आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलJantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव◆BREAKINGदेश-हरपलRahul Gandhi on CEC: राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं, इस्तीफा देकर हटें◆BREAKINGबिज़नेसGold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर◆BREAKINGबिज़नेसStock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट◆BREAKINGBreaking NewsINDIA Bloc Protest: राहुल गांधी का सवाल- ‘दिल्ली कैद में क्यों है?’, Supreme Court जाएगा विपक्ष◆BREAKINGदेश-हरपलBharatpur Murder Case: पूर्व BJP विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत से मचा हड़कंप, गांव में तनाव◆BREAKINGदेश-हरपलWeather Update: दिल्ली-NCR में तेज बारिश, लखनऊ में बाढ़ और राजस्थान में ओले◆BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Riyadh Airport Attack रियाद एयरपोर्ट हमले का CCTV फुटेज आया सामने, 13 की मौत◆BREAKINGदेश-हरपलJantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव◆BREAKINGदेश-हरपलRahul Gandhi on CEC: राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं, इस्तीफा देकर हटें◆BREAKINGबिज़नेसGold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर◆BREAKINGबिज़नेसStock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट◆BREAKINGBreaking NewsINDIA Bloc Protest: राहुल गांधी का सवाल- ‘दिल्ली कैद में क्यों है?’, Supreme Court जाएगा विपक्ष◆BREAKINGदेश-हरपलBharatpur Murder Case: पूर्व BJP विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत से मचा हड़कंप, गांव में तनाव◆BREAKINGदेश-हरपलWeather Update: दिल्ली-NCR में तेज बारिश, लखनऊ में बाढ़ और राजस्थान में ओले◆BREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Riyadh Airport Attack रियाद एयरपोर्ट हमले का CCTV फुटेज आया सामने, 13 की मौत◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

One Nation One Election Bill: 2029 में बदल सकती है चुनाव व्यवस्था, संसदीय समिति अध्यक्ष बोले- जनता का मिला समर्थन

Table of Content

भारत की चुनाव व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के बीच One Nation One Election (एक देश, एक चुनाव) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि अगर सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो 2029 के लोकसभा चुनाव से इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है।

इस प्रस्ताव को लेकर संसदीय समिति लगातार काम कर रही है और देश के अलग-अलग राज्यों में विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। समिति का मकसद एक ऐसी चुनाव प्रणाली तैयार करना है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सके।

99% लोगों ने किया One Nation One Election का समर्थन

JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा किया कि समिति द्वारा किए गए संवाद और सुझाव प्रक्रिया के दौरान करीब 99 प्रतिशत लोगों ने One Nation One Election के विचार का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण कई बार सरकारों के विकास कार्य और योजनाएं प्रभावित होती हैं।

राज्यों से ली जा रही राय, विशेषज्ञों से हो रही चर्चा

‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने से पहले राज्यों की भूमिका और उनकी चिंताओं को समझना जरूरी माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति राज्यों के विशेषज्ञों और अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों से सुझाव ले रही है।

समिति चुनाव प्रक्रिया, संविधान में संभावित बदलाव, कानूनी चुनौतियों और चुनाव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रही है।

क्या है One Nation One Election का पूरा विचार?

One Nation One Election का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। अभी भारत में अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव अलग समय पर होते हैं, जबकि लोकसभा चुनाव अपने तय समय पर होते हैं।

इस प्रस्ताव के तहत चुनावों को एक निश्चित चक्र में कराने की योजना है, जिससे बार-बार चुनाव कराने की जरूरत कम हो सकती है।

एक साथ चुनाव कराने के क्या फायदे बताए जा रहे हैं?

इस व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि इससे कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • चुनाव खर्च में कमी आ सकती है।
  • सरकारी मशीनरी और सुरक्षा बलों पर दबाव कम होगा।
  • विकास योजनाओं में बार-बार रुकावट नहीं आएगी।
  • सरकारें लंबे समय की नीतियों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।

समर्थकों का तर्क है कि लगातार चुनावी माहौल रहने से प्रशासनिक काम प्रभावित होते हैं, इसलिए एक साथ चुनाव व्यवस्था ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की अलग राय

हालांकि, One Nation One Election को लेकर सभी की राय एक जैसी नहीं है। कुछ विपक्षी दल और विशेषज्ञ इसके कुछ पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा राज्यों की स्वायत्तता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा जारी है।

2029 में लागू होने की उम्मीद क्यों?

संसदीय समिति फिलहाल सभी पक्षों से राय जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने में लगी है। इसके बाद ही आगे की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।

अगर सरकार और संसद स्तर पर सभी जरूरी मंजूरी मिल जाती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत में नई चुनाव व्यवस्था की शुरुआत का आधार बन सकता है।

One Nation One Election सिर्फ चुनाव कराने का तरीका बदलने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में संसदीय समिति की रिपोर्ट और सरकार के फैसले इस दिशा को तय करेंगे।

Yukta

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Jantar Mantar

Jantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव

दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar) सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि देशभर के लोगों की आवाज उठाने का एक बड़ा मंच रहा है। जब भी किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना होता था, लोग यहां धरना देने पहुंच जाते थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन हो या भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन, जंतर-मंतर ने कई बड़े आंदोलनों को करीब से देखा है। लेकिन अब यहां धरना-प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। दिल्ली पुलिस के ताजा फैसले के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल नहीं है। इसकी जगह दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस जगह पर पिछले करीब 33 साल से लोग अपनी मांगें उठाते रहे, वहां प्रदर्शन की व्यवस्था क्यों बदली गई? Jantar Mantar Protest Ban: क्या है पूरा मामला? Jantar Mantar पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को चर्चा तेज हुई। दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों में बदलाव किया गया है। अब प्रदर्शन के लिए तीन जगहों को तय किया गया है। इनमें सेंट्रल दिल्ली का रामलीला मैदान, नॉर्थ दिल्ली का बुराड़ी मैदान और ईस्ट दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं। इस फैसले से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और दूसरे समूहों के लिए अपनी रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार खत्म हो गया है। प्रदर्शन के लिए तय नियमों और अनुमति की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी रहेगा। 1993 से विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर जंतर-मंतर को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की प्रमुख जगह के रूप में पहचान 1993 के आसपास मिली। इससे पहले दिल्ली के बोट क्लब इलाके में बड़े धरने और सभाएं हुआ करती थीं। अक्टूबर 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बोट क्लब पर जुटे थे। इसके बाद वहां प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगने लगीं और दूसरे स्थान की जरूरत महसूस हुई। धीरे-धीरे जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख ठिकाना बन गया। संसद के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों पर मीडिया और राजनीतिक दलों का ध्यान भी आसानी से जाता था। यही वजह रही कि अगले कई दशकों तक यह जगह अलग-अलग आंदोलनों का गवाह बनी। Anna Hazare Movement: अन्ना आंदोलन से देशभर में चर्चा साल 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने लोकपाल कानून की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। इस आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। अरविंद केजरीवाल समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे जुड़े थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी इस आवाज ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी और आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन का रास्ता भी बना। उस दौर में जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ ने दिखाया कि किसी मुद्दे को लेकर लोगों का शांतिपूर्ण विरोध किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। Farmers Protest: तमिलनाडु के किसानों ने भी उठाई आवाज 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज, सूखे और आर्थिक परेशानियों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। किसानों की मांगों में कर्ज राहत, सूखा राहत पैकेज और कावेरी जल विवाद से जुड़े मुद्दे शामिल थे। किसानों का यह प्रदर्शन लंबे समय तक चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर जुटे किसानों ने अपनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की। इस आंदोलन ने खेती-किसानी से जुड़े संकट और किसानों की मांगों पर एक बार फिर ध्यान खींचा। Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने ने खींचा देश का ध्यान साल 2023 में जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी चर्चा में रहा। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पहलवानों के इस धरने ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी बहस छेड़ दी। प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी शिकायतों की जांच और जवाबदेही की मांग उठाई। इस आंदोलन ने एक बार फिर जंतर-मंतर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भी चर्चा में अक्टूबर 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, संगठन ने 7 अक्टूबर को अनुमति के लिए आवेदन किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामान्य तौर पर कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होता है। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन की अनुमति उसके आवेदन, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर तय की जाती है। Jantar Mantar पर पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद यहां प्रदर्शनों को लेकर प्रतिबंधात्मक निर्देश दिए थे। शिकायतों में शोर, गंदगी और आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी जैसे मुद्दे शामिल थे। बाद में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई की। अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा माना, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बहस केवल किसी एक आंदोलन तक सीमित नहीं रही है। इसमें नागरिकों के अधिकार, स्थानीय लोगों की परेशानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई पहलू शामिल रहे हैं। अब कहां कर सकेंगे लोग धरना-प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के...
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi on CEC: राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं, इस्तीफा देकर हटें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मैसेज उन्हें आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ज्ञानेश कुमार को अपराधी नहीं मानते, बल्कि उनके मुताबिक उनसे गड़बड़ी कराई जा रही है। राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देकर रास्ते से हटने की मांग की है। राहुल गांधी का यह बयान चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहा है। CEC Gyanesh Kumar पर राहुल गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के साथ उनके मैसेज के जरिए संपर्क होता है। उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपराधी नहीं मानते, लेकिन आरोप लगाया कि उनसे गलत काम कराया जा रहा है। राहुल ने यह भी मांग की कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें और इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट हो। हालांकि, राहुल गांधी के इन आरोपों को लेकर सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। उनके बयान और आरोपों को चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आधिकारिक जवाब से अलग समझना चाहिए। SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। वहीं, चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों के तहत काम करता है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। Supreme Court जाने की तैयारी में INDIA Bloc राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को कानूनी स्तर पर उठाने की बात कही है। INDIA Bloc का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्टता मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने पर संबंधित पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद के कानूनी पहलुओं को समझने में अहम होंगे। चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की भूमिका विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव से जोड़कर उठा रही है। फिलहाल, इस विवाद में राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्य अलग-अलग देखना जरूरी है। आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Price

Gold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर

Gold Price की कीमतों में आज गिरावट दर्ज की गई है। सोना ₹1,005 सस्ता हो गया, जिसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख पर आ गया। सोने की कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने के भाव में रोजाना बदलाव होता है। ऐसे में खरीदारी करने से पहले अपने शहर में ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सोने की कीमत में ₹1,005 की गिरावट आई है। इसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख बताया जा रहा है। सोने की कीमतों पर नजर रखने वाले खरीदारों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि भाव में थोड़ी सी कमी भी बड़ी खरीदारी के दौरान कीमत पर असर डाल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। इसलिए ज्वेलरी खरीदते समय 22 कैरेट का भाव भी जरूर चेक करें। सितंबर में भी ₹8,000 तक गिरा था सोने का भाव सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव पिछले महीने भी देखने को मिला था। सितंबर में सोना करीब ₹8,000 तक सस्ता हुआ था। अब एक बार फिर कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सोने के अगले रुख को लेकर चर्चा बढ़ गई है। सोने के भाव पर केवल घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की चाल, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई कारण गोल्ड रेट को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से कभी सोने की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिलती है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा भाव पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरत को ध्यान में रखें। अगर गहने खरीद रहे हैं, तो सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और लागू GST को भी जोड़ें। साथ ही, हॉलमार्क वाला सोना खरीदना बेहतर रहता है। 22 और 24 कैरेट Gold Rate में क्या है अंतर? 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे गहने बनाना आसान होता है। इसी कारण दोनों की कीमतों में अंतर रहता है। यह भी ध्यान रखें कि ₹1.48 लाख का भाव 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के लिए बताया गया है। आपके शहर में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा रेट जरूर पता करें। Gold Price Today: आगे क्या रहेगा सोने का रुख? सोने की कीमत में आई आज की गिरावट ने खरीदारों का ध्यान खींचा है। सितंबर में भी करीब ₹8,000 की कमी दर्ज होने के बाद अब ₹1,005 की ताजा गिरावट बाजार के लिए चर्चा का विषय है। फिलहाल सोने की कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेश या खरीदारी का फैसला करने से पहले ताजा भाव और बाजार के रुझान को समझना जरूरी है। नोट: यह खबर उपलब्ध कराए गए सोने के भाव के आंकड़ों पर आधारित है। प्रकाशन से पहले ताजा रेट और सितंबर में हुई गिरावट की पुष्टि जरूर करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। एक समय बाजार में तेजी की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। Sensex Today: 71,900 के आसपास पहुंचा बाजार सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 71,900 के स्तर पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी भी लगभग 150 अंक नीचे आ गया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरतते नजर आए। जिन निवेशकों को सुबह बाजार में तेजी की उम्मीद थी, उनके लिए अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी। IT और Banking Stocks में सबसे ज्यादा बिकवाली सोमवार के कारोबार में IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टेक महिंद्रा समेत कुछ आईटी शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट आने से प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सभी शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं रही। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा। Stock Market में गिरावट की क्या है वजह? Stock Market में गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं। निवेशक इस समय वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली होने पर बाजार के प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल भी प्रभावित होती है। कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। वैश्विक बाजारों का असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार में मुनाफावसूली: तेजी के बाद निवेशकों की ओर से शेयर बेचकर मुनाफा निकालना भी गिरावट की एक वजह हो सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। रुपये और कच्चे तेल पर भी निवेशकों की नजर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। वहीं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से निवेशक केवल शेयरों की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया से जुड़े आर्थिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए धैर्य रखना जरूरी है। बाजार में हर गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरों में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी। इसी तरह, थोड़ी तेजी आने पर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि बाजार पूरी तरह संभल गया है। निवेश का फैसला लेते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचना बेहतर है। आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सेंसेक्स 71,900 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बाजार में दबाव बना रहता है। कुल मिलाकर, सोमवार को सेंसेक्स में करीब 500 अंकों और निफ्टी में लगभग 150 अंकों की गिरावट ने बाजार के माहौल को कमजोर किया। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली इसका प्रमुख हिस्सा रही। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
राहुल गांधी

INDIA Bloc Protest: राहुल गांधी का सवाल- ‘दिल्ली कैद में क्यों है?’, Supreme Court जाएगा विपक्ष

दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासी माहौल गर्म है। सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की तैयारी में हैं। राहुल गांधी ने राजधानी में लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर दिल्ली को इस तरह बंद क्यों किया जा रहा है? विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। यह पूरा विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर है। विपक्षी दल इस मामले में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने के लिए अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी की जा रही है। Rahul Gandhi का सवाल- दिल्ली में इतनी पाबंदियां क्यों? राहुल गांधी ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे लोगों को रोका जा रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्षी नेता चाहते हैं कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर उठ रही शिकायतों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए। हालांकि, विपक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित कानूनी कार्यवाही भी महत्वपूर्ण है। Supreme Court क्यों पहुंच रहा है INDIA ब्लॉक? INDIA ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाना चाहते हैं। विपक्ष की योजना मार्च के जरिए अदालत तक पहुंचने और अपनी मांगों को लेकर याचिका दायर करने की है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का अनुरोध किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, CJI ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया और संबंधित मुद्दों पर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका दायर करने का रास्ता बताया। इसके बाद विपक्षी नेताओं की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली कार्रवाई पर है। याचिका में कौन-सी मांगें रखी जाती हैं और अदालत उन पर क्या विचार करती है, यह आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होगा। SIR विवाद क्या है? विपक्ष क्यों उठा रहा सवाल SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना होता है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर जारी विवाद में संबंधित तथ्यों को समझना जरूरी है। मतदाता सूची में किसी नाम के जुड़ने या हटने से जुड़े मामलों का आकलन उपलब्ध रिकॉर्ड और निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए। Delhi Protest के चलते 6 Metro Stations पर प्रतिबंध INDIA ब्लॉक के मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की घोषणा के मुताबिक, सोमवार सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने की व्यवस्था की गई थी। इनमें जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन शामिल थे। सुरक्षा संबंधी इन प्रतिबंधों का असर आम यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता था। ऐसे में दिल्ली में यात्रा करने वाले लोगों के लिए मेट्रो और ट्रैफिक से जुड़े अपडेट देखना जरूरी है। विपक्ष ने इन प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस मामले में प्रतिबंधों की जरूरत और उनके असर को लेकर अलग-अलग पक्षों की दलीलें सामने आ रही हैं। CJP Protest और हिरासत का मामला भी चर्चा में दिल्ली में प्रदर्शन और हिरासत को लेकर भी पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) सहित विभिन्न समूहों ने प्रदर्शन और अनुमति से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की हिरासत, सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध और लोगों की आवाजाही को लेकर कानूनी सवाल भी सामने आए हैं। विपक्षी नेताओं ने इन घटनाओं पर आपत्ति जताई है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की बात कही है। इन मामलों में प्रशासन की कार्रवाई और अदालतों के निर्देश महत्वपूर्ण हैं। किसी भी कार्रवाई का मूल्यांकन उसके तथ्यों और कानूनी आधार के अनुसार किया जाना चाहिए। Supreme Court के रुख पर टिकी निगाहें अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि INDIA ब्लॉक के नेता सुप्रीम कोर्ट में अपनी मांगों को किस तरह रखते हैं। विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की जांच हो और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय की जाए। वहीं, अदालत में याचिका दायर होने के बाद संबंधित पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। दिल्ली में INDIA ब्लॉक का मार्च ऐसे समय हो रहा है, जब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता पर बहस तेज है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और चुनाव आयोग का रुख इस विवाद को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.