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Share Bazaar Crash: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, Global Tension का असर, Nifty भी गिरा

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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार का दिन निवेशकों के लिए भारी रहा। सुबह से ही बाजार में दबाव नजर आया और देखते ही देखते गिरावट गहराती चली गई। कई निवेशकों के लिए यह दिन चिंता और नुकसान दोनों लेकर आया।

बाजार का ताजा हाल

कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 76,300 के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी 350 अंक से ज्यादा गिरकर 23,800 के नीचे फिसल गया

शुरुआती घंटों में हल्की रिकवरी की उम्मीद थी, लेकिन दिनभर बाजार दबाव में ही बना रहा।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?

आज की गिरावट में कुछ सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे—

  • Auto Stocks: लागत बढ़ने और डिमांड को लेकर चिंता
  • Banking Shares: बड़े बैंकों में तेज बिकवाली
  • Metal और Realty: ग्लोबल कमजोरी का असर

गिरावट के पीछे की बड़ी वजहें

1. Global Tension का असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

2. Crude Oil Prices में उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ने का डर है।

3. FII Selling जारी

विदेशी निवेशक लगातार बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

4. Rupee Weakness

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।

5. Global Markets से Weak Signals

एशियाई और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखा।मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी इससे अछूते नहीं रहे, जिससे बाजार की चौड़ाई (market breadth) कमजोर रही।

निवेशकों की जेब पर असर

आज की इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर डाला। कुछ ही घंटों में लाखों करोड़ रुपये का मार्केट कैप साफ हो गया, जिससे रिटेल निवेशकों में घबराहट देखने को मिली।

अब निवेशक क्या करें?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें
  • मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखें
  • लंबी अवधि के निवेशक गिरावट को मौके के रूप में देख सकते हैं

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Yukta

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NSPF

NSPF 2026: छोटे शहरों के Students ने National Level पर किया शानदार प्रदर्शन

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अंग्रेज़ी सीखना अक्सर एक चुनौती होता है, लेकिन जब सही प्लेटफॉर्म और मार्गदर्शन मिल जाए, तो यही बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला Marico Limited के ‘निहार शांति पाठशाला फनवाला’ (NSPF) द्वारा आयोजित Word Power Championship 2026 में, जहां मध्य प्रदेश और झारखंड के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा। छोटे शहरों से राष्ट्रीय मंच तक का सफर यह प्रतियोगिता कक्षा 2 से 5 तक के उन बच्चों के लिए आयोजित की जाती है, जो क्षेत्रीय भाषा माध्यम के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान (अलवर) जैसे राज्यों में यह पहल खास मायने रखती है, क्योंकि यहां शुरुआती शिक्षा में स्थानीय भाषा का वर्चस्व होता है। LeapForWord के सहयोग से चल रही इस प्रतियोगिता में बच्चों का मूल्यांकन सिर्फ स्पेलिंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी रीडिंग, शब्दावली, समझ और अर्थ की क्षमता को भी परखा जाता है। यही कारण है कि यह पहल बच्चों के संपूर्ण भाषा विकास में मदद कर रही है। सरकारों का भरोसा, बच्चों का बढ़ता आत्मविश्वास इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसे अब राज्य सरकारों का भी समर्थन मिल रहा है। यह पहल National Education Policy 2020 और NIPUN Bharat Mission के लक्ष्यों को भी मजबूत करती है, जिससे बच्चों की बुनियादी भाषा क्षमता बेहतर हो रही है। विजेताओं ने बढ़ाया प्रदेश का मान इस बार प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश और झारखंड के छात्रों ने खास पहचान बनाई— इन उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और सही दिशा मिले तो कोई भी बच्चा आगे बढ़ सकता है। लाखों बच्चों तक पहुंचा कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इस प्रतियोगिता का दायरा काफी बड़ा रहा— मध्य प्रदेश: झारखंड: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Skoda

Skoda Cars अब गांव-गांव तक: CSC eStore के साथ नई Partnership

Skoda Auto India ने देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए Common Services Centre Grameen eStore (CSC ग्रामीण ई-स्टोर) के साथ हाथ मिलाया है। इस नई साझेदारी का सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा, जो अब तक बड़े शहरों से दूर होने के कारण प्रीमियम कारों तक आसानी से नहीं पहुंच पाते थे। इस पहल के तहत अब कंपनी की लोकप्रिय कारें — Škoda Kylaq, Škoda Kushaq और Škoda Slavia — CSC के डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देश के गैर-महानगरीय क्षेत्रों में भी उपलब्ध होंगी। छोटे शहरों में बढ़ेगी Skoda की पकड़ भारत का ऑटो बाजार अब तेजी से टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में Skoda का यह कदम समय के साथ चलने वाला माना जा रहा है। CSC का नेटवर्क पहले से ही गांव-गांव तक फैला हुआ है, जिससे कंपनी को नए ग्राहकों तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी। यह साझेदारी Skoda को उन चुनिंदा प्रीमियम ब्रांड्स की सूची में शामिल करती है, जो डिजिटल और लोकल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल कर ग्रामीण भारत में कदम बढ़ा रहे हैं। कंपनी ने क्या कहा? Skoda Auto India के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता के मुताबिक, “हमारा लक्ष्य सिर्फ कार बेचना नहीं, बल्कि ग्राहकों तक अपनी पहुंच को आसान बनाना है। CSC के साथ यह साझेदारी हमें ऐसे इलाकों में पहुंचने का मौका देती है, जहां पहले हमारी मौजूदगी सीमित थी।” उन्होंने यह भी कहा कि इससे ग्राहकों को अपने ही शहर या गांव में Skoda के प्रोडक्ट्स और सर्विस का अनुभव मिल सकेगा। Hybrid Model से आसान होगी खरीद प्रक्रिया इस साझेदारी के तहत एक Hybrid Retail Model अपनाया जाएगा, जिससे ग्राहक ऑनलाइन जानकारी लेने के साथ-साथ ऑफलाइन सपोर्ट भी पा सकेंगे। ग्राहकों को मिलेंगे ये फायदे: ग्राहकों के लिए क्यों है खास? अब तक ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों के लिए प्रीमियम कार खरीदना थोड़ा मुश्किल होता था। लेकिन इस नई पहल के बाद ग्राहक CSC eStore के जरिए आसानी से कार की जानकारी ले सकेंगे और खरीद की प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ashish Usha Agrawal

Ashish Usha Agrawal मीडिया मैनेजमेंट से संगठन मजबूती तक का 3 साल का सफर

लेखक: सत्येंद्र कुमार जैन राजनीति में कई चेहरे आते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने काम के जरिए अलग पहचान बना लेते हैं। मध्यप्रदेश भाजपा में मीडिया प्रभारी के रूप में आशीष ऊषा अग्रवाल (Ashish Usha Agrawal) का नाम ऐसे ही नेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने काम से एक मजबूत छाप छोड़ी है। चुनावी जीत के पीछे मजबूत मीडिया रणनीति अगर पिछले कुछ चुनावों पर नजर डालें, तो भाजपा की सफलता साफ दिखाई देती है।विधानसभा चुनाव 2023 में पार्टी ने 163 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की और करीब 49% वोट शेयर पाया। इसके बाद लोकसभा चुनाव 2024 में तो पार्टी ने कमाल करते हुए प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की और लगभग 60% वोट शेयर हासिल किया। इन नतीजों के पीछे सिर्फ राजनीतिक रणनीति ही नहीं, बल्कि मीडिया में मजबूत प्रस्तुति भी एक बड़ा कारण रही—जिसे संभालने की जिम्मेदारी आशीष अग्रवाल के पास थी। मीडिया विभाग को नई दिशा देने का काम आशीष अग्रवाल ने मीडिया विभाग को सिर्फ खबर भेजने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पार्टी की आवाज बना दिया। उनके कार्यकाल में: उनकी कार्यशैली में एक खास बात रही—काम को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से करना। पत्रकारों से रिश्ते सिर्फ प्रोफेशनल नहीं आशीष अग्रवाल का एक अलग पहलू उनका मीडिया से जुड़ाव है।वे पत्रकारों को सिर्फ काम का हिस्सा नहीं, बल्कि अपने परिवार जैसा मानते हैं। चाहे बड़े चैनल हों या छोटे यूट्यूब प्लेटफॉर्म—हर किसी के लिए वे आसानी से उपलब्ध रहते हैं।भोपाल में एक पत्रकार पर संकट आया, तो वे खुलकर उसके साथ खड़े नजर आए। यही वजह है कि मीडिया में उनकी एक भरोसेमंद छवि बनी है। संगठन में भी उतनी ही पकड़ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनकी कार्यशैली और संगठन निष्ठा को देखते हुए उन्हें फिर से मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा: यह दिखाता है कि उनकी भूमिका सिर्फ मीडिया तक सीमित नहीं है। टेक्नोलॉजी और नवाचार पर फोकस आज के दौर में राजनीति और मीडिया दोनों डिजिटल हो चुके हैं।Ashish Usha Agrawal ने इस बदलाव को समझते हुए मीडिया विभाग में तकनीक और नए प्रयोगों को बढ़ावा दिया। सोशल मीडिया, डिजिटल कंटेंट और तेज सूचना प्रसारण—इन सभी में उनकी रणनीति साफ नजर आती है। तीन साल का यह सफर सिर्फ एक पद का कार्यकाल नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, अनुशासन और नए प्रयोगों की कहानी है। आशीष ऊषा अग्रवाल ने यह दिखाया है कि अगर नेतृत्व मजबूत हो और सोच स्पष्ट हो, तो मीडिया विभाग भी संगठन की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। आने वाले समय में उनसे और बड़े कामों की उम्मीद की जा सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
कर्नाटक

कर्नाटक में CM नहीं बदलेगा, Mallikarjun Kharge ने खत्म की अटकलें

कर्नाटक की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही “CM बदलने” की चर्चाओं पर अब आधिकारिक विराम लग गया है। Indian National Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में फिलहाल किसी भी तरह का Chief Minister Change नहीं होने जा रहा। CM Change की अटकलें क्यों हुईं तेज? दरअसल, हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई थीं। कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि पार्टी हाईकमान सत्ता संतुलन के लिए बड़ा फैसला ले सकती है। यही वजह रही कि “Karnataka CM Change” ट्रेंड करने लगा। लेकिन खरगे के बयान के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। Siddaramaiah पर कायम भरोसा कांग्रेस नेतृत्व ने एक बार फिर मुख्यमंत्री Siddaramaiah के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा सरकार स्थिर है और अपने वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान इस समय किसी भी तरह का नेतृत्व बदलाव कर राजनीतिक संदेश गलत नहीं देना चाहता। Congress High Command का साफ संदेश खरगे के बयान को सिर्फ एक सफाई नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह साफ हो गया है कि पार्टी के भीतर फिलहाल सब कुछ नियंत्रण में है और कोई अंदरूनी खींचतान जैसी स्थिति नहीं है। Development पर फोकस, Politics नहीं कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार का मुख्य फोकस विकास कार्यों, जनकल्याण योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर है। ऐसे में CM बदलने की चर्चाएं सिर्फ अफवाह साबित हुई हैं। क्या आगे भी रहेगा यही रुख? फिलहाल पार्टी का रुख साफ है—कर्नाटक में कोई बदलाव नहीं। हालांकि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं, इसलिए आने वाले समय पर भी नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran Conflict Effect: पाकिस्तान की आर्थिक हालत पतली, PM Shehbaz Sharif का बड़ा बयान

पाकिस्तान पर बढ़ते संकट की आहट मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात, अब पाकिस्तान के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा देश अब बाहरी दबाव के कारण और कमजोर पड़ता दिख रहा है। PM Shehbaz Sharif ने क्या कहा? पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में माना कि क्षेत्रीय हालात का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे अहम सेक्टर इस तनाव से प्रभावित हुए हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कैसे बढ़ रहा है आर्थिक दबाव? तेल की कीमतें बनी बड़ी वजहIran से जुड़े तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह बड़ा झटका है। व्यापार में सुस्तीमध्य-पूर्व के देशों के साथ व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ने लगी हैं, जिससे कारोबार और राजस्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं। डॉलर की किल्लतविदेशी मुद्रा भंडार पहले ही सीमित है। ऐसे में बढ़ता आयात और घटता निवेश स्थिति को और गंभीर बना रहा है। निवेशकों का भरोसा कमअस्थिर माहौल के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे नई निवेश संभावनाएं घट रही हैं। आम लोगों की जिंदगी पर असर इस पूरे घटनाक्रम का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। एक आम परिवार के लिए घर का बजट संभालना अब पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। आगे क्या हो सकता है? आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो पाकिस्तान को और बड़े आर्थिक झटके लग सकते हैं। सरकार को अंतरराष्ट्रीय मदद और सख्त फैसलों का सहारा लेना पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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