मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है।
यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान
मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है।
कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है।
NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी?
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है।

मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor), MPWPCL
पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।
इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience
MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है।
कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है।
महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा
ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं।
विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा।
MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद
NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है।
आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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