मध्य पूर्व में America और Iran के बीच जारी तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है।America ने लगातार 11वीं रात ईरान के पांच शहरों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में ड्रोन ठिकानों, सैन्य अड्डों और विमान हैंगर को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया है कि इस सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर (करीब ₹3.6 लाख करोड़) से अधिक खर्च हो चुका है। लगातार बढ़ते हमलों ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
ईरान के पांच शहरों में America की Airstrike
America सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा कार्रवाई में Iran के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर सटीक एयरस्ट्राइक की गई। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की ड्रोन क्षमता और सैन्य नेटवर्क को कमजोर करना बताया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जिन इलाकों को निशाना बनाया गया वहां ड्रोन स्टोरेज, एयरक्राफ्ट हैंगर और सैन्य उपकरण मौजूद थे। हालांकि ईरान ने अभी तक हमलों से हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
लगातार 11वीं रात जारी रहा हमला
अमेरिका का यह अभियान लगातार 11वीं रात तक जारी रहा। पिछले कई दिनों से दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज होती जा रही है। जहां एक ओर अमेरिका अपने अभियान को आतंकवाद और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
युद्ध पर अब तक ₹3.6 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के अनुसार, ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में करीब ₹3.6 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।
इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद अमेरिकी संसद में भी इस अभियान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रक्षा विभाग ने आगे की सैन्य जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त बजट की मांग भी की है।
ट्रंप ने दिए सख्त संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ईरान अपनी सैन्य गतिविधियों में कमी नहीं लाता, तो अमेरिका आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
दोनों देशों के बीच फिलहाल किसी बड़े कूटनीतिक समाधान के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।
दुनिया पर भी दिखने लगा असर
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और शेयर बाजार पर भी इस युद्ध का असर पड़ने लगा है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
आगे क्या?
लगातार हो रहे हवाई हमले, बढ़ता सैन्य खर्च और दोनों देशों के सख्त रुख को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। यदि जल्द कोई कूटनीतिक पहल नहीं होती, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान अगला कदम क्या उठाते हैं।
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