मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब सीधे Global Oil Supply पर दिखाई देने लगा है। ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी एक अहम East-West Oil Pipeline को बंद कर दिया है। यह वही पाइपलाइन है, जिसके जरिए रोजाना करीब 50 लाख बैरल तक कच्चा तेल Red Sea के रास्ते भेजा जा रहा था।
सऊदी का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब Strait of Hormuz को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में एक और बड़े Oil Route का प्रभावित होना दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
ड्रोन हमले के बाद लिया गया फैसला
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के रियाद और मदीना क्षेत्र में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। घटना के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पाइपलाइन का ऑपरेशन रोक दिया गया।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। घटना के बाद इराक की ओर से भी कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या है East-West Oil Pipeline?
सऊदी अरब की East-West Pipeline देश के तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को Red Sea के किनारे स्थित Yanbu तक पहुंचाती है।
इस रूट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेल को Hormuz Strait से होकर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी समुद्री रास्ते में परेशानी होने पर यह पाइपलाइन Saudi Arabia के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर काम करती है।
हाल में इससे करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल प्रतिदिन भेजे जाने की बात सामने आई है।
Hormuz के बाद Pipeline बंद होना क्यों अहम?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण Oil Shipping Routes में से एक है। यहां तनाव बढ़ने पर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की Supply को लेकर चिंता रहती है।
ऐसे समय में सऊदी की East-West Pipeline का बंद होना अलग तरह की चुनौती पैदा करता है। जिस रास्ते को Hormuz के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, उस पर भी अब सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है।
Red Sea Route पर भी दबाव
मिडिल ईस्ट में संकट सिर्फ Hormuz तक सीमित नहीं है। Red Sea और Bab el-Mandeb क्षेत्र में भी लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।
इन इलाकों में तनाव बढ़ने से कई बार Shipping Companies को अपने रास्ते बदलने पड़े हैं। अब Saudi Oil Infrastructure पर हुए ड्रोन हमले ने Energy Supply को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
Oil Prices पर कितना असर पड़ेगा?
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े Oil Producers में शामिल है। इसलिए वहां तेल की Supply या Infrastructure में किसी बड़ी रुकावट का असर International Market पर पड़ सकता है।
अगर पाइपलाइन जल्द दोबारा शुरू हो जाती है, तो बाजार में दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन अगर बंदी लंबी खिंचती है और Hormuz तथा Red Sea में भी स्थिति सामान्य नहीं होती, तो Crude Oil Prices में तेजी का खतरा बढ़ सकता है।
महंगे कच्चे तेल का असर आगे चलकर Transport और Manufacturing से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक दिखाई दे सकता है।
दुनिया की नजर अब Saudi Arabia पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब East-West Pipeline को कब तक बंद रखता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में Middle East में ड्रोन हमले और Shipping Security की स्थिति किस दिशा में जाती है।
एक तरफ Hormuz में तनाव और दूसरी तरफ Saudi Oil Pipeline पर हमला—इन घटनाओं ने Global Energy Market की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में तेल की Supply और कीमतों पर इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!


