रायपुर। गणेशोत्सव से पहले रायपुर में भगवान गणेश की अनोखी और आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस बार शहर के मूर्तिकार पारंपरिक मिट्टी के साथ-साथ बांस, पूजा सामग्री, मोती, दाल, चना, भुट्टे और धूप-अगरबत्ती जैसी अलग-अलग चीजों से गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं।
खास बात यह है कि इनमें से कई प्रतिमाएं ग्राहकों की पसंद और उनके बताए आइडिया के अनुसार तैयार की जा रही हैं। कुछ विशेष प्रतिमाओं को बनाने में करीब तीन महीने तक का समय लगा है। सीमित संख्या में तैयार होने वाली इन प्रतिमाओं के लिए समितियां पहले ही प्री-ऑर्डर दे देती हैं।
30 साल से गणेश प्रतिमाएं बना रहा यादव परिवार
रायपुर के रायपुरा इलाके में रहने वाला शिवचरण यादव का परिवार करीब 30 साल से गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। उनके दोनों बेटे भी पिछले करीब 15 साल से इस काम में पिता का साथ दे रहे हैं।
परिवार के सदस्य राहुल यादव बताते हैं कि ग्राहक अपनी पसंद की थीम और डिजाइन बताते हैं। इसके बाद उसमें अपनी क्रिएटिविटी और नए आइडिया जोड़कर प्रतिमा तैयार की जाती है।
रामसागर पारा की एक गणेश समिति पिछले 17 साल से इसी परिवार से प्रतिमा बनवा रही है। मूर्तिकारों के पास सीमित संख्या में ही ऑर्डर लिए जाते हैं और समितियां आमतौर पर करीब तीन महीने पहले अपनी पसंद की प्रतिमा बुक कर देती हैं।
बांस से बनाई गई खास गणेश प्रतिमा
इस बार बांस से बनाई गई गणेश प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रही है। इसकी खासियत है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। प्रतिमा को लकड़ी, पेपर और बांस की मदद से तैयार किया गया है।
मूर्तिकार के मुताबिक, इस प्रतिमा को बनाने का काम करीब तीन महीने पहले शुरू किया गया था। बांस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर एक-एक हिस्से को जोड़ते हुए गणेश जी का आकार दिया गया है।
इसके लिए पहले बांस की ऊपरी छाल हटाई जाती है और फिर उसे जरूरत के मुताबिक काटकर आकार दिया जाता है। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 40 से 50 हजार रुपए की लागत आने की जानकारी दी गई है।
इस तरह की प्रतिमाएं सीमित संख्या में तैयार की जाती हैं और इन्हें मुख्य रूप से प्री-ऑर्डर पर बनाया जाता है।
पूजा सामग्री से तैयार गणेश प्रतिमा
मूर्तिकारों ने पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से भी गणेश प्रतिमा तैयार की है। इसमें नारियल की जूट से प्रतिमा का मूल आकार बनाया गया है।
प्रतिमा की धोती में जनेऊ लगाया गया है, जबकि माला कमल गट्टे से तैयार की गई है। इसके अलावा रुद्राक्ष, मौली धागे और मोतियों का इस्तेमाल सजावट के लिए किया गया है।
मोतियों से तैयार की गई प्रतिमाओं को लोग गृह प्रवेश या गिफ्ट के तौर पर भी पसंद कर रहे हैं।
धूप-अगरबत्ती से बनी 12 फीट की प्रतिमा
इस साल धूप-अगरबत्ती से तैयार की गई 12 फीट की गणेश प्रतिमा भी खास आकर्षण है। इसे बनाने में करीब तीन महीने का समय लगा है।
प्रतिमा में अलग-अलग रंग की धूप स्टिक का इस्तेमाल किया गया है। गीली धूप की मदद से माला, पुष्प और कड़े जैसी सजावट तैयार की गई है।
मूर्तिकार के मुताबिक, गणेश समिति ने अपनी पसंद का स्ट्रक्चर बताया था और उसी डिजाइन के आधार पर प्रतिमा तैयार की गई।
उन्होंने बताया कि मिट्टी की प्रतिमा की तुलना में ऐसी प्रतिमाएं कुछ मामलों में आसान होती हैं, क्योंकि ये अपेक्षाकृत हल्की होती हैं और काम के दौरान इन्हें जरूरत के अनुसार स्थानांतरित किया जा सकता है।
मसूर दाल, चना और भुट्टे से भी बनी गणेश प्रतिमा
रायपुर में इस बार खाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों से भी गणेश प्रतिमा तैयार की गई है। इसमें मसूर दाल, चना और भुट्टे का इस्तेमाल किया गया है।
अलग-अलग खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से सजाकर गणेश जी का आकार दिया गया है। पारंपरिक मिट्टी के बजाय खाने की सामग्री से तैयार यह प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन रही है।
ग्राहकों के आइडिया से तैयार हो रही हैं अनोखी प्रतिमाएं
मूर्तिकार राहुल यादव के मुताबिक, अब गणेश प्रतिमाओं को लेकर ग्राहकों की पसंद भी बदल रही है। लोग पहले से अलग और अनोखी थीम चाहते हैं। वे अपनी कल्पना और डिजाइन का आइडिया मूर्तिकारों को बताते हैं।
इसके बाद मूर्तिकार उस आइडिया में अपनी क्रिएटिविटी जोड़कर प्रतिमा तैयार करते हैं। यही वजह है कि इस बार रायपुर में गणेशोत्सव के लिए कई ऐसी प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं, जो पारंपरिक मूर्तियों से बिल्कुल अलग नजर आएंगी।
