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Yuzvendra Chahal ने की RJ Mahvash संग रिलेशनशिप की पुष्टि! बोले- ‘अब तो पूरा इंडिया जानता है’

Yuzvendra Chahal ने की RJ Mahvash संग रिलेशनशिप की पुष्टि! बोले- ‘अब तो पूरा इंडिया जानता है’

टीम इंडिया के स्टार स्पिनर Yuzvendra Chahal ने आखिरकार अपनी रूमर्ड गर्लफ्रेंड RJ महवश के साथ रिलेशनशिप को लेकर चुप्पी तोड़ दी है। कपिल शर्मा के शो में पहुंचे चहल ने खुलकर बताया कि अब उनका रिश्ता किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “अब तो पूरा इंडिया जान चुका है!” जब कपिल शर्मा ने मज़ाकिया अंदाज़ में चहल से उनकी लव लाइफ के बारे में पूछा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “अब ये कोई सीक्रेट नहीं रहा।” चहल के इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि वह वाकई में RJ महवश को डेट कर रहे हैं। हाल ही में युजवेंद्र चहल और RJ महवश की एक साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। दोनों को एक-दूसरे की पोस्ट पर कमेंट करते हुए भी देखा गया है। फैंस पहले से ही कयास लगा रहे थे कि दोनों के बीच कुछ खास चल रहा है। चहल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की बधाइयों की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने लिखा, “आप दोनों की जोड़ी सलामत रहे” तो कुछ ने कहा, “नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं!” क्रिकेट के मैदान पर अपनी फिरकी से हर किसी को चकमा देने वाले चहल अब दिल के मैदान में भी हिट नज़र आ रहे हैं। फैंस को अब उनके शादी के एलान का बेसब्री से इंतजार रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kailash Kher की ज़िंदगी की जंग: कभी 50 रुपए में गाया, आज 15-20 लाख चार्ज करते हैं

Kailash Kher की ज़िंदगी की जंग: कभी 50 रुपए में गाया, आज 15-20 लाख चार्ज करते हैं

मशहूर सिंगर Kailash Kher आज म्यूज़िक इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं, लेकिन उनकी जिंदगी आसान नहीं रही। एक वक्त था जब वो सिर्फ 50 रुपए में गाना गाते थे। संघर्षों से भरे उस दौर में उन्हें कई बार खुद को खत्म करने का ख्याल तक आया। हाल ही में उन्होंने खुलासा किया कि जब उन पर सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का आरोप लगा था, तो वे गहरे डिप्रेशन में चले गए थे और आत्महत्या तक का सोचने लगे थे। “लोगों ने बिना सोचे-समझे मेरे बारे में बातें बनाईं। मुझे कोई मौका ही नहीं मिला अपनी बात कहने का। वो वक्त मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर था,” — कैलाश खेर कैलाश खेर का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ, लेकिन उन्होंने अपना करियर दिल्ली से शुरू किया। म्यूज़िक को अपना सबकुछ मान चुके कैलाश शुरू में जगराते, छोटे-मोटे इवेंट्स में गाया करते थे। उन्हें शुरुआत में सिर्फ 50 रुपए मिलते थे। बॉलीवुड में ब्रेक मिलने के बाद उनका गाना ‘अल्लाह के बंदे’ सुपरहिट हुआ और यहीं से उनकी किस्मत बदल गई। आज कैलाश खेर 15 से 20 लाख रुपए एक शो के लेते हैं। उनकी आवाज़ में सुफियाना टच और देशी मिट्टी की खुशबू लोगों को बेहद पसंद आती है। उन्होंने ना सिर्फ बॉलीवुड बल्कि इंटरनेशनल म्यूज़िक स्टेज पर भी भारत का नाम रोशन किया है। कैलाश खेर की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर आप सच्चे दिल से मेहनत करते हैं तो कामयाबी जरूर मिलती है। “मैं आज भी खुद को उसी छोटे गायक की तरह मानता हूं, बस फर्क इतना है कि अब मेहनत रंग लाई है,” — कैलाश खेर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kubereshwar Dham में शुरू हुआ गुरु पूर्णिमा महोत्सव

Kubereshwar Dham में शुरू हुआ गुरु पूर्णिमा महोत्सव

Kubereshwar Dham में 10 एकड़ में बना भव्य पंडाल, श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठहरने की पूरी व्यवस्था सीहोर – आस्था, भक्ति और श्रद्धा का संगम बना है Kubereshwar Dham, जहां आज से गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। हजारों श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए यहां 10 एकड़ में विशाल वाटरप्रूफ पंडाल बनाया गया है, ताकि मौसम की कोई भी बाधा भक्तों की श्रद्धा के सामने ना आए। गुरु की महिमा में डूबे श्रद्धालु हर साल की तरह इस बार भी गुरु पूर्णिमा के मौके पर कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। लोग देशभर से अपने गुरुओं के दर्शन और आशीर्वाद पाने पहुंचे हैं। माहौल पूरी तरह भक्ति में डूबा हुआ है – कहीं मंत्रोच्चार हो रहे हैं तो कहीं सत्संग, भजन और ध्यान का सिलसिला जारी है। भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी शानदार श्रद्धालुओं के लिए भंडारे और आवास की विशेष व्यवस्था की गई है। दूर-दराज़ से आए भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए स्वयंसेवक दिन-रात सेवा में जुटे हुए हैं। साफ-सफाई, सुरक्षा और मेडिकल सुविधाएं भी जगह-जगह मौजूद हैं। प्राकृतिक सुंदरता में आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम कुबेरेश्वरधाम सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि यह जगह प्राकृतिक शांति और अध्यात्म का अनोखा संगम है। हर साल की तरह इस बार भी यहां आने वाले भक्तों को संतों का सान्निध्य, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और गुरुकृपा का विशेष अनुभव प्राप्त हो रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CUET UG रिजल्ट जारी: डायरेक्ट लिंक से देखें अपनी मार्कशीट, 230+ यूनिवर्सिटी में मिलेगा दाखिला

CUET UG रिजल्ट जारी: डायरेक्ट लिंक से देखें अपनी मार्कशीट, 230+ यूनिवर्सिटी में मिलेगा दाखिला

CUET UG 2025 का इंतजार कर रहे लाखों स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी खबर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने CUET UG का रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है। अब स्टूडेंट्स अपने स्कोरकार्ड डायरेक्ट लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं। यह रिजल्ट उन छात्रों के लिए बेहद खास है जो भारत की टॉप सेंट्रल, स्टेट और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं। CUET UG यानी Common University Entrance Test (Undergraduate) अब देश भर के विश्वविद्यालयों में एडमिशन का सबसे बड़ा गेटवे बन चुका है। इसके जरिए स्टूडेंट्स को एक ही प्लेटफॉर्म से 230 से ज्यादा यूनिवर्सिटी में दाखिला पाने का मौका मिलता है, जिनमें शामिल हैं: https://exams.nta.ac.in/CUET-UG/ (Official NTA Portal) लॉगिन करने के लिए चाहिए: अगर आपने CUET में हिस्सा लिया था, तो देर मत कीजिए — अपना रिजल्ट चेक कीजिए और अपने करियर की नई शुरुआत की तैयारी कीजिए। यह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि आपके सपनों के कॉलेज की पहली सीढ़ी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इंजीनियरिंग से रामलीला और फिर Panchayat तक: 'Sachiv Ji' Jeetu Bhaiya की संघर्ष भरी लेकिन प्रेरणादायक कहानी

इंजीनियरिंग से रामलीला और फिर Panchayat तक: ‘Sachiv Ji’ Jeetu Bhaiya की संघर्ष भरी लेकिन प्रेरणादायक कहानी

आज हर किसी की जुबान पर वेब सीरीज़ ‘Panchayat’ के सचिव जी यानी Jitendra Kumar उर्फ Jeetu Bhaiya का नाम है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सक्सेस के पीछे एक लंबा संघर्ष और कई अनसुने किस्से छिपे हैं। कभी बेरोजगारी से जूझे, रामलीला में ताड़का बने, और फिर एक वीडियो से उनकी किस्मत ने ऐसी करवट ली कि आज OTT का चमकता सितारा बन गए। जितेंद्र कुमार राजस्थान के खैरथल (अलवर) से आते हैं। उन्होंने IIT खड़गपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन मन पढ़ाई में नहीं, मंच पर था। कॉलेज के दौरान ड्रामा सोसायटी से जुड़े और वहीं से एक्टिंग का शौक जुनून में बदल गया। IIT से पास होने के बाद जितेंद्र को कॉर्पोरेट जॉब नहीं मिली। ऐसे में बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने छोटे-छोटे नाटकों में काम किया, यहां तक कि रामलीला में ताड़का जैसे किरदार भी निभाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एक दिन TVF के साथ मिलकर उन्होंने एक वीडियो किया — “Munna Jazbaati: The Q-tiya Intern”। यह वीडियो वायरल हो गया और जीतू भइया की किस्मत यहीं से पलटी। लोग उनके सहज अभिनय और आम चेहरे से जुड़ गए। 2020 में आई वेब सीरीज़ ‘पंचायत’ ने जीतू कुमार को एक अलग मुकाम पर पहुंचा दिया। एक छोटे गांव में पोस्टेड ईमानदार सचिव के किरदार में जितेंद्र ने ऐसा जान डाला कि हर दर्शक को अपना-सा लगा। विनम्र, संवेदनशील और जमीनी सोच वाला सचिव जी हर किसी के दिल में बस गया। जितेंद्र की कहानी लाखों युवाओं को यह सीख देती है कि रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर जुनून हो तो मंज़िल ज़रूर मिलती है। इंजीनियर से एक्टर बनने की उनकी ये यात्रा हौसला भी है और उम्मीद भी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shubman Gill ने रचा इतिहास: भारतीय कप्तान के तौर पर बनाए सबसे ज्यादा रन

Shubman Gill ने रचा इतिहास: भारतीय कप्तान के तौर पर बनाए सबसे ज्यादा रन

भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे Shubman Gill ने इंग्लैंड की सरज़मीं पर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे अब तक सिर्फ दिग्गजों के नाम से जाना जाता था। उन्होंने सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। शुभमन ने न केवल इंग्लैंड में सबसे ज्यादा रन बनाए, बल्कि बतौर भारतीय कप्तान भी एक सीरीज में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया है। इस शानदार पारी से उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह भारतीय क्रिकेट का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान के चमकते सितारे भी हैं। “जिस तरह कोहली ने तेंदुलकर का स्थान लिया था, वैसे ही शुभमन अब कोहली की जगह लेने को तैयार हैं!” शुभमन गिल का यह प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया मोड़ है। उन्होंने न केवल बल्ले से जवाब दिया, बल्कि कप्तानी में भी परिपक्वता दिखाई। उनके इस प्रदर्शन से युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी और देश को एक नया लीडर मिल गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RAJA की बहन सृष्टि पर FIR दर्ज: असम पुलिस ने उठाया कदम

RAJA की बहन सृष्टि पर FIR दर्ज: असम पुलिस ने उठाया कदम

RAJA की बहन ने भाई की मौत को बताया ‘नरबलि’ – धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप एक भावुक बहन ने जब अपने भाई की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए, तो मामला अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। असम पुलिस ने RAJA की बहन सृष्टि रॉय के खिलाफ FIR दर्ज की है। सृष्टि ने एक वीडियो में दावा किया था कि उसके भाई राजा की हत्या एक ‘नरबलि’ (मानव बलिदान) के तहत की गई। इस बयान को लेकर धार्मिक भावनाएं भड़कने का आरोप लगा है। राजा रॉय चौधरी की रहस्यमयी मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनकी बहन सृष्टि का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि “मेरे भाई की हत्या किसी साधारण कारण से नहीं हुई, ये एक नरबलि थी।” यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में। असम पुलिस का कहना है कि सृष्टि का बयान समाज में धार्मिक तनाव फैला सकता है। FIR में IPC की धारा 295A (धार्मिक भावनाएं भड़काना) समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने कहा कि साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और बयान की सच्चाई की जांच की जाएगी। सृष्टि का कहना है कि उसे न्याय चाहिए। “मेरे भाई की मौत की असल वजह अब तक छुपाई जा रही है। अगर मैं आवाज़ न उठाऊं, तो और कितने राजा ऐसे ही चुपचाप मर जाएंगे?” सृष्टि ने यह भी कहा कि वह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, लेकिन जो सच है, उसे सामने लाना जरूरी है। कुछ लोग सृष्टि के समर्थन में खड़े हैं और कह रहे हैं कि उसे बोलने का हक है। वहीं, कई लोग मानते हैं कि इस तरह के बयानों से समाज में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी कैबिनेट की बड़ी सौगात: ELI Scheme को मंजूरी, 2 साल में 3.5 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार

मोदी कैबिनेट की बड़ी सौगात: ELI Scheme को मंजूरी, 2 साल में 3.5 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार

देश में बेरोजगारी की बड़ी चुनौती को देखते हुए मोदी सरकार ने युवाओं के लिए एक बड़ी पहल की है। कैबिनेट ने मंगलवार को Employment Linked Incentive (ELI) Scheme को हरी झंडी दे दी है। सरकार का दावा है कि इस योजना से अगले दो सालों में 3.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। इस योजना का मकसद कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी देने के लिए प्रेरित करना है। यानी अगर कोई कंपनी नए कर्मचारियों को नौकरी देती है, तो सरकार उस पर इंसेंटिव देगी। इससे प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी के नए अवसर खुलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। सरकार का कहना है कि यह स्कीम देश के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, खासकर उन राज्यों में जहां रोजगार की कमी है। सरकार कैसे करेगी मदद? सरकार का ये कदम ना सिर्फ रोजगार बढ़ाएगा बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jabalpur - ‘सरप्राइज’ के नाम पर सहेली ने बुलाया, तेजाब फेंककर झुलसा दिया चेहरा

Jabalpur – ‘सरप्राइज’ के नाम पर सहेली ने बुलाया, तेजाब फेंककर झुलसा दिया चेहरा

मध्यप्रदेश के Jabalpur से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक युवती पर उसकी ही जान-पहचान वाली लड़की ने एसिड फेंक दिया। दर्दनाक बात ये है कि आरोपी लड़की ने पीड़िता को “सरप्राइज है” कहकर घर के बाहर बुलाया और उस पर तेजाब फेंक दिया। घटना में पीड़िता का चेहरा और शरीर का लगभग 50% हिस्सा झुलस गया है। घटना शनिवार देर रात की है। पीड़िता अपने घर में थी तभी उसकी एक जानने वाली लड़की ने फोन किया और कहा कि वह उसे कुछ ‘सरप्राइज’ देना चाहती है। जैसे ही पीड़िता बाहर आई, आरोपी ने उस पर तेजाब फेंक दिया और मौके से फरार हो गई। चीख-पुकार सुनकर परिवार वाले और पड़ोसी बाहर आए और तुरंत युवती को अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर्स के मुताबिक उसकी हालत गंभीर है और इलाज जारी है। फिलहाल पुलिस आरोपी लड़की से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों के बीच किसी बात को लेकर आपसी विवाद था। पुलिस इस मामले में व्यक्तिगत रंजिश और साजिश दोनों एंगल से जांच कर रही है। यह घटना फिर से ये सवाल खड़ा करती है कि आखिर एसिड अटैक जैसे अपराध क्यों नहीं थम रहे? क्या यह सिर्फ एक सस्ती जलन या नफरत है, जो किसी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है? ऐसी घटनाएं समाज को झकझोर देती हैं। अब ज़रूरत है कि एसिड की बिक्री पर सख्ती से रोक लगे और ऐसे अपराधियों को तुरंत और कड़ी सज़ा दी जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand में बारिश ने मचाई तबाही: देहरादून में मकान ढहे, लोगों के घरों में घुसा मलबा और पानी

Uttarakhand में बारिश ने मचाई तबाही: देहरादून में मकान ढहे, लोगों के घरों में घुसा मलबा और पानी

Uttarakhand में मानसून की पहली भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। खासतौर पर देहरादून में हालात काफी चिंताजनक हो गए हैं। तेज बारिश की वजह से कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। देहरादून के कई इलाकों में नालों का पानी उफान पर आ गया, जिससे कुछ मकान बह गए और कई घरों में पानी घुस गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, देर रात से लगातार तेज बारिश हो रही थी। सुबह होते-होते पानी ने रौद्र रूप ले लिया। कुछ लोगों ने जैसे-तैसे अपने परिवार को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया, लेकिन कई घरों का सामान पूरी तरह से खराब हो गया। देहरादून के टर्नर रोड, डालनवाला, और कांवली जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। कई जगह सड़कों पर मलबा भर गया है और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी अनीता देवी बताती हैं, “रात को अचानक पानी घर में घुस आया। बच्चों को उठाकर बाहर भागे। सारा सामान भीग गया। बहुत डर लग रहा है।”दूसरे निवासी राकेश भट्ट ने कहा, “हर साल यही हाल होता है, लेकिन इस बार पानी बहुत तेज था। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा घर बह जाएगा।” जिला प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। SDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं और खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। स्कूलों को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदियों और नालों के आसपास न जाएं और जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन नंबरों से संपर्क करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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INDIA Block Rally

INDIA Block Rally: दिल्ली के कारोबारियों का दावा, ₹11,000 करोड़ का नुकसान; 2.5 लाख दुकानें बंद

दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA Block Rally अब राजनीतिक चर्चा के साथ व्यापारिक विवाद का भी कारण बन गई है। दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि 1 नवंबर को हुई इस रैली के चलते राजधानी के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के मुताबिक, दिल्ली के 20 से 25 प्रमुख बाजारों में लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि यह आयोजन दिवाली से ठीक पहले हुआ। इस समय बाजारों में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रहती है और दुकानदारों को त्योहारी सीजन में बेहतर बिक्री की उम्मीद होती है। लेकिन कारोबारियों का कहना है कि रैली के कारण ट्रैफिक, ग्राहकों की आवाजाही और सामान की सप्लाई पर असर पड़ा। इस मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। राहुल गांधी ने दिल्ली में दुकानें बंद होने के लिए बीजेपी पर आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने व्यापारियों के नुकसान के आंकड़ों पर सवाल उठाए। दूसरी तरफ CTI का कहना है कि उसका मकसद किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यापारियों की परेशानी सामने रखना है। 2.5 लाख दुकानें बंद, दिल्ली के 25 बाजारों में कारोबार प्रभावित CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास लगभग 20 से 25 बड़े बाजार हैं। इन बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें मौजूद हैं। संगठन का दावा है कि इनमें से लगभग 2.5 लाख दुकानें रैली वाले दिन बंद रहीं। प्रभावित बाजारों में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, भागीरथ पैलेस, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज और दरियागंज जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाके शामिल हैं। व्यापारियों का कहना है कि रैली के दौरान भीड़ और ट्रैफिक की आशंका के चलते कई दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोलीं। वहीं, जो दुकानें खुली थीं, वहां भी ग्राहकों की संख्या कम रही। इससे खासतौर पर छोटे व्यापारियों और रोजाना बिक्री पर निर्भर दुकानदारों को परेशानी हुई। ₹11,000 करोड़ का नुकसान, किस कारोबार पर कितना असर? CTI ने अपने अनुमान में बताया है कि रैली के कारण सिर्फ बाजारों में बिक्री ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की कमाई पर भी असर पड़ा। व्यापारिक संगठन के अनुसार नुकसान का अनुमान इस प्रकार है: कारोबार का क्षेत्र अनुमानित नुकसान रिटेल और होलसेल व्यापार ₹8,800 करोड़ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स ₹1,500 करोड़ होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन ₹500 करोड़ असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मजदूर ₹200 करोड़ कुल अनुमानित नुकसान ₹11,000 करोड़ CTI का कहना है कि सबसे ज्यादा असर खुदरा और थोक कारोबार पर पड़ा। हालांकि, यह पूरा आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है। नुकसान की स्वतंत्र आर्थिक पुष्टि सामने नहीं आई है। 5,000 मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर असर दिल्ली के बाजारों में रोजाना बड़ी मात्रा में सामान पहुंचता है। इसके लिए ट्रक, टेंपो और दूसरे मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। CTI के मुताबिक, दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब 5,000 मालवाहक वाहन बाजारों तक सामान पहुंचाते हैं। इनमें नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी और मुंडका जैसे औद्योगिक इलाके शामिल हैं। संगठन का दावा है कि रैली के कारण कई रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ, जिससे सामान की लोडिंग-अनलोडिंग और डिलीवरी में परेशानी आई। दिल्ली से NCR और दूसरे शहरों में सामान पहुंचाने वाले वाहनों के संचालन पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। कारोबारियों की चिंता यह है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले सप्लाई में देरी होने से दुकानों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। दिल्ली के बाहर से खरीदारी करने नहीं पहुंचे ग्राहक दिल्ली के चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे बाजारों में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। CTI के अनुसार, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ सहित करीब 100 शहरों से रोजाना 3 से 4 लाख ग्राहक दिल्ली के बाजारों में पहुंचते हैं। संगठन का दावा है कि रैली के दिन ट्रैफिक और बाजारों की स्थिति को देखते हुए कई ग्राहक दिल्ली नहीं पहुंचे। इसका असर थोक और खुदरा व्यापार दोनों पर पड़ा। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की कमाई भी प्रभावित रैली के कारण होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन कारोबार प्रभावित होने का दावा भी CTI ने किया है। संगठन के मुताबिक, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज और चांदनी चौक जैसे इलाकों में होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग पर असर पड़ा। लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसे पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की संख्या कम रहने की बात भी कही गई है। इसका असर सिर्फ बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहा। ऑटो चालक, ई-रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी वाले, लोडर और दिहाड़ी मजदूर भी रोजाना की कमाई के लिए ग्राहकों और बाजारों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कारोबार प्रभावित होने से उनकी आमदनी पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। रैली से पहले ही तारीख बदलने की मांग कर चुके थे व्यापारी CTI ने दावा किया कि व्यापारिक संगठनों ने रैली से पहले ही कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर आयोजन की तारीख बदलने की अपील की थी। व्यापारियों का कहना था कि दिवाली से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में रामलीला मैदान में बड़ी रैली होने से पुराने दिल्ली के बाजारों में ट्रैफिक और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। संगठन ने रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने या किसी दूसरे स्थान पर कार्यक्रम करने का सुझाव भी दिया था। हालांकि, रैली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 नवंबर को ही हुई। Rahul Gandhi ने बीजेपी पर लगाया दुकानें बंद करवाने का आरोप रैली के बाद राहुल गांधी कनॉट प्लेस पहुंचे और वहां स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील की। उन्होंने लोगों से छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों का समर्थन करने को कहा। इस दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बीजेपी ने दुकानें जबरन बंद करवाई हैं। उनका कहना था कि रैली में आए लोगों को बाजारों में खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। वहीं, व्यापारियों के नुकसान के दावों पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए। उन्होंने कारोबार अच्छा रहने की बात कही। इस तरह बाजारों...
INDIA गठबंधन

Indian Politics: INDIA गठबंधन की रैली के बाद BJP का पलटवार, राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

देश की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ गया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली के बाद अब बीजेपी ने भी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया है। इसी के साथ पार्टी ने 2 नवंबर को देश के कई शहरों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ (Loktantra Bachao, Arajakta Hatao) अभियान के तहत पदयात्राएं और विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। इस अभियान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनाव आयोग के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि खराब कर रहे हैं। दूसरी तरफ, राहुल गांधी और विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के नाम पर मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली की रैली के बाद BJP का जवाबी हमला दरअसल, 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की थी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे। रैली में नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे आम मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष की इसी रैली के अगले दिन बीजेपी ने देशभर में अपना विरोध अभियान शुरू कर दिया। पार्टी इसे ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दे रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। Amit Shah Hyderabad में निकालेंगे BJP का March बीजेपी के इस अभियान में अमित शाह की हैदराबाद पदयात्रा सबसे अहम कार्यक्रमों में शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री 2 नवंबर को हैदराबाद में पार्टी के मार्च का नेतृत्व करेंगे। यह पदयात्रा दोपहर करीब 3 बजे निजाम कॉलेज के सामने डॉ. बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से शुरू होगी। इसके बाद मार्च आबिड्स इलाके से होते हुए शाम करीब 6 बजे मोजमजाही मार्केट पहुंचेगा। तेलंगाना बीजेपी ने इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की हैं। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव भी आयोजन से जुड़ी तैयारियों में सक्रिय रहे हैं। मार्च को देखते हुए हैदराबाद के कुछ प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था भी की गई है। Nitin Nabin बिहार और बंगाल में संभालेंगे कमान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी इस अभियान के तहत बिहार और पश्चिम बंगाल में पदयात्रा करेंगे। बिहार के भागलपुर में सुबह करीब 11 बजे लाजपत पार्क से मार्च शुरू होकर सेवा ज्योति चौक तक जाएगा। इसके बाद वह कोलकाता पहुंचेंगे, जहां दोपहर 3 बजे कॉलेज स्ट्रीट से पदयात्रा निकाली जाएगी। यह मार्च धर्मतला और एस्प्लेनेड की ओर बढ़ेगा। बीजेपी इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों का जवाब देने और अपने पक्ष को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है। हरियाणा में भी BJP ने निकाली पदयात्रा बीजेपी का यह अभियान 1 नवंबर को भी कई शहरों में देखने को मिला। हरियाणा के रोहतक में नितिन नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकाला। वहीं, फरीदाबाद में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पदयात्रा की अगुवाई की। फरीदाबाद में मार्च बीके चौक से शुरू होकर हार्डवेयर चौक तक पहुंचा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर समेत कई स्थानीय नेता और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रहा है। 1984 के सिख दंगों को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बीजेपी ने INDIA गठबंधन की रैली को लेकर 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर की तारीख सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए बेहद संवेदनशील है। ऐसे दिन रैली आयोजित करने को लेकर उन्होंने कांग्रेस से सवाल किए। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस पर इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। हालांकि, विपक्ष की रैली का मुख्य एजेंडा SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली था। Sambit Patra ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर साधा निशाना बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष की रैली पर सवाल उठाए। उन्होंने रैली में जुटी भीड़ और कांग्रेस के दावों को लेकर अपनी आपत्ति जताई। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा कर रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन की रैली में चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि चुनाव में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। 30 नवंबर तक चलेगा BJP का अभियान बीजेपी ने अपने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को अलग-अलग चरणों में चलाने की योजना बनाई है। पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार, पहला चरण 5 नवंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी कई बड़े नेताओं को पदयात्राओं की जिम्मेदारी दी गई है। 3 नवंबर को शिवराज सिंह चौहान और जेपी नड्डा अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम करेंगे। 4 नवंबर को नितिन नवीन, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। वहीं, 5 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में पदयात्रा करेंगे। हरियाणा के करनाल में भी 5 नवंबर को अमित शाह के शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। क्या है SIR विवाद, जिस पर आमने-सामने हैं BJP और कांग्रेस? इस पूरे राजनीतिक विवाद की सबसे बड़ी वजह चुनाव आयोग की Special Intensive...

इंदौर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, मोहन भागवत समेत 408 पदाधिकारी संगठन के विस्तार पर करेंगे मंथन

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को डेली कॉलेज में शुरू हो गई। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह सहित देशभर के करीब 408 प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए हैं। 4 नवंबर तक चलने वाली इस बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा होगी। संघ के मुताबिक, पिछले एक साल में देशभर में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं और 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। 1.01 लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में संघ के 11 क्षेत्र और 46 प्रांतों से संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक शामिल हुए हैं। अंतिम दिन विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। आंबेकर के अनुसार, देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। सुनील आंबेकर के मुताबिक, शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ-दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडल स्तर पर सम्मेलन हुए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी आयोजन किए गए। उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज की ओर से समर्थन मिला। कई लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की है। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता की समीक्षा होगी। महिलाओं और युवाओं को जोड़ने पर चर्चा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी भी रही। अब इस अनुभव के आधार पर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान संघ की पिछली दो-तीन बैठकों में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई थी। इस बार भी यह विषय बैठक के एजेंडे में शामिल है। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार होगा। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम करने की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। पंच परिवर्तन के पांच विषयों पर बनेगी कार्ययोजना शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषय समाज के सामने रखे हैं। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैठक में इन पांचों विषयों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। अलग-अलग प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नए अभियान चलाने पर भी विचार होगा। सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर जन-जागरण की तैयारी बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जन-जागरण को लेकर भी चर्चा होगी। सुनील आंबेकर के मुताबिक, संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण और जानकारी लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा।
Rajasthan

Rajasthan Accident: झुंझुनूं में बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत

राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान हुए हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि सड़क बनाने के काम में लगी एक मशीन अचानक 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलते ही आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। जिन परिवारों के सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए काम पर निकले थे, उनके घरों में मातम छा गया। वहीं, घटना से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर धरना शुरू कर दिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। Jhunjhunu Accident: सड़क निर्माण के दौरान कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में कदम कुंड की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था। सोमवार को भी मजदूर सड़क बनाने के काम में जुटे हुए थे। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली रोड़ी और बजरी मिलाने की मशीन ऊपर से गुजर रही 11 KV हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। बिजली के तार से संपर्क होते ही मशीन में करंट फैल गया। आसपास काम कर रहे मजदूर भी इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे। शुरुआती खबरों में पांच मजदूरों की मौत और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, बाद की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ बताई गई। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में भी अंतर सामने आया है। 8 मजदूरों की मौत से गांव में पसरा मातम इस हादसे में आठ मजदूरों की जान चली गई। वहीं, करंट की चपेट में आए अन्य लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। एक साथ इतने मजदूरों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर गहरा दुख और नाराजगी है। फिलहाल घायलों के इलाज और मृतकों के परिवारों को मिलने वाली सहायता पर सबकी नजर बनी हुई है। ग्रामीणों का गुस्सा, धरने पर बैठे लोग हादसे के बाद छापोली गांव के ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए धरना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि जब निर्माण स्थल के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही थी, तो वहां मशीन से काम कराने से पहले सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही कैसे हुई। लोग चाहते हैं कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। CM भजनलाल शर्मा ने लिया हादसे का संज्ञान झुंझुनूं में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की ओर से घटना की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। अब प्रशासनिक जांच के जरिए हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है। अशोक गहलोत ने उठाई जांच और मुआवजे की मांग राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने घटना की जांच कराने और मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। गहलोत का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Construction Safety पर फिर उठे सवाल झुंझुनूं का यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान कई बार मजदूरों को बिजली की हाईटेंशन लाइनों के आसपास काम करना पड़ता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और मशीन हाईटेंशन लाइन के संपर्क में कैसे आई? प्रशासन की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे। फिलहाल आठ मजदूरों की मौत से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण धरने पर बैठे हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय तथा उचित सहायता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Omar Abdullah

Omar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के करीब 25 विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने और सरकार के कामकाज से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर इस दौरान मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ विधायकों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाएंगे? 25 विधायकों की नाराजगी, 14 दिन में फैसला लेने की मांग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने बैठक कर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी रखी। बताया जा रहा है कि इस समूह में करीब 25 विधायक शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि अन्य ने ऑनलाइन अपनी बात रखी। विधायकों की शिकायत है कि सरकार में महत्वपूर्ण फैसले लेने के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बराबर महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार के कामकाज में ज्यादा भागीदारी मिलनी चाहिए। इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापसी की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। Cabinet Expansion के बाद क्यों बिगड़ा मामला? दरअसल, 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें भी मंत्री पद या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं। नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में सभी विधायकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। नाराज विधायकों ने रखीं ये बड़ी मांगें असंतुष्ट विधायकों की मांग सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं बताई जा रही है। वे सरकार और पार्टी के कामकाज में बड़े बदलाव चाहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं: इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है, इस पर अब सबकी नजर है। Aga Syed Ruhullah के रुख से भी बढ़ी मुश्किल नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए परेशानी का एक और कारण श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में उनके 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान का भी जिक्र है। उनका विरोध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक मुद्दों और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी के रुख से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है। Jammu Kashmir Assembly में क्या है बहुमत का गणित? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया था। अगर 25 विधायक वास्तव में सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले पर कायम रहते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे सरकार गिरने की स्थिति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विधायकों का औपचारिक फैसला, विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या और बहुमत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अब उमर अब्दुल्ला क्या करेंगे? इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। नाराज विधायकों को मनाना, कैबिनेट विस्तार पर उठे सवालों का जवाब देना और पार्टी के चुनावी वादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना नेतृत्व के लिए अहम होगा। फिलहाल 14 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बातचीत से मामला सुलझाता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में समर्थन वापसी को लेकर कोई नया मोड़ आता है। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का फैसला न सिर्फ उमर अब्दुल्ला सरकार बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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