अमेरिका में H-1B Visa को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति Donald Trump प्रशासन के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार “फीस” के नाम पर टैक्स नहीं वसूल सकती।
इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा राहत भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों को मिली है, क्योंकि H-1B वीजा का सबसे अधिक इस्तेमाल भारतीय कर्मचारी करते हैं।
क्या था पूरा मामला?
Trump प्रशासन ने साल 2025 में H-1B वीजा आवेदन पर भारी फीस लगाने का फैसला लिया था। सरकार का कहना था कि इससे अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा होगी और विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम होगी। लेकिन टेक इंडस्ट्री और कई बिजनेस संगठनों ने इसका विरोध किया था।
नई नीति लागू होने के बाद कंपनियों के लिए विदेशी स्किल्ड कर्मचारियों को हायर करना काफी महंगा हो जाता। खासतौर पर भारतीय IT कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ने वाला था।
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
मैसाचुसेट्स की फेडरल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राष्ट्रपति प्रशासन के पास इस तरह का टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट के मुताबिक टैक्स या इतना बड़ा शुल्क लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास होता है।
जज ने यह भी माना कि यह नियम कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू किया गया था। इसी आधार पर कोर्ट ने इसे गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया।
भारतीयों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
H-1B Visa का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में हजारों भारतीय इंजीनियर और IT एक्सपर्ट काम करते हैं। हर साल जारी होने वाले H-1B वीजा में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रहती है।
अगर 1 लाख डॉलर वाला नियम लागू रहता, तो कंपनियां नए कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से बचतीं। इसका असर सीधे भारतीय युवाओं, इंजीनियरों और स्टूडेंट्स के करियर पर पड़ता।
IT कंपनियों को भी मिलेगा फायदा
Infosys, TCS, HCLTech जैसी भारतीय कंपनियां लंबे समय से H-1B वीजा सिस्टम पर निर्भर रही हैं। कोर्ट के इस फैसले से इन कंपनियों की लागत कम होगी और अमेरिका में भर्ती प्रक्रिया आसान बनी रहेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे अमेरिकी टेक सेक्टर में विदेशी टैलेंट की एंट्री पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
आगे क्या हो सकता है?
हालांकि ट्रम्प प्रशासन इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है, लेकिन फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद यह अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं रहेगा।
इस फैसले ने उन हजारों भारतीय युवाओं को राहत दी है, जो अमेरिका में नौकरी और बेहतर करियर का सपना देख रहे हैं।
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