जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और आस्था देखने को मिली। चातुर्मास के शुभ अवसर पर आयोजित कलश स्थापना की बोली में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी श्रद्धा का अनूठा परिचय दिया।
कलश स्थापना का लाभ प्राप्त करने के लिए आयोजित बोली ने नया इतिहास रच दिया। बोली की राशि बढ़ते-बढ़ते 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसे जैन समाज में गुरु भक्ति, समर्पण और धार्मिक आस्था का अभूतपूर्व उदाहरण माना जा रहा है। बोली के दौरान लगातार बढ़ती राशि ने आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया।
धार्मिक आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक बोली नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, गुरु के प्रति समर्पण और धर्म के प्रति विश्वास का प्रतीक है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा-अर्चना, तप, स्वाध्याय तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
जैन धर्म में चातुर्मास को सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु धर्म साधना, सेवा, तप और धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। मुनिश्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस वर्ष के चातुर्मास में भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।
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