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Monsoon Session

Parliament Monsoon Session: पेपर लीक मुद्दे पर संसद में हंगामा, Rajya Sabha में Vande Mataram Bill पेश

संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। गुरुवार को भी संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से लाखों युवाओं की मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। Paper Leak Issue पर संसद में विपक्ष का प्रदर्शन पेपर लीक का मुद्दा संसद में एक बार फिर प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। सांसदों ने मांग की कि सरकार इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा करे और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई। हालांकि सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई। Rajya Sabha में Vande Mataram Bill पेश पेपर लीक विवाद के बीच राज्यसभा में Vande Mataram Bill पेश किया गया। इस बिल को लेकर संसद में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उससे जुड़े नियमों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल पेश होने के बाद सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों पर चर्चा की जरूरत बताई। संसद में आगे भी जारी रह सकता है टकराव मानसून सत्र में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं से जुड़े मुद्दे और नए विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज होती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही हंगामेदार रहने के संकेत हैं। देशभर के छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदमों पर है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना इस समय सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET Exam Controversy: डॉ. मनोज शिरूरे को नहीं मिली राहत, Court ने खारिज की जमानत अर्जी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG Paper Leak Case में आरोपी डॉक्टर मनोज शिरूरे को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी Bail Plea (जमानत याचिका) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद डॉ. मनोज शिरूरे को अभी न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। Court ने क्यों नहीं दी जमानत? डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CBI (Central Bureau of Investigation) ने इसका विरोध किया। जांच एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि NEET पेपर लीक मामला केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। CBI का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है। एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि आरोपी को राहत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। NEET Paper Leak Case में आरोपी डॉक्टर पर गंभीर आरोप जांच एजेंसी के अनुसार, डॉ. मनोज शिरूरे पर कथित तौर पर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। CBI इस मामले में आरोपियों के बीच संपर्क, संदिग्ध लेन-देन और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक होना बेहद गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर असर पड़ता है। CBI कर रही बड़े नेटवर्क की जांच NEET Paper Leak Case की जांच में CBI कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी का फोकस इस बात का पता लगाना है कि पेपर लीक की पूरी साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसका नेटवर्क कितना बड़ा था। CBI डिजिटल सबूत, बातचीत के रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर मामले में और खुलासे हो सकते हैं। छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला NEET UG परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के लिए मेडिकल करियर का रास्ता तय करती है। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामले छात्रों के भरोसे और परीक्षा की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। कई छात्रों और अभिभावकों की मांग रही है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। अब आगे क्या होगा? कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद डॉ. मनोज शिरूरे को फिलहाल राहत नहीं मिली है। वहीं CBI अपनी जांच जारी रखेगी। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की कार्रवाई और कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jamshedpur

Jamshedpur डिमना डैम में डूबे दो Junior Doctors, Rescue Operation के बाद बरामद हुए शव

झारखंड के जमशेदपुर (Jamshedpur) से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। शहर के डिमना डैम में हुए हादसे में एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों की मौत हो गई। दोनों डॉक्टर अपने साथियों के साथ डैम घूमने गए थे, लेकिन अचानक हुए हादसे ने एक पल में खुशियों को मातम में बदल दिया। करीब छह घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों के शव बरामद किए गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही एमजीएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में शोक का माहौल छा गया। साथी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और परिजन इस हादसे से गहरे सदमे में हैं। मोबाइल निकालने के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के कुछ जूनियर डॉक्टर डिमना डैम क्षेत्र में घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल पानी में गिर गया। मोबाइल निकालने की कोशिश के दौरान दोनों डॉक्टर गहरे पानी में चले गए और डूब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और बचाव दल को दी। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश अभियान शुरू किया। 6 घंटे तक चला Search Operation हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, सिविल डिफेंस टीम और स्थानीय गोताखोरों ने डिमना डैम में खोज अभियान शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दोनों डॉक्टरों के शव पानी से बाहर निकाले गए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे। हादसे के बाद पूरे इलाके में गम का माहौल देखने को मिला। MGM Medical College में पसरा मातम दोनों जूनियर डॉक्टर एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही कॉलेज और अस्पताल परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। साथी डॉक्टरों ने इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति जताई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। बारिश के मौसम में जलाशयों से सावधानी की जरूरत डिमना डैम हादसा एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश देता है। बारिश के मौसम में तालाब, डैम और नदियों में पानी का स्तर बढ़ जाता है और कई बार गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता रहा है कि जलाशयों में बिना सुरक्षा इंतजाम के उतरने से बचें और किसी भी तरह का जोखिम न लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Market Down Today: Sensex 700 Points टूटा, Nifty 23,646 पर आया; Oil Price Rise से बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली। Stock Market में आई इस कमजोरी के चलते BSE Sensex करीब 700 अंक गिरकर 75,613 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं Nifty 50 में भी लगभग 200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,646 के स्तर पर आ गया। बाजार में अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, बढ़ती महंगाई की आशंका और Crude Oil Price के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। Crude Oil Price Rise से बाजार पर बढ़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। Crude Oil के 100 डॉलर के पार जाने से भारत की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात के जरिए पूरा करता है। महंगे कच्चे तेल का असर आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने बाजार में सतर्क रुख अपनाया और जमकर बिकवाली की। Sensex और Nifty में बड़ी गिरावट, निवेशकों को नुकसान शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स के कई प्रमुख शेयर दबाव में नजर आए। बैंकिंग, IT, ऑटो और अन्य बड़े सेक्टर के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने बाजार में मुनाफावसूली की, जिसके कारण शुरुआती कारोबार के बाद गिरावट और बढ़ती चली गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। Global Market Weakness का भारतीय बाजार पर असर भारतीय शेयर बाजार सिर्फ घरेलू घटनाओं से नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजारों की चाल से भी प्रभावित होता है। अमेरिका और अन्य वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। अगर विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। आगे कैसी रह सकती है Stock Market की चाल? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में Crude Oil Price, Global Market Trend और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी। हालांकि बाजार में गिरावट के दौरान लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छे शेयरों में अवसर भी बन सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल और बाजार की स्थिति को समझकर निवेश करें। फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा इन संकेतों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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आशीष कुमार दश

Infosys Leadership आशीष कुमार दश संभालेंगे CEO पद, पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 12.2% बढ़ा

देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys के लिए जुलाई का महीना कई मायनों में खास रहा है। कंपनी ने जहां अपने नए CEO के नाम का ऐलान किया है, वहीं पहली तिमाही के शानदार नतीजों से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। आशीष कुमार दश अब इंफोसिस की कमान संभालेंगे और उनके सामने कंपनी को टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इंफोसिस के ताजा Q1 Results के अनुसार, कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़ हो गया है। पिछले साल की इसी अवधि में इंफोसिस का मुनाफा ₹6,922 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़ पहुंच गया है। आशीष कुमार दश बने Infosys के नए CEO इंफोसिस ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए आशीष कुमार दश को नया Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है। आईटी सेक्टर की तेज प्रतिस्पर्धा, AI क्रांति और डिजिटल बदलाव के दौर में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि नए CEO के नेतृत्व में Infosys अपने डिजिटल बिजनेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड टेक्नोलॉजी और ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ को और मजबूत करेगी। Q1 Results में Infosys का शानदार प्रदर्शन पहली तिमाही के नतीजों ने दिखाया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद Infosys की ग्रोथ रफ्तार बनी हुई है। कंपनी को डिजिटल सर्विसेज, क्लाउड सॉल्यूशन और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स से फायदा मिला है। आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से मांग को लेकर दबाव देखा जा रहा था, लेकिन इंफोसिस के बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। AI और Digital Transformation पर रहेगा फोकस टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच AI अब कंपनियों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। Infosys भी AI आधारित सेवाओं और नए डिजिटल सॉल्यूशन पर लगातार निवेश कर रही है। नए CEO आशीष कुमार दश के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंपनी की ग्रोथ को बनाए रखना, नए क्लाइंट जोड़ना और बदलते टेक्नोलॉजी ट्रेंड के साथ आगे बढ़ना होगी। Investors की नजर अब नई रणनीति पर मजबूत तिमाही नतीजों और नए नेतृत्व के ऐलान के बाद अब निवेशकों की नजर Infosys की आने वाली रणनीति पर होगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि नए CEO के नेतृत्व में कंपनी किस तरह AI, डिजिटल सर्विसेज और इंटरनेशनल बिजनेस को आगे बढ़ाती है। कुल मिलाकर, Infosys के लिए यह दौर बदलाव और नई संभावनाओं का है। एक ओर कंपनी को नया नेतृत्व मिला है, वहीं दूसरी ओर शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने उसकी मजबूत स्थिति को साबित किया है। Infosys Q1 Results Highlights: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Commonwealth Games 2026

Team India at Commonwealth Games 2026: तिरंगे के साथ Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain की दमदार एंट्री

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2026 का आगाज शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लिए सबसे खास पल वह रहा, जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और गर्व पूरे देश के लिए यादगार क्षण बन गया। Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain बनीं भारत की Flag Bearer भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार महिला खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक चुना। जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में पहुंचा, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का स्वागत किया। तिरंगे के साथ दोनों खिलाड़ियों की तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। यह सम्मान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई बड़े मंचों पर गौरवान्वित कर चुकी हैं। King Charles ने किया Commonwealth Games 2026 का उद्घाटन उद्घाटन समारोह में King Charles ने आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत की घोषणा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया भी हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की। Opening Ceremony में दिखी संस्कृति और तकनीक की शानदार झलक ओपनिंग सेरेमनी में मेजबान देश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ पेश किया। पारंपरिक नृत्य, लाइव म्यूजिक, लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और आतिशबाजी ने समारोह को यादगार बना दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में हिस्सा लिया और अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया। भारत को इन खेलों में पदकों की बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दल कई खेलों में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाएं भी इस बार भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देशवासियों की उम्मीदों के साथ शुरू हुआ सफर उद्घाटन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन द्वारा तिरंगा लेकर स्टेडियम में प्रवेश करना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण रहा। अब खेल प्रेमियों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत अधिक से अधिक पदक जीतकर अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Layoffs

Tech Layoffs 2026: Amazon और Meta ने 40 हजार कर्मचारियों को निकाला, AI बना सबसे बड़ी वजह?

Amazon Layoffs और Meta Layoffs ने एक बार फिर दुनिया भर के टेक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 10 महीनों में दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 40 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन फैसलों के पीछे सबसे बड़ा कारण Artificial Intelligence (AI) पर बढ़ता निवेश, लागत में कटौती और कंपनियों का तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या आने वाले समय में टेक सेक्टर में नौकरी जाने का सिलसिला और तेज हो सकता है? Amazon ने क्यों घटाई अपनी Workforce? ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी Amazon ने इस साल कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। जनवरी 2026 में कंपनी ने करीब 16 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद हाल ही में Artificial General Intelligence (AGI) से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में भी टीमों का पुनर्गठन किया गया। कंपनी का कहना है कि वह AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ऑटोमेशन संभव है, वहां संसाधनों का नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। Amazon का फोकस अब भविष्य की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है। Meta भी AI Strategy पर कर रही बड़ा दांव Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भी अपने वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की है। इसके साथ ही कई नई भर्तियों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। Meta का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। इसी वजह से कंपनी अपने खर्चों को कम कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टूल्स और नई तकनीकों पर ज्यादा निवेश कर रही है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Tech Layoffs? पिछले कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्ती की थी। अब बाजार की बदलती परिस्थितियों और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— क्या आगे भी बढ़ सकता है Layoffs का आंकड़ा? टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल छंटनी पूरी तरह रुकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में भी कुछ कंपनियां अपने बिजनेस और AI रणनीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर AI Engineer, Machine Learning Specialist, Data Scientist, Cloud Engineer, Cyber Security Expert और Prompt Engineer जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी नौकरी के अवसर खत्म नहीं हो रहे, बल्कि उनका स्वरूप बदल रहा है। कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख? विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों की समझ भी उतनी ही जरूरी हो गई है। जो प्रोफेशनल समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे और AI से जुड़ी नई स्किल्स सीखेंगे, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर बने रहेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk सरकार से समझौते के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, Written Assurance मिलने का दावा

पिछले 27 दिनों से जारी सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति के चलते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। अनशन खत्म होने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस समझौते का हिस्सा नहीं बनी है। यह घटनाक्रम पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपने वादों को तय समय में किस तरह लागू करती है। 27 दिनों तक चला आंदोलन, बातचीत से निकला समाधान सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार 27 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस दौरान आंदोलन को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला। छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई। शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, लेकिन लगातार संवाद के बाद दोनों पक्ष एक साझा सहमति तक पहुंचे। इसके बाद सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। किन मांगों पर बनी सहमति? अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन अहम मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रधान के इस्तीफे की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना था। नड्डा ने पिलाया जूस, खत्म हुआ 27 दिनों का अनशन समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्वयं पहुंचे और उन्होंने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। अनशन खत्म होने के साथ ही लंबे समय से जारी गतिरोध भी समाप्त हो गया। अब वादों को पूरा करने की चुनौती सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उन पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय वादों को लागू नहीं किया गया, तो आगे की रणनीति पर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा। आंदोलन का संदेश करीब चार सप्ताह तक चला यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर चल रही आवाज का प्रतीक बन गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने से फिलहाल विवाद का समाधान निकलता दिखाई दे रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब उन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sikh Pilgrims

Sikh Pilgrims पाकिस्तान ने बदले Religious Yatra Rules, Private Travel पर सख्ती

भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं को लेकर एक बार फिर नियमों में सख्ती देखने को मिल रही है। पाकिस्तान में सामने आए जासूसी मामले के बाद अब धार्मिक यात्रियों की आवाजाही और उनके दस्तावेजों की जांच को लेकर व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबर है। खास तौर पर सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्राओं को लेकर Private Tour के बजाय अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा कराने पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत से पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा में SGPC (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) और HSGMC (Haryana Sikh Gurdwara Management Committee) जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम हो सकती है। यानी श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के लिए तय संस्थागत प्रक्रिया का पालन करना होगा। जासूसी मामले के बाद Security पर फोकस पाकिस्तान में सामने आए कथित जासूसी मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियां धार्मिक यात्राओं को लेकर भी ज्यादा सतर्क नजर आ रही हैं। यात्रियों की पहचान, यात्रा का उद्देश्य, दस्तावेज और उनके यात्रा कार्यक्रम की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, नियमों में बदलाव को किसी एक जासूसी मामले से सीधे जोड़ने को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे फिलहाल पाकिस्तान की बढ़ी हुई Security और Documentation प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। Private Tour पर क्यों बढ़ी सख्ती? निजी स्तर पर धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों की जानकारी और यात्रा कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी मुश्किल हो सकती है। इसके मुकाबले SGPC या HSGMC जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से जत्थे जाने पर यात्रियों की सूची और यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले से व्यवस्थित रहती है। यही वजह है कि धार्मिक यात्राओं को एक निर्धारित चैनल के जरिए संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे यात्रियों के दस्तावेजों और यात्रा कार्यक्रम की जांच भी पहले से की जा सकती है। श्रद्धालुओं के लिए क्या बदलेगा? अगर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो पाकिस्तान जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को निजी तौर पर Travel Plan बनाने के बजाय अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से यात्रा की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए Private Tour या व्यक्तिगत व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं। अब उन्हें जत्थे या अधिकृत धार्मिक संस्थाओं के जरिए यात्रा करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर भी विवाद इसी बीच पाकिस्तान में धार्मिक यात्रियों से जुड़ा एक और मामला सामने आया। फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पाकिस्तान से भारत के हेमकुंड साहिब जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को कथित तौर पर यात्रा की अनुमति नहीं मिली। अधिकारियों की ओर से NOC यानी No Objection Certificate को लेकर सवाल उठाए गए। इस घटना के बाद धार्मिक यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेजों और दोनों देशों के बीच लागू नियमों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। भारत-पाकिस्तान के बीच Religious Travel का पुराना Protocol भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं के लिए लंबे समय से एक निर्धारित व्यवस्था मौजूद है। 1974 Religious Shrines Protocol के तहत दोनों देशों के श्रद्धालुओं को कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की अनुमति दी जाती है। पाकिस्तान में ननकाना साहिब, पंजा साहिब और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारे भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक महत्व रखते हैं। हर साल अलग-अलग मौकों पर श्रद्धालुओं के जत्थे इन धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। वहीं, पाकिस्तान के सिख श्रद्धालु भी भारत में हेमकुंड साहिब समेत दूसरे धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। Wagah-Attari Route को लेकर भी उठी मांग पाकिस्तानी श्रद्धालुओं की भारत यात्रा को लेकर Wagah-Attari Land Route का मुद्दा भी सामने आया है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने पाकिस्तान के हाई कमिश्नर को पत्र लिखकर पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए जमीन के रास्ते भारत आने की अनुमति देने की मांग की थी। धार्मिक यात्राओं को लेकर लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी चिंता यही है कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर उनकी आस्था और यात्रा पर न पड़े। फिलहाल तस्वीर यही है कि India-Pakistan Religious Yatra को लेकर सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में अधिकृत संस्थाओं के जरिए यात्रा करना और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखना बेहद जरूरी हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bank Holiday

Bank Holiday: 5-Day Working की मांग को लेकर हड़ताल, शनिवार-रविवार से लगातार 3 दिन असर

देशभर के Bank Holiday 5-Day Working की मांग को लेकर आज हड़ताल का रुख अपनाया है। बैंककर्मियों की मांग है कि बैंकों में सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम हो और शनिवार-रविवार को नियमित छुट्टी दी जाए। हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी होने से बैंक शाखाओं की सेवाओं पर लगातार तीन दिनों तक असर पड़ सकता है। बैंक यूनियनों की ओर से लंबे समय से 5-Day Banking System लागू करने की मांग उठाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में पांच दिन काम और दो दिन की छुट्टी से कर्मचारियों को आराम के साथ परिवार के लिए भी समय मिल सकेगा। Bank Strike का ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में होने वाले रोजमर्रा के कई काम प्रभावित हो सकते हैं। कैश जमा करना, नकद निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक ड्राफ्ट और दूसरी branch-related services के लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम परेशानी होगी। UPI, ATM, Internet Banking और Mobile Banking जैसी सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है। किसी तकनीकी समस्या या बैंक की अपनी व्यवस्था के कारण इनमें अस्थायी दिक्कत अलग बात हो सकती है। क्यों हो रही है 5-Day Working की मांग? बैंक कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिन की working व्यवस्था से कर्मचारियों को बेहतर Work-Life Balance मिल सकता है। उनका मानना है कि लगातार दो दिन की छुट्टी मिलने से कर्मचारी अगले सप्ताह बेहतर ऊर्जा और क्षमता के साथ काम कर पाएंगे। यह मांग बैंकिंग कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चर्चा में रही है। यूनियनों का जोर है कि बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक कामकाजी माहौल के अनुरूप बनाया जाए। शनिवार-रविवार की छुट्टी से बढ़ेगा असर आज की हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण कई बैंक शाखाएं लगातार तीन दिन प्रभावित रहेंगी। ऐसे में जिन ग्राहकों का कोई जरूरी branch work है, उन्हें अगले working day तक इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर महीने या सप्ताह के जरूरी भुगतान, चेक क्लियरेंस या दूसरे शाखा संबंधी काम वाले ग्राहकों को पहले से योजना बनाना बेहतर रहेगा। Digital Banking से राहत की उम्मीद आज बैंकिंग का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है। मोबाइल से पैसे ट्रांसफर करने से लेकर बिल भुगतान और UPI transaction तक कई काम घर बैठे किए जा सकते हैं। इसलिए हड़ताल का असर मुख्य रूप से physical bank branches पर देखने को मिल सकता है। फिर भी जिन लोगों को बैंक शाखा में जाकर काम कराना जरूरी है, उन्हें बैंक दोबारा खुलने के बाद भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। अब सरकार और बैंकिंग संगठनों पर नजर बैंक कर्मचारियों की 5-Day Working की मांग के बीच अब सभी की नजर आगे होने वाली बातचीत पर है। कर्मचारियों की मांग और बैंकिंग सेवाओं की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना अहम होगा। फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि जरूरी branch-related काम को ध्यान में रखकर अपनी banking plan करें और जहां संभव हो, Digital Banking Services का इस्तेमाल करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hezbollah

Hezbollah Tunnel Blast: इजराइल ने उड़ाया 2 KM लंबा सुरंग नेटवर्क, दर्ज हुआ 4.1 Magnitude का कंपन

इजराइल और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच तनाव के बीच दक्षिणी लेबनान में बड़ी सैन्य कार्रवाई हुई है। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के एक बड़े Underground Tunnel Network को विस्फोट कर ध्वस्त करने का दावा किया है। यह सुरंग करीब 2 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है। इसे उड़ाने के बाद इलाके में इतना तेज कंपन महसूस हुआ कि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 4.1 Magnitude की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की। इजराइल के मुताबिक यह कोई सामान्य सुरंग नहीं थी, बल्कि हिजबुल्लाह का एक बड़ा भूमिगत सैन्य परिसर था। सेना का दावा है कि यहां हथियारों के साथ-साथ कमांड और ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए भी इंतजाम किए गए थे। इजराइल ने क्यों उड़ाई हिजबुल्लाह की सुरंग? इजराइली सेना के अनुसार यह Underground Complex दक्षिणी लेबनान के Ali al-Taher Ridge क्षेत्र में बनाया गया था। सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह ने इस इलाके में अपनी सैन्य क्षमता को छिपाने के लिए जमीन के नीचे लंबा नेटवर्क तैयार किया था। इजराइल का कहना है कि इस सुरंग के भीतर हथियार रखने की जगह, कमांड सेंटर और लड़ाकों के लंबे समय तक भूमिगत रहने के इंतजाम मौजूद थे। यही वजह है कि इसे नष्ट करना इजराइली सेना के लिए एक अहम ऑपरेशन माना जा रहा है। जोरदार Blast के बाद आया 4.1 का कंपन सुरंग को नष्ट करने के लिए किए गए विस्फोट के बाद आसपास के इलाके में जोरदार कंपन महसूस किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इस दौरान 4.1 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की। इस घटना ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि यह कंपन प्राकृतिक भूकंप के बजाय बड़े सैन्य विस्फोट के बाद दर्ज किया गया था। धमाके की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका असर आसपास के क्षेत्र में महसूस किया गया। Tunnel के अंदर हथियारों का जखीरा होने का दावा इजराइली सेना ने दावा किया है कि इस भूमिगत परिसर में रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन और एंटी-टैंक हथियारों समेत कई तरह की सैन्य सामग्री मौजूद थी। यहां हिजबुल्लाह की Badr Unit से जुड़ा कमांड ढांचा होने की बात भी कही गई है। इजराइल लंबे समय से हिजबुल्लाह के Underground Infrastructure को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। ऐसे में इस सुरंग का नष्ट किया जाना इजराइल की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। Netanyahu का बड़ा बयान, बोले- Mission Complete कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ऑपरेशन को लेकर संतोष जताया। इजराइली नेतृत्व ने संकेत दिया कि इलाके में सुरक्षा से जुड़े अभियान का अहम लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दक्षिणी लेबनान में तनाव खत्म हो गया है। इजराइल की ओर से साफ कहा गया है कि इलाके पर निगरानी जारी रहेगी और हिजबुल्लाह को दोबारा अपना सैन्य ढांचा खड़ा करने से रोकने की कोशिश की जाएगी। South Lebanon में अभी भी तनाव बरकरार दक्षिणी लेबनान लंबे समय से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव का प्रमुख क्षेत्र रहा है। यहां जमीन के ऊपर सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ Underground Networks को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गंभीर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबे सुरंग नेटवर्क का ध्वस्त किया जाना इस बात का संकेत है कि जमीन के नीचे बनाए गए सैन्य ढांचे को लेकर इजराइल कितना गंभीर है। अब इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्षेत्र में तनाव कम होगा या आने वाले दिनों में Israel-Hezbollah Conflict और बढ़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Delhi पहुंचे Putin, Modi से Meeting पर नजर; Su-57 Deal की भी चर्चा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS Summit 2026 में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। उनके भारत दौरे को लेकर पहले से ही काफी चर्चा थी। अब पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली उनकी मुलाकात पर है। भारत और रूस के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है, पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है। Putin-Modi Meeting पर सबकी नजर पुतिन के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है। इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ वैश्विक परिस्थितियों और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लगातार अपनी Strategic Autonomy पर जोर देता रहा है। वहीं रूस भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल है। Su-57 को लेकर भी चर्चा तेज पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस के Su-57 Fighter Jet को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच इस विमान से संबंधित संभावित सहयोग पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, अभी इसे किसी पक्की डील के तौर पर नहीं देखा जा सकता। किसी संभावित समझौते की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही इसकी तस्वीर साफ होगी। इसलिए फिलहाल Su-57 को लेकर चल रही खबरों को संभावित बातचीत के तौर पर ही देखना बेहतर है। 2016 Goa Summit में हुआ था S-400 Agreement भारत और रूस के संबंधों में साल 2016 का Goa BRICS Summit भी काफी अहम रहा था। उस समय दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। इनमें S-400 सिस्टम से जुड़ा अंतर-सरकारी समझौता भी शामिल था। अब करीब दस साल बाद एक बार फिर BRICS के मंच पर भारत और रूस की मुलाकात हो रही है। यही वजह है कि इस बार दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलकों में खास दिलचस्पी है। BRICS Summit में कई Global Issues पर होगी चर्चा BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में कई मोर्चों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। रूस-यूक्रेन संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया की स्थिति और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, कई मुद्दे अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में हैं। भारत के लिए BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है। यह ऐसा प्लेटफॉर्म भी है जहां नई दिल्ली अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करते हुए वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखती है। India-Russia Relations के लिए क्यों खास है दौरा? पुतिन की दिल्ली यात्रा को केवल एक BRICS दौरे के रूप में देखना आसान होगा, लेकिन इसके पीछे भारत-रूस संबंधों का बड़ा संदर्भ भी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से भरोसे और रणनीतिक सहयोग की परंपरा रही है। अब देखना होगा कि Modi-Putin Meeting से दोनों देशों के रिश्तों को लेकर क्या नए संकेत मिलते हैं। खासकर व्यापार, ऊर्जा और भविष्य के रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल पुतिन के दिल्ली पहुंचने के साथ ही BRICS Summit 2026 की हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में भारत-रूस बातचीत से निकलने वाले संदेश पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की नजर भी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kedarnath

Weather Update: Kedarnath में Cloudburst से पैदल मार्ग बंद, UP-MP में Flood जैसे हालात

देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही तेज बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। उत्तराखंड के केदारनाथ (Kedarnath) से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। कहीं बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड से रास्ते बंद हो गए हैं, तो कहीं पुल और हाईवे पानी में डूब गए हैं। मौसम की इस मार से सबसे ज्यादा परेशानी पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को हो रही है। Kedarnath में Cloudburst, पैदल मार्ग पर आया मलबा उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र में भारी बारिश के बीच Cloudburst की घटना सामने आई है। इसके बाद पहाड़ी रास्ते पर मलबा आने से पैदल यात्रा मार्ग प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश के कारण लैंडस्लाइड का खतरा भी बना हुआ है। केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले इलाके में मौसम अचानक बदलने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। प्रशासन के सामने फिलहाल रास्ते को सुरक्षित बनाने और यात्रियों की आवाजाही को लेकर चुनौती बनी हुई है। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा विशेष रूप से बढ़ जाता है।  Mirzapur में पुल पर बारिश का असर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। तेज बारिश और बढ़ते पानी के कारण पुल और आसपास के इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर पानी भरने से स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण सड़क और पुलों पर पानी बढ़ने से प्रशासन को भी लगातार स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है। Farrukhabad में Highway पर भरा पानी फर्रुखाबाद में भारी बारिश के बाद हाईवे पर जलभराव की स्थिति बन गई। सड़क पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई और यात्रियों को परेशानी हुई। हाईवे पर पानी बढ़ने के कारण कई जगह यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी रही। बारिश का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में दिखाई दे रहा है जहां पहले से जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर है। Damoh में बाढ़ जैसे हालात मध्य प्रदेश के दमोह में भी लगातार बारिश के बाद हालात चिंताजनक हो गए हैं। कई इलाकों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीण और निचले क्षेत्रों में बारिश का पानी पहुंचने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। प्रशासन की नजर जलस्तर और प्रभावित इलाकों पर बनी हुई है। कई राज्यों में बारिश बनी आफत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि इस समय बारिश सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि कई इलाकों में बड़ी चुनौती बन चुकी है। पहाड़ों में Cloudburst और Landslide का खतरा है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में Waterlogging और Flood-like Situation लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। ऐसे मौसम में सबसे जरूरी लोगों की सुरक्षा है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने और जोखिम वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। केदारनाथ जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम साफ होने और रास्तों की स्थिति सामान्य होने तक अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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