भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह उनके जीवन से जुड़े दो पुराने और चर्चित दावे हैं। पहला, उनके स्वास्थ्य संबंधी अभ्यास यानी मूत्र सेवन (Urine Therapy) को लेकर, और दूसरा पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा ऑपरेशन कहूटा (Operation Kahuta) विवाद।
इन दोनों मुद्दों पर वर्षों से अलग-अलग दावे और चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, इनमें से कई बातों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इतिहासकारों के बीच भी इस पर अलग-अलग राय मौजूद है।
मूत्र सेवन को लेकर क्या है दावा?
मोरारजी देसाई सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर चुके थे कि वे स्वास्थ्य कारणों से मूत्र सेवन करते थे। इसी को लेकर वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति उन्हें इस विषय में जानकारी लेने के लिए फोन किया करते थे।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे ऐतिहासिक दावा माना जाता है, न कि पूरी तरह स्थापित तथ्य।
क्या था ऑपरेशन कहूटा?
1970 और 1980 के दशक में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र कहूटा था। भारत की खुफिया एजेंसियां इस कार्यक्रम पर नजर बनाए हुए थीं।
इसी दौरान यह आरोप सामने आया कि भारत की खुफिया एजेंसी को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल गई थी।

