ग्वालियर के आईपीएस कॉलेज में नर्सिंग ट्रेनिंग ले रही 23 वर्षीय छात्रा नीलू प्रजापति की संदिग्ध मौत हो गई। परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर इलाज में देरी और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्वालियर में नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध मौत
ग्वालियर के आईपीएस कॉलेज में मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना के तहत नर्सिंग ट्रेनिंग लेने आई 23 वर्षीय छात्रा नीलू प्रजापति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है, जबकि परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
देर रात बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के अनुसार, नीलू प्रजापति सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे अचानक बीमार हो गई थी। उसे लगातार उल्टियां हो रही थीं। उसके साथ हॉस्टल में रह रही चचेरे भाई की बेटी तनु ने परिवार को फोन कर इसकी जानकारी दी।
इलाज में देरी का आरोप
मृतका के पिता लक्ष्मण प्रजापति का आरोप है कि बेटी की हालत बिगड़ने के बावजूद कॉलेज और हॉस्टल प्रबंधन ने समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया। उनका कहना है कि रात में तबीयत खराब होने के बाद सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच नीलू को अस्पताल ले जाया गया, जिससे इलाज में देरी हुई और उसकी जान चली गई।
14 मई को ट्रेनिंग के लिए पहुंची थी छात्रा
नीलू केआरजी कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी। वह 45 दिन की विशेष ट्रेनिंग के लिए 14 मई को आईपीएस कॉलेज पहुंची थी। परिजनों के मुताबिक, कुछ दिन पहले वह घर भी आई थी और अपने खराब जूते बदलवाकर दोबारा ट्रेनिंग के लिए लौटी थी।
हॉस्टल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
हॉस्टल स्टाफ ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। स्टाफ का कहना है कि छात्रा की तबीयत खराब होने पर उसे तुरंत ORS दिया गया था, जिससे उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ था। बाद में दोबारा तबीयत बिगड़ने पर उसे स्कूटी से अस्पताल पहुंचाया गया।
एम्बुलेंस का इंतजार नहीं किया
हॉस्टल प्रबंधन का दावा है कि एम्बुलेंस का इंतजार करने में अधिक समय लगता, इसलिए स्टाफ छात्रा को तुरंत स्कूटी से अस्पताल लेकर पहुंचा। वहीं परिजन इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर भी विवाद
आईपीएस हॉस्टल के ओबीसी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट डायरेक्टर कृति दीक्षित ने दावा किया कि नीलू को पहले से थायराइड और पेट दर्द की समस्या थी। हालांकि परिवार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी।
हॉस्टल की व्यवस्था पर उठे सवाल
परिजनों ने हॉस्टल की क्षमता और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग के लिए ठहराया गया था। जानकारी के मुताबिक हॉस्टल में करीब 80 छात्राएं और 120 छात्र रह रहे थे।
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। हॉस्टल के कमरे की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है और महिला पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम बनाई गई है।
पैनल पोस्टमार्टम और वीडियोग्राफी होगी
पुलिस के मुताबिक छात्रा का पैनल पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इस दौरान एसडीएम, तहसीलदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
नीलू प्रजापति एक साधारण परिवार से थी। उसके पिता आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कचरा वाहन चलाते हैं। परिवार में छोटी बहन भी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटा भाई आठवीं कक्षा में पढ़ता है। बेटी की अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
ट्रेनिंग व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना के तहत चल रही ट्रेनिंग व्यवस्थाओं और हॉस्टल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
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