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CWC

कांग्रेस CWC बैठक 2025 Rahul-Sonia की मौजूदगी में रणनीति और जन आंदोलन की तैयारी

कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) 2025 की अहम बैठक नई दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार की नीतियों का विश्लेषण करना और पार्टी के आगामी विरोध अभियान की रूपरेखा तय करना है। बैठक में प्रमुख नेता बैठक में शामिल नेता: कुछ नेताओं को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया, जैसे डीके शिवकुमार, जो इस बैठक के माहौल में चर्चा का विषय बने। MGNREGA और “जी-राम-जी” बिल पर रणनीति बैठक का मुख्य एजेंडा MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और केंद्र सरकार द्वारा पारित “विकसित भारत-जी राम जी बिल, 2025” रहा। कांग्रेस का आरोप है कि यह बिल मनरेगा की मूल भावना और ग्रामीण रोजगार की सुरक्षा को कमजोर कर रहा है। बैठक में तय किया गया कि जनवरी 2026 से पूरे देश में “MGNREGA बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण जनता को जागरूक करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। अन्य राजनीतिक मुद्दे बैठक में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय चुनावों की रणनीति, बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभव और अरावली संरक्षण जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई। वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि बैठक में राजनीतिक विमर्श और बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। निष्कर्ष कुल मिलाकर, यह बैठक कांग्रेस की अगली रणनीति और जन आंदोलन की रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी का फोकस ग्रामीण रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Operation Aaghat 3.0 में Police की सख्ती, हथियार-नशा बरामद, 285 Arrest

नए साल की रौनक से पहले राजधानी दिल्ली (Delhi) में सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने Operation Aaghat 3.0 के तहत एक बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए शहर के कई संवेदनशील इलाकों में रातभर छापेमारी की। इस अभियान में 285 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 500 से ज्यादा संदिग्धों को निवारक हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस विशेष ड्राइव का उद्देश्य नए साल के जश्न के दौरान किसी भी तरह की आपराधिक घटना को रोकना और आम लोगों को सुरक्षित माहौल देना था। ऑपरेशन खासतौर पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के उन इलाकों में चलाया गया, जहां पहले अपराध की घटनाएं सामने आती रही हैं। Arms Act से लेकर NDPS तक, कई मामलों में केस दर्ज ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए आरोपियों पर Arms Act, NDPS Act, Excise Act और Gambling Act जैसी धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई में 116 आदतन अपराधियों, जिन्हें स्थानीय भाषा में “बैड कैरेक्टर” कहा जाता है, को भी हिरासत में लिया। हथियार, शराब और ड्रग्स की बड़ी बरामदगी छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाली बरामदगियां लगीं। इनमें शामिल हैं: आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन आघात 3.0 का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना और लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना है। पुलिस का कहना है कि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे, खासकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान। नए साल के मौके पर दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जश्न में कोई खलल न पड़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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डिग्विजय सिंह

Congress के भीतर डिग्विजय सिंह की चेतावनी Rahul Gandhi और Party Working Style पर चर्चा

वरिष्ठ कांग्रेस नेता डिग्विजय सिंह ने आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) मीटिंग में पार्टी के वर्किंग स्टाइल और राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी के निर्णय लेने के तरीके और संगठनात्मक ढांचे पर चिंता जताई, और कहा कि बहुत ज्यादा अधिकार केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित है। डिग्विजय सिंह ने बैठक में यह भी कहा कि पार्टी में विकेंद्रीकरण (Decentralization) की जरूरत है, ताकि सभी स्तरों के नेताओं को निर्णय में हिस्सा मिल सके। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व के तरीकों पर भी संकेत दिए, जिससे यह साफ़ हुआ कि कांग्रेस के अंदर सुधार और बदलाव पर चर्चा जारी है। यह बैठक दिल्ली में आयोजित की गई थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया, डी. के. शिवकुमार और शशि थरूर भी मौजूद थे। CWC मीटिंग का मकसद पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर विचार करना था, खासकर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सवाल उठाना दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी आंतरिक सुधार और रणनीतिक सोच पर गंभीर है। डिग्विजय सिंह की टिप्पणियाँ यह दिखाती हैं कि पार्टी लीडरशिप और संगठनात्मक कार्यशैली को सुधारने की दिशा में कदम उठा रही है। इस बैठक से यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस आगामी राजनीतिक चुनौती और चुनावों के लिए खुद को मजबूत बनाने पर काम कर रही है, और यह बदलाव पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh में Hindu Minorities पर बढ़ते Attacks Blasphemy Allegations का खतरा

Bangladesh में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर हाल ही में गंभीर चेतावनी सामने आई है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार रिपोर्टों के अनुसार, कट्टरपंथी समूह झूठे Blasphemy (ईशनिंदा) के आरोप लगाकर हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। ये हमले केवल व्यक्तिगत हिंसा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरों, मंदिरों और जमीन पर कब्जा करने जैसी घटनाओं तक फैल गए हैं। प्रमुख घटना: दीपु चंद्र दास की हत्या 18 दिसंबर 2025 को म्यमेंसिंग जिले में 27 वर्षीय हिंदू गारमेंट वर्कर दीपु चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ ने पीटा, लटकाया और आग लगा दी। इस दुखद घटना ने न केवल बांग्लादेश में, बल्कि भारत में भी चिंता पैदा कर दी। पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विरोध और प्रदर्शन इस हिंसा के बाद ढाका और अन्य शहरों में हिंदू संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। भारत सरकार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश को चेतावनी दी कि अल्पसंख्यकों पर हमले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक संदर्भ आगामी Bangladesh के 2026 के चुनाव के मद्देनजर, हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय राजनीतिक रूप से अधिक सक्रिय हो रहा है। कुछ नई पार्टियाँ अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा की वकालत करते हुए चुनाव में उतर रही हैं। झूठे Blasphemy आरोपों का खतरा हालांकि बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप कानूनी रूप से उतने कड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया और व्यक्तिगत विवादों के कारण झूठे आरोप तेजी से फैल जाते हैं। ये आरोप कभी-कभी भीड़ हिंसा और समुदाय में भय फैलाने का कारण बन जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय नजरिया अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की चेतावनी दे रहे हैं। ये रिपोर्ट बताती हैं कि हिंसा के कारण घर, मंदिर और व्यक्तिगत सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है। Bangladesh में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है। झूठे Blasphemy आरोपों से उत्पन्न हिंसा न केवल उनके जीवन के लिए खतरा है, बल्कि समाज में डर और विभाजन भी पैदा कर रही है। न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सतर्कता बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इंग्लैंड

MCG में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराया 15 साल बाद मिली जीत

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए एशेज 2025 के चौथे टेस्ट मैच में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराकर सीरीज़ में अपनी पहली जीत दर्ज की। यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—खासकर इंग्लैंड की गेंदबाज़ी, पिच की प्रकृति और दो दिन में खत्म हुए टेस्ट मैच के कारण। टॉस और पिच इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया। MCG की पिच शुरू से ही हरी और तेज़ गेंदबाजों के अनुकूल दिखी, जिसका पूरा फायदा दोनों टीमों के पेस अटैक ने उठाया। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी ऑस्ट्रेलिया की टीम पहली पारी में सिर्फ 152 रन पर सिमट गई।इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ जोश टंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 विकेट झटके और कंगारू बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ दी। उनके अलावा ब्रायडन कार्स ने भी प्रभावी गेंदबाज़ी की। इंग्लैंड की पहली पारी जवाब में इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी भी टिक नहीं पाई और पूरी टीम 110 रन पर ऑलआउट हो गई।ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिचेल स्टार्क और अन्य तेज़ गेंदबाज़ों ने इंग्लिश बल्लेबाज़ों को लगातार परेशान किया। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया का संघर्ष दूसरी पारी में भी ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाज़ी लड़खड़ाई।टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर पाई, हालांकि ट्रैविस हेड ने सबसे ज़्यादा जुझारू पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 175 रनों का लक्ष्य रखा। इंग्लैंड की सफल रन चेज़ इंग्लैंड ने लक्ष्य का पीछा करते हुए दबाव जरूर झेला, लेकिन हैरी ब्रूक और जेमी स्मिथ ने समझदारी भरी बल्लेबाज़ी करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया।इंग्लैंड ने 178/6 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम किया। मैच की खास बातें सीरीज़ की स्थिति हालांकि ऑस्ट्रेलिया पहले ही एशेज सीरीज़ अपने नाम कर चुका है, लेकिन इस जीत से इंग्लैंड को आत्मविश्वास मिला है और सीरीज़ अब 3–1 पर पहुंच गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shashi Tharoor

Shashi Tharoor Big Statement “PM की हार को India की हार कहना खतरनाक सोच”

भारतीय राजनीति में जब ज़्यादातर बहसें दलों और आरोप-प्रत्यारोप के इर्द-गिर्द घूमती हैं, ऐसे समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor)का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री की हार को देश की हार के रूप में देखना खतरनाक सोच है, क्योंकि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी एक पार्टी की बपौती नहीं होती। उनका यह बयान न सिर्फ सियासी हलकों में, बल्कि आम लोगों के बीच भी गंभीर बहस को जन्म दे रहा है। Foreign Policy किसी Party की नहीं, Nation की होती है Shashi Tharoor ने कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रहित से जुड़ा विषय है, न कि चुनावी राजनीति का हथियार। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय असफलता पर खुश होता है, तो वह अनजाने में भारत की वैश्विक छवि को कमजोर करने की कामना कर रहा होता है। थरूर के मुताबिक, “दुनिया भारत को किसी पार्टी के चश्मे से नहीं देखती, बल्कि प्रधानमंत्री को देश के प्रतिनिधि के रूप में देखती है।” Pakistan Threat को नजरअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है अपने बयान में थरूर ने पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा खतरों पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीति लगातार बदल रही है और वहां की सैन्य शक्ति अब भी असली फैसले ले रही है। थरूर का मानना है कि: यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात फिर से संवेदनशील बने हुए हैं। Congress के भीतर असहजता, बाहर तारीफ Shashi Tharoor के इस रुख ने कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद को भी उजागर किया है। पार्टी के कुछ नेताओं को लगता है कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक सराहना से राजनीतिक संदेश कमजोर पड़ता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह बयान थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी दूसरी पार्टी में जाने की सोच नहीं रहे हैं और उनका रुख सैद्धांतिक और वैचारिक है, न कि राजनीतिक अवसरवाद। Global मंच पर भारत की छवि पर जोर Shashi Tharoor, जो खुद लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम कर चुके हैं, मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि “अगर भारत कमजोर दिखता है, तो उसका असर सिर्फ सरकार पर नहीं, बल्कि हर नागरिक पर पड़ता है।” यही वजह है कि वे विदेश नीति को दलगत राजनीति से ऊपर रखने की वकालत करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Thailand

Border Tension Ends Thailand–Cambodia Ceasefire से सीमा पर लौटी राहत और उम्मीद

कई हफ्तों तक चली भीषण झड़पों और निर्दोष लोगों की पीड़ा के बाद आखिरकार Thailand और Cambodia ने राहत की सांस ली है। दोनों देशों ने आपसी सहमति से तत्काल Ceasefire (संघर्ष विराम) लागू करने का ऐलान किया है। इस फैसले से हजारों विस्थापित परिवारों को अपने घर लौटने की उम्मीद जगी है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह संघर्ष विराम 27 दिसंबर को दोपहर 12 बजे (स्थानीय समय) से प्रभावी हो गया। समझौते पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने हस्ताक्षर किए और सीमा पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का निर्णय लिया गया। सीमा पर थमी गोलियां, इंसानियत को मिली राहत पिछले कुछ हफ्तों में Thailand–Cambodia सीमा पर हालात बेहद चिंताजनक हो गए थे। तोपखाने, रॉकेट हमलों और हवाई हमलों ने आम लोगों की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। स्कूल बंद हो गए, खेत खाली रह गए और करीब पांच लाख से ज्यादा लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए। इस Ceasefire Agreement के तहत दोनों देशों ने तय किया है कि: 18 सैनिकों की रिहाई और ASEAN की भूमिका समझौते में यह भी कहा गया है कि यदि संघर्ष विराम 72 घंटे तक बना रहता है, तो थाईलैंड द्वारा हिरासत में लिए गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को रिहा कर दिया जाएगा। इसके अलावा, Ceasefire की निगरानी के लिए ASEAN (आसियान) के पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा, ताकि दोनों पक्ष समझौते का पालन करें। पुराना विवाद, नई चुनौती Thailand और कंबोडिया के बीच सीमा लगभग 817 किलोमीटर लंबी है और इसके कुछ हिस्सों को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। इस महीने की शुरुआत में एक पुराना तनाव फिर से हिंसा में बदल गया था, जिससे पहले हुआ संघर्ष विराम भी टूट गया। इस संघर्ष में 100 से अधिक लोगों की जान गई, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय संगठन लगातार शांति की अपील कर रहे थे। क्या यह शांति टिक पाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह Ceasefire एक अहम कदम है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सिर्फ हथियारों का शांत होना काफी नहीं है। दोनों देशों को अब बातचीत की मेज पर बैठकर सीमा विवाद का राजनीतिक और कूटनीतिक हल निकालना होगा। फिलहाल, सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए यह खबर किसी उम्मीद से कम नहीं। गोलियों की आवाज़ थम चुकी है और लोग एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BrahMos

BrahMos Next Generation Missile भारत की रक्षा में नई ताकत

भारत अपने सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल BrahMos के नए और उन्नत संस्करण पर तेजी से काम कर रहा है। रूस के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा यह प्रोजेक्ट भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। नए ब्रह्मोस संस्करण में लंबी दूरी, हल्कापन और बहु-प्लेटफ़ॉर्म क्षमता जैसी विशेषताएं होंगी, जिससे रणनीतिक ताकत में वृद्धि होगी। ब्रह्मोस के नए वर्ज़न और उनकी खासियतें क्यों है यह महत्वपूर्ण? उत्पादन और टाइमलाइन भारत के इस नए ब्रह्मोस संस्करण के आने से देश की रक्षा क्षमता और रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी। यह मिसाइल न केवल सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय तकनीकी और उत्पादन क्षमता का भी उदाहरण बनेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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टोरंटो

Indian Students Murdered in Canada टोरंटो में दो भारतीय छात्रों की हत्या

टोरंटो, Canada में पिछले दो हफ्तों के भीतर दो भारतीय छात्रों की हत्या की घटनाओं ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। यह घटनाएँ न केवल भारतीय छात्रों बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के लिए एक चेतावनी हैं। Shivank Awasthi – A Bright Student Lost Too Soon 20 वर्षीय शिवांक अवस्थी, टोरंटो विश्वविद्यालय के स्कारबोरो परिसर में डॉक्टोरल स्टूडेंट थे। 23 दिसंबर 2025 को उन्हें Highland Creek Trail और Old Kingston Road के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई।पुलिस ने इसे हत्याकांड (Homicide) करार दिया और अभी तक आरोपी फरार हैं। इस घटना ने टोरंटो में इस साल की 41वीं हत्या के रूप में दर्ज की गई। भारतीय कांसुलेट जनरल, टोरंटो ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया और परिवार की सहायता के लिए कदम उठाए। शिवांक के दोस्तों और सहपाठियों में गहरा शोक फैला हुआ है। Himanshi Khurana – Tragic Loss of a Young Life 30 वर्षीय हिमांशी खुराना, टोरंटो में रह रही भारतीय नागरिक, अपने घर में मृत पाई गईं। पुलिस का मानना है कि यह इंटिमेट पार्टनर वायलेंस (Intimate Partner Violence) का मामला हो सकता है। इस मामले में 32 वर्षीय अब्दुल गफूरी के खिलाफ कनाडा वाइड वारंट जारी किया गया है। हिमांशी की हत्या के साथ ही टोरंटो में इस साल 40वीं हत्या दर्ज की गई। भारतीय कांसुलेट ने उनके परिवार को मदद और समर्थन देने का आश्वासन दिया। Impact on Indian Students and Community इन दोनों घटनाओं ने टोरंटो में भारतीय छात्रों और समुदाय के लोगों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। छात्र और परिवार सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।सामाजिक मीडिया और स्थानीय न्यूज़ चैनल्स पर भी इन घटनाओं को लेकर चर्चा बढ़ी है। लोग अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने और पुलिस से तेजी से कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। Conclusion टोरंटो में हुई ये हत्याएँ सिर्फ अपराध की घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समाज को याद दिलाती हैं कि सुरक्षा और समर्थन कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय कांसुलेट और स्थानीय प्रशासन दोनों ही इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Veer Bal Diwas

Veer Bal Diwas Special बहादुरी और प्रतिभा के लिए 20 बच्चों को मिलेगा PM National Child Award

Veer Bal Diwas 2025 के खास अवसर पर देश के उन बच्चों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने कम उम्र में असाधारण साहस, प्रतिभा और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (Prime Minister National Child Award) के तहत देशभर से चुने गए 20 बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा। यह सम्मान समारोह विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बच्चों को पुरस्कार प्रदान करेंगी। इसके बाद भारत मंडपम में वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों और युवाओं को संबोधित करेंगे। Prime Minister National Child Award क्या है? प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन बच्चों को मिलता है जिन्होंने बहादुरी, खेल, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। इन बच्चों की कहानियाँ यह साबित करती हैं कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसले और सोच बड़े होते हैं। 18 राज्यों से चुने गए 20 प्रतिभाशाली बच्चे इस वर्ष 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बच्चों का चयन किया गया है। इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिन्होंने Veer Bal Diwas का महत्व वीर बाल दिवस सिख इतिहास के चार साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान की याद में मनाया जाता है। यह दिन बच्चों को साहस, सत्य, देशभक्ति और आत्मबल की सीख देता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के “छोटे नायकों” को मंच देता है। देश के लिए प्रेरणा बनते बच्चे यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन सपनों की पहचान है जो कम उम्र में समाज को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। ये बच्चे आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देते हैं कि अगर इरादा मजबूत हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Mayawati

UP Election 2027: Mayawati का बड़ा Brahmin दांव, BSP ने घोषित किए 2 उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने एक बार फिर अपने पुराने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर भरोसा जताते हुए बड़ा चुनावी संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण समाज का सम्मान और हित बसपा में ही सुरक्षित है।” इसी के साथ पार्टी ने दो ब्राह्मण चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इस कदम को आगामी चुनावों के लिए बसपा की नई रणनीति माना जा रहा है। चुनाव से पहले Mayawati का बड़ा राजनीतिक दांव मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि बसपा ही ऐसी पार्टी है जिसने सत्ता में रहते हुए सभी वर्गों को समान सम्मान और भागीदारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिला और पार्टी आज भी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती एक बार फिर 2007 के सफल दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। इसी रणनीति ने उस समय बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। बसपा ने घोषित किए दो ब्राह्मण चेहरे पार्टी ने फिलहाल दो विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बसपा की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधानसभा प्रभारी को बाद में उम्मीदवार बनाया जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है। पार्टी जल्द ही अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। क्या सपा की बढ़ सकती है मुश्किल? मायावती ने अपने बयान में बिना नाम लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा द्वारा ब्राह्मण उम्मीदवारों को आगे लाने से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बसपा दलित और ब्राह्मण वोटों को एक साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। फिलहाल सपा PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बसपा का यह नया कदम मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा की नई रणनीति बसपा ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर यह संकेत दिया है कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की तैयारी में जुट चुकी है। पार्टी की कोशिश केवल अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि ब्राह्मण, सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों को भी अपने साथ जोड़ने की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सामाजिक समीकरण मजबूत होता है, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा रोचक हो सकता है। आने वाले महीनों में बसपा की अगली उम्मीदवार सूची और मायावती की चुनावी रणनीति पर सभी दलों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

जबलपुर में आवारा कुत्ते के हमले से युवक की मौत, पहचान में जुटी पुलिस

जबलपुर के गोहलपुर क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक युवक पर आवारा कुत्ते ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। जानकारी के अनुसार रविवार रात एक युवक गोहलपुर क्षेत्र में घूम रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद एक आवारा कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया। कुत्ते ने युवक को बुरी तरह नोच डाला, जिससे उसके शरीर पर कई गंभीर घाव हो गए। स्थानीय लोगों ने पहुंचाया अस्पताल हमले के बाद युवक गंभीर हालत में सड़क पर पड़ा मिला। आसपास के लोगों ने मानवता दिखाते हुए उसे तुरंत विक्टोरिया जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया और उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे इलाज के दौरान युवक ने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान अब तक नहीं गोहलपुर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के थानों से संपर्क कर रही है और गुमशुदगी की रिपोर्टों की भी जांच की जा रही है, ताकि युवक के परिजनों का पता लगाया जा सके। कुत्ता आवारा था या पालतू, जांच जारी पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हमला करने वाला कुत्ता वास्तव में आवारा था या किसी व्यक्ति का पालतू कुत्ता, जिसे खुले में छोड़ दिया गया था। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में बढ़ी चिंता इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक पर चिंता जताई है। रहवासियों का कहना है कि कई इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com

कैलाश विजयवर्गीय बोले- ‘अगर हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो’, बयान पर छिड़ी चर्चा

इंदौर में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। मंत्री ने मंच से कहा कि उनकी सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के लिए काम करती है, लेकिन कुछ लोग उन्हें “काफिर” कहते हैं। वार्ड क्रमांक-1 में आयोजित विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “यहां हिंदू भाई भी रहते हैं और मुस्लिम भाई भी रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमें काफिर बोलते हैं। अगर हम काफिर हैं, तो हमने सड़क बनाई है, उस पर मत चलो। यदि हम काफिर हैं और आपके घर में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा आ रहा है, तो वह भी मत लो।” ‘सबका साथ, सबका विकास’ हमारी नीति मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” रही है। उन्होंने कहा, “आप हमें वोट दें या न दें, हमारा काम जनता की सेवा करना है। वोट देंगे तो और अधिक उत्साह से काम करेंगे, नहीं देंगे तब भी जनता के लिए काम करना बंद नहीं करेंगे।” 2.39 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन रविवार को विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वार्ड क्रमांक-1 और 5 में करीब 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता होना और जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करना उनके जीवन का सौभाग्य है। बयान पर शुरू हुई राजनीतिक चर्चा मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में विकास कार्यों की शुरुआत था, लेकिन उनके बयान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com

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