ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की।
इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया।
क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat?
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है।
परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र
बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं—
“वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।
पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥”
मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं।
- वट वृक्ष को जल, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है।
- पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है।
- सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी और पढ़ी जाती है।
- अंत में पति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
बाजारों में भी दिखी रौनक
वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया।
परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार
वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है।
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