IndiGo का संकट सातवें दिन भी थमा नहीं — आज देशभर में 250 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। लाखों यात्री अपने गंतव्य के लिए फंसे हुए हैं, सामान और रिफंड की स्थिति अभी तक अनिश्चित। Supreme Court of India ने सुनवाई से किया इनकार यात्रियों ने रद्द उड़ानों और देरी से हुए नुकसान के लिए चाही थी तुरंत न्याय — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम एयरलाइन नहीं चलाते, इसलिए सुनवाई नहीं करेंगे।” यह कहकर अदालत ने मामले को अस्वीकृत कर दिया, जिससे यात्रियों की उम्मीदें टूट गईं। यात्री परेशान — लंबा इंतजार, रिफंड का इंतज़ार, और भविष्य अनिश्चित इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को प्रभावित किया है, बल्कि उन परिवारों को भी परेशानी में डाला है, जो अचानक मिले या लौटने वाले थे। समस्या की जड़ — सिर्फ रद्द उड़ान नहीं, प्रणाली में खामियां विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है। इंडिगो में पायलट और क्रू की कमी, नई ड्यूटी नियमों का जल्दबाजी में लागू होना, और शेड्यूलिंग में घबराहट — इन सब कारणों ने मिलकर आज का संकट खड़ा किया है। कई यात्रियों ने बताया कि देरी-रद्दीकरण और खराब व्यवस्था ने उनकी ज़िंदगियाँ प्रभावित कर दी हैं — ऐसा लग रहा है कि कोई भविष्य का भरोसा नहीं है। अब आगे क्या? — जवाबदेही, सुधार और यात्रियों की आवाज़ हमें उम्मीद है कि इंडिगो-संकट जितनी भी बड़ी हो — लेकिन न्याय, पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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