बिलासपुर में रेलवे के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को वेतन और मेडिकल कार्ड से जुड़ी जानकारी लेना महंगा पड़ गया। साइबर ठग ने फोन कर पहले उनसे नौकरी और पेंशन से संबंधित जानकारी हासिल की। इसके बाद एक प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराया।
ऐप इंस्टॉल करने के कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से लगातार रकम कटने लगी। जब तक पीड़ित कुछ समझ पाते, खाते से करीब 90 हजार रुपए निकाले जा चुके थे। उन्होंने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाता ब्लॉक कराया और तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
फोन पर ली वेतन और मेडिकल कार्ड की जानकारी
घटना 11 सितंबर की सुबह की बताई जा रही है। रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी जी. भीमाराव के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया। कॉल करने वाले ने उनसे पूछा कि उनका वेतन बन रहा है या नहीं और मेडिकल कार्ड तैयार हुआ है या नहीं।
बातचीत के दौरान आरोपी ने खुद को संबंधित प्रक्रिया से जुड़ा बताकर भीमाराव को एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। पीड़ित ने आरोपी के बताए तरीके के अनुसार ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया।
ऐप डाउनलोड करते ही शुरू हुए ट्रांजेक्शन
ऐप डाउनलोड करने के कुछ समय बाद भीमाराव के बैंक खाते से लगातार रकम कटने लगी। खाते की जांच करने पर उन्हें पता चला कि करीब 90 हजार रुपए निकाले जा चुके हैं।
घटना का पता चलते ही उन्होंने बैंक से संपर्क किया और अपना खाता ब्लॉक करवाया। इसके बाद तोरवा थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
साइबर ठगी का नया तरीका: पहले भरोसा, फिर ऐप
साइबर ठग लोगों को विश्वास में लेने के लिए अक्सर खुद को बैंक, रेलवे, सरकारी विभाग, बीमा कंपनी या किसी अन्य संस्थान का कर्मचारी बताते हैं।
ठग पहले पीड़ित से ऐसी सामान्य जानकारी हासिल करते हैं, जिससे उन्हें वास्तविक कर्मचारी होने का भरोसा हो जाए। इसके बाद वे KYC, पेंशन, वेतन, मेडिकल कार्ड या किसी अन्य प्रक्रिया को पूरा कराने के नाम पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करवाते हैं।
अनजान ऐप के जरिए ठग मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड करना भारी पड़ सकता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- फोन कॉल, WhatsApp या SMS के जरिए मिले किसी अनजान APK या ऐप को इंस्टॉल न करें।
- OTP, UPI PIN, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer या अन्य रिमोट एक्सेस और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप का इस्तेमाल न करें।
- वेतन, पेंशन, मेडिकल कार्ड, KYC या बैंक अपडेट के नाम पर भेजे गए अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- खाते से कोई अनधिकृत ट्रांजेक्शन दिखाई दे तो तुरंत बैंक से संपर्क कर कार्ड या खाते को सुरक्षित करवाएं।
- साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें। शिकायत में देरी होने से रकम वापस मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है।


