नेपाल के सुनसरी जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए भारतीय सीमा से सटे सुनसरी और सिराहा जिलों के कई इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
डीजे की आवाज को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, रविवार को कांवड़िए कोसी बैराज से जल लेकर लौट रहे थे। इस दौरान डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया।

पुलिस की फायरिंग, दो लोगों की मौत
स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस पर भी भीड़ ने पथराव किया, जिसमें एक इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने पहले भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की, लेकिन हिंसा नहीं थमी। इसके बाद रात करीब 10:45 बजे पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
फायरिंग में ओम प्रकाश मेहता की मौके पर मौत हो गई, जबकि घायल जयप्रकाश मेहता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस बल और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की टीमें तैनात की गई हैं।
तीन साल पहले दी गई थी चेतावनी
नेपाल के तराई और मधेश क्षेत्र में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने तीन वर्ष पहले ही सरकार को आगाह किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट में धर्म और जातीय आधार पर लोगों को बांटने की संगठित कोशिशों की चेतावनी दी थी।
रिपोर्ट में तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन अधिकारियों के अनुसार उस समय इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि नेपाल को भारत के मणिपुर सहित दक्षिण एशिया के अन्य देशों में हुई सांप्रदायिक घटनाओं से सीख लेकर समय रहते कदम उठाने चाहिए।
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