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अमेरिका में IRAN के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक प्रस्ताव पास किया गया है

IRAN पर हमले को लेकर अमेरिका में घमासान, संसद की मंजूरी बिना सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास

अमेरिका में IRAN के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें मांग की गई है कि राष्ट्रपति संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई न करें। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि “जंग का फैसला मेरा होगा।” ट्रम्प के इस बयान के बाद अमेरिका की राजनीति में हलचल बढ़ गई थी। संसद की मंजूरी जरूरी बताई गई प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका के संविधान के मुताबिक युद्ध या सैन्य कार्रवाई जैसे बड़े फैसलों में कांग्रेस की भूमिका बेहद अहम है। इसलिए किसी भी देश के खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले संसद की अनुमति लेना जरूरी होना चाहिए। कई सांसदों ने चिंता जताई कि बिना मंजूरी के सैन्य कार्रवाई होने पर अमेरिका एक बड़े संघर्ष में फंस सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ट्रम्प के बयान से बढ़ी चिंता डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ कार्रवाई का फैसला वह खुद लेंगे। उनके इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ सकते हैं। इसका असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। आम लोगों में भी बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव को लेकर दुनियाभर के लोग चिंतित हैं। लोग नहीं चाहते कि एक और बड़ी जंग शुरू हो, क्योंकि इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि संसद में लाया गया यह प्रस्ताव सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है, ताकि कोई भी बड़ा सैन्य फैसला जल्दबाजी में न लिया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM उमर अब्दुल्ला ने आखिरी वक्त पर बदला बैठक का ठिकाना

CM Omar Abdullah ने आखिरी वक्त पर बदला बैठक का ठिकाना

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोमवार को अचानक अपनी अहम बैठक का स्थान बदल दिया। पहले यह बैठक किसी और जगह आयोजित होनी थी, लेकिन आखिरी समय में इसे डाचीगाम में रखने का फैसला लिया गया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के साथ मंत्री और विधायक भी टेम्पो में सवार होकर डाचीगाम पहुंचे। इस अनोखे अंदाज ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आमतौर पर वीआईपी काफिले और बड़ी गाड़ियों में चलने वाले नेताओं को इस बार साधारण टेम्पो में सफर करते देखा गया। रास्ते में लोगों ने भी इस दृश्य को देखकर हैरानी जताई और कई लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला डाचीगाम क्षेत्र की जमीनी स्थिति और स्थानीय व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अचानक बैठक स्थल बदलने का फैसला लिया। उनके साथ मौजूद मंत्री और विधायक भी बिना किसी औपचारिकता के टेम्पो में ही रवाना हो गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से बातचीत भी की और उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों ने सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियां सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की बात कही। उमर अब्दुल्ला का यह सादगी भरा अंदाज अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इसे आम जनता से जुड़ने की कोशिश बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow में BJP नेता की हत्या: CCTV फुटेज से मिले अहम सुराग, चार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

Lucknow में BJP नेता की हत्या: CCTV फुटेज से मिले अहम सुराग, चार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में BJP नेता की हत्या के मामले में पुलिस को जांच के दौरान अहम सुराग मिले हैं। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं परिवार और समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पुलिस अब CCTV फुटेज के आधार पर चार संदिग्ध आरोपियों की तलाश कर रही है। जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता पर बदमाशों ने अचानक हमला कर दिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच की गई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध युवक घटना के आसपास घूमते नजर आए हैं। इसी आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों की पहचान की है और उनकी तलाश के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। मृतक के परिवार का कहना है कि उन्हें पहले से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिवार ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और हर एंगल से पड़ताल की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi के रेस्टोरेंट में भीषण आग, 10 लोगों की मौत: 11 लोगों को बचाया गया

Delhi के रेस्टोरेंट में भीषण आग, 10 लोगों की मौत: 11 लोगों को बचाया गया

Delhi के मालवीय नगर इलाके में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां एक रेस्टोरेंट में अचानक भीषण आग लग गई, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। वहीं दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग अंदर फंस गए और मदद के लिए चीखते रहे। आसपास के लोगों ने भी बचाव कार्य में मदद की, लेकिन धुआं और आग काफी ज्यादा होने के कारण राहत कार्य में दिक्कत आई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। हालांकि, असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि रेस्टोरेंट में फायर सेफ्टी के इंतजाम पूरे थे या नहीं। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। कई परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया। स्थानीय लोग प्रशासन से ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की सख्त जांच की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे दोबारा न हों। दिल्ली सरकार ने भी घटना पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal में घूस के पैसे लौटाने लगे TMC नेता, सरकारी योजनाओं में बड़ा घोटाला उजागर

Bengal में घूस के पैसे लौटाने लगे TMC नेता, सरकारी योजनाओं में बड़ा घोटाला उजागर

West Bengal में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और घूसखोरी के आरोपों ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। कई जगहों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले लोगों से पैसे वसूले। अब मामला सामने आने के बाद कुछ नेता लोगों को पैसे वापस लौटाते नजर आ रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा नादिया जिले की हो रही है, जहां महिलाओं के लिए चलाई जा रही सरकारी योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पता चला कि योजना की सूची में 173 पुरुषों के नाम शामिल कर दिए गए थे। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर महिलाओं की योजना में पुरुषों को लाभ कैसे मिल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना का फायदा पाने के लिए कई गरीब परिवारों से पैसे मांगे गए थे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बिना घूस दिए उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ तो कई TMC नेता और स्थानीय कार्यकर्ता लोगों को पैसे लौटाने लगे हैं। गांव के लोगों में इस मामले को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार गरीबों और महिलाओं के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन बीच में बैठे कुछ लोग उसका गलत फायदा उठाकर आम जनता का भरोसा तोड़ रहे हैं। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी और अन्य दलों का आरोप है कि बंगाल में सरकारी योजनाओं में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। वहीं TMC की ओर से कहा गया है कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब और जरूरतमंद लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसा अन्याय न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN-AMERICA तनाव बढ़ा: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

IRAN-AMERICA तनाव बढ़ा: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

IRAN ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया। हालांकि अमेरिका का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कुवैत और बहरीन में रहने वाले लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल बन गया है। कई जगहों पर रातभर सायरन बजते रहे और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के जवाब में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित एक ईरानी आइलैंड को निशाना बनाकर कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से लगातार बयानबाजी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। आम लोगों को डर है कि कहीं यह तनाव बड़े युद्ध का रूप न ले ले। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के अगले कदम हालात तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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थरूर का बयान: ‘हर कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना लोगों के लिए बोझिल’, बोले- सहमति से निकले समाधान

Shashi Tharoor का बयान: ‘हर कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना लोगों के लिए बोझिल’

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गाना कई लोगों के लिए बोझिल और मुश्किल हो सकता है। इस मुद्दे का समाधान आपसी सहमति और समझदारी से निकाला जाना चाहिए। थरूर ने कहा कि देशभक्ति किसी एक तरीके तक सीमित नहीं होती। हर व्यक्ति अपने तरीके से देश के प्रति सम्मान और प्रेम दिखाता है। ऐसे में किसी पर किसी खास गीत को गाने का दबाव बनाना सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां हैं। ऐसे में किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर संवेदनशीलता और आपसी सम्मान जरूरी है। थरूर के मुताबिक, इस विषय पर राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत न हों। थरूर के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे राष्ट्रगीत का अपमान बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ‘वंदे मातरम’ लंबे समय से देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है। ऐसे में इस पर होने वाली हर बहस लोगों की भावनाओं से जुड़ जाती है। अब देखना होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दल आगे क्या रुख अपनाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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लेबनान पर हमले से Trump नाराज, नेतन्याहू को लगाई फटकार

लेबनान पर हमले से Trump नाराज, नेतन्याहू को लगाई फटकार

लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर नाराजगी जताई। जानिए क्या कहा ट्रम्प ने और क्यों बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से नाराजगी जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान पर लगातार हो रहे इजराइली हमलों को लेकर ट्रम्प ने नेतन्याहू को फोन किया और कड़ी फटकार लगाई। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने फोन पर कहा, “क्या पागल हो गए हो? तुरंत ये सब बंद करो।” इस बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लेबनान पर हमलों से बढ़ा तनाव इजराइल और लेबनान के बीच पिछले कुछ समय से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा क्षेत्रों में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई हो रही है। आम लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं, जबकि डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे धमाकों और हमलों के कारण बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल है। लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ट्रम्प ने जताई नाराजगी रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प का मानना है कि इस तरह के हमले पूरे मध्य पूर्व को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने नेतन्याहू से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और हालात को शांत करने की अपील की। हालांकि, इजराइल की ओर से इस बातचीत पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिका समेत कई देश पहले ही दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर चुके हैं। आम लोग अब सिर्फ यही चाहते हैं कि युद्ध और हिंसा के बजाय बातचीत से समाधान निकले, ताकि मासूम लोगों की जान बचाई जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जून में आम आदमी को झटका: कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा, आज से बदल गए ये 4 बड़े नियम

जून में आम आदमी को झटका: कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा, आज से बदल गए ये 4 बड़े नियम

देशभर में जून महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए कई बड़े बदलावों के साथ हुई है। सबसे बड़ा असर रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर देखने को मिला है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं। इसके साथ ही 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर की कीमत में भी इजाफा किया गया है। इन बदलावों का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। कॉमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। वहीं 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर के दाम में 11 रुपए बढ़ाए गए हैं। हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कॉमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों और होटल कारोबार पर पड़ेगा। कई दुकानदारों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत से कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। जून में हुए ये 4 बड़े बदलाव 1. LPG सिलेंडर के दाम बढ़े कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से बाहर खाना और फूड सर्विस से जुड़ी चीजें महंगी हो सकती हैं। 2. बैंकिंग नियमों में बदलाव कुछ बैंकों ने ATM ट्रांजैक्शन और मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है। 3. क्रेडिट कार्ड नियम अपडेट कई बैंकों ने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स और चार्जेज में बदलाव किया है। कार्ड यूजर्स को नई शर्तें ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है। 4. तेल कंपनियों की नई कीमतें लागू हर महीने की पहली तारीख को पेट्रोलियम कंपनियां LPG और अन्य ईंधन की नई कीमतें जारी करती हैं। जून में भी नई दरें लागू हो गई हैं। आम लोगों की बढ़ी चिंता महंगाई के बीच गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है। खासकर छोटे होटल संचालकों और फूड बिजनेस से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत बढ़ने से ग्राहकों पर बोझ डालना मजबूरी बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में भी इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं तो इसका असर घरेलू बजट पर भी साफ दिखाई देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर से मचा हड़कंप, सरकार ने किया खंडन

IRAN के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर से मचा हड़कंप, सरकार ने किया खंडन

IRAN की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खबरों में यह भी आरोप लगाया गया कि देश की असली सत्ता अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों के हाथ में चली गई है और सरकार पर उनका कंट्रोल बढ़ता जा रहा है। हालांकि, ईरान सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरें झूठी और भ्रामक हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से ईरान में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच तनाव की चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर सामने आने से देश और दुनिया में कई तरह के सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में IRGC का प्रभाव पहले से काफी मजबूत रहा है। देश की सुरक्षा, विदेश नीति और कई अहम फैसलों में इस संगठन की बड़ी भूमिका मानी जाती है। ऐसे में जब सत्ता पर नियंत्रण को लेकर आरोप सामने आए तो लोगों की चिंता बढ़ गई। फिलहाल ईरान सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति अपने पद पर बने हुए हैं और सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस खबर को लेकर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्य पूर्व में पहले से चल रहे तनाव के बीच इस तरह की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर ईरान की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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