भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा। Sensex और Nifty दोनों लाल निशान में खुले और कुछ ही देर में बिकवाली तेज हो गई। सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा फिसलकर करीब 74,200 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 23,250 के नीचे आ गया।
बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Metal, Auto और Financial Stocks में देखने को मिला। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव ने भी बाजार के माहौल को कमजोर किया है।
Sensex-Nifty में तेज गिरावट
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 708 अंक टूटकर 74,194 के आसपास पहुंच गया। NSE Nifty 50 भी 234 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ करीब 23,244 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
इस गिरावट के साथ दोनों प्रमुख इंडेक्स जून के बाद के निचले स्तरों के करीब पहुंच गए। बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा और निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाना शुरू कर दिया।
Metal Stocks पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो Metal Stocks में सबसे ज्यादा गिरावट रही। Nifty Metal Index करीब 2.8 फीसदी तक नीचे आया। Auto और Financial सेक्टर में भी बिकवाली का असर साफ दिखाई दिया।
Tata Steel समेत कई प्रमुख मेटल कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। महंगे कच्चे माल और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच मेटल कंपनियों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
Crude Oil की तेजी ने बढ़ाई टेंशन
शेयर बाजार की कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी बड़ी वजह मानी जा रही है। Brent crude 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा crude रहने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
रुपये की कमजोरी भी चिंता का कारण
शेयर बाजार के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने बाजार के सेंटीमेंट को और कमजोर किया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर असर डाल रही है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है।
आगे बाजार की दिशा किस पर निर्भर करेगी?
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से Crude Oil Price, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। अगर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो भारतीय बाजार पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा। Sensex और Nifty में तेज गिरावट के साथ Metal और Auto Stocks में बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले सत्रों में कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
