आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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