अयोध्या | Desh Harpal Digital
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, आभूषण और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं। जांच के दौरान करीब 50 बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि कथित रूप से चढ़ावे की रकम के लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
SIT की रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में मंदिर के चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में 9 बड़ी खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर कथित गबन को अंजाम दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 दिनों में 70 बार कथित चोरी की घटनाएं हुईं। एसआईटी ने अविनाश शुक्ला को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख आरोपी बताया है।
टिन्नू यादव की दोबारा रिमांड की तैयारी
मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से पूछताछ अभी जारी है। पुलिस अब दोबारा रिमांड लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित चोरी का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित होता था और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को एंटी करप्शन कोर्ट में प्रस्तावित है।
ट्रस्ट में भी हुए बड़े बदलाव
चढ़ावा चोरी विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। साथ ही नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
RSS और मुख्यमंत्री योगी का बयान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए एसआईटी जांच पर भरोसा जताया है और कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जांच में अभी तक करीब 150 लोगों में से केवल 8 के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की कथित करतूत के आधार पर पूरे ट्रस्ट या अयोध्या की छवि को बदनाम करना उचित नहीं है। (The Times of India)
Desh Harpal Analysis
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि जनविश्वास और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

