पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल (Ketan Agarwal) की मौत ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। जिस घटना को शुरुआत में एक सामान्य ट्रैकिंग हादसा माना जा रहा था, वह अब एक कथित सुनियोजित हत्या के मामले के रूप में सामने आ रही है। पुलिस जांच में मिले डिजिटल सबूत, हजारों फोन कॉल्स और संदिग्ध गतिविधियों ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ट्रैकिंग ट्रिप से शुरू हुई मौत की कहानी 18 जून 2026 को केतन अग्रवाल महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले पर ट्रैकिंग के लिए गए थे। उनके साथ उनकी मंगेतर सिया गोयल भी मौजूद थीं। ट्रैकिंग के दौरान केतन के गहरी खाई में गिरने की खबर सामने आई, जिसके बाद इसे दुर्घटना मान लिया गया। हालांकि, परिवार को शुरुआत से ही घटना पर संदेह था। परिजनों का कहना था कि कई सवाल ऐसे थे जिनके जवाब नहीं मिल रहे थे। इसी शक ने पुलिस को मामले की गहराई से जांच करने के लिए मजबूर किया। 2000 से ज्यादा कॉल्स ने बढ़ाया शक जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले। इसमें पता चला कि दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों में 2004 से अधिक फोन कॉल्स हुई थीं। इतना ही नहीं, दोनों ने सैकड़ों घंटों तक बातचीत भी की थी। पुलिस को संदेह है कि लगातार संपर्क में रहने वाले दोनों आरोपी कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बना रहे थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सबूतों में से एक बनकर सामने आया है। ऑनलाइन सर्च की गई हत्या की जानकारी मामले की जांच कर रही टीम को आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि इंटरनेट पर हत्या के तरीकों और योजना से जुड़ी जानकारियां खोजी गई थीं। पुलिस अब मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कई बार नाकाम हुई साजिश? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि 18 जून की घटना कथित तौर पर पहली कोशिश नहीं थी। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि इससे पहले भी केतन को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस केस को केवल एक दिन की घटना नहीं बल्कि कई महीनों तक चली कथित साजिश के रूप में देख रही हैं। CCTV फुटेज से मिला अहम सुराग जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने गर्म मौसम के बावजूद हूडी पहन रखी थी। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने उसकी पहचान चेतन चौधरी के रूप में की। अधिकारियों का कहना है कि इसी सुराग ने पूरे मामले को नई दिशा दी और कथित साजिश की परतें खुलनी शुरू हुईं। परिवार के सवालों से खुलने लगा राज केतन अग्रवाल के परिवार ने घटना के बाद लगातार निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों के संदेह और पुलिस की तकनीकी जांच के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले को हादसे से हत्या की ओर मोड़ दिया। जांच जारी, अदालत में तय होगी सच्चाई फिलहाल पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य सबूतों को जोड़कर पूरी तस्वीर समझने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।