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Indian Stock Market Crash: बिकवाली के दबाव में Sensex-Nifty, Banking और Pharma Shares हुए कमजोर

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भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में गुरुवार को निवेशकों के लिए कारोबार का दिन कुछ कमजोर रहा। Sensex करीब 450 अंक गिरकर 76,300 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट देखने को मिली। बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों में हुई भारी बिकवाली को अहम कारण माना जा रहा है।

शुरुआती कारोबार में ही बाजार में दबाव नजर आने लगा था। कई बड़े शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर पहुंचे शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा।

Banking Stocks में गिरावट से बाजार पर असर

आज के कारोबार में Banking Sector के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निजी और सरकारी बैंकों के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। बैंकिंग इंडेक्स में गिरावट ने बाजार की चाल को प्रभावित किया और सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव बढ़ा दिया।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली के कारण गिरावट आई है। हालांकि, मजबूत फंडामेंटल वाली बैंकिंग कंपनियों में लंबी अवधि के निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

Pharma Stocks भी दबाव में, निवेशकों ने की बिकवाली

बैंकिंग के साथ-साथ Pharma Sector के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हेल्थकेयर कंपनियों के कई शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। फार्मा स्टॉक्स में बिकवाली का असर सेक्टर इंडेक्स पर भी दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को सेक्टर आधारित रणनीति अपनानी चाहिए।

Share Market Down होने की वजह क्या रही?

शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

  • ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत
  • विदेशी निवेशकों की सतर्कता
  • ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली
  • बैंकिंग और फार्मा शेयरों में बिकवाली का दबाव

इन सभी कारणों ने मिलकर घरेलू बाजार की तेजी को कमजोर किया।

Investors के लिए क्या है सलाह?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि गिरावट के समय घबराने की जरूरत नहीं है। निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए और बिना रिसर्च के जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट अच्छे शेयरों को बेहतर कीमत पर खरीदने का मौका दे सकती है। हालांकि, निवेश का फैसला कंपनी की मजबूती और भविष्य की संभावनाओं को देखकर ही लेना चाहिए।

Sensex-Nifty Update: बाजार में उतार-चढ़ाव जारी

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। आने वाले सत्रों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, ग्लोबल मार्केट की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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ODI

ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Cyclone Arnab

Cyclone Arnab Alert: 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका, Odisha में स्कूल-कॉलेज बंद

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब (Cyclone Arnab) को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में चिंता बढ़ गई है। तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए दोनों राज्यों में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आंध्र प्रदेश में करीब 5.7 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, ओडिशा में राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की आशंका है। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह मानने को कहा गया है। Cyclone Arnab: 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका चक्रवात अर्नब के आगे बढ़ने के साथ ही मौसम विभाग इसकी दिशा और तीव्रता पर लगातार नजर रख रहा है। पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान के तट के करीब पहुंचने पर हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। कुछ जगहों पर हवा के झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। तूफान का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिल सकता है। इसके कारण कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा भी बना हुआ है। आंध्र प्रदेश में 5.7 लाख लोगों को निकालने की तैयारी चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने संभावित प्रभावित इलाकों में रहने वाले करीब 5.7 लाख लोगों की सुरक्षा के लिए योजना तैयार की है। प्रशासन की प्राथमिकता उन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है, जिनके घरों पर तेज हवाओं और बाढ़ का खतरा हो सकता है। राहत शिविरों की व्यवस्था, जरूरी सामान की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को बिजली, सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में जल्द कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि तूफान के तट तक पहुंचने से पहले ही संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित कर लिया जाए। Odisha में 60 ODRAF टीमें तैनात, 302 बचाव दल तैयार चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए ओडिशा सरकार ने भी राहत और बचाव कार्यों की तैयारी तेज कर दी है। राज्य में 60 ODRAF टीमों, 17 NDRF टीमों और अग्निशमन विभाग की 225 टीमों सहित कुल 302 बचाव दलों को तैयार रखा गया है। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, जलभराव वाले इलाकों में मदद करने और आपात स्थिति में राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने अस्पतालों को जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल-कॉलेज बंद चक्रवात की आशंका के चलते ओडिशा के पांच जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र 28 और 29 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया गया है। इन जिलों में गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी शामिल हैं। अन्य जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला स्थानीय मौसम की स्थिति और प्रशासन के निर्देशों के आधार पर किया जा सकता है। इसके अलावा, संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने और मछुआरों को समुद्र से दूर रखने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट चक्रवात अर्नब के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में पानी भरने, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। तेज हवाओं के चलते कच्चे मकानों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है। इसलिए प्रशासन लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है। किसानों को भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों और कृषि उपकरणों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। Cyclone Arnab Safety Tips: लोगों को क्या करना चाहिए? चक्रवात के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। Cyclone Arnab Latest Update: प्रशासन अलर्ट, लोगों की सुरक्षा पर जोर चक्रवात अर्नब को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैयारियां जारी हैं। आंध्र प्रदेश में संभावित प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई है, जबकि ओडिशा में बचाव दलों को तैनात रखा गया है। पांच जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला भी इसी तैयारी का हिस्सा है। अब सभी की नजर मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान पर है। तूफान की दिशा और ताकत में बदलाव के साथ चेतावनियां भी बदल सकती हैं। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

खरगे के बयान पर भोपाल में भाजपा का प्रदर्शन, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का करेगी घेराव

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर दिए गए बयान के विरोध में भाजपा सोमवार को भोपाल में प्रदर्शन करेगी। भाजपा नेता और कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे। यहां से पैदल मार्च निकालकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे और उसका घेराव करेंगे। यह विवाद रविवार को पटना में खरगे के भाषण के दौरान दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। एक व्यक्ति की टिप्पणी का जवाब देते हुए खरगे ने कहा था, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ इसके बाद मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछे सवाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगे के बयान की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या उन्होंने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर इस तरह की टिप्पणी की है। शिवराज ने कहा कि यदि ऐसा नहीं है, तो क्या कांग्रेस खरगे से इस्तीफा लेगी? उन्होंने कहा कि खरगे जैसे वरिष्ठ नेता से सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। शिवराज के मुताबिक, भारतीय संस्कृति और परंपरा में दिवंगत आत्मा का सम्मान किया जाता है और राजनीतिक विरोध के दौरान भी भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। शिवराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। हेमंत खंडेलवाल बोले- राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पिता को लेकर इस तरह की बात करना राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है। खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि खरगे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि खरगे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वयं करते हैं या गांधी परिवार के इशारे पर ऐसा करते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात कही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खरगे की टिप्पणी की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन भाषा और व्यवहार में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राजनीतिक विरोध के दौरान भी गरिमा और शालीनता का ध्यान रखा जाना चाहिए। रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर साधा निशाना भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल अब पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि खरगे लंबे समय से राजनीति में हैं और संसदीय परंपराओं से परिचित हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं के प्रति अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप भी लगाया। विश्वास सारंग बोले- लोकतंत्र में ऐसी भाषा का स्थान नहीं मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने खरगे के बयान को अक्षम्य बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता लगातार राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं। भाजपा ने इस बयान के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया है। वहीं, इस पूरे विवाद के केंद्र में राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का मुद्दा है।

इंदौर में पानी बर्बाद करने वालों पर होगी चालानी कार्रवाई, पहले समझाइश फिर बनेगा वीडियो

इंदौर। शहर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम अब जागरूकता के साथ सख्ती भी करेगा। घरों में जरूरत से ज्यादा पानी बहाने और पीने योग्य पानी का अनावश्यक इस्तेमाल करने वालों को पहले दो-तीन बार समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी यदि पानी की बर्बादी जारी रही, तो उसका वीडियो बनाकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। इसी अभियान के तहत महापौर पुष्यमित्र भार्गव सोमवार को शहर की विभिन्न कॉलोनियों और गलियों में पहुंचे। उन्होंने रहवासियों से बातचीत कर पानी का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करने और इसे बर्बाद नहीं करने की अपील की। पार्श्वनाथ, विनय नगर और जैन कॉलोनी में पहुंचे महापौर महापौर ने पार्श्वनाथ, विनय नगर, जैन कॉलोनी और लोकमान्य नगर में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में पानी की बर्बादी का नुकसान आखिरकार शहरवासियों को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हर घर में पानी का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया जाए, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके। पहले दो-तीन बार समझाइश, फिर कटेगा चालान महापौर ने अभियान में जुटी एनजीओ की टीम को निर्देश दिए कि पानी बर्बाद करते पाए जाने वाले लोगों को शुरुआत में दो-तीन बार समझाया जाए। इसके बावजूद यदि उनकी आदत में सुधार नहीं होता है, तो पानी की बर्बादी का वीडियो बनाकर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाए। नगर निगम का उद्देश्य लोगों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करना और पानी की अनावश्यक खपत पर रोक लगाना है। RO के वेस्ट पानी को फेंकने के बजाय करें इस्तेमाल महापौर ने घरों में आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी का दोबारा उपयोग करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि इस पानी को फेंकने के बजाय पौधों में डालने, गाड़ी धोने और कपड़े धोने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पीने योग्य पानी की अनावश्यक खपत कम होगी और उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। दीपावली तक चलेगा निगरानी अभियान महापौर ने एनजीओ की टीम को दीपावली तक अभियान का चार्ट तैयार कर नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्थानों पर हरी घास दिखाई दे रही है, वहां भी दो-दो दिन की समय-सीमा तय कर घास की कटाई कराने को कहा गया है। इस दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’, पार्षद योगेश गेदर और नगर निगम के जोनल अधिकारी मौजूद रहे। नगर निगम का फोकस अब घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी की बर्बादी रोकने के साथ लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर है।
Lula da Silva

Brazil Election Result: Lula da Silva चौथी बार बने राष्ट्रपति, Flavio Bolsonaro को हराया

ब्राजील (Brazil) की राजनीति में लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ( Lula da Silva) ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रिकॉर्ड बनाया है। इस चुनाव में उनका मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो से था। फ्लावियो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक माना जाता है। Lula da Silva की जीत सिर्फ ब्राजील की राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत समेत कई देशों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनके नए कार्यकाल में व्यापार, कूटनीति और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है। Brazil Election 2026: लूला और फ्लावियो के बीच कड़ा मुकाबला ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में लूला दा सिल्वा को 51.79% वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। पहले चरण में फ्लावियो ने लूला को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन दूसरे चरण में लूला ने बढ़त बनाते हुए जीत हासिल की। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि ब्राजील के मतदाता दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बीच बंटे हुए हैं। लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं। इसके बाद 2023 में उन्होंने तीसरी बार सत्ता संभाली थी। अब उनकी नई जीत ने ब्राजील की राजनीति में उनके लंबे अनुभव और मजबूत जनाधार को फिर चर्चा में ला दिया है। कौन हैं Flavio Bolsonaro, जिन्हें मिली हार? फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। वह ब्राजील की दक्षिणपंथी राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक सोच और डोनाल्ड ट्रम्प के प्रति समर्थन ने इस चुनाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रखा। फ्लावियो ने अपने चुनाव प्रचार में अपराध पर सख्ती, आर्थिक सुधार और अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया। वहीं, लूला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं, गरीब परिवारों की मदद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की बात कही। महंगाई, रोजगार, आम लोगों के खर्च और सुरक्षा जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले में अहम रहे। हालांकि, फ्लावियो की हार को केवल ट्रम्प के समर्थन से जोड़ना सही नहीं होगा। ब्राजील के मतदाताओं ने कई घरेलू मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान किया। Trump और Brazil के रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर? लूला दा सिल्वा की विदेश नीति में ब्राजील की स्वतंत्र भूमिका को खास महत्व दिया जाता है। वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने देश के हितों को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं। अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापार, टैरिफ और कूटनीतिक मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में लूला की जीत के बाद दोनों देशों के रिश्तों पर नजर बनी रहेगी। हालांकि, अमेरिका ब्राजील का महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। इसलिए आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं भी बनी रहेंगी। लूला के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने देश के हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संतुलन बनाए रखें। India-Brazil Relations: भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत? भारत और ब्राजील के रिश्ते व्यापार, ऊर्जा, कृषि, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं। दोनों देश BRICS के सदस्य भी हैं, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। लूला की वापसी से भारत-ब्राजील संबंधों में सहयोग के नए अवसर तलाशने की संभावना बनी रह सकती है। भारत के लिए तीन मुद्दे खास रहेंगे: हालांकि, लूला की जीत से भारत को तुरंत कोई बड़ा आर्थिक फायदा होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर आने वाले समझौतों और दोनों देशों की नीतियों पर निर्भर करेगा। राष्ट्रपति बनने के बाद Lula के सामने क्या होंगी चुनौतियां? चुनाव जीतना लूला के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब उनके सामने जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। महंगाई, घरेलू खर्च, अपराध और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लोगों को ठोस नतीजों की उम्मीद रहेगी। इसके अलावा, चुनाव में फ्लावियो को मिले लगभग आधे वोट बताते हैं कि विपक्ष की राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लूला को सरकार चलाने के दौरान अलग-अलग विचारधाराओं के बीच संतुलन बनाना होगा। उनकी नीतियों का असर केवल ब्राजील की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक व्यापार और विकासशील देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर भी उनकी सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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