पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती बयानबाजी और नेताओं के अलग-अलग रुख ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व ने हालात पर नजर रखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाने से रोकने का फैसला किया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर संगठन इस मोड़ पर पहुंच गया है तो आखिर “ये किसका फेलियर है?” उनके इस सवाल को पार्टी नेतृत्व और प्रदेश संगठन पर सीधी टिप्पणी माना जा रहा है।
Delhi तक पहुंचा Punjab Congress का विवाद
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद अब केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी चिंता का कारण बन चुके हैं। इसी वजह से दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हाईकमान चाहता है कि पंजाब में कोई भी नेता ऐसा कदम न उठाए, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़े या चुनाव से पहले गलत राजनीतिक संदेश जाए।
Channi को क्यों दी गई सलाह?
जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कुछ अहम राजनीतिक फैसलों पर आगे बढ़ने की तैयारी में थे। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फिलहाल इंतजार करने और सभी निर्णय केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही लेने की सलाह दी है।
कांग्रेस का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी तरह का जल्दबाजी में लिया गया फैसला पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Randhawa के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब कांग्रेस की स्थिति को लेकर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के भीतर ऐसी नौबत आ गई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका “ये किसका फेलियर है?” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रंधावा का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि संगठन के कामकाज पर भी सवाल खड़ा करता है।
चुनाव से पहले Congress के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह की अंदरूनी टूट या सार्वजनिक विवाद से बचना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस नेताओं को एक मंच पर लाने और संगठन को मजबूत बनाए रखने पर है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि गुटबाजी समय रहते खत्म नहीं हुई तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों और पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल पंजाब कांग्रेस की सियासत पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में हाईकमान की बैठकें, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक फैसले यह तय करेंगे कि पार्टी इस संकट से कितनी जल्दी बाहर निकल पाती है। चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए एकजुटता बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।
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