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Ranchi Airport पर नई सुविधाओं का शुभारंभ आज, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ की स्कूटी पर नजर आए उड्डयन मंत्री

Ranchi Airport पर नई सुविधाओं का शुभारंभ आज, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ की स्कूटी पर नजर आए उड्डयन मंत्री

झारखंड की राजधानी Ranchi के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर आज कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री Sanjay Seth शामिल होंगे। एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं, जिनका आज औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। उद्घाटन से पहले एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई, जिसमें केंद्रीय मंत्री संजय सेठ अपनी स्कूटी पर उड्डयन मंत्री को बैठाकर एयरपोर्ट परिसर में घूमते नजर आए। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोगों को मंत्रियों का यह सादगी भरा अंदाज काफी पसंद आ रहा है। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए बेहतर वेटिंग एरिया, नई सुरक्षा सुविधाएं और आधुनिक तकनीक से जुड़ी कई सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे रांची एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों को पहले से ज्यादा सुविधा मिलेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट का लगातार विकास होने से झारखंड में पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, यात्रियों को भी बेहतर यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे नेताओं की सादगी और जमीन से जुड़े व्यवहार का उदाहरण बताया है। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिका में IRAN के साथ बढ़ते तनाव के बीच संसद में एक बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में ऐसा प्रस्ताव पास हुआ है, जिसका मकसद राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करना और ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को रोकना है। खास बात यह रही कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के ही 4 सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि बिना संसद की मंजूरी के अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं करेगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी नेताओं के बीच ईरान को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। हालांकि, यह प्रस्ताव पास होने के बाद भी अंतिम फैसला पूरी तरह तय नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार मौजूद है। यानी राष्ट्रपति चाहें तो इस फैसले को रोक सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद और चर्चा में आ गया है। आम अमेरिकी नागरिकों के बीच भी युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रम्प के अपने सांसदों का विरोध में जाना यह दिखाता है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान नीति को लेकर एकजुटता नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और गरमा सकता है। Deshharpal पर देश-दुनिया की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP में 20 मई को Medical Stores बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में फार्मासिस्टों की हड़ताल

MP में 20 मई को Medical Stores बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में फार्मासिस्टों की हड़ताल

MP में 20 मई को Medical Stores बंद रहेंगे। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में प्रदेशभर के फार्मासिस्ट और मेडिकल स्टोर संचालक हड़ताल पर जाएंगे। इस दौरान कई शहरों में दवा दुकानों के शटर बंद रह सकते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फार्मासिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर कारोबारियों पर असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बिना डॉक्टर की सलाह और नियमों के पालन के ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत पर भी खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाएं और स्थानीय मेडिकल व्यापारियों के हितों की रक्षा की जाए। हड़ताल के दौरान प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी की गई है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी कुछ दवा दुकानों को खुला रखने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। हड़ताल की खबर सामने आने के बाद लोगों ने पहले से जरूरी दवाएं खरीदना शुरू कर दिया है। खासकर बुजुर्ग मरीज और नियमित दवा लेने वाले लोग मेडिकल स्टोरों पर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दवा बिक्री के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि मरीजों को सुविधा भी मिले और स्थानीय व्यापार भी प्रभावित न हो। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP में फिजूलखर्ची पर सख्त हुए CM MOHAN YADAV, निगम-बोर्ड अध्यक्षों को दिया सादगी और अनुशासन का संदेश

MP में फिजूलखर्ची पर सख्त हुए CM MOHAN YADAV, निगम-बोर्ड अध्यक्षों को दिया सादगी और अनुशासन का संदेश

CM Mohan Yadav ने मध्य प्रदेश के निगम, बोर्ड और मंडल अध्यक्षों को साफ संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में फिजूलखर्ची बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी पदाधिकारियों से सादगी, अनुशासन और सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की है। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि जनता के पैसे का सही इस्तेमाल होना चाहिए और अनावश्यक खर्चों पर कड़ा नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि पद प्रतिष्ठा दिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का जिम्मा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी अध्यक्ष और पदाधिकारी आत्मानुशासन अपनाएं और सरकारी संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी से करें। हाल के दिनों में प्रदेश में VIP कल्चर और बड़ी वाहन रैलियों को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख दिखा चुकी है। सरकार का मानना है कि सादगीपूर्ण कार्यशैली से जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है। यही वजह है कि अब निगम, मंडल और बोर्डों में भी खर्चों की समीक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की “सख्त प्रशासन और अनुशासन” वाली कार्यशैली के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि जनता से जुड़े सभी संस्थानों में दिखावे की राजनीति के बजाय विकास और जनसेवा को प्राथमिकता मिले। मध्य प्रदेश में हाल ही में कई निगम और मंडलों में नई नियुक्तियां हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश नए पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि सरकार सादगी और जवाबदेही के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court सख्त: खतरनाक कुत्तों को दें मौत का इंजेक्शन

Supreme Court सख्त: खतरनाक कुत्तों को दें मौत का इंजेक्शन

Supreme Court of India ने आवारा और खतरनाक कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि लोगों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है और जो कुत्ते गंभीर रूप से खतरनाक या लाइलाज बीमारी से ग्रसित हैं, उन्हें नियमों के तहत मौत का इंजेक्शन (यूथेनेशिया) दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है, लेकिन इंसानों की जान और सुरक्षा उससे ऊपर है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी निर्देश दिए थे कि सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद भी खतरनाक कुत्तों को दोबारा भीड़भाड़ वाले इलाकों में न छोड़ा जाए। देश के कई हिस्सों में बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी आम लोगों की सुरक्षा को लेकर अहम मानी जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL 2026: आज राजस्थान और लखनऊ में भिड़ंत, होम ग्राउंड पर पहली जीत की तलाश में RR

IPL 2026: आज राजस्थान और लखनऊ में भिड़ंत, होम ग्राउंड पर पहली जीत की तलाश में RR

Indian Premier League (IPL) में आज बड़ा मुकाबला Rajasthan Royals और Lucknow Super Giants के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें जीत के इरादे से मैदान में उतरेंगी, लेकिन राजस्थान के लिए यह मुकाबला बेहद खास माना जा रहा है। टीम इस सीजन अपने होम ग्राउंड पर अब तक एक भी मैच नहीं जीत पाई है। राजस्थान रॉयल्स को अपने घरेलू मैदान पर लगातार हार का सामना करना पड़ा है, जिससे टीम और फैंस दोनों निराश हैं। ऐसे में आज का मुकाबला टीम के लिए सम्मान बचाने जैसा माना जा रहा है। कप्तान और खिलाड़ियों पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव भी रहेगा। हालांकि आंकड़े राजस्थान के पक्ष में दिखाई देते हैं। आईपीएल इतिहास में राजस्थान ने लखनऊ को अब तक 5 बार हराया है। यही रिकॉर्ड टीम का आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। दूसरी तरफ लखनऊ सुपर जायंट्स भी शानदार फॉर्म में है और जीत की लय बनाए रखना चाहेगी। अधिक खेल खबरों और आईपीएल अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Donald Trump ने ईरान पर होने वाले प्रस्तावित अमेरिकी हमले को फिलहाल टाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गल्फ देशों की अपील के बाद ट्रम्प ने यह फैसला लिया। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। इसके बाद ट्रम्प ने हमले की योजना को रोक दिया। ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका अब तक का सबसे बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी स्वीकार करे, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर कायम है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें ताकि मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध टाला जा सके। अंतरराष्ट्रीय और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Umar Khalid मामले में Supreme Court की बड़ी टिप्पणी, कहा- जमानत अधिकार है, जेल अपवाद

Umar Khalid मामले में Supreme Court की बड़ी टिप्पणी, कहा- जमानत अधिकार है, जेल अपवाद

दिल्ली दंगा मामले में आरोपी Umar Khalid को लेकर Supreme Court ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद”, जबकि उमर खालिद को पहले बेल मिल सकती थी। अदालत ने अपने पुराने फैसले पर भी आपत्ति जताई और कहा कि कई मामलों में इस मूल सिद्धांत का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी आरोपी को ट्रायल से पहले लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं माना जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में व्यक्तिगत स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है और बेल को अधिकार की तरह देखा जाना चाहिए। दरअसल, उमर खालिद पर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है। उनके खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जबकि मामले के कुछ अन्य आरोपियों को राहत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट की नई टिप्पणी के बाद इस फैसले को लेकर फिर बहस शुरू हो गई है। अदालत ने कहा कि “बेल नियम और जेल अपवाद” का सिद्धांत सिर्फ सामान्य मामलों में ही नहीं, बल्कि यूएपीए जैसे मामलों में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आने वाले समय में जमानत से जुड़े मामलों पर बड़ा असर डाल सकती है। इससे निचली अदालतों को भी यह संदेश गया है कि लंबे समय तक बिना ट्रायल जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

PM Narendra Modi सोमवार को नॉर्वे पहुंच गए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 43 साल बाद पहला नॉर्वे दौरा है। पीएम मोदी यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेंगे और नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे। यह दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के अलावा स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और समुद्री सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी का यह पहला नॉर्वे दौरा है। इससे पहले साल 1983 में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की यात्रा की थी। ऐसे में इस दौरे को ऐतिहासिक माना जा रहा है। दौरे के दौरान पीएम मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और क्वीन सोन्या से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dollar के मुकाबले रुपया पहली बार 96.18 पर पहुंचा, कच्चा तेल 110 डॉलर के पार

Dollar के मुकाबले रुपया पहली बार 96.18 पर पहुंचा, कच्चा तेल 110 डॉलर के पार

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सोमवार का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिकी Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 96.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी करीब 2% की तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। रुपये में आई इस बड़ी गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 1000 अंक तक टूट गया। हालांकि बाद में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली और निवेशकों को थोड़ी राहत मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की महंगी कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और आम लोगों की जेब पर पड़ता है। रुपये की कमजोरी से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश से आने वाले कई सामान महंगे हो सकते हैं। इसका असर आम लोगों के घरेलू बजट पर भी पड़ने की आशंका है। वहीं शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव से छोटे निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए, तो भारतीय बाजारों में आगे भी दबाव बना रह सकता है। देश-दुनिया और कारोबार की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AAP

Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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