राजधानी दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 इस बार कई मायनों में खास है। करीब एक दशक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं की मौजूदगी ने Summit को लेकर दुनियाभर की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
BRICS अब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद इसका आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव काफी बढ़ा है। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाली बैठकों और नेताओं की बातचीत पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की भी नजर बनी हुई है।
मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मौजूदगी क्यों खास?
BRICS Summit में प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की मौजूदगी को सबसे अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच पुराने रणनीतिक रिश्ते हैं, जबकि भारत और चीन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं।
ऐसे समय में तीनों नेताओं का एक ही मंच पर आना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। खासकर भारत के लिए यह मौका इसलिए भी अहम है क्योंकि नई दिल्ली रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
Putin के साथ Modi की अहम Meeting
BRICS Summit से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के पुराने संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।
रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा और रक्षा साझेदारों में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को लेकर होने वाली हर बातचीत का असर व्यापक स्तर पर देखा जाता है।
Xi Jinping की India Visit पर भी नजर
शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी Summit का बड़ा आकर्षण है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बाद रिश्तों में तनाव रहा है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों ने संवाद बढ़ाने की कोशिश की है।
ऐसे में मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत को लेकर खास उत्सुकता है। दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।
BRICS की बढ़ती Economic Power
BRICS के विस्तार के बाद इसकी आर्थिक ताकत में काफी इजाफा हुआ है। मौजूदा सदस्य देशों में Brazil, Russia, India, China, South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran, UAE, Saudi Arabia और Indonesia शामिल हैं।
PPP यानी Purchasing Power Parity के आधार पर BRICS देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी से ज्यादा मानी जाती है। बड़ी आबादी, प्राकृतिक संसाधन और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं इस समूह को Global Economy में महत्वपूर्ण स्थान देती हैं।
हालांकि BRICS की अर्थव्यवस्था को सीधे अमेरिका से “तीन गुना बड़ी” बताना सही नहीं होगा, क्योंकि GDP की गणना के अलग-अलग तरीकों से आंकड़े काफी बदल सकते हैं। PPP के आधार पर BRICS का वजन जरूर काफी बड़ा है।
Dollar के विकल्प पर बढ़ी चर्चा
BRICS देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और Cross-Border Payment System को मजबूत करने पर लगातार चर्चा होती रही है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को आसान बनाना और अलग-अलग देशों के बीच भुगतान के विकल्प बढ़ाना है।
भारत का UPI भी इस दिशा में दुनिया के सामने एक सफल Digital Payment Model के तौर पर देखा जाता है। हालांकि BRICS की तरफ से किसी साझा “BRICS Currency” को लागू करने का फैसला फिलहाल अलग बात है और इसे मौजूदा स्थानीय मुद्रा सहयोग से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
20 से ज्यादा देशों की भागीदारी ने बढ़ाया Summit का दायरा
इस Summit में BRICS के सदस्य देशों के अलावा कई Partner Countries और Global South से जुड़े देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है। इसी वजह से सम्मेलन का दायरा केवल 11 सदस्य देशों तक सीमित नहीं है।
विकासशील देशों के बीच व्यापार, निवेश, Technology और आर्थिक सहयोग बढ़ाना BRICS के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। भारत इस मंच के जरिए Global South की आवाज को मजबूत करने पर भी जोर देता रहा है।
Ukraine War और West Asia भी अहम मुद्दे
दुनिया में चल रहे युद्ध और बढ़ते geopolitical tensions का असर BRICS Summit पर भी दिखाई दे रहा है। Ukraine War और West Asia की स्थिति जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।
भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है। ऐसे में Summit के दौरान वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के लिए BRICS क्यों जरूरी?
भारत के लिए BRICS का महत्व सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यह देश के लिए Trade, Investment, Energy, Technology और Global Diplomacy के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मंच है।
भारत एक तरफ अमेरिका और यूरोप के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रूस, चीन और Global South के देशों के साथ भी सक्रिय संपर्क बनाए हुए है। BRICS इस संतुलित विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है।
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