मध्य पूर्व (Middle East) में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। America और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर अमेरिका ने लगातार 12वें दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, तो दूसरी ओर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार दोनों पर दबाव बढ़ गया है।
लगातार 12वें दिन US Airstrikes, कई ठिकाने बने निशाना
America सेना ने Iran के चार प्रांतों में मौजूद सैन्य अड्डों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और ड्रोन से जुड़े ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन ऑपरेशनों का उद्देश्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान लगातार 12 दिनों से जारी है और आने वाले दिनों में भी हालात के मुताबिक आगे की रणनीति तय की जाएगी।
Trump का दावा- “Iran लगातार कमजोर हो रहा”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान पर की जा रही कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगातार कमजोर हो रही है और यदि अमेरिकी हितों या सहयोगी देशों को निशाना बनाया गया तो जवाब और भी सख्त होगा।
ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
Houthi Rebels ने Saudi के दो Oil Tankers पर किया हमला
इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है। विद्रोहियों के अनुसार यह कार्रवाई उनके समुद्री अभियान का हिस्सा थी।
हमले के बाद जहाजों की आवाजाही वाले अहम समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी बड़े तेल रिसाव या भारी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
Global Oil Market पर बढ़ा दबाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इस स्थिति में दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
क्या कूटनीति से निकलेगा समाधान?
हालांकि सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन अमेरिका ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाता है तो बातचीत की संभावना बनी रह सकती है।
वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
Middle East Crisis पर दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां, तेल टैंकरों पर हमले और लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
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