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US

US Sanctions Law 2025 रूस से तेल खरीदने पर 500% Tariff का खतरा

अमेरिका ने रूस के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए “Sanctioning Russia Act 2025” को हरी झंडी दे दी है। इस नए कानून की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत रूस से तेल और ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।इस फैसले का असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि India, China, Brazil जैसे देशों और पूरी दुनिया के Stock Market पर भी दिखने लगा है। US Sanctions Law 2025 क्या है? (What is Sanctioning Russia Act?) इस कानून का मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, ताकि उसकी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर रोक लग सके।अमेरिका का मानना है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। इसी वजह से अमेरिका अब ऐसे देशों पर: India पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है? भारत पिछले कुछ समय से रूस से कच्चा तेल सस्ते दामों पर खरीद रहा है। इससे: लेकिन अगर अमेरिका ने यह 500% Tariff लागू कर दिया, तो: यानी सस्ता तेल मिलने का फायदा कहीं महंगा न पड़ जाए। Stock Market क्यों गिरा? (Market Fall Reasons) इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में डर साफ दिखा। असल में बाजार को सबसे ज्यादा डर अनिश्चितता (Uncertainty) का है। निवेशक नहीं जानते कि यह कानून कब और कितनी सख्ती से लागू होगा। Global Oil Market में क्या बदलेगा? अगर रूस से तेल खरीदना मुश्किल हुआ तो: हालांकि इसी बीच अमेरिका ने Venezuela Oil Sanctions में राहत के संकेत दिए हैं, जिससे भारत को कुछ वैकल्पिक रास्ते मिल सकते हैं। यह भारत के लिए एक छोटी लेकिन अहम राहत मानी जा रही है। India-US Relations पर असर पड़ेगा? भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन यह कानून दोनों देशों के रिश्तों की परीक्षा ले सकता है।अब भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं: आने वाले दिनों में Diplomatic Talks और Trade Negotiations तेज होने की संभावना है। आगे क्या हो सकता है? (What’s Next?) अभी यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी संसद में आगे की प्रक्रिया बाकी है।लेकिन इतना तय है कि: निवेशकों और सरकारों – दोनों को अब हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kolkata

Kolkata ED Raid IPAC Chief Prateek Jain के घर और ऑफिस पर कार्रवाई, ममता बनर्जी ने जताया गुस्सा

Kolkata में आज IPAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और उनके सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस पर Enforcement Directorate (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित money laundering और financial irregularities की जांच के तहत की जा रही है। सुबह से ED की टीम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी现场 पहुंचीं। उन्होंने ED के अधिकारियों से बातचीत की और मीडिया के सामने इसे राजनीतिक targeting करार दिया। ममता ने कहा कि ED केवल IPAC से TMC के अंदरूनी दस्तावेज और sensitive जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि केंद्र की एजेंसियां राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में सीधे हस्तक्षेप कर रही हैं। ममता बनर्जी की यह कदम भावनात्मक और साहसिक दोनों नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि TMC और उसके सहयोगियों को दबाव में लाने की यह कोशिश चुनावों से पहले की गई है। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने इस मामले को TMC पर आरोप लगाने का मौका बताया। उनका कहना है कि ममता और उनकी पार्टी अनियमितताओं को छिपा रही हैं। बीजेपी ने इसे accountability और governance से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि IPAC जैसी राजनीतिक consultancy कंपनियों की कार्रवाई अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। IPAC चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए उनके financial records पर जांच राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। इस ED छापेमारी ने राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक developments पर सभी की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Administration का Global Exit UN और International Organizations से अमेरिका बाहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) ने एक ऐतिहासिक और विवादित कदम उठाते हुए United States of America (USA) को 66 संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (International Organizations) से बाहर निकालने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये संस्थाएं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों और आर्थिक प्राथमिकताओं के खिलाफ हैं। यह कदम अमेरिका की वैश्विक भूमिका में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है और दुनिया भर के देशों की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हैं। किन संगठनों से हटेगा अमेरिका? इस निर्णय में शामिल हैं: प्रमुख संस्थाएं जिनसे अमेरिका हट रहा है: ट्रंप प्रशासन का तर्क व्हाइट हाउस का कहना है कि ये संगठन: प्रशासन का मानना है कि इन संगठनों में खर्च होने वाले संसाधनों को घरेलू प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित किया जाएगा। प्रक्रिया और समयसीमा अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया भर में इस फैसले की आलोचना की गई है: व्यापक संदर्भ ट्रंप प्रशासन की “America First” नीति लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूरी बनाए रखने की कोशिश रही है। इससे पहले भी अमेरिका: से बाहर निकल चुका है या उनकी फंडिंग रोक चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न केवल अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा मोड़ है, बल्कि वैश्विक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी असर डाल सकता है। आने वाले महीनों में इस कदम के दीर्घकालिक परिणाम साफ होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Police

Security Alert के बीच Delhi Police की बड़ी कार्रवाई 20 Bangladeshi नागरिक पकड़े गए

राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Delhi Police ने बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जो बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे थे। खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई Delhi Police अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और सत्यापन अभियान के आधार पर की गई। लंबे समय से कुछ इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से यह ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान पकड़े गए सभी 20 लोग पासपोर्ट, वीज़ा या वैध रहने से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। SIR से पहले बढ़ी सख्ती बताया जा रहा है कि यह अभियान Special Intelligence Review (SIR) से पहले चलाए जा रहे व्यापक सत्यापन ड्राइव का हिस्सा है। इस दौरान दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अन्य एजेंसियां सतर्कता के साथ जांच कर रही हैं। FRRO को सौंपे जाएंगे आरोपी Delhi Police ने सभी हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिकों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए Foreigners Regional Registration Office (FRRO) को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद Foreigners Act और Immigration Laws के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शामिल है। अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Zero Tolerance Policy अपनाई गई है। आने वाले दिनों में दिल्ली और एनसीआर के अन्य इलाकों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। आम लोगों से सहयोग की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से या बिना पहचान के रह रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आम जनता का सहयोग ऐसे अभियानों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vedanta Group

Vedanta Group Agnivesh Agarwal का न्यूयॉर्क में निधन, अनिल अग्रवाल ने जताया गहरा दुख

वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal) का निधन हो गया है। वह 49 वर्ष के थे। यह दुखद घटना अमेरिका के न्यूयॉर्क में हुई, जहां इलाज के दौरान उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। उनके निधन की खबर सामने आते ही देश और दुनिया के कारोबारी जगत में शोक की लहर दौड़ गई। इलाज के दौरान हुआ निधन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्निवेश अग्रवाल कुछ समय पहले अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक हादसे में घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह खबर किसी गहरे सदमे से कम नहीं है। पिता का दर्द छलका बेटे को खोने के बाद अनिल अग्रवाल का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा कि यह उनकी जिंदगी का “सबसे अंधकारमय दिन” है। उन्होंने कहा कि अग्निवेश सिर्फ उनके बेटे नहीं थे, बल्कि एक अच्छे दोस्त, मार्गदर्शक और परिवार की मजबूत कड़ी थे। अनिल अग्रवाल ने यह भी कहा कि वे अपने बेटे के सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे। कौन थे Agnivesh Agarwal अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन सहित समूह की कई कंपनियों से जुड़े हुए थे। उन्होंने मायो कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की थी और कम उम्र में ही बिजनेस की गहरी समझ विकसित कर ली थी। वे शांत स्वभाव, दूरदर्शी सोच और आधुनिक नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। देश-विदेश से श्रद्धांजलि अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन पर उद्योग जगत, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। कई लोगों ने इसे भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ी और अपूरणीय क्षति बताया है। एक व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति यह सिर्फ एक बिजनेस लीडर का जाना नहीं है, बल्कि एक बेटे, एक परिवार के सदस्य और एक इंसान का असमय चले जाना है। अनिल अग्रवाल परिवार इस समय गहरे दुख में है और उन्होंने सभी से इस कठिन घड़ी में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold और Silver के भाव आज 7 जनवरी 2026 में सोना और चांदी की कीमतें

7 जनवरी 2026 को भारत में Gold और Silver के भाव में हल्की तेजी देखी गई है। निवेशकों की बढ़ती रुचि और वैश्विक मार्केट की स्थिति के कारण सोना और चांदी दोनों ही उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। सोने (Gold) का भाव आज आज 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹13,880–₹13,948 प्रति ग्राम के बीच है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹12,700–₹12,785 प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। 18 कैरेट सोना भी ₹10,410–₹10,461 प्रति ग्राम के आसपास मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक निवेश की मांग, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और मुद्रास्फीति पर निर्भर करता है। चांदी (Silver) का भाव चांदी का भाव आज लगभग ₹2,53,000 प्रति किलोग्राम है, यानी लगभग ₹253/ग्राम। कुछ मार्केट रिपोर्ट्स में इसे ₹2,59,000 तक भी बताया गया है। चांदी आज स्थिर स्थिति में है और निवेशकों की नजर इसके रुझान पर बनी हुई है। मार्केट का मूड सोना और चांदी दोनों ही आज स्टेबल ट्रेडिंग में हैं। सोने में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि चांदी का भाव स्थिर और थोड़ा ऊपर है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि मेकिंग चार्ज, स्थानीय टैक्स और मार्केट ट्रेंड्स पर ध्यान दें। निवेशकों के लिए सुझाव निष्कर्ष आज का बाजार Gold और Silver के लिए मजबूत दिख रहा है। छोटे उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहकर ही निर्णय लेना चाहिए।
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Stray Dogs

Stray Dogs in Delhi NCR सुप्रीम कोर्ट की आज की Hearing और Guidelines

दिल्ली‑एनसीआर में stray dogs (आवारा कुत्तों) की बढ़ती संख्या ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट आज, 7 जनवरी 2026, को सुनवाई कर रहा है। मामला सिर्फ दिल्ली‑एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों के management और human safety से जुड़ा हुआ है। Supreme Court की Hearing: क्या हुआ आज? सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया) ने मामले में कहा कि इतनी सारी applications इतनी गंभीरता से दायर होना असामान्य है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आवारा कुत्तों के मामले में human safety और animal rights दोनों का संतुलन जरूरी है। कोर्ट ने आज सुनवाई में यह बात भी उठाई कि राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज भी आवारा कुत्तों के हमले के शिकार हो चुके हैं, जिसमें एक अभी भी गंभीर चोटों से जूझ रहा है। पिछले Orders और Controversy सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह निर्देश दिए थे कि: हालांकि, इस दिशा में कुछ लोगों और local authorities के बीच विवाद भी सामने आया। डॉग लवर्स ने कहा कि animal rights की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और humane तरीके से ही कुत्तों को relocate किया जाए। Pet Lovers और Activists की प्रतिक्रिया डॉग लवर्स और animal activists का कहना है कि आवारा कुत्तों को हटाने की प्रक्रिया मानवता और statutory rules के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। दिल्ली के जंतर मंतर पर भी कई प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लेने की मांग की गई। Government Agencies की तैयारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली और NCR की municipal agencies ने आवारा कुत्तों के management के लिए कदम उठाए हैं। Case की जटिलता यह मामला केवल local issue नहीं है। पूरे देश में stray dog management को लेकर awareness और legal framework की जरूरत महसूस की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक जो orders दिए हैं, उनके पालन की जिम्मेदारी municipal authorities और government agencies पर है। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है। अगले आदेश में यह तय किया जा सकता है कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL

IPL से World Cup तक विवाद Mustafizur Rahman, BCCI और Bangladesh के बीच टकराव पर ICC की नजर

T20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने खेल से ज़्यादा राजनीति और कूटनीति को सुर्खियों में ला दिया है। यह पूरा मामला जुड़ा है बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान, IPL, BCCI, BCB और ICC से। विवाद की शुरुआत कहां से हुई? IPL 2026 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने मुस्ताफिज़ुर रहमान को लगभग 9 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद, BCCI के निर्देश पर KKR को उन्हें रिलीज़ करना पड़ा। इस फैसले ने न सिर्फ क्रिकेट जगत को चौंकाया, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी तनाव पैदा कर दिया। BCCI ने आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेदों से जोड़ा गया। मुस्ताफिज़ुर रहमान की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुस्ताफिज़ुर रहमान ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया। बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटरों के अनुसार, वह स्थिति को शांत मन से देख रहे हैं और अपने खेल पर फोकस बनाए हुए हैं। IPL के मौजूदा नियमों के अनुसार, चूंकि खिलाड़ी को फ्रेंचाइज़ी की गलती या अनुशासनहीनता के कारण नहीं हटाया गया, बल्कि बोर्ड के निर्देश पर रिलीज़ किया गया, इसलिए उन्हें किसी तरह के मुआवज़े की संभावना भी नहीं के बराबर है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का सख्त रुख मुस्ताफिज़ुर को IPL से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने कड़ा ऐतराज़ जताया। BCB का कहना है कि: इतना ही नहीं, बांग्लादेश में कथित तौर पर IPL के टीवी प्रसारण पर रोक लगा दी गई, जिससे यह विवाद और गंभीर हो गया। ICC की दो टूक नीति अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने इस पूरे मामले में साफ रुख अपनाया है। ICC का कहना है कि: हालांकि ICC इस समय BCCI और BCB के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है ताकि टूर्नामेंट बिना किसी बड़े व्यवधान के हो सके। वर्ल्ड कप पर मंडराता खतरा अगर यह विवाद नहीं सुलझता है, तो इसके असर दूरगामी हो सकते हैं: फिलहाल क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें ICC के अगले कदम और बांग्लादेश के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। खेल से आगे निकल चुका है मामला यह विवाद अब सिर्फ एक खिलाड़ी या IPL कॉन्ट्रैक्ट तक सीमित नहीं रहा। यह साफ दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कई बार राजनीति और कूटनीति से अलग नहीं रह पाता। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेल की भावना के साथ आगे बढ़ता है या विवादों की छाया में। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

Maharashtra Politics अंबरनाथ नगर परिषद में BJP-Congress की जोड़ी, शिंदे गुट हाशिये पर

महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ नगर परिषद से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। जिन पार्टियों को देश की राजनीति में एक-दूसरे का कट्टर विरोधी माना जाता है, वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस इस बार स्थानीय स्तर पर एक साथ नजर आईं। इस गठबंधन का नतीजा यह हुआ कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर रहना पड़ा। अंबरनाथ में क्या बदला? अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 सीटें हैं। हालिया चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। आम तौर पर माना जा रहा था कि शिवसेना यहां परिषद पर नियंत्रण बनाएगी, लेकिन राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए। BJP ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इस गठबंधन को स्थानीय स्तर पर “Ambernath Vikas Aghadi” नाम दिया गया। इसके बाद परिषद की सत्ता शिवसेना के हाथ से निकल गई। BJP-Congress गठबंधन क्यों है चर्चा में? यह गठबंधन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि BJP लंबे समय से “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा देती रही है। ऐसे में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गया है। स्थानीय BJP नेताओं का कहना है कि यह फैसला शहर के विकास और स्थिर प्रशासन को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि नगर परिषद में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। Shinde Sena की नाराज़गी शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्हें सत्ता से बाहर रखना जनादेश का अपमान है। शिंदे गुट ने BJP पर “अवसरवादी राजनीति” करने का आरोप भी लगाया है। स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है, और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है। महाराष्ट्र Politics पर क्या असर पड़ेगा? अंबरनाथ का यह राजनीतिक प्रयोग सिर्फ एक नगर परिषद तक सीमित नहीं माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक: अंबरनाथ नगर परिषद में बना BJP-Congress Alliance यह दिखाता है कि स्थानीय राजनीति में विचारधाराओं से ज़्यादा संख्याबल और सत्ता समीकरण अहम हो जाते हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए यह झटका जरूर है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह एक साफ संदेश भी है कि आने वाला समय और भी दिलचस्प होने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP Voter List

UP Voter List 2026 उत्तर प्रदेश की Draft Voter List जारी, SIR के बाद लाखों नाम कटे

उत्तर प्रदेश में वोटरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने 6 जनवरी 2026 को UP SIR Draft Voter List 2026 जारी कर दी है। यह सूची Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है, जिसमें मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने का काम किया गया। इस बार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर चर्चा इसलिए ज्यादा है, क्योंकि करीब 2.8 से 2.9 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। क्या है SIR और क्यों जारी की गई Draft Voter List? SIR यानी Special Intensive Revision एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची में केवल योग्य और सक्रिय मतदाताओं के ही नाम हों। इस दौरान: इन सभी मामलों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के बाद अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 जारी की गई है। UP Voter List 2026 में क्या बड़ा बदलाव हुआ? SIR शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 15.44 करोड़ थी।नई ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 12.55 करोड़ रह गई है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अब अपना नाम दोबारा चेक कर रहे हैं। UP Draft Voter List 2026 में अपना नाम कैसे चेक करें? अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें: Online तरीका Offline तरीका अगर Draft Voter List में नाम नहीं है तो क्या करें? अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियों (Claims & Objections) के लिए समय दिया है। जरूरी तारीखें कौन-सा फॉर्म भरें? फॉर्म ऑनलाइन भी भरे जा सकते हैं या फिर BLO के पास जमा किए जा सकते हैं। Draft List क्यों है इतनी अहम? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट इसलिए जरूरी है ताकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Mayawati

UP Election 2027: Mayawati का बड़ा Brahmin दांव, BSP ने घोषित किए 2 उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने एक बार फिर अपने पुराने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर भरोसा जताते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण समाज का सम्मान और हित बसपा में ही सुरक्षित है।” इसी के साथ पार्टी ने दो ब्राह्मण चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस कदम को आगामी चुनावों के लिए बसपा की नई रणनीति माना जा रहा है। चुनाव से पहले Mayawati का बड़ा राजनीतिक दांव मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि बसपा ही ऐसी पार्टी है जिसने सत्ता में रहते हुए सभी वर्गों को समान सम्मान और भागीदारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिला और पार्टी आज भी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती एक बार फिर 2007 के सफल दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। इसी रणनीति ने उस समय बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। बसपा ने घोषित किए दो ब्राह्मण चेहरे पार्टी ने फिलहाल दो विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बसपा की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधानसभा प्रभारी को बाद में उम्मीदवार बनाया जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है। पार्टी जल्द ही अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। क्या सपा की बढ़ सकती है मुश्किल? मायावती ने अपने बयान में बिना नाम लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा द्वारा ब्राह्मण उम्मीदवारों को आगे लाने से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बसपा दलित और ब्राह्मण वोटों को एक साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। फिलहाल सपा PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बसपा का यह नया कदम मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा की नई रणनीति बसपा ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर यह संकेत दिया है कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की तैयारी में जुट चुकी है। पार्टी की कोशिश केवल अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि ब्राह्मण, सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों को भी अपने साथ जोड़ने की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सामाजिक समीकरण मजबूत होता है, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा रोचक हो सकता है। आने वाले महीनों में बसपा की अगली उम्मीदवार सूची और मायावती की चुनावी रणनीति पर सभी दलों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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