पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर बोलते हुए South vs North बहस, परिसीमन और राजनीतिक क्रेडिट पर बड़ा बयान दिया। जानें उनके भाषण की पूरी बड़ी बातें।
नई दिल्ली
लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ महिला आरक्षण पर बात की, बल्कि South vs North बहस, परिसीमन (Delimitation) और राजनीतिक क्रेडिट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी स्पष्ट और मजबूत रुख रखा।
उन्होंने कहा कि यह बिल देश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा, इसलिए इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
South vs North पर बड़ा बयान – “किसी के साथ अन्याय नहीं होगा”
पीएम मोदी ने सबसे अहम आशंका पर सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा—
चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम,
छोटे राज्य हों या बड़े — किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में किसी क्षेत्र को नुकसान नहीं होगा और संतुलन पूरी तरह बनाए रखा जाएगा।
परिसीमन (Delimitation) पर साफ आश्वासन
परिसीमन को लेकर चल रही चिंताओं पर पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा—
- पहले जो जनसंख्या अनुपात तय हुआ है, उसी के आधार पर आगे बढ़ेंगे
- उसमें कोई छेड़छाड़ या असंतुलन नहीं होगा
- भविष्य में जो भी वृद्धि होगी, वह भी उसी अनुपात में होगी
यानी उन्होंने साफ संकेत दिया कि महिला आरक्षण के नाम पर सीटों के बंटवारे में कोई राजनीतिक या क्षेत्रीय खेल नहीं होगा।
“क्रेडिट नहीं चाहिए” – पीएम मोदी का बड़ा संदेश
पीएम मोदी ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा—
- अगर इस बिल का विरोध होगा, तो राजनीतिक फायदा मिल सकता है
- लेकिन अगर सभी साथ आएंगे, तो किसी एक को क्रेडिट नहीं मिलेगा
“हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, देश के लिए सही निर्णय चाहिए।”
उन्होंने इसे राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने की अपील की।
“राजनीति का रंग न दें”
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बिल 25–30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। अगर तब हो जाता तो आज तक इसे और बेहतर बनाया जा सकता था।
उन्होंने साफ कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक लाभ-हानि का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का है।
महिलाओं की बढ़ती ताकत का जिक्र
पीएम मोदी ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा—
- पंचायतों में लाखों महिलाएं नेतृत्व कर चुकी हैं
- अब वे सिर्फ समझती नहीं, बल्कि खुलकर बोलती भी हैं
- देशभर में हजारों पंचायत और शहरी निकाय महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे हैं
उन्होंने कहा कि यही “ग्रासरूट पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस” अब राष्ट्रीय राजनीति को भी बदल रही है।
विरोध करने वालों को महिलाओं ने नहीं किया माफ
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले महिला आरक्षण के खिलाफ थे, उन्हें महिलाओं ने चुनावों में जवाब दिया है।
हालांकि 2024 में सर्वसम्मति से बिल पास होने के कारण यह विवाद का मुद्दा नहीं बना।
“विकसित भारत में महिलाओं की बराबरी जरूरी”
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, ब
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर पीएम मोदी का भाषण सिर्फ एक बिल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें South vs North संतुलन, परिसीमन की पारदर्शिता और राजनीति से ऊपर उठने का संदेश साफ दिखाई दिया।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऐतिहासिक फैसला आने वाले समय में भारतीय राजनीति और महिला नेतृत्व को किस तरह नई दिशा देता है।
