महाराष्ट्र में अब ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा जानना जरूरी होने जा रहा है। राज्य सरकार ने 15 अगस्त 2026 तक सभी कमर्शियल ड्राइवरों को बेसिक मराठी सीखने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद परिवहन विभाग ने पूरे राज्य में विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया है, जिसके तहत ड्राइवरों का डाटा कलेक्ट किया जा रहा है और उनकी भाषा क्षमता भी जांची जा रही है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है, ताकि स्थानीय लोगों को सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
59 RTO में चल रही विशेष जांच
महाराष्ट्र के सभी 59 RTO कार्यालयों में फिलहाल ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की जा रही है। अधिकारियों द्वारा लाइसेंस, परमिट और पहचान दस्तावेजों के साथ यह भी देखा जा रहा है कि चालक मराठी समझ और बोल पा रहे हैं या नहीं।
मुंबई, ठाणे और मीरा-भायंदर जैसे इलाकों में हुए शुरुआती सर्वे में कई ऐसे चालक मिले जो मराठी में सामान्य बातचीत भी नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद सरकार ने राज्यभर में यह अभियान तेज कर दिया।
सरकार बोली- पहले सीखाइए, फिर सख्ती होगी
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल कार्रवाई से ज्यादा फोकस मराठी सिखाने पर रहेगा। इसके लिए यूनियन कार्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और कुछ राजनीतिक संगठनों की मदद से “प्रैक्टिकल मराठी” क्लास शुरू की जा रही हैं।
इन क्लासेस में ड्राइवरों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले शब्द, यात्रियों से बातचीत करने का तरीका और सामान्य संवाद सिखाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बाहर से आए चालकों को भी स्थानीय माहौल समझने में आसानी होगी।
15 अगस्त के बाद बढ़ सकती है सख्ती
सरकार ने संकेत दिए हैं कि 15 अगस्त के बाद नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि फिलहाल लाइसेंस रद्द करने जैसी कोई सीधी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन विभाग नियमों को लेकर गंभीर नजर आ रहा है।
परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने कहा कि महाराष्ट्र में काम करने वाले लोगों को कम से कम बेसिक मराठी जरूर आनी चाहिए। यह स्थानीय संस्कृति और लोगों के सम्मान से जुड़ा विषय है।
फैसले पर शुरू हुई राजनीति
इस फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ यूनियनों और विपक्षी नेताओं ने इसे भाषा की राजनीति बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रोजी-रोटी कमाने आए लोगों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
वहीं सरकार का दावा है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य किसी की नौकरी छीनना नहीं बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देना है।
आम लोगों की क्या है राय?
मुंबई और आसपास के इलाकों में कई यात्रियों ने इस फैसले का समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि कई बार भाषा की वजह से सफर के दौरान परेशानी होती है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मराठी सीखना अच्छी बात है, लेकिन इसे जबरदस्ती लागू नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल 15 अगस्त की डेडलाइन को लेकर पूरे महाराष्ट्र में चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन सकता है।
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