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1 मई 2025 (गुरुवार) का पंचांग

तिथि: पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) नक्षत्र: मूल (प्रातः बाद) योग: हर्षण करण: तैतिल सूर्योदय: 05:48 AM सूर्यास्त: 06:49 PM चंद्रोदय: 07:00 PM चंद्र राशि: मिथुन राहुकाल: 01:55 PM – 03:34 PM शुभ मुहूर्त: पुण्यकाल सारा दिन ग्रह दशा: सूर्य मेष में, चंद्रमा मिथुन में
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Daily Horoscope

1 मई 2025 (गुरुवार )| Thursday | दैनिक राशिफल (Daily Horoscope)

मेष (Aries ♈️): साहसिक निर्णय लाभ देंगे। जीवन में ऊर्जा रहेगी। वृषभ (Taurus ♉️): धन निवेश सोच-समझकर करें। परिवार के साथ समय बिताएं। मिथुन (Gemini ♊️): प्रेम जीवन में सुधार आएगा। कार्यक्षेत्र में तरक्की के संकेत। कर्क (Cancer ♋️): मनचाही सफलता मिलेगी। मित्रों से सहयोग मिलेगा। सिंह (Leo ♌️): रचनात्मक कामों में सफलता मिलेगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा। कन्या (Virgo ♍️): स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें। वाणी पर संयम रखें। तुला (Libra ♎️): मित्रों के साथ समय बितेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वृश्चिक (Scorpio ♏️): संतान से सुख मिलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता। धनु (Sagittarius ♐️): नए प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए उत्तम दिन। मकर (Capricorn ♑️): संपत्ति में निवेश लाभकारी रहेगा। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कुंभ (Aquarius ♒️): व्यावसायिक मामलों में समझदारी से काम लें। लाभ होगा। मीन (Pisces ♓️): परिवार में खुशहाली आएगी। किसी पुराने विवाद का हल निकलेगा।
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Census

Caste Census अब होगी Main Census का हिस्सा: 1931 के बाद पहली बार होगा जातीय डेटा कलेक्शन

देश की अगली Census अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी — यह भारत के सामाजिक ताने-बाने को एक नई पारदर्शिता के साथ दुनिया के सामने लाएगी। केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब जातीय आंकड़ों की गिनती भी मुख्य जनगणना का हिस्सा होगी। यह फैसला न केवल सरकार की सोच में बदलाव दर्शाता है, बल्कि देश की करोड़ों जातियों और उपजातियों को पहली बार मुख्य धारा के डेटा में लाने की कोशिश भी है। अब हर जाति की होगी गिनती, खुलेगा असली सामाजिक चित्र केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि आगामी Census में अब जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “समाज में बहुत सारी योजनाएं जातीय आधार पर बनती हैं, लेकिन ठोस आंकड़े नहीं होने के कारण असली लाभार्थी वंचित रह जाते हैं।“ अब पहली बार केंद्र सरकार यह जिम्मेदारी खुद उठाकर एक भरोसेमंद जातीय डेटा उपलब्ध कराएगी। राज्यों के जातीय सर्वे को बताया ‘राजनीतिक नाटक’ मंत्री ने कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में हुए जातीय सर्वेक्षणों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ये सर्वे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे और इनमें पारदर्शिता की भारी कमी रही। केंद्र सरकार का मानना है कि जब तक जातीय Census पूरे देश में एकसमान रूप से नहीं होगी, तब तक इसके आधार पर नीति बनाना गलत होगा। क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक? जातीय आंकड़े क्यों ज़रूरी हैं? भारत एक विविधता से भरा देश है। हर क्षेत्र, हर गाँव और हर समुदाय में अलग-अलग सामाजिक परतें हैं। लेकिन जब योजनाएं बनती हैं, तो बिना आंकड़ों के सिर्फ अनुमान के आधार पर फैसले होते हैं। अब जातीय Census के जरिए सरकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि कौन पीछे रह गया है, और किसे वास्तव में मदद की जरूरत है। आम जनता की आवाज को मिलेगा प्लेटफॉर्म यह कदम उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर आया है जो लंबे समय से कहते आए हैं कि — “हमें गिना नहीं जाता, तो हमें क्यों माना जाएगा?” अब जातियों की पहचान और उनकी समस्याएं सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं रहेंगी, बल्कि नीति और समाधान का हिस्सा बनेंगी। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Waqf Act

भोपाल में ‘Light Bandh’ Protest: Waqf Act के खिलाफ मुस्लिम समाज का अनोखा प्रदर्शन

भोपाल, मध्यप्रदेश — देशभर में वक्फ कानून (Waqf Act) में हुए संशोधनों के विरोध में मुस्लिम समाज द्वारा एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया गया। मंगलवार, 30 अप्रैल 2025 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के आह्वान पर भोपाल सहित कई शहरों में ‘लाइट बंद करो’ (Light Bandh) अभियान चलाया गया। Waqf Act के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध AIMPLB ने मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि वे रात 9:00 से 9:15 बजे तक अपने घरों और दुकानों की लाइटें बंद रखें। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन का उद्देश्य था सरकार को यह संदेश देना कि वक्फ संशोधन कानून को लेकर मुस्लिम समाज में गहरी नाराजगी है। क्या है विरोध का कारण? AIMPLB के महासचिव मौलाना फजलूर्रहीम मुजद्दीदी ने Waqf Act को भेदभावपूर्ण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि नए संशोधनों से वक्फ संपत्तियों पर मुस्लिम समाज का नियंत्रण कम हो गया है और यह सीधा धार्मिक हस्तक्षेप है। भोपाल में हुए धरना-प्रदर्शन इससे पहले भोपाल में सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड पर सैकड़ों लोगों ने वक्फ बिल के खिलाफ धरना दिया था। हालांकि प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने के कारण कई प्रदर्शन मोती मस्जिद रोड जैसे सार्वजनिक स्थलों पर किए गए। इन विरोधों में AIMPLB, मुस्लिम त्योहार समिति और कई सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, देशभर में विरोध AIMPLB ने वक्फ संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत की है। बोर्ड का कहना है कि यह सिर्फ एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Sanjay Dutt

Sanjay Dutt Statement: “Film Industry बंट चुकी है, पहले जैसी Unity नहीं रही”

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता संजय दत्त (Sanjay Dutt) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) के बदलते स्वरूप पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज की इंडस्ट्री पहले की तरह एकजुट और पारिवारिक नहीं रही, बल्कि अब इसमें “बंटवारा” और “असुरक्षा” हावी हो गई है। Bollywood में अब Unity नहीं, बढ़ गई है Insecurity – संजय दत्त संजय दत्त ने बताया कि एक समय था जब फिल्म इंडस्ट्री एक परिवार की तरह हुआ करती थी। कलाकारों में आपसी सम्मान और दोस्ती थी। लेकिन आज हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है। उन्होंने कहा, DeshHarpal  पर बॉलीवुड की दुनिया से जुड़ी हर ताज़ा खबर पढ़ें और अपडेट रहें
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Char Dham Yatra

Char Dham Yatra 2025 शुरू: Gangotri-Yamunotri के कपाट खुले, Kedarnath-Badrinath के लिए श्रद्धालु तैयार

उत्तराखंड की Char Dham Yatra 2025 का शुभारंभ 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर हो गया। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत रूप से खोल दिए गए हैं। अब श्रद्धालु 2 मई को केदारनाथ और 4 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार कर रहे हैं। Char Dham Yatra मां गंगा के धाम गंगोत्री में उत्सव का माहौल गंगोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया अत्यंत भव्य रही। सुबह 10:30 बजे मुखबा गांव से मां गंगा की डोली धाम पहुंची। वहां वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना हुई और राजपूताना राइफल्स बैंड की धुनों के बीच कपाट खोले गए। इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई, जिससे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। यमुनोत्री धाम में मां यमुना के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 11:55 बजे खोले गए। मां यमुना की डोली खरसाली गांव से होते हुए जानकी चट्टी और भैरव मंदिर होकर धाम पहुंची। इस दौरान करीब 3000 श्रद्धालु उत्सव में सम्मिलित हुए। वैदिक मंत्रोच्चारण और परंपरागत विधियों के अनुसार कपाट खोले गए। अक्षय तृतीया को यमुना नदी में स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है, इसलिए यमुनोत्री घाट पर भी स्नान करने वालों की भीड़ रही। अब केदारनाथ और बद्रीनाथ की बारी उत्तराखंड सरकार द्वारा इन दोनों धामों में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद कर दिया गया है। यात्रियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश DeshHarpal पर पढ़ें हर बड़ी खबर।
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Digital Access

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: Digital Access अब “मौलिक अधिकार” (Fundamental Right)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में डिजिटल एक्सेस (Digital Access) को मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों — खासकर ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों — को समान रूप से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करे। यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें से एक याचिका एक एसिड अटैक सर्वाइवर ने दायर की थी। पीड़िता ने बैंक में KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया के दौरान आने वाली परेशानियों का ज़िक्र किया था। डिजिटल भेदभाव अब असंवैधानिक कोर्ट ने कहा, “डिजिटल डिवाइड को खत्म करना अब नीति का सवाल नहीं बल्कि संविधानिक कर्तव्य है। जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) में अब डिजिटल पहुंच को भी शामिल करना अनिवार्य हो गया है।” कोर्ट ने बताया कि आज के समय में हेल्थकेयर, बैंकिंग, शिक्षा जैसी ज़रूरी सेवाएं डिजिटल माध्यमों (Digital Access)से ही उपलब्ध होती हैं। ऐसे में जिनके पास इन सेवाओं तक पहुंच नहीं है, वे पीछे छूट रहे हैं। 20 अहम निर्देश दिए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को KYC प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने के लिए 20 जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि विशेष रूप से विकलांग और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जाना चाहिए क्या था मामला? एक एसिड अटैक सर्वाइवर, प्रज्ञा प्रसून, जुलाई 2023 में बैंक में खाता खोलने पहुंची थीं। लेकिन Digital Access डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के दौरान बैंक ने उनसे “ब्लिंक” करने यानी पलकों को झपकाने की मांग की — ताकि यह साबित हो सके कि वे जीवित हैं। लेकिन उनके चेहरे की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पाया। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद बैंक ने अपवाद के रूप में खाता खोलने की अनुमति दी। प्रज्ञा ने कोर्ट से अपील की थी कि एसिड अटैक पीड़ितों और अन्य विकलांग व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार नई गाइडलाइंस जारी करे, ताकि वे बिना भेदभाव के डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। जजों ने क्या कहा? जस्टिस महादेवन ने इस आदेश को लिखा, जिसे उनके साथी जस्टिस पारदीवाला ने “शानदार” बताते हुए सराहना की। उन्होंने कहा कि अब आर्थिक अवसरों से लेकर मूलभूत सेवाओं तक पहुंच डिजिटल माध्यमों से ही संभव है, इसलिए Article 21 (जीवन का अधिकार) की नई व्याख्या आवश्यक हो गई है। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Donald Trump

India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द finalized होने की उम्मीद, ट्रंप बोले – बातचीत सही दिशा में

India-US Trade भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत के साथ टैरिफ को लेकर बातचीत “बहुत अच्छी तरह” आगे बढ़ रही है और जल्द ही एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप मिशिगन में रैली से पहले मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि वे अफ्रीका की यात्रा की योजना बना रहे हैं और ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों से भी बातचीत प्रस्तावित है। भारत सरकार बना रही है ‘लुभावना प्रस्ताव’, बातचीत में तेजी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकार India-US Trade डील को स्थायी और आकर्षक बनाने के लिए एक विशेष प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसे ‘स्वीटनर’ कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका को दी जाने वाली रियायतें भविष्य में किसी अन्य देश को नहीं दी जाएं। इसके लिए सरकार “फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड नेशन” (FMFN) क्लॉज शामिल करने पर विचार कर रही है। इस क्लॉज के तहत यदि भारत भविष्य में किसी और देश को बेहतर टैरिफ सुविधा देता है, तो वह सुविधा अमेरिका को भी अपने आप मिल जाएगी। यह क्लॉज अब तक भारत ने बहुत ही कम समझौतों में इस्तेमाल किया है। अमेरिकी अधिकारी भी सकारात्मक India-US Trade अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने इस बात की पुष्टि की कि भारत के साथ बातचीत सही दिशा में है और भारत संभवतः उन पहले देशों में होगा, जिनके साथ अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देगा। वहीं, अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने CNBC को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि एक समझौता तैयार है, लेकिन अब अमेरिका उस देश के प्रधानमंत्री और संसद की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन आगामी 90 दिनों की समयसीमा से पहले इस डील को पूरा करना चाहता है। ट्रंप का टैरिफ दांव: भारत को 26%, अमेरिका को 52% शुल्क 2 अप्रैल को डॉनल्ड ट्रंप ने “जवाबी शुल्क” (Reciprocal Tariffs) की घोषणा की, जिसके तहत भारत सहित कई देशों पर नई टैरिफ दरें लागू की गईं। भारत पर 26% टैरिफ लगाया गया, जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 52% शुल्क लगाता है। हालांकि, 9 अप्रैल को ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बाद ट्रंप ने सभी जवाबी शुल्कों पर 90 दिन की रोक (pause) लगाने की घोषणा की। यह रोक चीन को छोड़कर सभी देशों पर लागू होगी। लेकिन 10% का बेसलाइन टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेगा। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम हमले पर PM Modi का एक्शन मोड, बोले – सेना को पूरी छूट, मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

PM Modi का एक्शन मोड जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश और चिंता का माहौल है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों – जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे – की जान चली गई। यह हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इस हमले के बाद मंगलवार को PM Modi ने दिल्ली स्थित अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी शामिल हुए। बैठक में PM Modi ने सशस्त्र बलों को यह संदेश दिया कि वे देश के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए “पूरी तरह से स्वतंत्र” हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हमारे सैनिक तय करेंगे कि आतंकियों को कैसे, कब और कहां जवाब दिया जाए। उन्हें हर तरह की परिचालन छूट दी गई है।” “आतंकवाद को मिलेगा मुँहतोड़ जवाब” – PM Modi का सख्त संदेश सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ भारत का रुख बेहद स्पष्ट है – “यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है कि हम आतंकवाद को जड़ से खत्म करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देंगी, उन्हें हर हाल में जवाब मिलेगा – चाहे वह सीमा पार हों या देश के भीतर छिपे हों। CCS बैठक में लिए गए बड़े फैसले – पाकिस्तान को दिया गया कड़ा संदेश हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए थे: इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि तय समयसीमा के बाद कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में न रुके। हर आतंकी को सजा मिलेगी – पीएम मोदी का संकल्प प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा, “भारत हर एक आतंकी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और सजा देगा। हम उन्हें धरती के छोर तक भी क्यों न जाना पड़े, वहां तक पहुंचेंगे।” गृह मंत्रालय की तैयारी भी तेज इसी दिन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम बैठक की। इसमें BSF, NSG और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ सशस्त्र सीमा बल (SSB) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस बैठक में देशभर में सुरक्षा चाक-चौबंद रखने और आतंक विरोधी रणनीतियों पर चर्चा की गई। DeshHarpal पर पढ़ें देश-दुनिया से जुड़ी हर बड़ी खबर।
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pancang

30 अप्रैल 2025 (बुधवार)का पंचांग

तिथि: शुक्ल पक्ष चतुर्दशी नक्षत्र: ज्येष्ठा योग: वज्र करण: कौलव सूर्योदय: 05:49 AM सूर्यास्त: 06:48 PM चंद्रोदय: 05:50 PM चंद्र राशि: रात 03:14 AM के बाद मिथुन राशि में प्रवेश राहुकाल: 12:17 PM – 01:55 PM शुभ मुहूर्त: सर्वार्थसिद्धि योग सायं से ग्रह दशा: सूर्य मेष में, चंद्रमा वृश्चिक/मिथुन में
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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