बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन शुरू किया है। इस प्रक्रिया का मकसद राज्य की मतदाता सूचियों को साफ़, सटीक और अपडेटेड बनाना है ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
Special Intensive Revision (SIR) के मुख्य उद्देश्य
- Duplicate Voters हटाना: मतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाना
- Residency Verification: प्रवासी मतदाताओं सहित सभी मतदाताओं का निवास सत्यापन
- नई वोटर जोड़ना: 1 अक्टूबर 2025 तक 18 वर्ष के होने वाले नए मतदाताओं को सूची में शामिल करना
- Election Integrity बनाए रखना
दस्तावेज़ी मानदंड और परेशानी
मतदाता को अपनी पहचान और निवास का प्रमाण देने के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 11 दस्तावेज़ों में से किसी एक को प्रस्तुत करना आवश्यक है। हालांकि, आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। यह स्थिति बिहार के कई प्रवासी मजदूरों के लिए मुश्किल पैदा कर रही है क्योंकि उनके पास वैध निवास प्रमाण नहीं होते।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस नियम का समर्थन किया है कि आधार या राशन कार्ड को अंतिम निवास प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विरोध और राजनीतिक विवाद
विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने इसे “vote theft” यानी मत चोरी का आरोप लगाया है। कांग्रेस, शिवसेना और CPI(ML) सहित कई पार्टियों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है। विवादों में एक 124 वर्षीय महिला मतदाता मिंता देवी का नाम भी आया, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
CPI(ML) ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर बड़ा हमला करार दिया है और कहा है कि 66 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से हटाया गया है, जिनमें प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह
अब तक लगभग 87.6% मतदाताओं ने अपना सत्यापन पूरा कर लिया है, लेकिन प्रवासी मजदूरों और अन्य वर्गों की संख्या में कटौती जारी है। चुनाव आयोग इन मुद्दों का समाधान निकालने के प्रयास में है ताकि सभी योग्य मतदाता चुनाव प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
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