Axiom-4 मिशन से वापसी के बाद बवाल में घिरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला – कांग्रेस नेता ने दे दिया जातीय तड़का
नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो।
भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है। Group Captain शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताकर धरती पर सफल वापसी की है। लेकिन जैसे ही वह वापस लौटे, कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने इस ऐतिहासिक क्षण को विवाद में खींच लिया।
क्या कहा कांग्रेस नेता उदित राज ने?
डॉ. उदित राज ने शुभांशु की वापसी पर तो उन्हें शुभकामनाएं दीं लेकिन उसके साथ-साथ एक ऐसा बयान भी दे डाला जिसने माहौल गर्मा दिया। उन्होंने कहा:
“पहले राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, तब SC-ST और OBC इतने पढ़े-लिखे नहीं थे। लेकिन अब तो किसी दलित या ओबीसी को भी शुभांशु शुक्ला की जगह भेजा जा सकता था। ऐसा नहीं कि NASA ने कोई परीक्षा लेकर उनका चयन किया हो।”
इस बयान पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
#WATCH | Axiom 4 Mission | On the return of Group Captain Shubhanshu Shukla and the crew today, Congress leader Udit Raj says, "… When Rakesh Sharma was sent earlier, the SC, ST, OBC people were not that educated. This time, I think it was the turn to send a Dalit… It is not… pic.twitter.com/iPCAfdt7iQ
— ANI (@ANI) July 15, 2025
शुभांशु ने स्पेस में किए 60 वैज्ञानिक प्रयोग
Axiom-4 मिशन पर 25 जून को शुभांशु तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ISS के लिए रवाना हुए थे। 18 दिनों के इस मिशन में उन्होंने 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 भारत के ISRO द्वारा प्रस्तावित थे। शुभांशु शुक्ला अपने साथ 263 किलोग्राम वैज्ञानिक उपकरण और डेटा लेकर लौटे हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
🇮🇳 भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन?
शुभांशु शुक्ला भारत के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन के तहत ISS तक सफर किया। ISRO के आगामी Gaganyaan Mission (2027) से पहले यह मिशन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और वैज्ञानिक प्रयोगशाला साबित हो सकता है।
Axiom-4 मिशन पर भारत ने खर्च किए 550 करोड़ रुपये
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत सरकार ने इस मिशन पर करीब ₹550 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश से भारत को न केवल वैश्विक स्पेस कमर्शियल सेक्टर में पहचान मिली, बल्कि तकनीकी रूप से भी कई नई जानकारियां हासिल हुई हैं।
NASA और ISRO की साझेदारी
यह मिशन अमेरिकी कंपनी Axiom Space और NASA के सहयोग से संचालित हुआ था। भारत की तरफ से ISRO और भारतीय वायुसेना के सहयोग से शुभांशु को प्रशिक्षित किया गया।
