जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका बुधवार को खारिज कर दी। मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित अतिरिक्त खनन से जुड़ा है।
कंपनी ने कलेक्टर जबलपुर की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस, जांच समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि मामला अभी कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है और कंपनी की अंतिम देयता अभी तय नहीं हुई है।
दो खदानों के लिए करोड़ों रुपए की वसूली प्रस्तावित
राज्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर कलेक्टर ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
हाईकोर्ट के आदेश में उल्लेखित जानकारी के अनुसार:
- टिकरिया खदान: ₹1,13,81,94,280 की वसूली प्रस्तावित।
- प्रतापपुर खदान: ₹1,20,69,41,910 की वसूली प्रस्तावित।
मामले में अतिरिक्त खनन से संबंधित देयता और वसूली की प्रक्रिया को लेकर कंपनी ने न्यायालय का रुख किया था।
हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम देयता अभी तय नहीं हुई
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रकरण अभी कारण बताओ नोटिस के चरण में है। कलेक्टर ने कंपनी की अंतिम देयता निर्धारित नहीं की है।
कोर्ट के अनुसार, इस स्तर पर हाईकोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता। कंपनी को अपनी आपत्तियां कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
जांच रिपोर्ट में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि का उल्लेख
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जांच समिति की रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में संबंधित कंपनियों से ₹4,43,04,86,890 यानी करीब ₹443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपए और उसके अनुसार GST की राशि जमा कराने को उचित बताया गया था।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट अपने आप में अंतिम रिकवरी आदेश नहीं है। यह रिपोर्ट कलेक्टर के लिए बाध्यकारी भी नहीं है।
कलेक्टर को कंपनी की आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र और कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।
कलेक्टर को चार महीने में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिए कि वह कंपनी की आपत्तियों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए नियमानुसार निर्णय लें।
कोर्ट ने कार्यवाही शीघ्र पूरी करने की अपेक्षा जताई और कहा कि प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के बाद यथासंभव चार महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।
कंपनी ने जांच समिति और नोटिस को दी थी चुनौती
याचिकाकर्ता कंपनी ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी।
कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि:
- जांच समिति का गठन वैधानिक अधिकार के बिना किया गया।
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ।
- संबंधित प्रकरण में कलेक्टर के क्षेत्राधिकार का प्रश्न उठता है।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कंपनी को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए कहा।
शिकायतकर्ता ने पारदर्शी जांच की मांग की
मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि और उस पर GST का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने फिलहाल कंपनी की वास्तविक देयता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। संबंधित पक्षों को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
संजय पाठक से जुड़ी कंपनी का मामला
आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी के रूप में बताया जा रहा है। कंपनी ने अतिरिक्त खनन से संबंधित वसूली नोटिस को कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की आगे की कार्यवाही जबलपुर कलेक्टर के समक्ष होगी। कलेक्टर को सभी आपत्तियों और रिकॉर्ड पर विचार कर कानून के अनुसार निर्णय लेना है।
नोट: मामले में वसूली की अलग-अलग राशियों का उल्लेख हुआ है। अंतिम देयता और वसूली की राशि कलेक्टर के अंतिम, कारणयुक्त आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।



