राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नई पीढ़ी, नेतृत्व और समाज की बदलती सोच को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को सिर्फ आदेश देने से बात नहीं बनेगी। अगर समाज को मजबूत बनाना है तो नई पीढ़ी के साथ संवाद करना होगा, उनकी बात सुननी होगी और उन्हें समझना होगा।
‘युवाओं को समझना होगा, सिर्फ निर्देश देना काफी नहीं’
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि समय बदल रहा है और उसके साथ लोगों की सोच भी बदल रही है। ऐसे में पुरानी कार्यशैली से आगे बढ़ने के बजाय युवाओं के साथ भरोसे का रिश्ता बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है, अपनी राय रखती है और उसे सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। यही किसी भी मजबूत समाज और संगठन की पहचान होती है।
‘शक्ति के बल पर सबके मालिक नहीं बन सकते’
उन्होंने शक्ति और अहंकार पर भी स्पष्ट टिप्पणी की। भागवत ने कहा, “यह नहीं हो सकता कि हम मनमानी करें और केवल शक्ति के बल पर सबके मालिक बन जाएं।” उनके अनुसार किसी भी व्यवस्था की सफलता दूसरों पर नियंत्रण स्थापित करने में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने में है।
नेतृत्व का मतलब आदेश देना नहीं, लोगों को साथ लेकर चलना
RSS प्रमुख ने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल निर्देश देना नहीं होता। एक अच्छा नेतृत्व वही है जो लोगों की बात सुने, उन्हें साथ लेकर चले और हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर दे। उन्होंने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि उनके विचारों और ऊर्जा का सही उपयोग तभी होगा, जब उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भी उचित स्थान मिलेगा।
मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद नहीं रुकना चाहिए
भागवत ने समाज में बढ़ती वैचारिक असहमतियों का जिक्र करते हुए कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद बंद नहीं होना चाहिए। जब बातचीत रुक जाती है, तब गलतफहमियां बढ़ती हैं और समाज में दूरी पैदा होती है। इसलिए हर पीढ़ी और हर वर्ग के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
समाज और परिवार की मजबूती का आधार है विश्वास
उन्होंने यह भी कहा कि परिवार, समाज और संस्थाओं की मजबूती आपसी विश्वास, सहयोग और सम्मान से आती है। यदि नई पीढ़ी को केवल निर्देश दिए जाएंगे और उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तो उनके साथ जुड़ाव कमजोर पड़ सकता है। इसलिए संवाद और सहभागिता ही आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
क्यों अहम है मोहन भागवत का यह बयान?
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में युवाओं की भूमिका, नेतृत्व की शैली और सामाजिक समरसता पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका संदेश केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है जो आने वाली पीढ़ी के साथ बेहतर संबंध और मजबूत भविष्य बनाना चाहता है।
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