/ Apr 29, 2026
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Trump

Trump Administration का Global Exit UN और International Organizations से अमेरिका बाहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) ने एक ऐतिहासिक और विवादित कदम उठाते हुए United States of America (USA) को 66 संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (International Organizations) से बाहर निकालने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये संस्थाएं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों और आर्थिक प्राथमिकताओं के खिलाफ हैं। यह कदम अमेरिका की वैश्विक भूमिका में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है और दुनिया भर के देशों की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हैं। किन संगठनों से हटेगा अमेरिका? इस निर्णय में शामिल हैं: प्रमुख संस्थाएं जिनसे अमेरिका हट रहा है: ट्रंप प्रशासन का तर्क व्हाइट हाउस का कहना है कि ये संगठन: प्रशासन का मानना है कि इन संगठनों में खर्च होने वाले संसाधनों को घरेलू प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित किया जाएगा। प्रक्रिया और समयसीमा अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया भर में इस फैसले की आलोचना की गई है: व्यापक संदर्भ ट्रंप प्रशासन की “America First” नीति लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूरी बनाए रखने की कोशिश रही है। इससे पहले भी अमेरिका: से बाहर निकल चुका है या उनकी फंडिंग रोक चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न केवल अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा मोड़ है, बल्कि वैश्विक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी असर डाल सकता है। आने वाले महीनों में इस कदम के दीर्घकालिक परिणाम साफ होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Police

Security Alert के बीच Delhi Police की बड़ी कार्रवाई 20 Bangladeshi नागरिक पकड़े गए

राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Delhi Police ने बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जो बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे थे। खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई Delhi Police अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और सत्यापन अभियान के आधार पर की गई। लंबे समय से कुछ इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से यह ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान पकड़े गए सभी 20 लोग पासपोर्ट, वीज़ा या वैध रहने से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। SIR से पहले बढ़ी सख्ती बताया जा रहा है कि यह अभियान Special Intelligence Review (SIR) से पहले चलाए जा रहे व्यापक सत्यापन ड्राइव का हिस्सा है। इस दौरान दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अन्य एजेंसियां सतर्कता के साथ जांच कर रही हैं। FRRO को सौंपे जाएंगे आरोपी Delhi Police ने सभी हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिकों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए Foreigners Regional Registration Office (FRRO) को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद Foreigners Act और Immigration Laws के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शामिल है। अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Zero Tolerance Policy अपनाई गई है। आने वाले दिनों में दिल्ली और एनसीआर के अन्य इलाकों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। आम लोगों से सहयोग की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से या बिना पहचान के रह रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आम जनता का सहयोग ऐसे अभियानों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vedanta Group

Vedanta Group Agnivesh Agarwal का न्यूयॉर्क में निधन, अनिल अग्रवाल ने जताया गहरा दुख

वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal) का निधन हो गया है। वह 49 वर्ष के थे। यह दुखद घटना अमेरिका के न्यूयॉर्क में हुई, जहां इलाज के दौरान उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। उनके निधन की खबर सामने आते ही देश और दुनिया के कारोबारी जगत में शोक की लहर दौड़ गई। इलाज के दौरान हुआ निधन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अग्निवेश अग्रवाल कुछ समय पहले अमेरिका में स्कीइंग के दौरान एक हादसे में घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह खबर किसी गहरे सदमे से कम नहीं है। पिता का दर्द छलका बेटे को खोने के बाद अनिल अग्रवाल का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा कि यह उनकी जिंदगी का “सबसे अंधकारमय दिन” है। उन्होंने कहा कि अग्निवेश सिर्फ उनके बेटे नहीं थे, बल्कि एक अच्छे दोस्त, मार्गदर्शक और परिवार की मजबूत कड़ी थे। अनिल अग्रवाल ने यह भी कहा कि वे अपने बेटे के सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे। कौन थे Agnivesh Agarwal अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन सहित समूह की कई कंपनियों से जुड़े हुए थे। उन्होंने मायो कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की थी और कम उम्र में ही बिजनेस की गहरी समझ विकसित कर ली थी। वे शांत स्वभाव, दूरदर्शी सोच और आधुनिक नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। देश-विदेश से श्रद्धांजलि अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन पर उद्योग जगत, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। कई लोगों ने इसे भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ी और अपूरणीय क्षति बताया है। एक व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति यह सिर्फ एक बिजनेस लीडर का जाना नहीं है, बल्कि एक बेटे, एक परिवार के सदस्य और एक इंसान का असमय चले जाना है। अनिल अग्रवाल परिवार इस समय गहरे दुख में है और उन्होंने सभी से इस कठिन घड़ी में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold और Silver के भाव आज 7 जनवरी 2026 में सोना और चांदी की कीमतें

7 जनवरी 2026 को भारत में Gold और Silver के भाव में हल्की तेजी देखी गई है। निवेशकों की बढ़ती रुचि और वैश्विक मार्केट की स्थिति के कारण सोना और चांदी दोनों ही उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। सोने (Gold) का भाव आज आज 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹13,880–₹13,948 प्रति ग्राम के बीच है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹12,700–₹12,785 प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। 18 कैरेट सोना भी ₹10,410–₹10,461 प्रति ग्राम के आसपास मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक निवेश की मांग, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और मुद्रास्फीति पर निर्भर करता है। चांदी (Silver) का भाव चांदी का भाव आज लगभग ₹2,53,000 प्रति किलोग्राम है, यानी लगभग ₹253/ग्राम। कुछ मार्केट रिपोर्ट्स में इसे ₹2,59,000 तक भी बताया गया है। चांदी आज स्थिर स्थिति में है और निवेशकों की नजर इसके रुझान पर बनी हुई है। मार्केट का मूड सोना और चांदी दोनों ही आज स्टेबल ट्रेडिंग में हैं। सोने में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि चांदी का भाव स्थिर और थोड़ा ऊपर है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि मेकिंग चार्ज, स्थानीय टैक्स और मार्केट ट्रेंड्स पर ध्यान दें। निवेशकों के लिए सुझाव निष्कर्ष आज का बाजार Gold और Silver के लिए मजबूत दिख रहा है। छोटे उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहकर ही निर्णय लेना चाहिए।
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Stray Dogs

Stray Dogs in Delhi NCR सुप्रीम कोर्ट की आज की Hearing और Guidelines

दिल्ली‑एनसीआर में stray dogs (आवारा कुत्तों) की बढ़ती संख्या ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट आज, 7 जनवरी 2026, को सुनवाई कर रहा है। मामला सिर्फ दिल्ली‑एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों के management और human safety से जुड़ा हुआ है। Supreme Court की Hearing: क्या हुआ आज? सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया) ने मामले में कहा कि इतनी सारी applications इतनी गंभीरता से दायर होना असामान्य है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आवारा कुत्तों के मामले में human safety और animal rights दोनों का संतुलन जरूरी है। कोर्ट ने आज सुनवाई में यह बात भी उठाई कि राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज भी आवारा कुत्तों के हमले के शिकार हो चुके हैं, जिसमें एक अभी भी गंभीर चोटों से जूझ रहा है। पिछले Orders और Controversy सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह निर्देश दिए थे कि: हालांकि, इस दिशा में कुछ लोगों और local authorities के बीच विवाद भी सामने आया। डॉग लवर्स ने कहा कि animal rights की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और humane तरीके से ही कुत्तों को relocate किया जाए। Pet Lovers और Activists की प्रतिक्रिया डॉग लवर्स और animal activists का कहना है कि आवारा कुत्तों को हटाने की प्रक्रिया मानवता और statutory rules के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। दिल्ली के जंतर मंतर पर भी कई प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लेने की मांग की गई। Government Agencies की तैयारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली और NCR की municipal agencies ने आवारा कुत्तों के management के लिए कदम उठाए हैं। Case की जटिलता यह मामला केवल local issue नहीं है। पूरे देश में stray dog management को लेकर awareness और legal framework की जरूरत महसूस की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक जो orders दिए हैं, उनके पालन की जिम्मेदारी municipal authorities और government agencies पर है। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है। अगले आदेश में यह तय किया जा सकता है कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL

IPL से World Cup तक विवाद Mustafizur Rahman, BCCI और Bangladesh के बीच टकराव पर ICC की नजर

T20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने खेल से ज़्यादा राजनीति और कूटनीति को सुर्खियों में ला दिया है। यह पूरा मामला जुड़ा है बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान, IPL, BCCI, BCB और ICC से। विवाद की शुरुआत कहां से हुई? IPL 2026 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने मुस्ताफिज़ुर रहमान को लगभग 9 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद, BCCI के निर्देश पर KKR को उन्हें रिलीज़ करना पड़ा। इस फैसले ने न सिर्फ क्रिकेट जगत को चौंकाया, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी तनाव पैदा कर दिया। BCCI ने आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेदों से जोड़ा गया। मुस्ताफिज़ुर रहमान की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुस्ताफिज़ुर रहमान ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया। बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटरों के अनुसार, वह स्थिति को शांत मन से देख रहे हैं और अपने खेल पर फोकस बनाए हुए हैं। IPL के मौजूदा नियमों के अनुसार, चूंकि खिलाड़ी को फ्रेंचाइज़ी की गलती या अनुशासनहीनता के कारण नहीं हटाया गया, बल्कि बोर्ड के निर्देश पर रिलीज़ किया गया, इसलिए उन्हें किसी तरह के मुआवज़े की संभावना भी नहीं के बराबर है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का सख्त रुख मुस्ताफिज़ुर को IPL से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने कड़ा ऐतराज़ जताया। BCB का कहना है कि: इतना ही नहीं, बांग्लादेश में कथित तौर पर IPL के टीवी प्रसारण पर रोक लगा दी गई, जिससे यह विवाद और गंभीर हो गया। ICC की दो टूक नीति अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने इस पूरे मामले में साफ रुख अपनाया है। ICC का कहना है कि: हालांकि ICC इस समय BCCI और BCB के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है ताकि टूर्नामेंट बिना किसी बड़े व्यवधान के हो सके। वर्ल्ड कप पर मंडराता खतरा अगर यह विवाद नहीं सुलझता है, तो इसके असर दूरगामी हो सकते हैं: फिलहाल क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें ICC के अगले कदम और बांग्लादेश के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। खेल से आगे निकल चुका है मामला यह विवाद अब सिर्फ एक खिलाड़ी या IPL कॉन्ट्रैक्ट तक सीमित नहीं रहा। यह साफ दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कई बार राजनीति और कूटनीति से अलग नहीं रह पाता। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेल की भावना के साथ आगे बढ़ता है या विवादों की छाया में। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

Maharashtra Politics अंबरनाथ नगर परिषद में BJP-Congress की जोड़ी, शिंदे गुट हाशिये पर

महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ नगर परिषद से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। जिन पार्टियों को देश की राजनीति में एक-दूसरे का कट्टर विरोधी माना जाता है, वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस इस बार स्थानीय स्तर पर एक साथ नजर आईं। इस गठबंधन का नतीजा यह हुआ कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर रहना पड़ा। अंबरनाथ में क्या बदला? अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 सीटें हैं। हालिया चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। आम तौर पर माना जा रहा था कि शिवसेना यहां परिषद पर नियंत्रण बनाएगी, लेकिन राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए। BJP ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इस गठबंधन को स्थानीय स्तर पर “Ambernath Vikas Aghadi” नाम दिया गया। इसके बाद परिषद की सत्ता शिवसेना के हाथ से निकल गई। BJP-Congress गठबंधन क्यों है चर्चा में? यह गठबंधन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि BJP लंबे समय से “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा देती रही है। ऐसे में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गया है। स्थानीय BJP नेताओं का कहना है कि यह फैसला शहर के विकास और स्थिर प्रशासन को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि नगर परिषद में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। Shinde Sena की नाराज़गी शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्हें सत्ता से बाहर रखना जनादेश का अपमान है। शिंदे गुट ने BJP पर “अवसरवादी राजनीति” करने का आरोप भी लगाया है। स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है, और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है। महाराष्ट्र Politics पर क्या असर पड़ेगा? अंबरनाथ का यह राजनीतिक प्रयोग सिर्फ एक नगर परिषद तक सीमित नहीं माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक: अंबरनाथ नगर परिषद में बना BJP-Congress Alliance यह दिखाता है कि स्थानीय राजनीति में विचारधाराओं से ज़्यादा संख्याबल और सत्ता समीकरण अहम हो जाते हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए यह झटका जरूर है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह एक साफ संदेश भी है कि आने वाला समय और भी दिलचस्प होने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP Voter List

UP Voter List 2026 उत्तर प्रदेश की Draft Voter List जारी, SIR के बाद लाखों नाम कटे

उत्तर प्रदेश में वोटरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने 6 जनवरी 2026 को UP SIR Draft Voter List 2026 जारी कर दी है। यह सूची Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है, जिसमें मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने का काम किया गया। इस बार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर चर्चा इसलिए ज्यादा है, क्योंकि करीब 2.8 से 2.9 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। क्या है SIR और क्यों जारी की गई Draft Voter List? SIR यानी Special Intensive Revision एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची में केवल योग्य और सक्रिय मतदाताओं के ही नाम हों। इस दौरान: इन सभी मामलों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के बाद अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 जारी की गई है। UP Voter List 2026 में क्या बड़ा बदलाव हुआ? SIR शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 15.44 करोड़ थी।नई ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 12.55 करोड़ रह गई है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अब अपना नाम दोबारा चेक कर रहे हैं। UP Draft Voter List 2026 में अपना नाम कैसे चेक करें? अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें: Online तरीका Offline तरीका अगर Draft Voter List में नाम नहीं है तो क्या करें? अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियों (Claims & Objections) के लिए समय दिया है। जरूरी तारीखें कौन-सा फॉर्म भरें? फॉर्म ऑनलाइन भी भरे जा सकते हैं या फिर BLO के पास जमा किए जा सकते हैं। Draft List क्यों है इतनी अहम? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट इसलिए जरूरी है ताकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vijay Hazare

Vijay Hazare Trophy 2025-26 डेवलपिंग टैलेंट और स्टार प्लेयर्स का जलवा

भारत की घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट Vijay Hazare Trophy 2025-26 अपने रोमांचक मोड़ पर है। मंगलवार को खेले गए 6th Round में दर्शकों ने जबरदस्त मुकाबले देखे। बल्लेबाजों के बड़े स्कोर, तेज गेंदबाजों की धार, और कुछ स्टार खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने इस राउंड को बेहद रोमांचक बना दिया। 6th Round Highlights टूर्नामेंट की रोमांचक तस्वीर छठे राउंड के बाद अंक तालिका और भी दिलचस्प हो गई है। कुछ टीमों ने क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली है, जबकि कई टीमें हर मैच में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।बल्लेबाजों के बड़े स्कोर और गेंदबाजों के निर्णायक स्पेल ने यह साफ कर दिया कि अगले राउंड में मुकाबले और भी रोमांचक होंगे। Vijay Hazare Trophy 2025-26 का छठा राउंड घरेलू क्रिकेट के रोमांच और प्रतिभा को दर्शाता है। युवा और सीनियर दोनों खिलाड़ी अपनी टीम के लिए योगदान दे रहे हैं। फैंस के लिए आने वाले मैचों का इंतजार अब और मुश्किल हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Violence 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, सरत चक्रवर्ती केस ने हिलाया देश

बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नरसिंदी ज़िले के चारसिंदूर बाज़ार में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार सरत चक्रवर्ती मणि की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस डर की तस्वीर है जो आज बांग्लादेश के कई हिंदू परिवारों के मन में बैठ चुका है। दुकान पर हमला, अस्पताल में तोड़ा दम स्थानीय लोगों के मुताबिक, 5 जनवरी की रात सरत चक्रवर्ती अपनी रोज़ की तरह दुकान चला रहे थे। तभी अज्ञात हमलावर धारदार हथियारों के साथ आए और उन पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। सरत को इलाके में एक शांत, मेहनती और किसी से विवाद न रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। यही बात उनकी हत्या को और भी चौंकाने वाली बनाती है। 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, चिंता बढ़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े 6 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें से दो हत्याएँ सिर्फ 24 घंटों के भीतर अलग-अलग ज़िलों में हुईं, जिनमें नरसिंदी और जशोर शामिल हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अब खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं? हिंदू समुदाय में खौफ, बदल रही रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन हत्याओं के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में डर साफ़ दिखाई दे रहा है। कई दुकानदार अब जल्दी दुकान बंद कर रहे हैं, कुछ लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। परिवारों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगला नंबर किसका होगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा,“हम यहीं पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े, लेकिन आज अपने ही देश में डर लग रहा है।” प्रशासन पर सवाल, जवाब की तलाश अब तक कई मामलों में हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर दोषियों को सख़्त सज़ा नहीं मिली, तो ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों की अपील मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ बयान नहीं, ज़मीन पर ठोस कार्रवाई ज़रूरी है। Sarat Chakraborty Mani की हत्या एक चेतावनी है। यह बताती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना कितनी गहरी हो चुकी है। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर पूरे समाज की शांति और भरोसे पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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खंडवा में बैंक के कब्जे वाले मकान में घुसा परिवार, 4 पर केस दर्ज

खंडवा के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक जैन परिवार के खिलाफ जबरन कब्जे का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि बैंक द्वारा सील किए गए मकान में परिवार ने पीछे के दरवाजे से घुसकर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। 86 लाख का लोन नहीं चुकाया मामला सौमित्र नगर का है, जहां चंद्रकुमार जैन ने एयू बैंक से अपने मकान को गिरवी रखकर 86 लाख 67 हजार रुपए का लोन लिया था। लंबे समय तक लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने संपत्ति को अपने आधिपत्य में लेकर मकान सील कर दिया था। कलेक्टर के आदेश पर बैंक को मिला कब्जा जानकारी के अनुसार, बैंक ने बकाया राशि को लेकर नोटिस जारी किए थे, लेकिन परिवार ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद मामला कलेक्टर तक पहुंचा, जहां से बैंक के पक्ष में आदेश जारी हुआ। तहसीलदार की मौजूदगी में बैंक को मकान का कब्जा दिलाया गया। पीछे के गेट से घुसकर कब्जे की कोशिश आरोप है कि इसके बावजूद जैन परिवार पीछे के रास्ते से मकान में घुस गया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। बैंक अधिकारियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। परिवार के 4 सदस्यों पर केस पुलिस ने शिकायत के आधार पर नवीन कुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन, निर्मला जैन और चंद्रकुमार जैन के खिलाफ जबरन कब्जे की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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अब पेट्रोल में होगा बड़ा बदलाव! गाड़ियां चलेंगी ‘शराब वाले फ्यूल’ से

भारत सरकार ने पेट्रोल में 85% तक एथेनॉल मिलाने (E85 Fuel) का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। जानिए इसका आपकी गाड़ी, माइलेज और जेब पर क्या असर पड़ेगा। E85 Petrol: देश में फ्यूल सिस्टम बदलने की तैयारी भारत में अब पेट्रोल का खेल बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत न सिर्फ E85 बल्कि E100 (100% एथेनॉल) फ्यूल को भी शामिल करने की तैयारी है, यानी आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह “अल्कोहल बेस्ड फ्यूल” पर चल सकती हैं। क्या है E85 Fuel? (Simple भाषा में समझें) अब तक देश में E20 लागू हो चुका है, लेकिन सरकार इससे आगे बढ़कर E85 की दिशा में काम कर रही है। सरकार ऐसा क्यों कर रही है? इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण हैं: 👉 तेल आयात पर निर्भरता कम करना👉 पेट्रोल खर्च घटाना👉 पर्यावरण को कम नुकसान (कम कार्बन उत्सर्जन)👉किसानों को फायदा (एथेनॉल गन्ना/मक्का से बनता है) भारत पहले ही E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब अगला कदम E85 है। क्या आपकी गाड़ी में चलेगा E85? यह सबसे बड़ा सवाल है 👇 ❌ अभी की ज्यादातर गाड़ियां E85 के लिए तैयार नहीं हैं✔ इसके लिए Flex Fuel Vehicles (FFV) चाहिए होंगी✔ कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी लानी पड़ेगी यानी तुरंत बदलाव नहीं होगा, लेकिन आने वाले सालों में नई गाड़ियां इस हिसाब से डिजाइन होंगी। क्या होंगे इसके असर? गाड़ियों पर असर पेट्रोल पंप पर बदलाव आपकी जेब पर असर Auto कंपनियों की चिंता भी बढ़ी ऑटो इंडस्ट्री इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं है। कंपनियों का कहना है कि: आगे क्या होगा? E85 Fuel भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।लेकिन सच यह भी है कि यह बदलाव धीरे-धीरे ही लागू होगा। 👉 अभी के लिए घबराने की जरूरत नहीं👉 लेकिन भविष्य में गाड़ी खरीदते समय “Flex Fuel” जरूर ध्यान में रखें

दलबदल मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, 720 दिन की देरी पर सवाल

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की है, जिसमें उनकी विधायकी खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा और मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। “90 दिन में फैसला होना चाहिए, 720 दिन क्यों लगे?” चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है। ऐसे में 720 दिन बीत जाने के बाद भी फैसला नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाई जाए। स्पीकर के पास लंबित है मामला महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की सुनवाई विधानसभा स्पीकर के समक्ष जारी है और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। बीजेपी कार्यक्रम में दिखने के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, निर्मला सप्रे ने 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बीजेपी के मंच पर नजर आई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। 5 जुलाई 2024 को उमंग सिंघार ने स्पीकर के समक्ष याचिका लगाकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। जब इस पर फैसला नहीं हुआ, तो नवंबर 2024 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए 12वीं बोर्ड के नतीजे

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल कुल 83.04% छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 43 छात्रों ने जगह बनाई है। जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर बेमेतरा जिले की छात्रा ओमनी वर्मा रहीं, जिन्होंने 98.20% अंक हासिल किए।तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिले के छात्र कृष महंत रहे, जिनके 97.80% अंक आए। इन जिलों के छात्रों का दबदबा रायगढ़, जशपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और कांकेर जैसे जिलों के छात्रों ने टॉप-10 में जगह बनाई है। इससे साफ है कि छोटे शहरों के छात्र भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टॉपर्स को मिलेंगे 1.5 लाख रुपए राज्य सरकार ने टॉपर्स को 1.5 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। टॉपर जिज्ञासु वर्मा ने बताया कि वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता एक किराना दुकान चलाते हैं। टॉप-10 स्टूडेंट्स लिस्ट (CGBSE 12th 2026) इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट सहित कुल 9 वेबसाइट्स पर देख सकते हैं। (स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना रोल नंबर तैयार रखें) 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
E85 Petrol

Petrol vs Ethanol: E85 Petrol Launch से बदल जाएगा India का Fuel System

भारत के फ्यूल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। केंद्र सरकार ने E85 Petrol(85% Ethanol + 15% Petrol) को लेकर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर यह लागू होता है, तो आने वाले समय में हमारी गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल के बजाय ज्यादा “ग्रीन फ्यूल” पर दौड़ती नजर आ सकती हैं। यह सिर्फ एक टेक्निकल बदलाव नहीं है—बल्कि इसका असर आपकी जेब, किसानों की आय और देश की ऊर्जा नीति तक पड़ेगा। क्या है E85 Petrol? (Simple समझें) E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें: अभी भारत में E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन E85 उससे कहीं आगे का स्टेप माना जा रहा है। सरकार का प्लान क्या है? सरकार चाहती है कि भारत धीरे-धीरे पेट्रोल-डिपेंडेंसी से बाहर निकले। इसी दिशा में: फिलहाल यह ड्राफ्ट स्टेज में है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। क्यों जरूरी है E85? (Big Reasons) 1. Import Bill होगा कम भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। एथेनॉल बढ़ने से यह खर्च कम हो सकता है 2. Pollution में कमी Ethanol एक क्लीनर फ्यूल है इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को राहत मिलेगी 3. Farmers को सीधा फायदा क्या आपकी Car E85 पर चल पाएगी? यहीं पर सबसे बड़ा ट्विस्ट है। हर गाड़ी E85 पर नहीं चल सकती मतलब साफ है—नई टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां ही इस बदलाव का पूरा फायदा उठा पाएंगी। आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

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