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North Korea

उत्तर कोरिया (North Korea) ने पहली बार माना – रूस (Russia) के लिए यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) में भेजे सैनिक

उत्तर कोरिया (North Korea) ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने रूस (Russia) का समर्थन करते हुए यूक्रेन (Ukraine) के खिलाफ अपने सैनिक भेजे हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, किम जोंग उन (Kim Jong Un) के आदेश पर, उनके सैनिकों ने रूस के साथ मिलकर “कुर्स्क (Kursk) सीमा क्षेत्र को पूरी तरह से मुक्त” किया। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही रूस के चीफ ऑफ स्टाफ वालेरी गेरासिमोव (Valery Gerasimov) ने उत्तर कोरियाई सैनिकों की “वीरता” की सराहना की थी। यह पहली बार है जब रूस ने भी सार्वजनिक रूप से उत्तर कोरियाई सैनिकों की भागीदारी को स्वीकार किया है। North Korea से भेजे गए लगभग 11,000 सैनिकों में से कम से कम 1,000 सैनिक युद्ध में मारे गए हैं।यूक्रेन (Ukraine) ने रूस के कुर्स्क (Kursk) क्षेत्र पर दोबारा नियंत्रण पाने के दावे को खारिज कर दिया है। वहीं अमेरिका (USA) ने उत्तर कोरिया को चेताया है कि उसे अब इस युद्ध को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी उठानी होगी। क्यों भेजे सैनिक? KCNA के मुताबिक, सैनिकों की तैनाती, प्योंगयांग और मास्को (Moscow) के बीच हुई एक आपसी रक्षा संधि के तहत की गई थी। किम जोंग उन ने कहा, “जो न्याय के लिए लड़े, वे हमारे देश की प्रतिष्ठा और सम्मान के प्रतिनिधि हैं।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुर्स्क (Kursk) में उत्तर कोरिया और रूस ने “रक्त से साबित भाईचारे और गठबंधन” का प्रदर्शन किया है, जो दोनों देशों के रिश्तों को हर स्तर पर मजबूत करेगा। KCNA ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिशन समाप्त होने के बाद उत्तर कोरियाई सैनिकों का क्या होगा और क्या उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दी जाएगी। किस तरह के सैनिक भेजे गए? सूत्रों के अनुसार, उत्तर कोरिया (North Korea) ने अपनी एक “एलीट यूनिट” स्टॉर्म कॉर्प्स (Storm Corps) से सैनिक भेजे थे। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये सैनिक आधुनिक युद्ध की वास्तविकताओं के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। पूर्व ब्रिटिश सेना के टैंक कमांडर कर्नल हैमिश डी ब्रेटन-गॉर्डन (Col. Hamish de Bretton-Gordon) ने कहा था, “ये मुश्किल से प्रशिक्षित सैनिक हैं, जिन्हें रूसी अधिकारियों के तहत लड़ना पड़ रहा है, जिनकी भाषा वे समझते भी नहीं।” यूक्रेन के लिए क्यों बना खतरा? भले ही उत्तर कोरियाई सैनिकों को कमजोर माना गया हो, लेकिन यूक्रेन के शीर्ष सैन्य कमांडर जनरल ओलेक्जेंडर सिरस्की (Gen. Oleksandr Syrskyi) ने चेताया कि ये सैनिक यूक्रेनी मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये सैनिक बड़ी संख्या में हैं। 11,000 से 12,000 तक अत्यधिक प्रेरित और प्रशिक्षित सैनिक आक्रामक कार्रवाइयों में जुटे हैं। ये सोवियत रणनीतियों पर आधारित तरीकों से लड़ रहे हैं और अपनी भारी संख्या पर निर्भर कर रहे हैं।” ताज़ा खबरें और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए – Deshharpal
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pancang

28 अप्रैल 2025 (सोमवार) का पंचांग

तिथि: शुक्ल पक्ष द्वादशी नक्षत्र: विशाखा योग: सिद्धि करण: बव सूर्योदय: 05:50 AM सूर्यास्त: 06:47 PM चंद्रोदय: 03:10 PM चंद्र राशि: वृश्चिक राहुकाल: 07:20 AM – 08:59 AM शुभ मुहूर्त: अभिजीत 11:50 AM – 12:40 PM ग्रह दशा: सूर्य मेष में, चंद्रमा वृश्चिक में
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Daily Horoscope

28 अप्रैल 2025 (सोमवार) | Monday| दैनिक राशिफल (Daily Horoscope)

मेष (Aries ♈️): ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी। नई जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं।वृषभ (Taurus ♉️):आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। किसी पर जल्दी भरोसा न करें।मिथुन (Gemini ♊️): प्रेम संबंध प्रगाढ़ होंगे। कोई उपहार मिल सकता है।कर्क (Cancer ♋️): व्यापार में लाभ होगा। पुरानी योजनाएं सफल होंगी।सिंह (Leo ♌️): आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। घर में सुख-शांति बनी रहेगी।कन्या (Virgo ♍️): – सेहत में सुधार होगा। दिन सुखद रहेगा।तुला (Libra ♎️):– आज कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है।वृश्चिक(Scorpio ♏️): – दिन लाभदायक रहेगा। मान-सम्मान बढ़ेगा।धनु (Sagittarius ♐️)– अध्ययन में रुचि बढ़ेगी। छात्रों के लिए समय अच्छा है।मकर(Capricorn ♑️) – अतीत की किसी बात से मन विचलित हो सकता है। धैर्य रखें।कुंभ (Aquarius ♒️)– रिश्तों में मजबूती आएगी। नई योजनाएं बनेगी।मीन (Pisces ♓️)– परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। मन प्रसन्न रहेगा।
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pancang

27 अप्रैल 2025 (रविवार) का पंचांग

तिथि: चतुर्दशी (08:27 AM से), तत्पश्चात अमावस्या पक्ष: कृष्ण पक्ष (वैशाख मास) नक्षत्र: रेवती योग: शुभ सूर्योदय: 05:44 AM सूर्यास्त: 06:55 PM चंद्रमा: मीन राशि में राहुकाल: 05:08 PM – 06:46 PM शक संवत: 1947 (विश्वावसु) विक्रम संवत: 2082
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Pope Francis

Pope Francis के Funeral में शामिल हुए Droupadi Murmu, Donald Trump, Volodymyr Zelenskyy समेत कई वर्ल्ड लीडर्स

रोम (इटली):वैटिकन सिटी के सेंट पीटर्स स्क्वायर में आज Pope Francis का अंतिम संस्कार आयोजित किया गया, जिसमें दुनियाभर से करीब 2 लाख श्रद्धालु और 130 से अधिक विदेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वभर के कई प्रमुख नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी श्रद्धांजलि भारत की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Pope Francis को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और गोवा के डिप्टी स्पीकर जॉशुआ डी सूजा भी मौजूद रहे। अमेरिका से डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन पहुंचे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके अलावा वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन भी उपस्थित रहे। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी पहुंचे यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। खबरों के अनुसार, जेलेंस्की ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप से एक निजी बैठक भी की। अन्य देशों से भी पहुंचे प्रमुख नेता अंतिम संस्कार समारोह की खास बातें देश-दुनिया की नई खबरों के लिए जुड़े रहें Deshharpal के साथ
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Indus Water

भारत-पाकिस्तान टकराव: Indus Water Treaty पर India के फैसले से Pakistan में बौखलाहट

भारत (India) द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर लिए गए नए फैसले पर पाकिस्तान (Pakistan) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने चेतावनी दी है कि अगर भारत ने पानी के प्रवाह को रोका, तो पाकिस्तान उसका “मुंहतोड़ जवाब” देगा। शरीफ ने भारत के कदम को “उकसाने वाला” और “आक्रामक” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय शांति (regional peace) के लिए गंभीर खतरा है। 🇮🇳 भारत ने क्यों भेजा Indus Treaty Review Notice? भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल (Indus Water) संधि की पुनरावलोकन (review) के लिए पाकिस्तान को आधिकारिक नोटिस भेजा है। इसमें भारत ने कई आधुनिक कारण गिनाए हैं — जैसे जनसंख्या वृद्धि (population growth), पर्यावरणीय परिवर्तन (climate change), स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता (need for clean energy) और सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism)। भारत का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में यह संधि अब अप्रासंगिक होती जा रही है और पाकिस्तान ने कई मौकों पर इसके प्रावधानों का दुरुपयोग किया है। 🇵🇰 Pakistan’s Response: चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय मंच की धमकी शहबाज शरीफ ने कहा, “पाकिस्तान किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत को गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।” पाकिस्तान ने यह भी इशारा किया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। बढ़ता Indo-Pak तनाव: Visa, Trade और Security इस ताजा विवाद के चलते भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहरा हो गया है। खबरों के मुताबिक:
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Tesla

Tesla की भारत में एंट्री की बड़ी तैयारी: पुराने Model 3 बुकर्स को मिल रहा Refund, जल्द हो सकता है Launch

भारत में Tesla के प्रवेश को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। Elon Musk की अगुवाई वाली Tesla Inc. ने भारत में अपने पहले इलेक्ट्रिक कार मॉडल की बुकिंग करने वाले ग्राहकों को रिफंड देना शुरू कर दिया है। 2016 में जिन ग्राहकों ने Model 3 के लिए एडवांस बुकिंग की थी, उन्हें अब कंपनी बुकिंग राशि लौटा रही है। क्यों लौटाए जा रहे हैं पैसे? ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिफंड उस वजह से हो रहा है क्योंकि Tesla अब अपने पुराने Model 3 वर्जन को बंद कर रही है। वहीं, कंपनी द्वारा भेजे गए ईमेल्स से यह संकेत भी मिल रहा है कि भारत में अपने ऑपरेशन्स को लेकर एक नई रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी की ओर से ग्राहकों को भेजे गए ईमेल में लिखा है: “हम फिलहाल आपकी बुकिंग राशि वापस करना चाहते हैं। जब हम भारत में अपने ऑफर्स को अंतिम रूप देंगे, तब हम फिर से आपसे संपर्क करेंगे। हमें उम्मीद है कि हमारे लॉन्च और डिलीवरी के समय आप हमारे साथ फिर जुड़ेंगे।” भारत में Tesla की एंट्री अब ज्यादा दूर नहीं? Tesla द्वारा भारत में पुरानी बुकिंग्स का रिफंड करना इस ओर इशारा करता है कि कंपनी जल्द ही यहां नए मॉडल्स के साथ दोबारा दस्तक दे सकती है। खास बात यह है कि ये ईमेल्स Tesla के आधिकारिक डोमेन से भेजे गए हैं, जो इस संभावित एंट्री को और मजबूत आधार देते हैं। इसके अलावा Elon Musk ने हाल ही में X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर यह ऐलान किया कि वे 2024 के अंत तक भारत की यात्रा करेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, जिसमें कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने की संभावना जताई जा रही है। भारत के EV मार्केट में बड़ा बदलाव ला सकती है अगर भारत सरकार टैरिफ स्ट्रक्चर को Tesla जैसी कंपनियों के लिए आसान बनाती है, तो यह देश के EV सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। एक तरफ जहां भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ रही है, वहीं ग्लोबल ब्रांड की एंट्री से भारतीय ग्राहकों को और विकल्प मिलेंगे। हालांकि इसका असर घरेलू ऑटो कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो देश में लाखों लोगों को रोजगार देती हैं। वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत बना Tesla की नई उम्मीद गौरतलब है कि पिछले साल Tesla की वैश्विक डिलीवरी में एक दशक में पहली बार गिरावट आई थी। वहीं, चीन की BYD जैसी कंपनियां के लिए सीधी चुनौती बन रही हैं। ऐसे में भारत जैसे बड़े और उभरते बाजार में Tesla की एंट्री कंपनी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
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pancang

26 अप्रैल 2025 (शनिवार) का पंचांग

तिथि: त्रयोदशी (पूर्ण दिन) पक्ष: कृष्ण पक्ष (वैशाख मास) नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद योग: वैधृति सूर्योदय: 05:45 AM सूर्यास्त: 06:54 PM चंद्रमा: मीन राशि में राहुकाल: 09:04 AM – 10:42 AM शक संवत: 1947 (विश्वावसु) विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त) व्रत: मासिक शिवरात्रि (चतुर्दशी तिथि का आरंभ सुबह 08:27 बजे से)
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Waqf Act

Waqf संशोधन कानून 2025 पर बढ़ा विवाद: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अहम आश्वासन, अगली सुनवाई 5 मई को

25 अप्रैल 2025 — Waqf (संशोधन) अधिनियम 2025 को लेकर देशभर में मचा सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर संभावित असर के बीच केंद्र सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कुछ विवादित प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगाने का आश्वासन दिया है। क्या है मामला? वक्फ एक्ट 2025 में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनमें से कुछ प्रावधानों पर खासा विरोध हो रहा है। इसमें वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया, ‘waqf बाय यूजर’ की समाप्ति, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति जैसी बातें शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिलहाल गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्डों में शामिल करने और कोर्ट द्वारा घोषित वक्फ संपत्तियों को डीनोटिफाई करने जैसे प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार का पक्ष क्या है? सरकार ने हलफनामे में कहा कि यह कानून मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता। बल्कि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि संशोधन केवल प्रशासनिक और नियामक प्रकृति के हैं, धार्मिक अधिकारों से इनका कोई लेना-देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का रुख मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सरकार के आश्वासन को दर्ज करते हुए साफ किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक कोई नई नियुक्ति या डीनोटिफिकेशन की प्रक्रिया नहीं होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। विवादास्पद प्रावधान जिन पर मचा है बवाल Waqf संशोधन अधिनियम 2025 अभी कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। जहां एक ओर सरकार इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं मुस्लिम समाज इसे धार्मिक हस्तक्षेप मान रहा है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस अहम मामले पर क्या फैसला सुनाता है। DeshHarpal पर जुड़े रहें ऐसे ही खबरों के लिए।
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UP Board Result

UP Board Result 2025: 10वीं और 12वीं के परिणाम आज दोपहर 12:30 बजे होंगे घोषित, जानें पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 25 अप्रैल 2025 को UP Board Result की कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम जारी करने की तारीख और समय का ऐलान कर दिया है। ये परिणाम आज दोपहर 12:30 बजे जारी किए जाएंगे। करीब 54 लाख छात्र-छात्राएं इस वर्ष की परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनका इंतजार अब समाप्त होने वाला है। UP Board Result Class 10th और 12th का परिणाम कैसे देखें?छात्र-छात्राएं अपने परीक्षा परिणाम की जांच यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों पर कर सकते हैं: कुल कितने छात्रों ने परीक्षा दी? इस साल कुल 54,37,233 छात्रों ने यूपी बोर्ड की परीक्षा में हिस्सा लिया, जिसमें से 25,77,997 छात्र इंटरमीडिएट (कक्षा 12) और 25,56,992 छात्र हाई स्कूल (कक्षा 10) के लिए परीक्षा में बैठे थे। यह आंकड़ा यूपी बोर्ड के इतिहास में एक अहम मील का पत्थर है। परीक्षाओं की तारीखें और मूल्यांकन प्रक्रिया यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी से 12 मार्च 2025 तक आयोजित की गई थीं। इन परीक्षाओं को दो पालियों में आयोजित किया गया था। इसके बाद, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 19 मार्च से 2 अप्रैल 2025 तक किया गया, जिसमें कुल 1,34,723 परीक्षकों ने 2.96 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। DigiLocker और अन्य ऑनलाइन सुविधाएं इस बार छात्रों को उनकी अंकतालिकाओं को DigiLocker के माध्यम से डाउनलोड करने की सुविधा भी दी जा रही है। यह डिजिटल विकल्प छात्रों के लिए एक और सुविधा लेकर आया है, जिससे वे कभी भी, कहीं भी अपने परिणाम तक पहुंच सकते हैं। साथ ही, छात्रों को उनके मूल अंकपत्र अपने संबंधित स्कूलों से प्राप्त करने के लिए कहा जाएगा, क्योंकि ऑनलाइन अंकपत्र अस्थायी होते हैं। UP Board Result 2025 के लिए अन्य महत्वपूर्ण विवरण UPMSP से संबंधित हेल्पलाइन नंबरअगर छात्रों को परिणाम संबंधित किसी भी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वे यूपी बोर्ड की हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं। समाप्ति शब्द:इस वर्ष के यूपी बोर्ड के परिणाम विद्यार्थियों के लिए किसी खास चुनौती की तरह रहे हैं। परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए यूपी बोर्ड से संबंधित आधिकारिक वेबसाइटों का नियमित रूप से चेक करना आवश्यक होगा। साथ ही, परिणाम के तुरंत बाद छात्रों को इसे अपने स्कूल से प्रमाणित करवाने के लिए भी कहा जाएगा। अधिक जानकारी के लिए Deshharpal साथ जुड़े रहें।
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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