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Supreme Court - हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

Supreme Court – हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

आम लोगों को समय पर न्याय मिले, इसके लिए Supreme Court ने देश के सभी हाईकोर्टों को अहम निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम Court ने कहा है कि कोई भी फैसला 3 महीने से ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रखा जाना चाहिए। खासकर जमानत से जुड़े मामलों में आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जारी किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अदालतों के आदेशों को तुरंत ऑनलाइन अपलोड किया जाए, ताकि लोगों को फैसले की जानकारी समय पर मिल सके। कोर्ट ने माना कि फैसलों में देरी होने से लोगों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, कई मामलों में देखा गया है कि सुनवाई पूरी होने के बाद भी फैसले लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाते हैं। इससे आरोपी, पीड़ित और उनके परिवारों को अनिश्चितता में रहना पड़ता है। जमानत मामलों में देरी होने पर कई लोगों को जरूरत से ज्यादा समय जेल में बिताना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है। अदालतों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फैसले तय समय सीमा में आएं और लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। कोर्ट के इन निर्देशों को न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबित मामलों के जल्द निपटारे में भी मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यस्त Charbagh Railway Station पर शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। स्टेशन पर बने टिन शेड का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में टीटीई समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुकी थी। अचानक तेज आवाज के साथ टिन शेड नीचे गिर गया। मौके पर मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी और राहत टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि घायलों में एक टीटीई भी शामिल है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे के बाद सुरक्षा के मद्देनजर हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। रेलवे प्रशासन ने प्लेटफॉर्म खाली कराकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में टिन शेड की जर्जर हालत को हादसे की वजह माना जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर कई जगहों पर पुराने और कमजोर शेड बने हुए हैं, जिनकी समय-समय पर जांच नहीं होती। लोगों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पुराने ढांचों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, आंधी-बारिश बनी हादसे की वजह

UP में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, आंधी-बारिश बनी हादसे की वजह

UP में एक दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। निर्माणाधीन पुल का स्लैब अचानक गिरने से 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर मलबे में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मदद के लिए दौड़ पड़े। अधिकारियों के मुताबिक तेज आंधी और बारिश के कारण पुल का स्लैब कमजोर हो गया था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। राहत और बचाव टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे में फंसे 3 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि अन्य की तलाश जारी रही। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। मृत मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई मजदूर दूसरे राज्यों से यहां काम करने आए थे और अपने परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत कर रहे थे। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। स्थानीय लोगों ने निर्माण कंपनी की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। वहीं घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया है। लोगों का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियमों का पालन जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

दुनियाभर में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का इस्तेमाल करते हैं। अब इन प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाली कंपनी Meta अपने यूजर्स के लिए एक नया “Plus” या प्रीमियम वर्जन लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इसके लिए यूजर्स को हर महीने कुछ पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, लेकिन बदले में कई नए और खास फीचर्स मिलने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को और ज्यादा पर्सनल और एडवांस बनाने पर काम कर रही है। नए Plus वर्जन में यूजर्स को ऐसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो अभी फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। 24 घंटे बाद भी नहीं हटेगी स्टोरी Instagram और Facebook पर अभी स्टोरी सिर्फ 24 घंटे तक दिखाई देती है, लेकिन Plus वर्जन में यूजर्स अपनी स्टोरी को ज्यादा समय तक एक्टिव रख सकेंगे। इससे लोग अपनी खास यादों और जरूरी अपडेट्स को लंबे समय तक शेयर कर पाएंगे। पसंदीदा लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना सकेंगे नए फीचर के तहत यूजर्स अपने करीबी दोस्तों, परिवार और ऑफिस के लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना पाएंगे। इससे हर पोस्ट और स्टोरी को अपनी पसंद के लोगों तक ही शेयर करना आसान हो जाएगा। यह फीचर प्राइवेसी और पर्सनल कंट्रोल को बेहतर बनाएगा। आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? अगर Meta अपने Plus वर्जन को लॉन्च करता है, तो इससे यूजर्स को फ्री और पेड दोनों विकल्प मिल सकते हैं। जो लोग ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव चाहते हैं, वे प्रीमियम प्लान चुन सकते हैं। वहीं सामान्य यूजर्स पहले की तरह फ्री वर्जन इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि, Meta की तरफ से अभी तक इन फीचर्स और कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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20 साल से कम उम्र में IPL में 600 रन बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने सूर्यवंशी

20 साल से कम उम्र में IPL में 600 रन बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने सूर्यवंशी

IPL में युवा खिलाड़ियों का जलवा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सूर्यवंशी ने एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने IPL में 600 रन पूरे कर सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनकी बल्लेबाजी ने इस सीजन में क्रिकेट फैंस को खूब प्रभावित किया है। सूर्यवंशी ने इस सीजन में सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से हर मैच में टीम को मजबूत शुरुआत भी दिलाई। खास बात यह रही कि उन्होंने पांचवीं बार 20 से कम गेंदों में अर्धशतक जड़कर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का दम दिखाया। इस सीजन में लगाए 65 छक्के सूर्यवंशी इस सीजन में अब तक 65 छक्के लगा चुके हैं। उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लगता है कि वे हर गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने के इरादे से मैदान पर उतरते हैं। यही वजह है कि वे इस सीजन के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में गिने जा रहे हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद अच्छा संकेत है। फैंस भी सूर्यवंशी की बल्लेबाजी को खूब पसंद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हो रही है। टीम की जीत में निभा रहे बड़ी भूमिका सूर्यवंशी की तेज पारियों की वजह से उनकी टीम को लगातार मजबूत शुरुआत मिल रही है। कई मुकाबलों में उन्होंने अकेले दम पर मैच का रुख बदल दिया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और निडरता साफ दिखाई देती है। कम उम्र में इतने बड़े रिकॉर्ड बनाकर सूर्यवंशी ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले समय में वे भारतीय क्रिकेट का बड़ा चेहरा बन सकते हैं। अधिक खबरों और खेल जगत की ताजा अपडेट के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump की ओमान को चेतावनी: ‘होर्मुज स्ट्रेट पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं’, बोले- जरूरत पड़ी तो उड़ा देंगे

Trump की ओमान को चेतावनी: ‘होर्मुज स्ट्रेट पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं’, बोले- जरूरत पड़ी तो उड़ा देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर मध्य पूर्व को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। ईरान को चेतावनी देने के बाद अब उन्होंने ओमान को भी सख्त संदेश देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी देश का कंट्रोल अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। ट्रम्प ने यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि उन्हें चुनाव या राजनीतिक नुकसान की परवाह नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार सबसे पहले है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया की तेल सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट बेहद अहम रास्ता है और यहां किसी तरह की रोक-टोक पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर दुनिया तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अधिक अपडेट्स और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal news portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court ने कहा- SIR प्रक्रिया अवैध नहीं, चुनाव आयोग ने कानून के तहत किया काम

Supreme Court ने कहा- SIR प्रक्रिया अवैध नहीं, चुनाव आयोग ने कानून के तहत किया काम

देश की सबसे बड़ी अदालत Supreme Court of India ने वोटर लिस्ट से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि Election Commission of India ने यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से संदिग्ध मानकर हटाए गए हैं, उनकी जानकारी चार हफ्तों के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और सही मतदाता सूची बेहद जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि फर्जी या संदिग्ध नामों को हटाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इस मामले को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि बिना पर्याप्त जांच के नाम हटाए जाने से कई असली मतदाता परेशान हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष था कि मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद साफ हो गया है कि SIR प्रक्रिया फिलहाल कानूनी दायरे में मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग आगे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है। ऐसे में सही मतदाता सूची बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि किसी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे। यही संतुलन बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RCB या GT में से ही कोई बनेगा IPL 2026 का चैंपियन! पूर्व क्रिकेटर का बड़ा दावा

RCB या GT में से ही कोई बनेगा IPL 2026 का चैंपियन! पूर्व क्रिकेटर का बड़ा दावा

IPL 2026 को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर Aakash Chopra ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार आईपीएल का खिताब Royal Challengers Bengaluru (RCB) या Gujarat Titans (GT) में से कोई एक टीम जीत सकती है। पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि दोनों टीमों ने पिछले कुछ सीजन में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके पास मजबूत बल्लेबाजी और संतुलित गेंदबाजी आक्रमण मौजूद है। खासतौर पर RCB इस बार काफी बदली हुई नजर आ रही है और टीम के खिलाड़ी अच्छे फॉर्म में दिखाई दे रहे हैं। वहीं गुजरात टाइटंस की बात करें तो टीम ने कम समय में खुद को आईपीएल की सबसे मजबूत टीमों में शामिल कर लिया है। टीम के पास मैच जिताने वाले कई खिलाड़ी हैं, जो बड़े मुकाबलों का दबाव संभालना जानते हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर दोनों टीमों का प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो IPL 2026 का फाइनल बेहद रोमांचक हो सकता है। फैंस भी सोशल मीडिया पर लगातार अपनी पसंदीदा टीम को सपोर्ट कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या RCB पहली बार ट्रॉफी जीत पाएगी या गुजरात टाइटंस एक बार फिर चैंपियन बनने में सफल होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सरकार का मकसद सिर्फ टैक्स वसूली नहीं, व्यापारियों के हित भी जरूरी: CM Yogi

सरकार का मकसद सिर्फ टैक्स वसूली नहीं, व्यापारियों के हित भी जरूरी: CM Yogi

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि सरकार का उद्देश्य केवल टैक्स वसूलना नहीं है, बल्कि व्यापारियों के हितों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और प्रशासन उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुने। सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश में ऐसा माहौल बनाया जाए, जहां व्यापारी बिना डर और दबाव के अपना कारोबार कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमानदारी से व्यापार करने वालों को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। सरकार व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है, इसलिए अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे व्यापारियों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। व्यापारियों ने भी मुख्यमंत्री के इस बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे कारोबारियों में भरोसा बढ़ेगा और व्यापार का माहौल बेहतर होगा। सरकार के इस रुख से छोटे व्यापारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: NTA से पूछा- पिछली गलती से क्या सीखा

NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: NTA से पूछा- पिछली गलती से क्या सीखा

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से सीधे सवाल किया कि आखिर पिछले विवादों और गड़बड़ियों से उसने क्या सीखा? अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अब तक कोई सबक नहीं लिया गया, तो यह बेहद दुखद स्थिति है। सुप्रीम Court में NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा होता है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने साफ कहा कि बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियां छात्रों और उनके परिवारों के मन में डर और असमंजस पैदा कर रही हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा है। अदालत जानना चाहती है कि पेपर लीक मामले की जांच कहां तक पहुंची है और दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। जजों ने कहा कि केवल जांच करना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था बनानी होगी जिससे मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा बना रहे। देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। कई छात्रों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर सवाल खड़े कर देती हैं। अभिभावकों में भी परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता बढ़ी है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार व जांच एजेंसियों के जवाब पर टिकी हुई है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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