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Vijay Hazare

Vijay Hazare Trophy 2025-26 डेवलपिंग टैलेंट और स्टार प्लेयर्स का जलवा

भारत की घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट Vijay Hazare Trophy 2025-26 अपने रोमांचक मोड़ पर है। मंगलवार को खेले गए 6th Round में दर्शकों ने जबरदस्त मुकाबले देखे। बल्लेबाजों के बड़े स्कोर, तेज गेंदबाजों की धार, और कुछ स्टार खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने इस राउंड को बेहद रोमांचक बना दिया। 6th Round Highlights टूर्नामेंट की रोमांचक तस्वीर छठे राउंड के बाद अंक तालिका और भी दिलचस्प हो गई है। कुछ टीमों ने क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली है, जबकि कई टीमें हर मैच में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।बल्लेबाजों के बड़े स्कोर और गेंदबाजों के निर्णायक स्पेल ने यह साफ कर दिया कि अगले राउंड में मुकाबले और भी रोमांचक होंगे। Vijay Hazare Trophy 2025-26 का छठा राउंड घरेलू क्रिकेट के रोमांच और प्रतिभा को दर्शाता है। युवा और सीनियर दोनों खिलाड़ी अपनी टीम के लिए योगदान दे रहे हैं। फैंस के लिए आने वाले मैचों का इंतजार अब और मुश्किल हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Violence 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, सरत चक्रवर्ती केस ने हिलाया देश

बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नरसिंदी ज़िले के चारसिंदूर बाज़ार में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार सरत चक्रवर्ती मणि की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस डर की तस्वीर है जो आज बांग्लादेश के कई हिंदू परिवारों के मन में बैठ चुका है। दुकान पर हमला, अस्पताल में तोड़ा दम स्थानीय लोगों के मुताबिक, 5 जनवरी की रात सरत चक्रवर्ती अपनी रोज़ की तरह दुकान चला रहे थे। तभी अज्ञात हमलावर धारदार हथियारों के साथ आए और उन पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। सरत को इलाके में एक शांत, मेहनती और किसी से विवाद न रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। यही बात उनकी हत्या को और भी चौंकाने वाली बनाती है। 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, चिंता बढ़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े 6 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें से दो हत्याएँ सिर्फ 24 घंटों के भीतर अलग-अलग ज़िलों में हुईं, जिनमें नरसिंदी और जशोर शामिल हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अब खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं? हिंदू समुदाय में खौफ, बदल रही रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन हत्याओं के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में डर साफ़ दिखाई दे रहा है। कई दुकानदार अब जल्दी दुकान बंद कर रहे हैं, कुछ लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। परिवारों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगला नंबर किसका होगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा,“हम यहीं पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े, लेकिन आज अपने ही देश में डर लग रहा है।” प्रशासन पर सवाल, जवाब की तलाश अब तक कई मामलों में हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर दोषियों को सख़्त सज़ा नहीं मिली, तो ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों की अपील मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ बयान नहीं, ज़मीन पर ठोस कार्रवाई ज़रूरी है। Sarat Chakraborty Mani की हत्या एक चेतावनी है। यह बताती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना कितनी गहरी हो चुकी है। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर पूरे समाज की शांति और भरोसे पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JNU

JNU Protest Viral Umar Khalid Bail Reject के बाद JNU में नारेबाज़ी, देशभर में मचा हंगामा

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है—छात्र नेता उमर ख़ालिद की जमानत याचिका खारिज होने के बाद हुआ विरोध प्रदर्शन, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगों के 2020 मामले में उमर ख़ालिद और शारजील इमाम को जमानत न दिए जाने के फैसले के बाद जेएनयू कैंपस में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। इसी दौरान लगाए गए कुछ उग्र और विवादित नारों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस में बदल दिया। Viral Video में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ छात्र समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इन नारों को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।कई लोगों ने इसे सीमा लांघने वाला विरोध बताया, जबकि कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि यह सरकार के फैसलों के खिलाफ आक्रोश की अभिव्यक्ति है। Protest का असली कारण प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उमर ख़ालिद पिछले कई वर्षों से जेल में हैं और बार-बार जमानत याचिका खारिज होना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। छात्रों के अनुसार, यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि असहमति की आवाज़ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। Political Reaction तेज़ वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज़ हो गई।सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने इसे देश विरोधी मानसिकता करार दिया, जबकि विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को नारों से ज़्यादा मूल मुद्दों—जैसे न्यायिक प्रक्रिया और छात्रों की समस्याओं—पर ध्यान देना चाहिए। Police और University Administration का रुख अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, इस नारेबाज़ी को लेकर कोई आधिकारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं हुई है, हालांकि वीडियो की जांच की जा रही है।वहीं, जेएनयू प्रशासन ने फिलहाल संयम बरतते हुए किसी सख्त कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। Background: क्यों अहम है यह मामला? उमर ख़ालिद पर UAPA के तहत दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है। वे 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।जेएनयू पहले भी ऐसे कई राजनीतिक आंदोलनों और प्रदर्शनों का गवाह रहा है, जहां छात्रों की आवाज़ अक्सर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचती रही है। जेएनयू का यह ताज़ा विरोध प्रदर्शन एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है किविरोध की सीमा क्या होनी चाहिए?और अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बने? आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस वायरल वीडियो पर प्रशासन और जांच एजेंसियाँ क्या कदम उठाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL

IPL Controversy मुस्ताफिज़ुर को लेकर बांग्लादेश सरकार का बड़ा फैसला, IPL Broadcast बंद

बांग्लादेश में क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बांग्लादेश सरकार ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के प्रसारण पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला अचानक लिया गया, लेकिन इसके पीछे की वजह ने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया है। IPL पर बैन क्यों लगाया गया? इस पूरे मामले की शुरुआत बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान से जुड़े विवाद से हुई। IPL 2026 सीज़न से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने मुस्ताफिज़ुर को अपनी टीम से रिलीज़ कर दिया। बांग्लादेश में इसे सिर्फ़ एक टीम का फैसला नहीं, बल्कि बांग्लादेशी खिलाड़ी के अपमान और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के हस्तक्षेप के तौर पर देखा गया। क्रिकेट वहां सिर्फ़ खेल नहीं, बल्कि भावना है। जैसे ही यह खबर फैली, बांग्लादेशी फैंस में नाराज़गी साफ़ दिखने लगी। सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह मुद्दा सरकार तक पहुंच गया। सरकार का बड़ा फैसला जनभावनाओं को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए IPL के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।इस आदेश के तहत: दर्शकों और ब्रॉडकास्टर्स पर असर इस फैसले का सबसे बड़ा असर सीधे क्रिकेट प्रशंसकों पर पड़ा है। IPL बांग्लादेश में भी बेहद लोकप्रिय लीग है और बड़ी संख्या में लोग इसे नियमित रूप से देखते हैं।इसके अलावा: क्रिकेट से आगे बढ़ता मामला कई क्रिकेट जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा अब सिर्फ़ IPL या एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहा। यह फैसला खेल, राजनीति और राष्ट्रीय स्वाभिमान के बीच की जटिल स्थिति को दर्शाता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर भविष्य की द्विपक्षीय सीरीज़ और क्रिकेट सहयोग पर भी पड़ सकता है। आगे क्या? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि: IPL पर लगाया गया यह प्रतिबंध एक याद दिलाता है कि क्रिकेट सिर्फ़ मैदान तक सीमित नहीं रहता। खिलाड़ियों से जुड़ी भावनाएं, देश की प्रतिष्ठा और प्रशंसकों की उम्मीदें—सब मिलकर फैसलों की दिशा तय करती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस मोड़ पर जाकर खत्म होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRCTC

IRCTC Ticket Booking में Aadhaar Linking Rule जनवरी 2026 से मिलेगा Priority Access

भारतीय रेलवे ने जनवरी 2026 से IRCTC टिकट बुकिंग में आधार लिंकिंग को लेकर नया नियम लागू करने की घोषणा की है। इस नियम के तहत आधार से लिंक किए गए यात्रियों को पहले दिन आरक्षण विंडो में प्राथमिकता मिलेगी। नया बदलाव कब से लागू होगा? किस पर लागू होगा? क्यों किया जा रहा है बदलाव? रेलवे का कहना है कि यह कदम एजेंट्स, बॉट्स और टिकट touts के गलत इस्तेमाल को रोकने और सच्चे यात्रियों को आरक्षण में बेहतर अवसर देने के लिए उठाया गया है। स्टेशन काउंटर से बुकिंग पर असर प्राथमिकता का लाभ कैसे उठाएं? इस बदलाव के बाद, रेलवे का लक्ष्य है कि टिकट बुकिंग प्रक्रिया समान और पारदर्शी बने, और genuine यात्रियों को सुविधाजनक अनुभव मिले। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ट्रंप

ट्रंप बोले: Modi ने Russia Oil Import घटाकर मुझे खुश किया India-US Trade Tension बढ़ सकती है

ट्रंप का बयान: मोदी ने मेरी नाखुशी समझी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि भारत के रूस से तेल आयात घटाने का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर उठाया। ट्रंप ने बताया कि मोदी “बहुत समझदार और अच्छे नेता” हैं और उन्हें पता था कि ट्रंप रूस से तेल खरीद जारी रखने पर नाखुश होंगे। एयर फ़ोर्स वन पर चेतावनी: Extra Tariffs की संभावना ट्रंप ने यह बयान एयर फ़ोर्स वन पर रिपोर्टर्स से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल की खरीद जारी रखता है तो अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ (extra tariffs) लगा सकता है, जो भारत के लिए “काफी नकारात्मक” होगा। India-US Trade Relation पर असर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम India-US trade relationship पर प्रभाव डाल सकता है। ट्रंप प्रशासन पहले भी भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे चुका है, जिसमें रूस से तेल खरीदना एक बड़ा कारण रहा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतें भारत ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतें सर्वोपरि हैं। भारत का कहना है कि रूस से ऊर्जा खरीदने का उद्देश्य घरेलू मांग को पूरा करना और पेट्रोलियम बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। रूस पर पश्चिमी दबाव और भारत की रणनीति अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर दबाव बढ़ाया है और ऊर्जा खरीद पर निगरानी रखी हुई है। ऐसे में भारत का निर्णय संतुलन बनाने और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रयास माना जा रहा है। भविष्य में India-US Trade Dynamics विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले समय में India-US trade dynamics में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है, खासकर ऊर्जा और टैरिफ नीतियों को लेकर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला Umar Khalid और Sharjeel Imam को झटका

साल 2020 के Delhi Riots Case से जुड़े बहुचर्चित larger conspiracy matter में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने साफ कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और उनकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग मानी जाती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत? सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत आरोप हैं, जिसमें जमानत के नियम बेहद सख्त हैं। अदालत के अनुसार, इस स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि मामला कमजोर है या आरोप प्रथम दृष्टया गलत हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों की कथित भूमिका “qualitatively different” यानी अन्य सह-आरोपियों की तुलना में ज्यादा गंभीर मानी गई है। क्या है Delhi Riots 2020 का मामला? फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद दावा किया कि यह हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत हुई थी। इसी कथित साजिश के तहत उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोगों पर दंगे भड़काने, भाषणों और बैठकों के जरिए माहौल तनावपूर्ण बनाने जैसे आरोप लगाए गए। अन्य आरोपियों को मिली राहत जहां एक ओर उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसी केस में पांच अन्य आरोपियों —गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ आरोप और सबूत, मुख्य आरोपियों की तुलना में उतने गंभीर नहीं हैं। पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है। दोनों पिछले कई वर्षों से जेल में बंद हैं और ट्रायल अभी भी जारी है, जिसे लेकर देरी के सवाल उठते रहे हैं। फैसले के मायने सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक बार फिर यह दिखाता है कि UAPA जैसे कठोर कानूनों में जमानत पाना आसान नहीं है। साथ ही, यह फैसला उन बहसों को भी हवा देता है जो लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए हिरासत, नागरिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर होती रही हैं। फिलहाल, उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल में ही रहना होगा और आगे की कानूनी लड़ाई निचली अदालत में जारी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump vs Venezuela Maduro Arrest Claim के बाद Caracas में Explosions से हड़कंप

अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों में शनिवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा किया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। यह दावा ऐसे समय पर आया है जब वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस (Caracas) समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। Trump का बड़ा बयान, दुनिया में हलचल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कार्रवाई “बड़े पैमाने पर किए गए सैन्य ऑपरेशन” का हिस्सा थी। उन्होंने इसे अमेरिका की एक “सफल रणनीतिक कार्रवाई” बताया और कहा कि जल्द ही इस पर आधिकारिक ब्रीफिंग दी जाएगी। ट्रंप के इस बयान के बाद दुनियाभर के मीडिया और सरकारों में हलचल मच गई। हालांकि, अब तक मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या स्वतंत्र एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Caracas में धमाके, लोगों में डर का माहौल स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार तड़के कराकस और आसपास के इलाकों में कई जोरदार विस्फोट सुने गए। कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई और आसमान में धुएँ के गुबार देखे गए।इन घटनाओं के बाद आम लोगों में डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। Venezuela सरकार का पलटवार वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिकी दावों को “झूठा और भड़काऊ प्रचार” बताया है। सरकारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने देश की संप्रभुता पर हमला किया है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मादुरो सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। पहले से तनावपूर्ण थे US–Venezuela संबंध अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका, मादुरो सरकार पर जैसे गंभीर आरोप लगाता रहा है। ट्रंप पहले भी मादुरो को “नार्को-टेररिस्ट” कह चुके हैं और उन पर इनाम तक घोषित किया गया था। अभी क्या है सच्चाई? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है किक्या वाकई Nicolas Maduro गिरफ्तार हो चुके हैं? ट्रंप का दावा ज़रूर सुर्खियों में है, लेकिन जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं कही जा सकती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Unrest हिंदू व्यापारी को पीटकर जिंदा जलाया

New Year Eve पर हुआ हमला, तीन दिन तक जिंदगी से जूझते रहे, 3 जनवरी को निधन बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच एक और हृदय विदारक घटना सामने आई है। शरीयतपुर जिले के डामुड्या उपजिला में रहने वाले हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। नए साल की पूर्व संध्या पर हुए इस हमले के बाद वह तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन 3 जनवरी 2026 को अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। New Year Eve की रात क्या हुआ परिजनों के अनुसार, 50 वर्षीय खोकन दास अपनी मेडिकल दुकान और मोबाइल बैंकिंग कारोबार बंद कर रोज़ की तरह घर लौट रहे थे। रास्ते में उनकी ऑटो-रिक्शा को कुछ लोगों ने जबरन रुकवाया। इसके बाद उन पर अचानक हमला कर दिया गया। हमलावरों ने पहले उन्हें बुरी तरह पीटा, फिर तेज़ हथियारों से वार किया और अंत में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जलती आग से बचने की कोशिश में खोकन दास पास के एक तालाब में कूद गए, जिससे आग कुछ हद तक बुझी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत और मौत हमले में खोकन दास के शरीर का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था। इसके अलावा उन्हें कई जगह चाकू के घाव और अंदरूनी चोटें आई थीं। पहले उन्हें शरीयतपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में हालत गंभीर होने पर ढाका रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार 3 जनवरी की सुबह उनकी मौत हो गई। उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार का दर्द और सवाल मृतक की पत्नी सीमा दास का कहना है कि उनके पति का किसी से कोई झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। वह एक साधारण, मेहनती व्यापारी थे और इलाके में सभी से अच्छे संबंध रखते थे। परिवार का आरोप है कि खोकन दास को सिर्फ हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया। परिजन अब भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इतनी बेरहमी की वजह क्या थी। अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा यह घटना बांग्लादेश (Bangladesh) में हाल के दिनों में हिंदू समुदाय पर हुए कई हमलों की कड़ी में एक और नाम जोड़ती है। इन घटनाओं ने न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने और दोषियों को सख्त सज़ा देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela

Venezuela में Explosions Caracas में धमाकों से बढ़ी Panic, अमेरिका-Venezuela Tensions और भी तेज़

वेनेजुएला (Venezuela) की राजधानी काराकास में आज सुबह कई जोरदार धमाके (explosions) सुनाई दिए, जिससे शहर में अफरा-तफरी और panic फैल गया। स्थानीय लोग सुबह के समय अचानक उठे और बाहर निकलकर देखा कि आसमान में low-flying aircrafts उड़ रहे थे और कुछ इलाकों में smoke उठ रही थी। धमाकों के समय शहर के कई हिस्सों में power outage भी हुआ। लोगों ने बताया कि यह आवाज़ इतनी तेज़ थी कि घर और गाड़ियों में कंपन महसूस हुआ। हालांकि, अभी तक कोई official confirmation नहीं आई है कि धमाके किस कारण हुए या इसके पीछे कौन जिम्मेदार है। अमेरिका और Venezuela के बीच बढ़ता तनाव यह घटना ऐसे समय में हुई है जब US और Venezuela के बीच political और military tensions बढ़ रहे हैं। पिछले हफ्तों में अमेरिका ने Caribbean क्षेत्र में अपनी military presence बढ़ाई और ड्रग ट्रैफिकिंग के मामलों में strikes on vessels किए। दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुलासा किया था कि अमेरिकी बलों ने Venezuela में एक suspected drug facility को निशाना बनाया था। दूसरी ओर, वेनेजुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति Nicolás Maduro ने अमेरिका के साथ dialogue और talks की पेशकश की है, लेकिन उन्होंने वाशिंगटन पर regime change की कोशिश और देश के oil resources पर नियंत्रण का आरोप भी लगाया। क्या नहीं पता इस घटना का महत्व यह Caracas में हाल के महीनों की सबसे गंभीर सुरक्षा घटना मानी जा रही है। इससे: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Mayawati

UP Election 2027: Mayawati का बड़ा Brahmin दांव, BSP ने घोषित किए 2 उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने एक बार फिर अपने पुराने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर भरोसा जताते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण समाज का सम्मान और हित बसपा में ही सुरक्षित है।” इसी के साथ पार्टी ने दो ब्राह्मण चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस कदम को आगामी चुनावों के लिए बसपा की नई रणनीति माना जा रहा है। चुनाव से पहले Mayawati का बड़ा राजनीतिक दांव मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि बसपा ही ऐसी पार्टी है जिसने सत्ता में रहते हुए सभी वर्गों को समान सम्मान और भागीदारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिला और पार्टी आज भी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती एक बार फिर 2007 के सफल दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। इसी रणनीति ने उस समय बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। बसपा ने घोषित किए दो ब्राह्मण चेहरे पार्टी ने फिलहाल दो विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बसपा की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधानसभा प्रभारी को बाद में उम्मीदवार बनाया जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है। पार्टी जल्द ही अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। क्या सपा की बढ़ सकती है मुश्किल? मायावती ने अपने बयान में बिना नाम लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा द्वारा ब्राह्मण उम्मीदवारों को आगे लाने से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बसपा दलित और ब्राह्मण वोटों को एक साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। फिलहाल सपा PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बसपा का यह नया कदम मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा की नई रणनीति बसपा ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर यह संकेत दिया है कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की तैयारी में जुट चुकी है। पार्टी की कोशिश केवल अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि ब्राह्मण, सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों को भी अपने साथ जोड़ने की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सामाजिक समीकरण मजबूत होता है, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा रोचक हो सकता है। आने वाले महीनों में बसपा की अगली उम्मीदवार सूची और मायावती की चुनावी रणनीति पर सभी दलों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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