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Pune Murder Case: Ketan Agarwal Case में नया अपडेट, Siya Goyal के परिवार की दुकान पर FDA Action

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Ketan Agarwal Murder Case में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस बीच अब मुख्य आरोपी Siya Goyal के परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पुणे के मार्केट यार्ड स्थित उनके परिवार की मसाले और ड्राई फ्रूट्स की दुकान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबार बंद करने का नोटिस जारी किया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई हत्या मामले की जांच का हिस्सा नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की गई है।

Pune में FDA की बड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र FDA की टीम ने हाल ही में पुणे के मार्केट यार्ड स्थित एम/एस बीजी गोयल एंड कंपनी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने हल्दी पाउडर, तिल और सोया उत्पाद समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे।

निरीक्षण के दौरान करीब 4,172 किलोग्राम खाद्य सामग्री, जिसकी अनुमानित कीमत 8.14 लाख रुपये बताई गई है, जब्त कर ली गई। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों मिला कारोबार बंद करने का नोटिस?

FDA के मुताबिक निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने दावा किया कि दुकान के लाइसेंस से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावा कुछ उत्पादों की लेबलिंग में कमियां मिलीं और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई।

इन्हीं कारणों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत प्रतिष्ठान को अगले आदेश तक कारोबार बंद रखने का नोटिस जारी किया गया है।

क्या Murder Case से जुड़ी है यह कार्रवाई?

इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि FDA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दुकान के खिलाफ उठाया गया कदम केतन अग्रवाल हत्याकांड से जुड़ा नहीं है। यह केवल खाद्य सुरक्षा नियमों और लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई है।

उधर, केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच पुणे पुलिस अपनी अलग प्रक्रिया के तहत कर रही है।

आखिर क्या है Ketan Agarwal Murder Case?

पुणे के युवा रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की जून 2026 में लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे एक हादसा माना गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला हत्या का निकला।

पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर Siya Goyal और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर पहले पूरी साजिश रची और फिर ट्रेकिंग के दौरान उन्हें खाई में धक्का देकर हत्या कर दी। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।

गुपचुप शादी के दावे भी चर्चा में

इस हाई-प्रोफाइल केस के बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में गुपचुप शादी की थी। इन दावों की पुष्टि के लिए पुणे पुलिस ने मंदिर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की।

हालांकि अब तक पुलिस को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे इन दावों की पुष्टि हो सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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Yukta

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Share Market

Share Market Today: निवेशकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, Sensex-Nifty में बढ़त

भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में गुरुवार को कारोबार के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला। Sensex करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 50 अंकों की तेजी दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी के पीछे IT और Media सेक्टर के शेयरों में हुई मजबूत खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है। सुबह से ही बाजार में निवेशकों का रुख थोड़ा उत्साहित नजर आया। लंबे समय से उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार कर रहे निवेशकों को आज IT कंपनियों और मीडिया स्टॉक्स में बेहतर अवसर दिखाई दिए, जिसके चलते इन सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। IT Stocks में तेजी, टेक सेक्टर को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT Stocks में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में मांग बढ़ने और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से आने वाले समय में इस क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। IT शेयरों में आई मजबूती ने बाजार के सेंटीमेंट को भी सकारात्मक बनाया। Media Stocks में भी दिखी बढ़त IT के साथ-साथ Media Stocks में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। मीडिया कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण सेक्टर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद की। Global Market Signals पर निवेशकों की नजर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेतों की अहम भूमिका बनी हुई है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर-रुपये की चाल पर निवेशक लगातार नजर बनाए हुए हैं। आगे कैसी रह सकती है Market की चाल? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत कंपनियों और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल Sensex और Nifty में आई तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Petrol

Diesel ATF Export Duty Hike: सरकार का बड़ा फैसला, Petrol Export Duty में कटौती

देश में Petrol की सप्लाई को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और बाजार में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना है। Diesel और ATF Export Duty में बढ़ोतरी क्यों? सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है। डीजल देश के परिवहन क्षेत्र, उद्योगों और कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है, जबकि ATF विमानन सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सरकार चाहती है कि तेल कंपनियां पहले घरेलू बाजार की मांग को पूरा करें, ताकि देश में ईंधन की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो। बढ़ी हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी से कंपनियों के लिए विदेशों में इन उत्पादों की बिक्री पहले की तुलना में महंगी हो सकती है। Petrol Export Duty हुई कम, क्या बदलेगा? जहां डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है। सरकार का यह फैसला पेट्रोलियम सेक्टर में संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार समय-समय पर एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करती रहती है। Fuel Supply को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी भारत अपनी जरूरतों के लिए कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात करता है और उसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करता है। ऐसे में घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी व्यवस्था के जरिए सरकार घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बनाना चाहती है। आम लोगों पर पड़ेगा क्या असर? इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना कम है। एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मुख्य प्रभाव तेल कंपनियों और निर्यातकों पर पड़ेगा। हालांकि, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी बाजार की स्थिति और रुपये की मजबूती के आधार पर ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। 16 July से लागू हुई नई दरें सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था 16 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है। अब तेल कंपनियों को नई एक्सपोर्ट ड्यूटी के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की Energy Security को मजबूत करने और घरेलू बाजार में फ्यूल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) में भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत के पूर्व रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर डॉ. रघुराम राजन समेत तीन भारतीय विशेषज्ञों को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों में शामिल किया गया है। इसे भारत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सलाहकार समूहों के लिए नए सदस्यों की घोषणा की है। इनमें भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी जगह मिली है। इन विशेषज्ञों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देना होगा। डॉ. रघुराम राजन, जो भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माने जाते हैं, को एक अहम सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उनके साथ दो अन्य भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थशास्त्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा और आर्थिक विशेषज्ञता को लगातार सम्मान मिल रहा है। भारतीय पेशेवर आज दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माण से जुड़े संगठनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के निर्णय लेने वाले बोर्ड की सदस्यता नहीं है, बल्कि सलाहकार समितियों का हिस्सा है। फिर भी इन समितियों की सिफारिशें आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की यह बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है। भारतीय मूल के विशेषज्ञों को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक विशेषज्ञता की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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