ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Khamenei) के अंतिम संस्कार में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। तेहरान में आयोजित इस राजकीय समारोह में हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, पूरे कार्यक्रम के दौरान दो बातें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। पहली, खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई समारोह में नजर नहीं आए। दूसरी, ईरान के करीबी सहयोगी माने जाने वाले रूस, चीन और भारत ने अपने शीर्ष नेताओं को अंतिम संस्कार में नहीं भेजा।
Tehran में उमड़ा जनसैलाब, कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार
राजधानी तेहरान में सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। देशभर से आए नागरिक अपने सर्वोच्च नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रमुख सरकारी इमारतों, सड़कों और समारोह स्थल के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत बनाया गया था।
बेटे मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
अंतिम संस्कार में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य मौजूद थे, लेकिन उनके बेटे मुजतबा खामेनेई कहीं दिखाई नहीं दिए। उनकी अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
हालांकि, ईरानी प्रशासन या खामेनेई परिवार की ओर से अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी के कारणों को लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं।
100 से ज्यादा देशों ने भेजे अपने प्रतिनिधि
खामेनेई के अंतिम संस्कार में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका सहित दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। कई देशों ने विदेश मंत्री, संसद अध्यक्ष, उपराष्ट्रपति या विशेष दूत को भेजकर ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ने यह भी दिखाया कि ईरान की वैश्विक राजनीति में भूमिका आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
Russia, China और India ने क्यों नहीं भेजे Top Leaders?
ईरान के करीबी साझेदार माने जाने वाले रूस और चीन ने अपने राष्ट्रपति स्तर के नेताओं को अंतिम संस्कार में नहीं भेजा। दोनों देशों की ओर से वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि समारोह में शामिल हुए।
भारत ने भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बजाय राजनयिक स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि किसी भी देश की ओर से अंतिम संस्कार जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में किस स्तर का प्रतिनिधि भेजा जाएगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें सुरक्षा, पहले से तय सरकारी कार्यक्रम, कूटनीतिक प्राथमिकताएं और द्विपक्षीय संबंध शामिल होते हैं। इसलिए शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति को सीधे किसी राजनीतिक संदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब ईरान के भविष्य पर टिकी दुनिया की नजर
खामेनेई के निधन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल ईरान के भविष्य के नेतृत्व को लेकर है। राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर आगे क्या बदलाव होंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। ऐसे में खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक राजकीय समारोह नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भी महत्वपूर्ण अवसर बन गया।
