मध्य-पूर्व के बदलते हालात के बीच ईरान ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इसी सिलसिले में Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच फोन पर अहम बातचीत हुई। बातचीत का मुख्य मुद्दा रहा होर्मुज जलडमरूमध्य—एक ऐसा समुद्री रास्ता, जिस पर दुनिया की ऊर्जा सप्लाई काफी हद तक निर्भर है।
क्यों अहम है यह बातचीत?
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, शिपिंग रूट्स की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की। मौजूदा समय में होर्मुज के आसपास का माहौल संवेदनशील बना हुआ है, जिससे वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज में कोई बाधा आती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर महंगाई तक पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत इस इलाके में स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में लगातार आवाज उठाता रहा है।
Iran की रणनीति क्या संकेत देती है?
हाल के दिनों में ईरान ने कई देशों से संवाद बढ़ाया है। अब्बास अराघची का यह कदम भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में होर्मुज को लेकर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपने कूटनीतिक संबंध मजबूत रखे और हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहे।
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