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America-Iran के बीच तनाव कम होने के संकेत, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति

America-Iran के बीच तनाव कम होने के संकेत, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी America-Iran के तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर सहमति बनने की बात कही जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला अभी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मंजूरी के बाद ही होगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि तेल सप्लाई और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर लगभग सहमति बन चुकी है। यह रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस मुद्दे पर कहा कि अमेरिका कोई जल्दबाजी नहीं करेगा और हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि युद्ध की स्थिति को और बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ ईरान की ओर से भी नरम रुख देखने को मिला है। माना जा रहा है कि लगातार बढ़ते तनाव, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता के चलते दोनों देश अब टकराव से बचना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा पूरी तरह खुल जाता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है, जिसका फायदा भारत समेत कई देशों को होगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प और खामेनेई के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। अगर दोनों नेता मंजूरी दे देते हैं, तो मध्य पूर्व में लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL 2026: आज लखनऊ से भिड़ेगी पंजाब, प्लेऑफ की उम्मीदें बचाने उतरेगी PBKS

IPL 2026: आज लखनऊ से भिड़ेगी पंजाब, प्लेऑफ की उम्मीदें बचाने उतरेगी PBKS

IPL 2026 में आज एक बेहद अहम मुकाबला खेला जाएगा, जहां Lucknow Super Giants और Punjab Kings आमने-सामने होंगी। पंजाब की टीम इस मैच को जीतकर अपनी प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखना चाहेगी, जबकि लखनऊ अपने घरेलू मैदान पर जीत हासिल कर मजबूत स्थिति बनाने उतरेगी। पंजाब किंग्स के लिए यह मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा माना जा रहा है। टीम ने इस सीजन में कुछ शानदार मुकाबले जीते हैं, लेकिन लगातार प्रदर्शन में कमी की वजह से अंक तालिका में पिछड़ गई। अब हर मैच उनके लिए बेहद अहम हो गया है। वहीं, लखनऊ सुपर जायंट्स का रिकॉर्ड पंजाब के खिलाफ ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। आईपीएल इतिहास में पंजाब ने लखनऊ को अब तक 4 बार हराया है, जिससे टीम का आत्मविश्वास काफी मजबूत नजर आ रहा है। पंजाब की बल्लेबाजी इस सीजन में काफी हद तक उसके टॉप ऑर्डर पर निर्भर रही है। अगर शुरुआती बल्लेबाज अच्छी शुरुआत देते हैं तो टीम बड़ा स्कोर खड़ा कर सकती है। दूसरी ओर, लखनऊ की टीम अपने ऑलराउंड प्रदर्शन और घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेगी। फैंस को आज एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है, क्योंकि दोनों टीमों के लिए यह मैच बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ पंजाब की प्लेऑफ की उम्मीदें दांव पर होंगी, तो दूसरी ओर लखनऊ जीत के साथ अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहेगी। संभावित प्लेइंग-11 लखनऊ सुपर जायंट्स:केएल राहुल, क्विंटन डिकॉक, निकोलस पूरन, मार्कस स्टोइनिस, आयुष बदोनी, क्रुणाल पंड्या, रवि बिश्नोई, नवीन उल हक, मोहसिन खान, यश ठाकुर, मयंक यादव। पंजाब किंग्स:शिखर धवन, जॉनी बेयरस्टो, प्रभसिमरन सिंह, लियाम लिविंगस्टोन, सैम करन, जितेश शर्मा, हरप्रीत बराड़, कगिसो रबाडा, अर्शदीप सिंह, राहुल चाहर, हर्षल पटेल। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump की बेटी को जान से मारने की धमकी, FBI ने इराकी युवक को पकड़ा

Trump की बेटी को जान से मारने की धमकी, FBI ने इराकी युवक को पकड़ा

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के परिवार को लेकर बड़ा सुरक्षा खतरा सामने आया है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने एक इराकी युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर ट्रम्प की बेटी को जान से मारने की साजिश रचने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी का संबंध ईरानी सेना से जुड़े आतंकी नेटवर्क से था और वह लंबे समय से हमले की प्लानिंग कर रहा था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध लोगों के संपर्क में था। जांच एजेंसियों को उसके मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से कई अहम सुराग मिले हैं। FBI का कहना है कि समय रहते कार्रवाई कर एक बड़ी घटना को टाल दिया गया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी ट्रम्प परिवार की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह साजिश अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से भी जुड़ी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों ने फिलहाल ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इस घटना के बाद ट्रम्प परिवार की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था। इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिका में सुरक्षा व्यवस्था और विदेशी आतंकी नेटवर्क को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। आम लोगों के बीच भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है। Deshharpal News Portal पर देश-दुनिया की ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhar Bhojshala Dispute : हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Dhar Bhojshala Dispute : हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

मध्यप्रदेश के Dhar स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट नहीं बल्कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले को मुस्लिम पक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में चुनौती दी है। मामले में आज ही सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला परिसर का सर्वे कराने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला धार्मिक भावनाओं और पुराने समझौतों के खिलाफ है। दरअसल, धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद ASI सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले को लेकर धार शहर में भी लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी तरह का तनाव न फैले। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे चाहते हैं कि अदालत का फैसला सभी पक्षों के सम्मान और शांति को ध्यान में रखकर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय हो सकती है। अब देखना होगा कि सर्वोच्च अदालत हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाती है या ASI सर्वे की प्रक्रिया जारी रहती है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajya Sabha की 26 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को होगा मतदान

Rajya Sabha की 26 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को होगा मतदान

चुनाव आयोग ने Rajya Sabha की 26 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है। इन सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन शाम तक वोटों की गिनती भी पूरी कर ली जाएगी। इन सीटों पर अलग-अलग राज्यों से राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिसके बाद नए सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और उम्मीदवार तय समय सीमा के भीतर अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। राज्यसभा चुनाव में आम जनता सीधे वोट नहीं डालती है। इसमें संबंधित राज्यों के विधायक मतदान करते हैं और अपने प्रतिनिधियों को राज्यसभा भेजते हैं। इसलिए इन चुनावों पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीतियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। राजनीतिक दलों ने भी संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने की तैयारी में IRAN

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने की तैयारी में IRAN

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच IRAN अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए ईरान और ओमान के बीच नए पेमेंट सिस्टम को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, अमेरिका ने इस कदम का विरोध करते हुए साफ कहा है कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ऐसे में ईरान के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान जहाजों से ट्रांजिट फीस लेने के लिए ओमान के साथ वित्तीय व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इससे ईरान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की फीस लगाना गलत है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा। अमेरिका ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर रणनीति बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान यह कदम लागू करता है तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश, जो खाड़ी देशों से तेल आयात करते हैं, इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच ईरान का यह कदम आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाल सकता है। Deshharpal पर पढ़ें देश-दुनिया की हर बड़ी खबर और ताजा अपडेट। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा, योजनाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

CM Dr. Mohan Yadav ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं और चल रही योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने और शिक्षा के स्तर में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने छात्रों के हित में चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करने और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिल सके। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

30,055 करोड़ की Cabinet मंजूरी से प्रदेश को विकास की नई रफ्तार

प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। Cabinet बैठक में करीब 30,055 करोड़ रुपये की योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कैबिनेट की स्वीकृति में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। सरकार का फोकस खासतौर पर गांवों और छोटे शहरों तक विकास पहुंचाने पर है, ताकि हर वर्ग को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं के लागू होने से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। निर्माण कार्यों और नई परियोजनाओं से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं किसानों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा रहे हैं, ताकि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भी तेजी से विकास हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की मंजूरी से आने वाले समय में प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिलेगा। प्रदेश और देश की हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें Deshharpal News
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UPSC Exam Calendar 2027: यूपीएससी ने 27 भर्तियों का परीक्षा कैलेंडर जारी किया

UPSC Exam Calendar 2027: यूपीएससी ने 27 भर्तियों का परीक्षा कैलेंडर जारी किया

संघ लोक सेवा आयोग यानी Union Public Service Commission (UPSC) ने साल 2027 के लिए अपना वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर में सिविल सेवा परीक्षा (IAS), IPS, IFS, NDA, CDS समेत कुल 27 बड़ी भर्ती परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान किया गया है। अब लाखों उम्मीदवार अपनी तैयारी को पहले से बेहतर तरीके से प्लान कर सकेंगे। यूपीएससी की ओर से जारी कैलेंडर के मुताबिक, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims) 23 मई 2027 को आयोजित होगी। वहीं, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) 20 अगस्त 2027 से शुरू होगी और यह पांच दिनों तक चलेगी। इसके अलावा NDA, CDS, इंजीनियरिंग सर्विस, जियो-साइंटिस्ट और अन्य कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तारीखें भी जारी कर दी गई हैं। आयोग ने साफ किया है कि परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा तिथियों में बदलाव भी किया जा सकता है। UPSC 2027 की प्रमुख परीक्षाओं की तारीखें उम्मीदवारों के लिए क्यों जरूरी है यह कैलेंडर? हर साल लाखों युवा यूपीएससी की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा कैलेंडर जारी होने से उम्मीदवारों को अपनी पढ़ाई, टेस्ट सीरीज और रिवीजन की रणनीति बनाने में काफी मदद मिलती है। खासकर वे छात्र जो पहली बार UPSC की तैयारी शुरू कर रहे हैं, उनके लिए यह शेड्यूल बेहद उपयोगी माना जा रहा है। ऐसे डाउनलोड करें UPSC Exam Calendar 2027 उम्मीदवार यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा परीक्षा कैलेंडर डाउनलोड कर सकते हैं। UPSC Official Website UPSC Exam Calendar Page अधिक जानकारी और शिक्षा जगत की बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tamil Nadu में 59 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी, विजय कैबिनेट में दो विधायक बने मंत्री

Tamil Nadu में 59 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी, विजय कैबिनेट में दो विधायक बने मंत्री

Tamil Nadu की राजनीति में 59 साल बाद कांग्रेस ने सरकार में वापसी की है। अभिनेता से नेता बने Vijay की सरकार में कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस लंबे समय से तमिलनाडु में सहयोगी दल की भूमिका निभा रही थी, लेकिन अब उसे सीधे सत्ता में भागीदारी मिली है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। वहीं, राजनीतिक जानकार इसे दक्षिण भारत में कांग्रेस के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता मान रहे हैं। विजय की कैबिनेट में शामिल किए गए कांग्रेस विधायकों को अहम विभाग मिलने की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा है कि इससे गठबंधन और मजबूत होगा और आने वाले समय में कांग्रेस राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु में कांग्रेस की यह वापसी सिर्फ सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी के लिए दक्षिण भारत में नए सिरे से खुद को मजबूत करने का मौका भी है। फिलहाल, विजय सरकार के गठन और नए मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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