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खरगे के बयान पर भोपाल में भाजपा का प्रदर्शन, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का करेगी घेराव

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भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर दिए गए बयान के विरोध में भाजपा सोमवार को भोपाल में प्रदर्शन करेगी। भाजपा नेता और कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे। यहां से पैदल मार्च निकालकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे और उसका घेराव करेंगे।

यह विवाद रविवार को पटना में खरगे के भाषण के दौरान दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। एक व्यक्ति की टिप्पणी का जवाब देते हुए खरगे ने कहा था, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ इसके बाद मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा।

शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछे सवाल

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगे के बयान की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या उन्होंने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर इस तरह की टिप्पणी की है। शिवराज ने कहा कि यदि ऐसा नहीं है, तो क्या कांग्रेस खरगे से इस्तीफा लेगी?

उन्होंने कहा कि खरगे जैसे वरिष्ठ नेता से सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। शिवराज के मुताबिक, भारतीय संस्कृति और परंपरा में दिवंगत आत्मा का सम्मान किया जाता है और राजनीतिक विरोध के दौरान भी भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

शिवराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की।

हेमंत खंडेलवाल बोले- राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पिता को लेकर इस तरह की बात करना राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है।

खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि खरगे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि खरगे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वयं करते हैं या गांधी परिवार के इशारे पर ऐसा करते हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात कही

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खरगे की टिप्पणी की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन भाषा और व्यवहार में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राजनीतिक विरोध के दौरान भी गरिमा और शालीनता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल अब पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कर रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि खरगे लंबे समय से राजनीति में हैं और संसदीय परंपराओं से परिचित हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं के प्रति अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप भी लगाया।

विश्वास सारंग बोले- लोकतंत्र में ऐसी भाषा का स्थान नहीं

मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।

सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने खरगे के बयान को अक्षम्य बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता लगातार राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं।

भाजपा ने इस बयान के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया है। वहीं, इस पूरे विवाद के केंद्र में राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का मुद्दा है।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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Cyclone Arnab

Cyclone Arnab Alert: 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका, Odisha में स्कूल-कॉलेज बंद

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब (Cyclone Arnab) को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में चिंता बढ़ गई है। तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए दोनों राज्यों में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आंध्र प्रदेश में करीब 5.7 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, ओडिशा में राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की आशंका है। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह मानने को कहा गया है। Cyclone Arnab: 28 अक्टूबर को तट से टकराने की आशंका चक्रवात अर्नब के आगे बढ़ने के साथ ही मौसम विभाग इसकी दिशा और तीव्रता पर लगातार नजर रख रहा है। पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान के तट के करीब पहुंचने पर हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। कुछ जगहों पर हवा के झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। तूफान का सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिल सकता है। इसके कारण कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा भी बना हुआ है। आंध्र प्रदेश में 5.7 लाख लोगों को निकालने की तैयारी चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने संभावित प्रभावित इलाकों में रहने वाले करीब 5.7 लाख लोगों की सुरक्षा के लिए योजना तैयार की है। प्रशासन की प्राथमिकता उन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है, जिनके घरों पर तेज हवाओं और बाढ़ का खतरा हो सकता है। राहत शिविरों की व्यवस्था, जरूरी सामान की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को बिजली, सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में जल्द कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि तूफान के तट तक पहुंचने से पहले ही संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित कर लिया जाए। Odisha में 60 ODRAF टीमें तैनात, 302 बचाव दल तैयार चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए ओडिशा सरकार ने भी राहत और बचाव कार्यों की तैयारी तेज कर दी है। राज्य में 60 ODRAF टीमों, 17 NDRF टीमों और अग्निशमन विभाग की 225 टीमों सहित कुल 302 बचाव दलों को तैयार रखा गया है। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, जलभराव वाले इलाकों में मदद करने और आपात स्थिति में राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने अस्पतालों को जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल-कॉलेज बंद चक्रवात की आशंका के चलते ओडिशा के पांच जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र 28 और 29 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया गया है। इन जिलों में गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी शामिल हैं। अन्य जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला स्थानीय मौसम की स्थिति और प्रशासन के निर्देशों के आधार पर किया जा सकता है। इसके अलावा, संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने और मछुआरों को समुद्र से दूर रखने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट चक्रवात अर्नब के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में पानी भरने, पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। तेज हवाओं के चलते कच्चे मकानों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है। इसलिए प्रशासन लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है। किसानों को भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों और कृषि उपकरणों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। Cyclone Arnab Safety Tips: लोगों को क्या करना चाहिए? चक्रवात के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। Cyclone Arnab Latest Update: प्रशासन अलर्ट, लोगों की सुरक्षा पर जोर चक्रवात अर्नब को लेकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैयारियां जारी हैं। आंध्र प्रदेश में संभावित प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई है, जबकि ओडिशा में बचाव दलों को तैनात रखा गया है। पांच जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला भी इसी तैयारी का हिस्सा है। अब सभी की नजर मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान पर है। तूफान की दिशा और ताकत में बदलाव के साथ चेतावनियां भी बदल सकती हैं। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

खरगे के बयान पर भोपाल में भाजपा का प्रदर्शन, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का करेगी घेराव

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर दिए गए बयान के विरोध में भाजपा सोमवार को भोपाल में प्रदर्शन करेगी। भाजपा नेता और कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे। यहां से पैदल मार्च निकालकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे और उसका घेराव करेंगे। यह विवाद रविवार को पटना में खरगे के भाषण के दौरान दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। एक व्यक्ति की टिप्पणी का जवाब देते हुए खरगे ने कहा था, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ इसके बाद मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछे सवाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगे के बयान की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या उन्होंने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर इस तरह की टिप्पणी की है। शिवराज ने कहा कि यदि ऐसा नहीं है, तो क्या कांग्रेस खरगे से इस्तीफा लेगी? उन्होंने कहा कि खरगे जैसे वरिष्ठ नेता से सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। शिवराज के मुताबिक, भारतीय संस्कृति और परंपरा में दिवंगत आत्मा का सम्मान किया जाता है और राजनीतिक विरोध के दौरान भी भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। शिवराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। हेमंत खंडेलवाल बोले- राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पिता को लेकर इस तरह की बात करना राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है। खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि खरगे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि खरगे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वयं करते हैं या गांधी परिवार के इशारे पर ऐसा करते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात कही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खरगे की टिप्पणी की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन भाषा और व्यवहार में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राजनीतिक विरोध के दौरान भी गरिमा और शालीनता का ध्यान रखा जाना चाहिए। रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर साधा निशाना भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल अब पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि खरगे लंबे समय से राजनीति में हैं और संसदीय परंपराओं से परिचित हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं के प्रति अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप भी लगाया। विश्वास सारंग बोले- लोकतंत्र में ऐसी भाषा का स्थान नहीं मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने खरगे के बयान को अक्षम्य बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता लगातार राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं। भाजपा ने इस बयान के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया है। वहीं, इस पूरे विवाद के केंद्र में राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का मुद्दा है।

इंदौर में पानी बर्बाद करने वालों पर होगी चालानी कार्रवाई, पहले समझाइश फिर बनेगा वीडियो

इंदौर। शहर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम अब जागरूकता के साथ सख्ती भी करेगा। घरों में जरूरत से ज्यादा पानी बहाने और पीने योग्य पानी का अनावश्यक इस्तेमाल करने वालों को पहले दो-तीन बार समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी यदि पानी की बर्बादी जारी रही, तो उसका वीडियो बनाकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। इसी अभियान के तहत महापौर पुष्यमित्र भार्गव सोमवार को शहर की विभिन्न कॉलोनियों और गलियों में पहुंचे। उन्होंने रहवासियों से बातचीत कर पानी का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करने और इसे बर्बाद नहीं करने की अपील की। पार्श्वनाथ, विनय नगर और जैन कॉलोनी में पहुंचे महापौर महापौर ने पार्श्वनाथ, विनय नगर, जैन कॉलोनी और लोकमान्य नगर में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में पानी की बर्बादी का नुकसान आखिरकार शहरवासियों को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हर घर में पानी का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया जाए, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति से बचा जा सके। पहले दो-तीन बार समझाइश, फिर कटेगा चालान महापौर ने अभियान में जुटी एनजीओ की टीम को निर्देश दिए कि पानी बर्बाद करते पाए जाने वाले लोगों को शुरुआत में दो-तीन बार समझाया जाए। इसके बावजूद यदि उनकी आदत में सुधार नहीं होता है, तो पानी की बर्बादी का वीडियो बनाकर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाए। नगर निगम का उद्देश्य लोगों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करना और पानी की अनावश्यक खपत पर रोक लगाना है। RO के वेस्ट पानी को फेंकने के बजाय करें इस्तेमाल महापौर ने घरों में आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी का दोबारा उपयोग करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि इस पानी को फेंकने के बजाय पौधों में डालने, गाड़ी धोने और कपड़े धोने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पीने योग्य पानी की अनावश्यक खपत कम होगी और उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। दीपावली तक चलेगा निगरानी अभियान महापौर ने एनजीओ की टीम को दीपावली तक अभियान का चार्ट तैयार कर नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्थानों पर हरी घास दिखाई दे रही है, वहां भी दो-दो दिन की समय-सीमा तय कर घास की कटाई कराने को कहा गया है। इस दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’, पार्षद योगेश गेदर और नगर निगम के जोनल अधिकारी मौजूद रहे। नगर निगम का फोकस अब घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी की बर्बादी रोकने के साथ लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर है।
Lula da Silva

Brazil Election Result: Lula da Silva चौथी बार बने राष्ट्रपति, Flavio Bolsonaro को हराया

ब्राजील (Brazil) की राजनीति में लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ( Lula da Silva) ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रिकॉर्ड बनाया है। इस चुनाव में उनका मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो से था। फ्लावियो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक माना जाता है। Lula da Silva की जीत सिर्फ ब्राजील की राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत समेत कई देशों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनके नए कार्यकाल में व्यापार, कूटनीति और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है। Brazil Election 2026: लूला और फ्लावियो के बीच कड़ा मुकाबला ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में लूला दा सिल्वा को 51.79% वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। पहले चरण में फ्लावियो ने लूला को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन दूसरे चरण में लूला ने बढ़त बनाते हुए जीत हासिल की। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि ब्राजील के मतदाता दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बीच बंटे हुए हैं। लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं। इसके बाद 2023 में उन्होंने तीसरी बार सत्ता संभाली थी। अब उनकी नई जीत ने ब्राजील की राजनीति में उनके लंबे अनुभव और मजबूत जनाधार को फिर चर्चा में ला दिया है। कौन हैं Flavio Bolsonaro, जिन्हें मिली हार? फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। वह ब्राजील की दक्षिणपंथी राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक सोच और डोनाल्ड ट्रम्प के प्रति समर्थन ने इस चुनाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रखा। फ्लावियो ने अपने चुनाव प्रचार में अपराध पर सख्ती, आर्थिक सुधार और अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया। वहीं, लूला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं, गरीब परिवारों की मदद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की बात कही। महंगाई, रोजगार, आम लोगों के खर्च और सुरक्षा जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले में अहम रहे। हालांकि, फ्लावियो की हार को केवल ट्रम्प के समर्थन से जोड़ना सही नहीं होगा। ब्राजील के मतदाताओं ने कई घरेलू मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान किया। Trump और Brazil के रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर? लूला दा सिल्वा की विदेश नीति में ब्राजील की स्वतंत्र भूमिका को खास महत्व दिया जाता है। वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने देश के हितों को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं। अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापार, टैरिफ और कूटनीतिक मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में लूला की जीत के बाद दोनों देशों के रिश्तों पर नजर बनी रहेगी। हालांकि, अमेरिका ब्राजील का महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। इसलिए आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं भी बनी रहेंगी। लूला के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने देश के हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संतुलन बनाए रखें। India-Brazil Relations: भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत? भारत और ब्राजील के रिश्ते व्यापार, ऊर्जा, कृषि, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं। दोनों देश BRICS के सदस्य भी हैं, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। लूला की वापसी से भारत-ब्राजील संबंधों में सहयोग के नए अवसर तलाशने की संभावना बनी रह सकती है। भारत के लिए तीन मुद्दे खास रहेंगे: हालांकि, लूला की जीत से भारत को तुरंत कोई बड़ा आर्थिक फायदा होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर आने वाले समझौतों और दोनों देशों की नीतियों पर निर्भर करेगा। राष्ट्रपति बनने के बाद Lula के सामने क्या होंगी चुनौतियां? चुनाव जीतना लूला के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब उनके सामने जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। महंगाई, घरेलू खर्च, अपराध और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर लोगों को ठोस नतीजों की उम्मीद रहेगी। इसके अलावा, चुनाव में फ्लावियो को मिले लगभग आधे वोट बताते हैं कि विपक्ष की राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लूला को सरकार चलाने के दौरान अलग-अलग विचारधाराओं के बीच संतुलन बनाना होगा। उनकी नीतियों का असर केवल ब्राजील की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक व्यापार और विकासशील देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर भी उनकी सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
OBC Reservation

OBC Reservation: UPSC के 958 उम्मीदवारों की ट्रेनिंग में देरी, केंद्र ने SC से मांगी राहत

OBC क्रीमीलेयर के नियमों को लेकर चल रही कानूनी उलझन का असर अब UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के चयनित उम्मीदवारों पर पड़ रहा है। परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवारों का सर्विस अलॉटमेंट और फाउंडेशन ट्रेनिंग अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्पष्ट निर्देश दे, ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि OBC उम्मीदवारों की क्रीमीलेयर स्थिति तय करने के लिए माता-पिता की आय और उनके पद को किस तरह देखा जाए। सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने पुराने और नए नियमों को लागू करने के तरीके पर स्पष्टीकरण मांगा है। 25 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को केंद्र की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। वहीं, 26 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस कानूनी विवाद से UPSC CSE 2025 बैच की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, सर्विस अलॉटमेंट और ट्रेनिंग शुरू होने की तारीख को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। OBC Creamy Layer विवाद क्या है? OBC Reservation के तहत नॉन-क्रीमीलेयर श्रेणी में आने वाले पात्र उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है। वहीं, निर्धारित मानदंडों के तहत क्रीमीलेयर में आने वाले उम्मीदवार इस लाभ के पात्र नहीं होते। विवाद इस बात को लेकर है कि क्रीमीलेयर तय करते समय माता-पिता की सैलरी को किस तरह शामिल किया जाए और उनकी नौकरी के पद तथा सेवा की श्रेणी का कितना महत्व हो। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को Union of India vs Rohith Nathan मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि OBC क्रीमीलेयर की पहचान केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं की जा सकती। माता-पिता के पद और उनकी सेवा की श्रेणी जैसे पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है। अदालत ने 8 सितंबर 1993 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन और 14 अक्टूबर 2004 के स्पष्टीकरण के बीच संबंध पर भी विचार किया। फैसले के अनुसार, 2004 के स्पष्टीकरण को 1993 के मूल नियमों से अलग करके लागू नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने Supreme Court से क्या मांग की? केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फैसले को लागू करने के तरीके पर स्पष्ट निर्देश मांगे थे। सरकार का अनुरोध है कि UPSC CSE 2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों का सर्विस अलॉटमेंट पहले लागू OBC क्रीमीलेयर मानदंडों के आधार पर पूरा करने की अनुमति दी जाए। केंद्र का कहना है कि परीक्षा का अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित हुआ था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसके पांच दिन बाद आया। उस समय सर्विस अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। सरकार के सामने चुनौती यह है कि अगर नए फैसले को बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के पिछली भर्तियों पर भी लागू किया जाता है, तो पहले से नियुक्त अधिकारियों की वरिष्ठता, कैडर और सेवा संबंधी मामलों पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कारण केंद्र ने अदालत से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि फैसले को पुरानी भर्तियों और पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं पर किस तरह लागू किया जाए। 958 उम्मीदवारों की IAS-IPS Training क्यों रुकी? UPSC सिविल सेवा परीक्षा के चयनित उम्मीदवारों का फाउंडेशन कोर्स आमतौर पर अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में शुरू होता है। इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को प्रशासन, संविधान, सरकारी नीतियों और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाती है। इस साल OBC क्रीमीलेयर विवाद के कारण 2025 बैच का सर्विस अलॉटमेंट पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से फाउंडेशन कोर्स भी निर्धारित समय पर शुरू नहीं हुआ। केंद्र सरकार के अनुसार, संबंधित विभाग और प्रशिक्षण संस्थान प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार हैं। लेकिन एक बार सर्विस अलॉटमेंट और कैडर तय होने के बाद उसमें बदलाव करना जटिल हो सकता है। इसलिए सरकार अदालत के निर्देश मिलने से पहले अंतिम निर्णय लेने से बच रही है। यह देरी उन उम्मीदवारों के लिए चिंता का विषय है, जिन्होंने लंबी चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सिविल सेवाओं में जगह बनाई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनिंग में देरी से इस बैच की वरिष्ठता, ग्रेडेशन या अन्य सेवा शर्तें प्रभावित नहीं होंगी। क्या पुराने अधिकारियों की नौकरी और Seniority पर असर पड़ेगा? इस मामले का असर केवल नए उम्मीदवारों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह चिंता भी रखी है कि फैसले को पिछली भर्तियों पर लागू करने से कई पुराने मामलों की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है। इसमें प्रमुख रूप से ये मुद्दे शामिल हैं: केंद्र का तर्क है कि यदि पुराने मामलों को दोबारा खोला जाता है, तो कई साल से सेवा कर रहे अधिकारियों की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि किन मामलों की समीक्षा होगी। इस पर अंतिम स्थिति अदालत के निर्देशों और सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों से स्पष्ट होगी। OBC Reservation Rules पर फैसले का क्या होगा असर? OBC क्रीमीलेयर का मुद्दा आरक्षण की पात्रता से जुड़ा है, इसलिए इस मामले का प्रभाव भविष्य की सरकारी भर्तियों पर भी पड़ सकता है। सरकार के सामने एक चुनौती ऐसे स्पष्ट मानदंड तैयार करने की है, जिनके आधार पर सरकारी कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी कंपनियों में कार्यरत माता-पिता के पदों तथा सेवा की स्थिति का आकलन किया जा सके। केंद्र ने यह भी चिंता जताई है कि यदि नियमों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की गई, तो समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों के साथ अलग व्यवहार होने और नए कानूनी विवाद पैदा होने की आशंका रहेगी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से मांगी गई स्पष्टता केवल 958 उम्मीदवारों के सर्विस अलॉटमेंट तक सीमित नहीं है। इसका संबंध OBC आरक्षण के नियमों को लागू करने और पहले से लिए गए फैसलों की स्थिति स्पष्ट करने से भी है। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को केंद्र की याचिका पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 26...

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