जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ ही दिनों बाद पार्टी के करीब 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर सामने आई है। नाराज विधायक सरकार के कामकाज और मंत्रियों के चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाया जाए और मंत्रिमंडल में भी बदलाव किया जाए।
श्रीनगर में हुई विधायकों की बैठक के बाद अब सभी की नजर पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर है। नाराज विधायक उनसे मुलाकात कर अपनी शिकायतें और मांगें रखने की तैयारी में हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है।
24 विधायकों ने मिलकर की बैठक, पार्टी नेतृत्व से नाराजगी
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि छह विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना समर्थन दिया।
बैठक में विधायकों ने पार्टी के अंदर फैसले लेने के तरीके और सरकार में उनकी भूमिका को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मंत्रियों और दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते समय वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की राय भी ली जानी चाहिए।
विधायकों का मानना है कि पार्टी के अंदर बातचीत और सामूहिक फैसलों को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। हालांकि, पार्टी की ओर से इसे बगावत मानने से इनकार किया गया है।
CM के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग
नाराज विधायकों की सबसे बड़ी मांग मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से हटाने की है। कुछ विधायकों का आरोप है कि सरकार और पार्टी से जुड़े फैसलों में कुछ लोगों का जरूरत से ज्यादा प्रभाव है।
इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। विधायकों के एक समूह ने पुराने मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मौका देने की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाया जाए।
- उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की भूमिका पर दोबारा विचार हो।
- मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका दिया जाए।
- पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की राय से फैसले लिए जाएं।
- सरकार के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए स्पष्ट योजना बनाई जाए।
27 अक्टूबर को हुआ था Cabinet Expansion
दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
नए मंत्रियों में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस फेरबदल के दौरान निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था। कैबिनेट विस्तार के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आईं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के चयन और पार्टी के भीतर सलाह-मशविरे की कमी को लेकर असंतोष बढ़ा है।
Mubarak Gul को महासचिव पद से हटाया गया
पार्टी के अंदर चल रही हलचल के बीच फारूक अब्दुल्ला ने एक संगठनात्मक बदलाव भी किया। उन्होंने वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को महासचिव पद से हटा दिया। उनकी जगह अली मोहम्मद सागर को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई।
मुबारक गुल नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह छह बार विधायक रह चुके हैं। कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं।
उनके समर्थकों ने भी उन्हें मंत्री बनाए जाने की मांग उठाई थी। ऐसे में महासचिव पद से हटाए जाने के फैसले को पार्टी के मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
Aga Ruhullah Mehdi ने भी पार्टी छोड़ने का किया ऐलान
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और मुश्किल श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी के बयान से बढ़ गई है। उन्होंने पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है।
रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार को और प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था।
उनके इस फैसले ने पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
National Conference ने बगावत की खबरों को नकारा
विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी में बगावत होने की बात को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विधायकों की बैठक को विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि संगठन के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होना सामान्य बात है। विधायक अपनी समस्याएं और सुझाव नेतृत्व के सामने रख सकते हैं।
इस तरह पार्टी के भीतर एक तरफ बदलाव की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ नेतृत्व इसे आंतरिक बातचीत का हिस्सा बता रहा है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में NC की स्थिति
जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। पार्टी ने कांग्रेस और अन्य समर्थक विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई है।
ऐसे में पार्टी के भीतर 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल सरकार के बहुमत को लेकर कोई आधिकारिक संकट सामने नहीं आया है।
अब Farooq Abdullah के फैसले पर टिकी नजरें
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही नाराजगी अब पार्टी नेतृत्व के लिए अहम मुद्दा बन गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई असंतोष की चर्चा, मुबारक गुल को पद से हटाए जाने और आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे के ऐलान ने राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया है।
अब देखना होगा कि फारूक अब्दुल्ला नाराज विधायकों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में दोबारा बदलाव करते हैं या नहीं। फिलहाल पार्टी के भीतर बातचीत और नेतृत्व के अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है।
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