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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026 सूर्य की नई चाल से भारत में नई उम्मीदों की शुरुआत

भारत में मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन, कृषि चक्र और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। यह समय ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति 2026 का खगोलीय महत्व मकर संक्रांति एकमात्र हिंदू पर्व है जो सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की किरणों की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, जिससे जीवन में नई सक्रियता आती है। किसानों के लिए खुशहाली का पर्व भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मकर संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण है। यह नई फसल के आगमन का समय होता है। गेहूं, धान, गन्ना और तिलहन की फसल किसानों की मेहनत का प्रतिफल होती है।इसलिए मकर संक्रांति को कृषि उत्सव भी कहा जाता है। देशभर में अलग-अलग रूप मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन भावना एक—सूर्य और अन्नदाता का सम्मान। पतंगों से सजा भारत का आकाश मकर संक्रांति की सबसे सुंदर पहचान है पतंगबाजी। हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़कर उम्मीद, स्वतंत्रता और नई ऊँचाइयों का प्रतीक बन जाती हैं। गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में पतंग उत्सव सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा माध्यम बनता है। तिल-गुड़ और सामाजिक सौहार्द इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटने की परंपरा है। इसका अर्थ है—“कठिन समय में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखना।” यह पर्व समाज को जोड़ने और प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। मकर संक्रांति 2026 का संदेश जब देश डिजिटल युग और वैश्विक बदलावों की ओर बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति 2026 हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और परिश्रम को न भूलने की सीख देता है। यह त्योहार सिखाता है कि असली विकास तभी संभव है जब हम परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tata Punch

Tata Punch 2026 Facelift Review Price, Variants और Engine Options की पूरी जानकारी

Tata Motors ने भारत में अपनी पॉपुलर माइक्रो‑SUV Tata Punch का 2026 फेसलिफ्ट वर्ज़न लॉन्च कर दिया है। नई Tata Punch अपने स्टाइल, फीचर्स और सुरक्षा अपग्रेड्स के साथ अब और भी आकर्षक बन गई है। बेस वेरिएंट की कीमत ₹5.59 लाख (एक्स‑शोरूम) से शुरू होती है। डिज़ाइन और एक्सटीरियर (Design & Exterior) फेसलिफ्ट Tata Punch में नया और प्रीमियम लुक है। इसके प्रमुख बदलाव: इस रिफ्रेश्ड डिज़ाइन के साथ Punch अब सड़क पर और भी दमदार नजर आती है। इंटीरियर और टेक्नोलॉजी (Interior & Technology) नई Punch के केबिन को और स्मार्ट और कंफर्टेबल बनाया गया है: इन फीचर्स से ड्राइविंग अनुभव और भी आसान और प्रीमियम हो गया है। सुरक्षा फीचर्स (Safety Features) Tata ने Punch की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया है: यह सुनिश्चित करता है कि Punch सिर्फ स्टाइलिश ही नहीं बल्कि सुरक्षित भी है। इंजन और माइलेज (Engine & Mileage) Tata Punch फेसलिफ्ट में कई इंजन विकल्प हैं: माइलेज: वेरिएंट और कीमत (Variants & Price) Punch फेसलिफ्ट विभिन्न वेरिएंट्स में उपलब्ध है: जैसे जैसे वेरिएंट बढ़ते हैं, फीचर्स और अधिक प्रीमियम और एडवांस्ड हो जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Hindu Murder बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा डर के साये में जी रहा अल्पसंख्यक समाज

बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बीते कुछ हफ्ते बेहद डरावने रहे हैं। अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही हत्या और हमलों की खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—ये उन परिवारों की टूटती ज़िंदगियों की कहानी हैं, जिनके घरों से अचानक किसी अपने की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। एक और जान गई, एक और घर उजड़ गया हाल में एक युवा हिंदू ऑटो-रिक्शा चालक की हत्या ने पूरे इलाके को हिला दिया। रोज़ की तरह काम करके घर लौट रहा यह युवक अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी जुटा रहा था। रास्ते में उस पर हमला हुआ, उसे चाकू मारा गया और उसकी जान ले ली गई। उसका वाहन भी लूट लिया गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस असुरक्षा का प्रतीक है जिसमें आज कई अल्पसंख्यक परिवार जी रहे हैं। उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों के लिए अब हर सुबह एक सवाल लेकर आती है—“क्या हम सुरक्षित हैं?” यह कोई एक घटना नहीं यह दुखद मामला अकेला नहीं है। हाल के दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू नागरिकों पर हमले, मारपीट और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं। कभी किसी दुकानदार पर धारदार हथियार से हमला होता है, कभी किसी युवक को भीड़ घेर लेती है, तो कहीं किसी को सिर्फ उसकी पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है। इन घटनाओं की वजहें अलग-अलग बताई जाती हैं—कभी लूट, कभी निजी रंजिश, कभी अफ़वाहें। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए सच्चाई एक ही है: उनके अपने अब लौटकर नहीं आएंगे। डर के साये में जीता एक समुदाय हिंदू मोहल्लों में आज डर साफ महसूस किया जा सकता है। लोग रात में बाहर निकलने से कतराते हैं, दुकानें जल्दी बंद हो जाती हैं और बच्चे भी सहमे रहते हैं। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों, जो कभी खुशियों से भरे होते थे, अब सुरक्षा की चिंता के बीच मनाए जाते हैं। स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्हें सिर्फ न्याय ही नहीं, बल्कि भरोसा भी चाहिए—कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को उसकी आस्था के कारण निशाना नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन और प्रतिक्रियाएँ इन घटनाओं पर पुलिस जांच की बात कह रही है और कुछ मामलों में कार्रवाई का दावा भी किया गया है। साथ ही, मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से सख़्त कदम उठाने की मांग की है ताकि दोषियों को सज़ा मिले और आगे ऐसी घटनाएं न हों। भारत और दूसरे देशों में भी इन खबरों को लेकर चिंता जताई गई है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। क्यों ज़रूरी है यह बात उठाना यह मुद्दा सिर्फ एक देश या एक समुदाय तक सीमित नहीं है। जब कहीं भी किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण हिंसा का शिकार होना पड़ता है, तो वह पूरी इंसानियत के लिए एक चेतावनी होती है। बांग्लादेश (Bangladesh) की विविधता उसकी ताकत रही है—हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है। इस साझी विरासत को बचाने के लिए ज़रूरी है कि नफ़रत और डर की जगह कानून, इंसाफ़ और इंसानियत को आगे रखा जाए। आज Bangladesh के कई हिंदू परिवार अपने घरों में यह दुआ कर रहे हैं कि अगली सुबह शांति के साथ आए। उनकी मांग बहुत साधारण है—जीने का हक़, बिना डर के, बिना भेदभाव के। यह सिर्फ एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की परीक्षा है कि वह हिंसा के सामने खड़ा होता है या चुप रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Tariff Policy ईरान से कारोबार किया तो अमेरिका में 25% टैक्स तय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस देश पर अमेरिका के साथ होने वाले पूरे व्यापार पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इसे “तुरंत लागू और अंतिम फैसला” बताया है। यह घोषणा सोशल मीडिया के ज़रिए आई, लेकिन असर पूरी दुनिया के बाज़ारों और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ता दिख रहा है। क्या है Trump Iran Tariff Policy? सरल शब्दों में कहें तो ट्रंप का कहना है— “अगर कोई देश ईरान से खरीद-फरोख्त करता है, तो उसे अमेरिका से होने वाले हर व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैक्स देना होगा।” मतलब यह कि ईरान के साथ तेल, गैस, केमिकल, फूड या किसी भी तरह का कारोबार करने वाले देशों को अमेरिकी बाज़ार में अपने सामान को 25% महंगे शुल्क के साथ बेचना पड़ेगा। यह फैसला क्यों लिया गया? यह कदम ऐसे समय पर आया है जब ईरान में राजनीतिक अशांति और विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि उसकी नीतियों में बदलाव आए।ट्रंप की रणनीति साफ दिखती है—ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना ताकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़े। कौन-कौन से देश होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित? ईरान के साथ व्यापार करने वाले कई बड़े देश अब मुश्किल में हैं, जिनमें शामिल हैं: इन देशों को अब दो रास्तों में से एक चुनना होगा—या तो ईरान के साथ व्यापार घटाएँ, या अमेरिका के साथ अपने निर्यात को महंगा होने दें। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत का ईरान के साथ सीधा तेल आयात पहले से कम है, लेकिन खाद्य सामग्री, रसायन, फार्मा और मशीनरी जैसे कई सेक्टरों में व्यापार अब भी चलता है।अगर भारत ईरान के साथ यह कारोबार जारी रखता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात 25% टैरिफ के कारण महंगा हो सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घटेगी। दूसरी ओर, ईरान भारत के लिए रणनीतिक साझेदार भी रहा है—चाहे वह चाबहार पोर्ट हो या मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता। ऐसे में भारत के सामने आर्थिक और कूटनीतिक संतुलन साधने की चुनौती होगी। वैश्विक बाजारों में क्यों मची हलचल? ट्रंप का यह टैरिफ सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे: कई देशों के लिए यह स्थिति “या तो अमेरिका, या ईरान” जैसा कठिन चुनाव बन सकती है। कानूनी और व्यावहारिक सवाल हालांकि ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके कानूनी ढांचे और लागू करने के तरीके अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं।क्या यह सभी उत्पादों पर लगेगा?क्या कुछ सेक्टरों को छूट मिलेगी?इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यह नीति कितनी सख्ती से लागू होती है। Trump Iran Tariff News केवल ईरान की कहानी नहीं है—यह पूरी दुनिया के व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करने वाला फैसला है।अगर यह नीति पूरी ताकत से लागू होती है, तो कई देशों को अपनी विदेश नीति और व्यापार रणनीति दोबारा सोचनी पड़ेगी। दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आर्थिक फैसले सीधे राजनीति को और राजनीति सीधे आम लोगों की जेब को प्रभावित करती है। अब देखना यह है कि देश इस चुनौती से कैसे निपटते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TCS

Tata Consultancy Services Q3 Report TCS Profit Down, लेकिन Business Growth मजबूत

भारत की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की कमाई पर थोड़ा दबाव रहा, लेकिन कारोबार की रफ्तार बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। मुनाफा घटा, लेकिन कारोबार बढ़ा इस तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 14% घटकर ₹10,657 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब ₹12,380 करोड़ था। यानी कंपनी ने कमाई की, लेकिन लागत और कुछ एक-बार के खर्चों के कारण लाभ कम हुआ। वहीं दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 5% बढ़कर ₹67,087 करोड़ पर पहुंच गया। यह साफ संकेत है कि ग्राहकों से मिलने वाला काम और डील्स मजबूत बनी हुई हैं। डिविडेंड ने शेयरधारकों को दिया सुकून नतीजों के साथ TCS ने ₹57 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया, जिसमें इंटरिम और स्पेशल डिविडेंड शामिल है। ऐसे समय में जब मुनाफा दबाव में है, यह कदम निवेशकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। मुनाफा क्यों घटा? कंपनी के अनुसार, इस तिमाही में कुछ एक-बार के खर्च और ऑपरेशनल लागत बढ़ने से प्रॉफिट पर असर पड़ा। हालांकि, यह कमजोरी कारोबार की मांग में गिरावट की वजह से नहीं, बल्कि अस्थायी खर्चों के कारण रही। यही वजह है कि कई निवेशक इसे लंबे समय के नजरिये से अभी भी सकारात्मक मान रहे हैं। AI और डिजिटल सेवाओं से उम्मीद TCS तेजी से AI, क्लाउड और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में यही सेक्टर रेवेन्यू और मुनाफे को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। कई बड़े क्लाइंट्स पहले ही इन सेवाओं में निवेश बढ़ा रहे हैं। शेयर बाजार की प्रतिक्रिया नतीजों के बाद TCS के शेयरों में ज्यादा बड़ी गिरावट नहीं दिखी। निवेशकों ने कमजोर मुनाफे से ज्यादा ध्यान रेवेन्यू ग्रोथ और डिविडेंड पर दिया, जिससे शेयर को सपोर्ट मिला। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump का India Visit अगले 1-2 साल में संभव भारत बनेगा Pax Silica का सदस्य

अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आशा जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अगले एक-दो साल में भारत (India) का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करते हैं और यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा कर सकता है। भारत को मिलेगा Pax Silica Group का हिस्सा राजदूत गोर ने यह भी बताया कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica समूह में शामिल होने का निमंत्रण मिलेगा। यह समूह सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देता है।भारत के शामिल होने के बाद यह समूह जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और इज़राइल जैसे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। औपचारिक घोषणा अगले महीने होने की उम्मीद है। व्यापार वार्ता में नई उम्मीदें गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता (India-US Trade Talks) जल्द ही फिर से शुरू होगी, और 13 जनवरी को नई बातचीत आयोजित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक मतभेदों का समाधान निकाला जाएगा।उनके इस बयान से भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में सकारात्मक उछाल देखा गया। अमेरिका-भारत रिश्ते: सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग केवल व्यापार तक नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, आतंकवाद विरोधी प्रयास, शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैला है। उन्होंने इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बताया। ट्रंप का भारत दौरा अगले 1-2 साल में संभव है। भारत Pax Silica समूह का हिस्सा बनेगा। व्यापार वार्ता में सुधार और बाजारों में सकारात्मक प्रभाव। द्विपक्षीय सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि तकनीक और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran Anti-Government Protest तेहरान से Mashhad तक प्रदर्शन जारी

ईरान (Iran) में सरकार-विरोधी प्रदर्शन अब 16वें दिन भी लगातार जारी हैं। ये आंदोलन पहले आर्थिक संकट और गिरती हुई रियाल के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब ये व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग में बदल गया है। तेहरान, मशहद, तब्रिज, क़ोम और जहेदान जैसे शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर Supreme Leader आयतोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया है। इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, हजारों लोग गिरफ्तार हुए हैं और कई जगहों पर गोलियों का उपयोग भी किया गया है। इसके कारण दर्जनों लोग मारे गए और हजारों लोग हिरासत में हैं। विदेशों को दोष देने का आरोप Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल इन विरोध प्रदर्शनों को भड़काने में शामिल हैं। अराघची ने कहा कि ये देश शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक संघर्ष में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, तेहरान ने इस बाबत UN Security Council को पत्र भेजा है। हालांकि, विशेषज्ञ और मानवाधिकार संगठन मानते हैं कि यह प्रदर्शन देश के अंदर की समस्याओं — जैसे आर्थिक संकट, राजनीतिक दबाव और लंबे समय से चली आ रही नाराजगी — के कारण हैं। विदेशी हस्तक्षेप का आरोप अक्सर सरकार की कठोर कार्रवाई को सही ठहराने के लिए लगाया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती सरकार ने हाल ही में उन लोगों पर सख्त कार्रवाई की है, जिन पर इज़राइल की खुफिया एजेंसी Mossad के लिए जासूसी का आरोप था। यह कदम विरोध प्रदर्शन और विदेशी हस्तक्षेप के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है। जनता की उम्मीद और आंदोलन ईरानी जनता अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है। यह आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की दिशा में बढ़ रहा है। हर दिन नए शहरों में प्रदर्शन होते हैं, और लोगों की आवाज़ तेज़ होती जा रही है। Iran Protest 2026 न सिर्फ़ एक आर्थिक संघर्ष है, बल्कि यह जनता की आवाज़, उम्मीद और बदलाव की मांग का प्रतीक बन गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee

ED vs Mamata Banerjee Supreme Court में I-PAC Raid विवाद पर नया मोड़

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने I-PAC जांच के दौरान ED अधिकारियों को धमकाया और उनकी जांच में बाधा डाली। याचिका में ED के अधिकारियों निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडिला ने कहा है कि जब वे कोलकाता में छानबीन (Search & Seizure) कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचे। ED का दावा है कि इस दौरान उनके दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए, जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई। ED ने सुप्रीम कोर्ट से अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील भी की गई है। मामले की पृष्ठभूमि (Background) यह विवाद I-PAC और कोयला हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। पहले ED ने इसे कोलकाता हाई कोर्ट में उठाया था, लेकिन सुनवाई स्थगित (Adjourned) कर दी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court में Caveat दाखिल किया ताकि कोर्ट किसी भी आदेश से पहले उनकी दलील सुने। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ (Political Reactions) यह मामला अब Supreme Court में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। I-PAC raid और ED vs Mamata Banerjee की यह लड़ाई न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक (Legal & Constitutional) दृष्टि से भी ध्यान आकर्षित कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Price Alert सोने और चांदी की Record रैली, कब करें Investment

सोना (Gold) और चांदी (Silver) ने जनवरी 2026 की शुरुआत में इतिहास रच दिया है। दुनियाभर के बाजारों में ये दोनों धातुएं रिकॉर्ड हाई पर पहुँच गई हैं, और निवेशकों के लिए यह एक नई चर्चा का विषय बन गई हैं। International Market में सोना Gold और चांदी Silver की रफ्तार Global uncertainty और डॉलर की कमजोरी ने सोना और चांदी को और attractive बना दिया है। तेजी के मुख्य कारण (Reasons Behind Surge) इन तीन कारणों ने मिलकर Gold और Silver के भाव को इतिहास की ऊंचाई पर पहुँचाया। Investors और Buyers के लिए सुझाव Summary: Gold और Silver की Current Situation Gold और Silver आज निवेशकों के लिए opportunities और challenges दोनों लेकर आए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Gujarat सोमनाथ की आस्था और Rajkot का विकास एक साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का तीन दिन का गुजरात दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी विरासत और भविष्य की दिशा को एक साथ दिखाने वाला सफर बन गया।सोमनाथ के पवित्र तट से लेकर राजकोट के निवेश मंच तक, हर पड़ाव पर भारत के गौरव और विकास की झलक साफ दिखाई दी। Somnath Swabhiman Parv: इतिहास जो आज भी जीवित है गिर सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ इस यात्रा का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक हिस्सा रहा।प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें घोड़ों का जुलूस, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भव्य ड्रोन शो शामिल था। सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की जिजीविषा का प्रतीक है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि— सोमनाथ की कहानी हार की नहीं, बल्कि हर बार फिर उठ खड़े होने की कहानी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं के हमलों के बावजूद यह मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है।यह संदेश सिर्फ अतीत के लिए नहीं, बल्कि आज के भारत के आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। Rajkot में Vibrant Gujarat Regional Conference सोमनाथ से सीधे राजकोट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने Vibrant Gujarat Regional Conference (Kutch–Saurashtra) का उद्घाटन किया।यह मंच गुजरात की निवेश क्षमता, उद्योग और भविष्य की अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने रखने के लिए था। पीएम मोदी (PM Modi) ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र अब भारत के ग्रीन एनर्जी हब बन रहे हैं।कच्छ में बन रहा 30 GW का हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात अब सिर्फ उद्योगों का राज्य नहीं, बल्किग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और स्टार्टअप्स का नया सेंटर बन चुका है। Investment, Jobs और Youth की नई दिशा राजकोट सम्मेलन में निवेशकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा किगुजरात में अब इंटरनेशनल एजुकेशन हब, स्किल यूनिवर्सिटी और डिफेंस लॉजिस्टिक्स ट्रेनिंग पर खास फोकस किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिलेगा —नौकरियां, स्टार्टअप्स और ग्लोबल लेवल पर काम करने के मौके। India Growth Story में Gujarat की बड़ी भूमिका PM Modi ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और गुजरात इस विकास की रीढ़ बना हुआ है।पोर्ट, इंडस्ट्री, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर गुजरात भारत को Viksit Bharat 2047 की ओर ले जा रहा है। सोमनाथ से राजकोट तक: एक भारत की दो तस्वीरें इस पूरे दौरे में दो भारत एक साथ दिखाई दिए— यही PM Modi की गुजरात यात्रा की असली पहचान रही —जहां विरासत भी है और विज़न भी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Lucknow

Lucknow Fire Breaking इंस्टीट्यूट में आग से मची अफरा-तफरी, कई छात्र घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एक इंस्टीट्यूट में अचानक लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद छात्र-छात्राएं और स्टाफ घबरा गए। धुआं भरते ही बिगड़े हालात प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही आग लगी, पूरे भवन में घना धुआं फैल गया और बाहर निकलने के रास्ते बंद होने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा। कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती इस हादसे में कुछ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। एक छात्र के नीचे गिरने से लोहे की ग्रिल से टकराने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी घटना के बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Market Update: Sensex 500 Points Jump, Nifty में 150 अंकों की बढ़त

आज भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई जब पूरे दिन खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला और दिन के अंत तक यह मजबूती और गहरी हो गई। Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,300 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 150 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। बाजार में क्यों लौटी रौनक? पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद आज बाजार में जो तेजी देखने को मिली, उसके पीछे कई अहम वजहें रहीं— इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया। सेक्टर अपडेट: किसने कितना दिया साथ? आज के कारोबार में अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन इस तरह रहा— IT सेक्टर: दिन का सबसे बड़ा स्टार, लगातार खरीदारी देखने को मिलीOil & Gas: मजबूत उछाल के साथ निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीBanking: स्थिर से सकारात्मक रुझानFMCG: हल्की लेकिन स्थिर बढ़त बाजार का मूड कैसा रहा? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेजी फिलहाल एक राहत भरी रिकवरी (relief rally) का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, आगे भी ग्लोबल संकेत और आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के बीच फिलहाल बड़े और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को लेकर भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Silver Market कीमतों में जोरदार उछाल, निवेशक सतर्क

देश के सर्राफा बाजार में आज सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। लगातार बढ़ते दामों ने जहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, वहीं आम खरीदारों के बजट पर भी दबाव साफ नजर आने लगा है। ताजा अपडेट के अनुसार चांदी के भाव में आज ₹5,826 प्रति किलोग्राम की बड़ी छलांग दर्ज की गई है। इस तेजी के बाद चांदी का रेट अब करीब ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बाजार में यह स्तर काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से चांदी लगातार मजबूत बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी तेजी जारी है। 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) अब ₹1,46,000 के आसपास पहुंच गया है, जिसमें ₹1,694 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोने के दामों में यह उछाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों के संकेतों का असर माना जा रहा है। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं Gold-Silver के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। इसके साथ ही भारत में शादी और त्योहारों का सीजन भी नजदीक है, जिससे ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों पर असर और निवेश का संकेत लगातार बढ़ते रेट्स का सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो शादी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, निवेशक इसे अभी भी सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, सोना-चांदी की यह तेजी संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और भी ज्यादा सक्रिय और अस्थिर रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
Keir Starmer

Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा उलटफेर, Andy Burnham सबसे बड़े दावेदार

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी अपनी पार्टी लेबर पार्टी (Labour Party) के कई सांसदों को अब यह भरोसा नहीं है कि वह अगले आम चुनाव (General Election) में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। ऐसे में उन्होंने पार्टी और देश के हित को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व केवल पद पर बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी राजनीतिक अस्थिरता के पूरा हो सके। पार्टी के भीतर बढ़ता गया दबाव पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई सांसदों का मानना था कि सरकार की लोकप्रियता में गिरावट और हाल के चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले चुनाव में जीत आसान नहीं होगी। इसी बीच कुछ उपचुनावों के नतीजों और पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को और मजबूत कर दिया। आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बाद स्टार्मर ने इस्तीफा देने का फैसला किया। Andy Burnham बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। पार्टी के कई सांसद उनके समर्थन में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, लेबर पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नेता और प्रधानमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होगी। ब्रिटेन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? प्रधानमंत्री के अचानक इस्तीफे से ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नई सरकार बनने के बाद आर्थिक नीतियों, विदेश नीति और घरेलू सुधारों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व आने के बाद लेबर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है ताकि अगले आम चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल किया जा सके। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सत्ता परिवर्तन पर दुनिया की नजर कीर स्टार्मर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि लेबर पार्टी अपना नया नेता किसे चुनती है और ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि लेबर पार्टी के लिए नई राजनीतिक शुरुआत भी मानी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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