी जुटाई जा सकती है। Character Certificate लंबित होने पर मिल सकता है नियुक्ति पत्र नई व्यवस्था में चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट लंबित होने पर हर मामले में नियुक्ति पत्र रोकना अनिवार्य नहीं होगा। जरूरी दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र मिलने पर नियमानुसार औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है। हालांकि, उम्मीदवार की पात्रता पर गंभीर सवाल होने या पद की प्रकृति के कारण अतिरिक्त जांच जरूरी होने पर अलग प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। बाद में गलत जानकारी देने या अयोग्यता सामने आने पर नियुक्ति रद्द होने की स्थिति भी बन सकती है। नए नियमों पर विपक्ष ने भी उठाए सवाल चरित्र सत्यापन से जुड़े नए प्रावधानों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने आशंका जताई है कि इन नियमों का इस्तेमाल विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ किया जा सकता है। दूसरी ओर, नीति में राजनीतिक विचारधारा और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर किया गया है। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी उम्मीदवार की पात्रता का फैसला केवल राजनीतिक विचारों के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित तथ्यों और लागू नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को क्या करना चाहिए? अगर आप उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो आवेदन के समय सभी जानकारियां सही भरें। पुलिस सत्यापन या स्व-घोषणा पत्र में आपसे जो जानकारी मांगी जाए, उसे छिपाने या गलत विवरण देने से बचें। यदि आपके खिलाफ कोई मामला दर्ज है, तो उसकी वास्तविक कानूनी स्थिति समझें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लें। केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के आधार पर यह न मानें कि आपकी सरकारी नौकरी का मौका खत्म हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: US Fed के फैसले से शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स में उछाल

शेयर बाजार (Stock Market) में गिरावट देखकर परेशान निवेशकों को गुरुवार को राहत मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले के बाद भारतीय बाजार में खरीदारी लौट आई। सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर खींचा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा? US Fed Decision: अमेरिका में क्या हुआ, जिसका दिखा असर? अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर को अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों ने राहत महसूस की। दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरों का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। जब वहां ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अपने निवेश को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, फेड के फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैश्विक बाजारों की सभी चिंताएं खत्म हो गई हैं। महंगाई और आगे ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर अभी भी नजर बनी हुई है। Sensex Today: 600 अंक से ज्यादा चढ़ा बाजार गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ी। इसके बाद सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं, निफ्टी 50 में भी तेजी देखने को मिली और इंडेक्स 22,900 के करीब पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार पर बिकवाली का दबाव था। ऐसे में अगले दिन आई तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। बाजार के प्रमुख शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को सहारा मिला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में दर्ज की गई तेजी पूरे दिन बरकरार रहे, यह जरूरी नहीं है। शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। Share Market Rally: बाजार में तेजी की क्या हैं बड़ी वजहें? 1. US Fed ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं अमेरिकी फेड के फैसले से निवेशकों को तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता से कुछ राहत मिली। इससे वैश्विक बाजारों की धारणा को सहारा मिला। हालांकि, आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 2. विदेशी निवेशकों ने की खरीदारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। 28 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 872 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी होने से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, विदेशी निवेशकों के कुल रुख में स्थायी बदलाव हुआ है या नहीं, यह आने वाले सत्रों में स्पष्ट होगा। 3. बड़े शेयरों में बढ़ी खरीदारी बाजार की तेजी में दिग्गज कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। IT कंपनियों के शेयरों में भी कुछ जगहों पर मजबूती दर्ज की गई। जब बड़ी कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स को भी सहारा मिलता है। 4. टैक्स राहत की उम्मीदों पर नजर शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर संभावित राहत की चर्चा भी निवेशकों के बीच बनी हुई है। हालांकि, किसी आधिकारिक घोषणा के बिना इसे सरकार का तय फैसला नहीं माना जा सकता। किन शेयरों में दिखी तेजी? गुरुवार के शुरुआती कारोबार में Adani Ports, Power Grid और Reliance Industries जैसे शेयरों पर निवेशकों की नजर रही। कुछ IT शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, सभी शेयरों में तेजी नहीं थी। Trent सहित कुछ कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि बाजार के प्रमुख इंडेक्स में बढ़त के बावजूद अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन अलग रह सकता है। Crude Oil Price: कच्चा तेल बना बाजार की चिंता शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। 29 अक्टूबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो बाजार की तेजी पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना ही पर्याप्त नहीं होगा। पिछले दिन बाजार में क्यों आई थी गिरावट? 28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों के करीब गिर गया था और बाद में कुछ सुधार के बावजूद गिरावट के साथ बंद हुआ। IT शेयरों में बिकवाली, प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और वैश्विक संकेतों को लेकर चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया था। अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे थे। इसके बाद 29 अक्टूबर को खरीदारी लौटने से बाजार को राहत मिली। लेकिन एक कारोबारी दिन की तेजी से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती। आगे Share Market में क्या होगा? अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जो निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। केवल एक दिन की तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Spain

Spain Train Crash: दो हाईस्पीड ट्रेनों की टक्कर, मैड्रिड में हिंसक प्रदर्शन

स्पेन (Spain) में दो हाईस्पीड ट्रेनों की टक्कर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 28 अक्टूबर को हुए इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। दूसरी ओर, रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा भी सामने आया। मैड्रिड में परिवहन मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन हुए और कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके गए। शुरुआती जांच में कंप्यूटर सिस्टम की खराबी और ट्रेन को दोबारा चलाने की अनुमति देने के फैसले पर सवाल उठे हैं। स्पेन सरकार ने हादसे की विस्तृत जांच का भरोसा दिया है। आइए जानते हैं Spain Train Accident की पूरी कहानी, हादसे की वजह और अब तक सामने आए अहम अपडेट। Spain Train Crash: कहां और कैसे हुआ हादसा? यह हादसा स्पेन के टोलेडो प्रांत में उर्दा के पास मैड्रिड से सेविले जाने वाले हाईस्पीड रेल मार्ग पर हुआ। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कंपनी Renfe की एक हाईस्पीड ट्रेन आगे चल रही निजी कंपनी Iryo की ट्रेन से टकरा गई। Iryo की ट्रेन उस समय ट्रैक पर रुकी हुई थी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों ट्रेनों के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। कुछ डिब्बे रेलवे लाइन के किनारे ढलान पर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस दुर्घटना में कम से कम 68 लोगों की मौत हुई है। शुरुआती रिपोर्टों में दर्जनों यात्रियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। Signal Failure: सिग्नलिंग सिस्टम की खराबी के बाद क्या हुआ? स्पेन के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते के शुरुआती बयान के मुताबिक, रेलवे लाइन के करीब 63 किलोमीटर के हिस्से में कंप्यूटर संबंधी खराबी के कारण LZB सुरक्षा और सिग्नलिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद संबंधित ट्रेनों को रोक दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे के केंद्रीय कंट्रोल सेंटर ने Renfe ट्रेन को दोबारा चलने की अनुमति दे दी। समस्या यह थी कि आगे की लाइन पर रुकने का सिग्नल सक्रिय था और Iryo की ट्रेन ट्रैक पर मौजूद थी। इसके बाद Renfe ट्रेन आगे बढ़ी और करीब 8:53 बजे दोनों ट्रेनों की टक्कर हो गई। परिवहन मंत्री ने कंट्रोल सेंटर के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा प्रणाली में खराबी आने के बाद ट्रेन को सामान्य गति से आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। ऐसी स्थिति में ट्रेन को रोकना या निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत बेहद कम गति से चलाना जरूरी होता है। हालांकि, दुर्घटना के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। हादसे के बाद Madrid में विरोध-प्रदर्शन ट्रेन हादसे के बाद मैड्रिड में लोगों ने रेलवे सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी परिवहन मंत्रालय के बाहर जमा हुए और सरकार से हादसे की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते के इस्तीफे की मांग भी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों के जवाब मिलने चाहिए और अगर जांच में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। Spain Train Accident: प्रधानमंत्री ने क्या कहा? स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने हादसे पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दुर्घटना की पूरी जांच कराने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया। सरकार ने 29 अक्टूबर से तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। प्रधानमंत्री के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, दुर्घटना के कारणों का पता लगाना और दूसरी, लोगों का रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना। लगातार हुए रेल हादसों के बाद सरकार से सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने की मांग भी तेज हो गई है। रेलवे कंट्रोल सेंटर की भूमिका जांच के घेरे में इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी आने के बाद ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति क्यों दी गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कंट्रोल सेंटर को उस समय क्या जानकारी मिली थी, किस आधार पर ट्रेन को दोबारा चलाने का निर्देश दिया गया और क्या निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। इसके साथ ही दोनों ट्रेनों की वास्तविक गति, सिग्नलिंग सिस्टम के रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के निर्देशों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल किसी एक व्यक्ति को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस साल दूसरा बड़ा Train Accident स्पेन में 2026 के दौरान यह दूसरा बड़ा जानलेवा रेल हादसा है। जनवरी में दक्षिणी स्पेन के अदामुज के पास हुए रेल हादसे में 46 लोगों की मौत हुई थी। उस दुर्घटना के बाद भी रेलवे सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल उठे थे। अब अक्टूबर में हुए इस हादसे ने एक बार फिर हाईस्पीड रेल नेटवर्क की सुरक्षा पर बहस तेज कर दी है। स्पेन का रेल नेटवर्क अपनी तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए जाना जाता है, लेकिन लगातार हुई दुर्घटनाओं के बाद तकनीकी व्यवस्था और रखरखाव की समीक्षा की मांग बढ़ रही है। रेलवे सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के लिए अब यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा सिस्टम में कौन-सी कमियां थीं और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं। Spain Train Crash: अब आगे क्या होगा? फिलहाल हादसे की जांच जारी है। अधिकारियों का ध्यान सिग्नलिंग सिस्टम की खराबी, कंट्रोल सेंटर के फैसले और ट्रेन संचालन के नियमों पर है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई...
Cancer

Cancer Injection Price: महंगे इंजेक्शन की कीमत में 91% की कटौती, 9 नवंबर से नई दरें

कैंसर (Cancer) जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवारों की परीक्षा लेता है। लंबे इलाज, महंगी दवाओं और बार-बार अस्पताल जाने के खर्च के बीच सरकार का एक नया फैसला मरीजों के लिए राहत लेकर आया है। Cancer की 543 ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें एक ऐसा इंजेक्शन भी शामिल है, जिसकी कीमत करीब ₹80 हजार से घटकर ₹7,150.33 रह गई है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से जारी संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में एक जैसी कटौती नहीं हुई है। मरीजों को यह देखना होगा कि उनकी दवा नई सूची में शामिल है या नहीं। Cancer Injection Price: ₹80 हजार का इंजेक्शन अब ₹7,150 में इस फैसले में सबसे ज्यादा चर्चा Samtepa इंजेक्शन की हो रही है। 100 mg वाले इस इंजेक्शन की एक शीशी की कीमत पहले ₹80,071.86 थी, जिसे घटाकर ₹7,150.33 कर दिया गया है। इस तरह इसकी कीमत में लगभग 91% की कमी हुई है। Samtepa में Thiotepa दवा होती है। इसका इस्तेमाल कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के इलाज और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से जुड़ी प्रक्रियाओं में किया जाता है। इस तरह की बड़ी कीमत कटौती से संबंधित उपचार करा रहे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। कैंसर की दवाओं की नई कीमतें क्या हैं? 543 ब्रांडेड दवाओं की संशोधित सूची में कई इंजेक्शन, टैबलेट और कैप्सूल शामिल हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण नीचे दिए गए हैं। दवा का नाम पुरानी कीमत नई कीमत Samtepa 100 mg इंजेक्शन ₹80,071.86 ₹7,150.33 Palbopro 125 mg, 21 कैप्सूल ₹40,421.33 ₹2,720 Bevacizab 100 mg/4 ml इंजेक्शन ₹21,767.70 ₹5,930.13 Fulbreca 5 ml इंजेक्शन ₹26,072.16 ₹5,491 Azacytin 100 mg इंजेक्शन ₹6,337 ₹1,495.04 Fludanox इंजेक्शन ₹14,235 ₹2,432 Anarzole 1 mg, 10 टैबलेट ₹695.76 ₹73 Enuta 40 mg, 28 कैप्सूल ₹6,578.20 ₹2,232 ध्यान रखें कि कीमतें संबंधित दवा की निर्धारित स्ट्रेंथ और पैक साइज के अनुसार हैं। दवा खरीदने से पहले पैक पर लिखी MRP और नई दर की पुष्टि जरूर करें। NPPA ने कैंसर की दवाओं के दाम क्यों घटाए? दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का फैसला किया था। इस व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित किया गया। आसान शब्दों में समझें तो दवा बनाने वाली कंपनी से लेकर मरीज तक दवा पहुंचने के दौरान वितरण और बिक्री से जुड़े मार्जिन पर नियंत्रण रखने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी रोकना और मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है। इस फैसले के बाद संबंधित दवाओं की कीमतों में कटौती की गई है। हालांकि, हर दवा की कीमत में बदलाव उसकी मौजूदा कीमत और लागू नियमों पर निर्भर करता है। क्या सभी कैंसर की दवाएं सस्ती हो गई हैं? इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हर दवा की कीमत कम हो गई है। कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है, जबकि कुछ दवाओं के दाम में मामूली बदलाव हुआ है या कीमत पहले जैसी बनी हुई है। उदाहरण के लिए, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। वहीं, Keytruda जैसी महंगी दवा की 100 mg शीशी की कीमत करीब ₹2.16 लाख बताई गई है। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों को अपनी दवा का नाम, ब्रांड, स्ट्रेंथ और पैक साइज देखकर ही नई कीमत की जानकारी लेनी चाहिए। 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें NPPA की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। दवा कंपनियों को नई कीमतों की जानकारी वितरकों और दवा विक्रेताओं तक पहुंचानी होगी। मरीज भी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांच सकते हैं। इसके लिए NPPA की वेबसाइट और सरकार के Pharma Sahi Daam ऐप की मदद ली जा सकती है। कैंसर के इलाज का खर्च कितना कम होगा? कैंसर के इलाज में दवाओं के साथ जांच, अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर की फीस और दूसरी चिकित्सा प्रक्रियाओं पर भी खर्च होता है। इसलिए किसी एक दवा की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज का पूरा इलाज भी उतने ही प्रतिशत सस्ता हो जाएगा। फिर भी, जिन मरीजों की दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है, उनके लिए यह बदलाव राहत देने वाला हो सकता है। खासकर लंबे समय तक इलाज कराने वाले परिवारों के लिए दवाओं पर होने वाली बचत मायने रखती है। मरीजों के लिए जरूरी सलाह: अपनी दवा की नई MRP जरूर जांचें। केवल कम कीमत देखकर डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का ब्रांड, खुराक या इलाज न बदलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karnataka SIR Update: कर्नाटक में 99 लाख वोटरों के नाम कटे, कांग्रेस मंत्री के बयान से चर्चा तेज

कर्नाटक (Karnataka) में वोटर लिस्ट को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चा तेज हो गई है। Special Intensive Revision (SIR) के बाद राज्य की अंतिम मतदाता सूची में करीब 99.32 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। इसी बीच कांग्रेस के मंत्री सतीश जारकीहोली के SIR प्रक्रिया को सही बताने संबंधी बयान ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। अब सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या क्यों घटी और क्या सभी पात्र लोगों के नाम सुरक्षित हैं? Karnataka Voter List: करीब 99.32 लाख मतदाताओं की कमी कर्नाटक में SIR से पहले मतदाताओं की संख्या करीब 5.54 करोड़ थी। 27 अक्टूबर 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई। इस तरह कुल 99,32,303 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची को अपडेट करने के दौरान मृत व्यक्तियों, दूसरी जगह स्थायी रूप से जा चुके लोगों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और अन्य अपात्र मामलों की जांच की गई। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होने के बाद यह जानना भी जरूरी है कि कितने मामले इन कारणों से जुड़े हैं और कितने पात्र मतदाताओं को दोबारा आवेदन करना पड़ सकता है। सतीश जारकीहोली के बयान पर क्यों हो रही चर्चा? कर्नाटक सरकार में मंत्री सतीश जारकीहोली के नाम से सामने आए बयान में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं होने की बात कही गई है। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनके बयान का पूरा आधिकारिक विवरण स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए उनके नाम से सामने आए दावे को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले मूल बयान और उसका संदर्भ देखना जरूरी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने मतदाता सूची में पारदर्शिता और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलती से वोटर लिस्ट से बाहर न हो। Election Commission का क्या कहना है? चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची में बदलाव निर्धारित नियमों और सत्यापन की प्रक्रिया के तहत किए गए हैं। नाम हटाने से पहले संबंधित मामलों की जांच, नोटिस और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया अपनाई जाती है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। लेकिन किसी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में बहुत बड़ी गिरावट आने पर आंकड़ों की दोबारा जांच करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि पात्र मतदाताओं को परेशानी न हो। Form 7 को लेकर भी उठे सवाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए Form 7 का इस्तेमाल किया जाता है। इसी फॉर्म को लेकर कर्नाटक में सवाल उठे थे। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और यह जांच होनी चाहिए कि नाम हटाने से जुड़े अनुरोध नियमों के अनुसार दर्ज किए गए या नहीं। दूसरी ओर, निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि नाम हटाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए। किसी भी मामले में अंतिम फैसला नियमों और संबंधित जांच के आधार पर होना जरूरी है। Bengaluru में सबसे ज्यादा चर्चा क्यों? कर्नाटक में मतदाताओं की संख्या में गिरावट का असर बेंगलुरु के कई इलाकों में भी दिखाई दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बेंगलुरु अर्बन जिले में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है। इसी वजह से उन क्षेत्रों के आंकड़ों की दोबारा जांच की जरूरत महसूस की जा रही है, जहां पहले और अंतिम मतदाता सूची के बीच अंतर काफी ज्यादा है। अधिकारियों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नामों में कमी के पीछे क्या कारण रहे और क्या किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट गया है। वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें? अगर आप कर्नाटक के मतदाता हैं और अंतिम वोटर लिस्ट में अपना नाम नहीं देख पा रहे हैं, तो घबराने के बजाय पहले अपनी जानकारी की जांच करें। समय रहते जानकारी की जांच करने से मतदान के अधिकार से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। Karnataka SIR पर अब आगे क्या होगा? कर्नाटक में करीब 99.32 लाख मतदाताओं की कमी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इस बदलाव के पीछे अलग-अलग कारणों का वास्तविक अनुपात क्या है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया, राजनीतिक दलों की आपत्तियां और मतदाताओं की शिकायतें इस मामले के अलग-अलग पहलू हैं। सतीश जारकीहोली के नाम से सामने आए बयान ने राजनीतिक चर्चा को बढ़ाया है, लेकिन इस विवाद का समाधान आंकड़ों की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं की शिकायतों के निष्पक्ष निपटारे से ही संभव होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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