/ Apr 29, 2026
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कैलाश नारायण

पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश नारायण सारंग की प्रतिमा पर हमला कायस्थ एवं सकल हिंदू समाज ने किया विरोध प्रदर्शन

भोपाल | 14 जनवरी 2026 – पूर्व राज्यसभा सांसद और अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. श्री कैलाश नारायण सारंग की प्रतिमा के साथ असामाजिक तत्वों द्वारा की गई छेड़छाड़ के विरोध में भोपाल में व्यापक आक्रोश देखने को मिला। रोशनपुरा चौराहे पर बुधवार को कायस्थ समाज और सकल हिंदू समाज के नागरिकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अटल पथ स्थित पार्क में स्थापित स्व. कैलाश नारायण सारंग की प्रतिमा के साथ आग लगाकर छेड़छाड़ की गई, जो न केवल एक सम्मानित जनप्रतिनिधि का अपमान है, बल्कि समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग प्रदर्शन के दौरान उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों की शीघ्र पहचान की जाए और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कायस्थ समाज और सकल हिंदू समाज ने स्पष्ट किया कि महापुरुषों और जननायकों की प्रतिमाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ समाज की एकता और शांति को भंग करने का प्रयास है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए दोषियों को शीघ्र दंडित किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रमुख समाजिक प्रतिनिधि प्रदर्शन में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री अजय श्रीवास्तव नीलू, प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष युवा संगठन संजीव श्रीवास्तव, वेद आशीष, महेन्द्र श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव, उदय सत्य, अग्रवाल समाज से वेंकटेश गोयल, पंजाबी समाज के तेज़ेन्दर सिंह, जाट समाज से शैलेंद्र वर्मा, मुस्लिम समाज से मुस्तकीम बेग, सैनी समाज से महेश सैनी, माहेश्वरी समाज से गिरधर और अरुण राठी, मंडी व्यापारी समाज से हरीश, शिव यादव, यादव समाज से मनोज जैन, जैन समाज से प्रमोद नेमा, अग्रवाल समाज से सुभाष अग्रवाल, पवन सक्सेना, चेम्बर्स के अजय देवनानी, आलोक, अनिल, बृजेश श्रीवास्तव, व्योम खरे, डॉ. ब्रजेश, अभय प्रधान, दिनेश, विनय श्रीवास्तव, दिनेश सक्सेना, अमोल सक्सेना, अनिल राज, प्रमोद प्रधान, दिवाकर श्रीवास्तव, राजकुमार, चित्रांश दीप, विजय, आर.वी. सक्सेना, मधु भटनागर, संजीव श्रीवास्तव, चंदरेश सक्सेना, सौरभ कुलश्रेष्ठ, ब्रजेश श्रीवास्तव, विश्वनाथ भटनागर, मुकेश राठौर, संजय पटेल और सुशील श्रीवास्तव सहित अन्य सामाजिक संगठनों के नागरिक उपस्थित रहे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mayawati

Mayawati Press Meet स्टेज लाइट से धुआं निकलते ही बीच में छोड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय अचानक रुक गई, जब मंच पर लगी एक तेज़ लाइट से धुआं निकलने लगा। कुछ ही सेकेंड में माहौल असहज हो गया और सुरक्षा कारणों से मायावती को अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। यह घटना लखनऊ में आयोजित एक अहम राजनीतिक प्रेस मीट के दौरान हुई, जहां मायावती पार्टी की आगे की रणनीति और मौजूदा राजनीतिक हालात पर बोलने वाली थीं। लेकिन जैसे ही धुएं की तेज़ गंध और लाइट से निकलता धुआं दिखाई दिया, वहां मौजूद लोग भी घबरा गए। मंच पर अचानक बदला माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस सामान्य रूप से चल रही थी, तभी अचानक स्टेज लाइट के एक हिस्से से धुआं उठने लगा। कुछ देर के लिए यह साफ नहीं हो पाया कि यह तकनीकी खराबी है या किसी बड़े खतरे का संकेत। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली और मायावती को मंच से हटाया गया। Mayawati बिना किसी हड़बड़ी के अपनी कुर्सी से उठीं और सुरक्षा घेरे के बीच कार्यक्रम स्थल से बाहर चली गईं। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को वहीं रोक दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना के कुछ ही मिनटों में प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे — कुछ ने इसे सुरक्षा में चूक बताया तो कुछ ने इसे महज तकनीकी खराबी कहा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और समय रहते बड़ा हादसा टल गया। क्या थी धुएं की वजह? फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि लाइट से धुआं क्यों निकला। शुरुआती तौर पर इसे इलेक्ट्रिकल या टेक्निकल फॉल्ट माना जा रहा है। इवेंट मैनेजमेंट टीम और तकनीकी स्टाफ द्वारा उपकरणों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गड़बड़ी कहां हुई। बसपा की ओर से भी कहा गया है कि मायावती पूरी तरह सुरक्षित हैं और जल्द ही अगला कार्यक्रम तय किया जाएगा। राजनीति के बीच एक अप्रत्याशित मोड़ इस वक्त जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज़ है, मायावती की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी काफी अहम मानी जा रही थी। ऐसे में इस तरह की तकनीकी घटना ने न सिर्फ कार्यक्रम को प्रभावित किया, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

US–Iran Tension Trump Says Killings Stopped, ईरान बोला अब कोई फांसी नहीं

ईरान में चल रहे लंबे और उग्र सरकार-विरोधी प्रदर्शनों (Iran Protests) के बीच अमेरिका और ईरान के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या ईरान ने वाकई प्रदर्शनकारियों पर सख्ती कम कर दी है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री ने भी साफ शब्दों में कहा है कि अब किसी तरह की फांसी (Execution / Hanging) की कोई योजना नहीं है। ट्रंप का बयान: “हत्या रुकी, अब फांसी नहीं” डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें “दूसरी तरफ से भरोसेमंद जानकारी” मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं अब रुक गई हैं और सरकार ने फांसी देने की योजना भी टाल दी है। ट्रंप के अनुसार, हालात पहले जैसे नहीं हैं और तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर दिख रहा है।हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के कदम हालात देखकर तय किए जाएंगे। ईरान का पक्ष: “फांसी पर कोई विचार नहीं” ट्रंप के दावे के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि “फांसी का कोई प्लान नहीं है और यह मुद्दा चर्चा के दायरे से बाहर है”। उनका कहना था कि ईरान अपने आंतरिक मामलों को कानून के दायरे में संभाल रहा है और बाहरी दबाव में फैसले नहीं लेता। प्रदर्शन की पृष्ठभूमि: क्यों भड़का गुस्सा? ईरान में पिछले कई हफ्तों से महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक असंतोष को लेकर बड़े-पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं।कुछ मामलों में फांसी की सजा की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अंतरराष्ट्रीय दबाव और बदला माहौल अमेरिका की चेतावनियों, संयुक्त राष्ट्र में उठी आवाज और वैश्विक मीडिया कवरेज के बाद ईरान पर दबाव साफ दिखाई दिया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के बयान और ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया इसी दबाव का नतीजा हो सकते हैं।हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स यह भी कहती हैं कि ईरान में अब भी कई प्रदर्शनकारी हिरासत में हैं और उनके मुकदमों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आगे क्या? फिलहाल, दोनों देशों के बयानों से यह संकेत जरूर मिलता है कि तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन ज़मीनी हकीकत को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं। क्या वास्तव में हिंसा थमी है या यह सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी है—इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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तेज प्रताप यादव

Bihar Family Politics तेज प्रताप यादव और Lalu परिवार की Makar Sankranti मुलाकात

बिहार में मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर तेज प्रताप यादव का दही‑चूड़ा (Dahi‑Chura) Feast आयोजन सिर्फ पारिवारिक रिश्तों को फिर से जीवित करने वाला पल नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी नया संकेत बना। परिवार का मिलन और आशीर्वाद तेज प्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव, माता राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव से पटना स्थित अपने घर पर मुलाकात की। उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को दही‑चूड़ा भोज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।इस मुलाकात में तेज प्रताप ने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में उठाते हुए भावनात्मक पल साझा किया। लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे को आशीर्वाद और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।यह मुलाकात लंबे समय के बाद हुई, जब परिवार के रिश्तों में कुछ दूरी बनी हुई थी। रिश्तों में नरमी और Positive Signs पिछले समय में तेज प्रताप यादव और उनके परिवार के बीच तनाव देखा गया था। आज का यह त्योहार और मुलाकात संकेत देती है कि व्यक्तिगत रिश्तों में सुलह की कोशिशें हो रही हैं। हालांकि यह कहना जल्दी होगा कि सब कुछ सामान्य हो गया है, लेकिन यह पहला सकारात्मक कदम जरूर माना जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश दही‑चूड़ा भोज सिर्फ पारिवारिक मिलन का पल नहीं है। यह बिहार में राजनीतिक परंपरा का भी हिस्सा है। तेज प्रताप ने इस भोज में एनडीए और अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया।इससे यह संकेत मिलता है कि वे न केवल पारिवारिक रिश्तों को सुदृढ़ करना चाहते हैं, बल्कि राजनीतिक समीकरण भी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह आयोजन पारिवारिक प्यार और राजनीति के संतुलन का प्रतीक है। इस तरह के कार्यक्रम अक्सर सामाजिक और राजनीतिक संकेत दोनों देते हैं। आज का दही‑चूड़ा भोज पारिवारिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सब कुछ पूरी तरह सामान्य हो गया है, लेकिन त्योहार और मुलाकात ने रिश्तों में नरमी और सकारात्मक बदलाव के संकेत जरूर दिए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Thailand

Thailand Train Accident चलती ट्रेन पर गिरा Heavy Crane

Nakhon Ratchasima, Thailand: 14 जनवरी 2026 की सुबह थाईलैंड के नाखोन राचसीमा प्रांत में एक भयानक रेल हादसा हुआ। यहां चलती ट्रेन पर हाई-स्पीड रेल निर्माण साइट की भारी क्रेन (Heavy Crane) गिर गई, जिससे 22 लोगों की मौत और 30 से अधिक यात्रियों के घायल होने की खबर है। घटना के समय ट्रेन बैंकॉक से उबोन राचथानी की ओर जा रही थी, जब निर्माण स्थल की क्रेन अचानक ट्रेन पर गिर पड़ी। इसके कारण ट्रेन के कई डिब्बे ट्रैक से उतर गए और कुछ में आग लग गई। हादसे की यह तस्वीर न सिर्फ यात्रियों के लिए डरावनी थी, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई। हादसे की वजह और शुरुआती जानकारी अधिकारियों ने बताया कि क्रेन गिरने का अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन शुरुआती अनुमान यह है कि निर्माण क्षेत्र की सुरक्षा मानकों में कोई चूक हुई हो सकती है। ट्रेन हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव दल (Rescue Team) मौके पर पहुंच गए और घायल यात्रियों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रभावित लोगों की स्थिति घायलों में कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। मृतकों के परिवारों को स्थानीय प्रशासन (Local Authorities) ने तत्काल सहायता देने की घोषणा की है। हादसे ने वहां के लोगों में गहरी शोक और चिंता की लहर पैदा कर दी है। सुरक्षा और भविष्य की तैयारी थाईलैंड सरकार ने हादसे के कारणों की पूरी जांच (Investigation) शुरू कर दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि रेलवे और निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों को और कड़ा किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND

IND vs NZ 2nd ODI 2026 Rajkot में India vs New Zealand का धमाकेदार क्रिकेट शो

राजकोट की शाम, खचाखच भरा स्टेडियम और दोनों तरफ़ से गूंजता शोर—IND vs NZ 2nd ODI सिर्फ़ एक मैच नहीं, बल्कि जज़्बातों की भिड़ंत है। तीन मैचों की वनडे सीरीज़ के इस अहम मुकाबले में टीम इंडिया बढ़त को मजबूत करना चाहती है, जबकि न्यूज़ीलैंड बराबरी के इरादे से उतरेगा। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह दिन खास है, क्योंकि मैदान पर बड़े नाम, तेज़ रफ्तार गेंदबाज़ी और लंबे शॉट्स—सब कुछ देखने को मिलेगा। Rajkot Pitch Report: रन बरसने के आसार राजकोट की पिच आमतौर पर बल्लेबाज़ों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां की सतह पर अच्छा उछाल मिलता है और आउटफील्ड भी तेज़ रहती है, इसलिए चौके-छक्कों की बारिश अक्सर देखने को मिलती है। शुरुआती ओवरों में तेज़ गेंदबाज़ों को स्विंग मिल सकता है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, बल्लेबाज़ी आसान होती जाती है। यही वजह है कि टॉस जीतने वाली टीम अक्सर पहले बल्लेबाज़ी पर नज़र रखती है। India Team: फॉर्म, फायर और फिनिश टीम इंडिया का बैटिंग ऑर्डर इस वक्त गहरी फॉर्म में है। टॉप ऑर्डर से लेकर मिडिल ऑर्डर तक, हर खिलाड़ी अपने रोल को समझते हुए खेल रहा है। राजकोट की सपाट पिच पर भारत का लक्ष्य साफ़ होगा—बड़ा स्कोर बनाना और दबाव में गेंदबाज़ी करना। New Zealand Team: प्लान, प्रिसीजन और पलटवार न्यूज़ीलैंड की टीम हमेशा अनुशासन और स्मार्ट क्रिकेट के लिए जानी जाती है। उनके बल्लेबाज़ शुरुआती ओवरों में संभलकर खेलते हैं और बाद में गियर बदलते हैं। इस मुकाबले में कीवी टीम का फोकस रहेगा—शुरुआत को बड़ा बनाना और भारतीय बल्लेबाज़ों पर जल्दी दबाव डालना। Key Players to Watch हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran vs US फांसी की आशंका के बीच Trump Warning, Tehran ने किया पलटवार

ईरान (Iran) इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। देशभर में सरकार-विरोधी प्रदर्शन तेज़ हैं, सड़कों पर लोग अपने हक़ और आज़ादी की आवाज़ उठा रहे हैं, और दूसरी ओर सरकार सख़्ती से इन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच एक प्रदर्शनकारी को सरेआम फांसी दिए जाने की खबरों ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। क्या हो रहा है ईरान में? पिछले कुछ हफ्तों से ईरान के कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आर्थिक परेशानियाँ, राजनीतिक असंतोष और नागरिक आज़ादियों से जुड़े मुद्दों ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है। इन प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुई हैं, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ हुईं और सैकड़ों नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की मौत की रिपोर्टें सामने आई हैं।इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी कई इलाकों में पाबंदियाँ लगाई गईं ताकि सूचनाओं का प्रसार रोका जा सके। फांसी की खबर और वैश्विक चिंता इन सबके बीच एक युवा प्रदर्शनकारी को मौत की सज़ा दिए जाने और उसे सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने की आशंका ने माहौल को और विस्फोटक बना दिया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे दमन की नई और खतरनाक मिसाल बताया है। Trump Warning: “कड़ी कार्रवाई होगी” अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को फांसी देती है या हिंसा बढ़ाती है, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा।ट्रम्प ने ईरान के लोगों से विरोध जारी रखने की अपील भी की और यह संदेश दिया कि दुनिया उनकी स्थिति को देख रही है। Tehran का पलटवार ट्रम्प की चेतावनी पर तेहरान ने भी कड़ा रुख अपनाया। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रम्प और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर ही हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए उन्हें “मुख्य हत्यारा” करार दिया।ईरान का कहना है कि बाहरी ताकतें देश के आंतरिक मामलों में दखल देकर अस्थिरता पैदा कर रही हैं। क्यों बढ़ रहा है अंतरराष्ट्रीय तनाव? Iran के भीतर जो शुरू हुआ था, वह अब वैश्विक राजनीति का मुद्दा बन गया है। अमेरिका, यूरोप और कई मानवाधिकार संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह मौत की सज़ा और हिंसा बंद करे। दूसरी ओर ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। आम लोगों की कहानी इस पूरे संघर्ष के बीच सबसे ज़्यादा असर आम ईरानियों पर पड़ रहा है—वे परिवार जो अपने बच्चों को खो चुके हैं, वे युवा जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में सड़कों पर उतरे थे, और वे लोग जो हर दिन डर के साए में जी रहे हैं।दुनिया के लिए यह सिर्फ़ एक राजनीतिक टकराव हो सकता है, लेकिन ईरान के लोगों के लिए यह ज़िंदगी और आज़ादी की लड़ाई बन चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026 सूर्य की नई चाल से भारत में नई उम्मीदों की शुरुआत

भारत में मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन, कृषि चक्र और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। यह समय ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति 2026 का खगोलीय महत्व मकर संक्रांति एकमात्र हिंदू पर्व है जो सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की किरणों की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, जिससे जीवन में नई सक्रियता आती है। किसानों के लिए खुशहाली का पर्व भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मकर संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण है। यह नई फसल के आगमन का समय होता है। गेहूं, धान, गन्ना और तिलहन की फसल किसानों की मेहनत का प्रतिफल होती है।इसलिए मकर संक्रांति को कृषि उत्सव भी कहा जाता है। देशभर में अलग-अलग रूप मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन भावना एक—सूर्य और अन्नदाता का सम्मान। पतंगों से सजा भारत का आकाश मकर संक्रांति की सबसे सुंदर पहचान है पतंगबाजी। हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़कर उम्मीद, स्वतंत्रता और नई ऊँचाइयों का प्रतीक बन जाती हैं। गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में पतंग उत्सव सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा माध्यम बनता है। तिल-गुड़ और सामाजिक सौहार्द इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटने की परंपरा है। इसका अर्थ है—“कठिन समय में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखना।” यह पर्व समाज को जोड़ने और प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। मकर संक्रांति 2026 का संदेश जब देश डिजिटल युग और वैश्विक बदलावों की ओर बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति 2026 हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और परिश्रम को न भूलने की सीख देता है। यह त्योहार सिखाता है कि असली विकास तभी संभव है जब हम परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tata Punch

Tata Punch 2026 Facelift Review Price, Variants और Engine Options की पूरी जानकारी

Tata Motors ने भारत में अपनी पॉपुलर माइक्रो‑SUV Tata Punch का 2026 फेसलिफ्ट वर्ज़न लॉन्च कर दिया है। नई Tata Punch अपने स्टाइल, फीचर्स और सुरक्षा अपग्रेड्स के साथ अब और भी आकर्षक बन गई है। बेस वेरिएंट की कीमत ₹5.59 लाख (एक्स‑शोरूम) से शुरू होती है। डिज़ाइन और एक्सटीरियर (Design & Exterior) फेसलिफ्ट Tata Punch में नया और प्रीमियम लुक है। इसके प्रमुख बदलाव: इस रिफ्रेश्ड डिज़ाइन के साथ Punch अब सड़क पर और भी दमदार नजर आती है। इंटीरियर और टेक्नोलॉजी (Interior & Technology) नई Punch के केबिन को और स्मार्ट और कंफर्टेबल बनाया गया है: इन फीचर्स से ड्राइविंग अनुभव और भी आसान और प्रीमियम हो गया है। सुरक्षा फीचर्स (Safety Features) Tata ने Punch की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया है: यह सुनिश्चित करता है कि Punch सिर्फ स्टाइलिश ही नहीं बल्कि सुरक्षित भी है। इंजन और माइलेज (Engine & Mileage) Tata Punch फेसलिफ्ट में कई इंजन विकल्प हैं: माइलेज: वेरिएंट और कीमत (Variants & Price) Punch फेसलिफ्ट विभिन्न वेरिएंट्स में उपलब्ध है: जैसे जैसे वेरिएंट बढ़ते हैं, फीचर्स और अधिक प्रीमियम और एडवांस्ड हो जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Hindu Murder बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा डर के साये में जी रहा अल्पसंख्यक समाज

बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बीते कुछ हफ्ते बेहद डरावने रहे हैं। अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही हत्या और हमलों की खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—ये उन परिवारों की टूटती ज़िंदगियों की कहानी हैं, जिनके घरों से अचानक किसी अपने की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। एक और जान गई, एक और घर उजड़ गया हाल में एक युवा हिंदू ऑटो-रिक्शा चालक की हत्या ने पूरे इलाके को हिला दिया। रोज़ की तरह काम करके घर लौट रहा यह युवक अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी जुटा रहा था। रास्ते में उस पर हमला हुआ, उसे चाकू मारा गया और उसकी जान ले ली गई। उसका वाहन भी लूट लिया गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस असुरक्षा का प्रतीक है जिसमें आज कई अल्पसंख्यक परिवार जी रहे हैं। उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों के लिए अब हर सुबह एक सवाल लेकर आती है—“क्या हम सुरक्षित हैं?” यह कोई एक घटना नहीं यह दुखद मामला अकेला नहीं है। हाल के दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू नागरिकों पर हमले, मारपीट और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं। कभी किसी दुकानदार पर धारदार हथियार से हमला होता है, कभी किसी युवक को भीड़ घेर लेती है, तो कहीं किसी को सिर्फ उसकी पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है। इन घटनाओं की वजहें अलग-अलग बताई जाती हैं—कभी लूट, कभी निजी रंजिश, कभी अफ़वाहें। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए सच्चाई एक ही है: उनके अपने अब लौटकर नहीं आएंगे। डर के साये में जीता एक समुदाय हिंदू मोहल्लों में आज डर साफ महसूस किया जा सकता है। लोग रात में बाहर निकलने से कतराते हैं, दुकानें जल्दी बंद हो जाती हैं और बच्चे भी सहमे रहते हैं। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों, जो कभी खुशियों से भरे होते थे, अब सुरक्षा की चिंता के बीच मनाए जाते हैं। स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्हें सिर्फ न्याय ही नहीं, बल्कि भरोसा भी चाहिए—कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को उसकी आस्था के कारण निशाना नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन और प्रतिक्रियाएँ इन घटनाओं पर पुलिस जांच की बात कह रही है और कुछ मामलों में कार्रवाई का दावा भी किया गया है। साथ ही, मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से सख़्त कदम उठाने की मांग की है ताकि दोषियों को सज़ा मिले और आगे ऐसी घटनाएं न हों। भारत और दूसरे देशों में भी इन खबरों को लेकर चिंता जताई गई है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। क्यों ज़रूरी है यह बात उठाना यह मुद्दा सिर्फ एक देश या एक समुदाय तक सीमित नहीं है। जब कहीं भी किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण हिंसा का शिकार होना पड़ता है, तो वह पूरी इंसानियत के लिए एक चेतावनी होती है। बांग्लादेश (Bangladesh) की विविधता उसकी ताकत रही है—हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है। इस साझी विरासत को बचाने के लिए ज़रूरी है कि नफ़रत और डर की जगह कानून, इंसाफ़ और इंसानियत को आगे रखा जाए। आज Bangladesh के कई हिंदू परिवार अपने घरों में यह दुआ कर रहे हैं कि अगली सुबह शांति के साथ आए। उनकी मांग बहुत साधारण है—जीने का हक़, बिना डर के, बिना भेदभाव के। यह सिर्फ एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की परीक्षा है कि वह हिंसा के सामने खड़ा होता है या चुप रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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खंडवा में बैंक के कब्जे वाले मकान में घुसा परिवार, 4 पर केस दर्ज

खंडवा के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक जैन परिवार के खिलाफ जबरन कब्जे का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि बैंक द्वारा सील किए गए मकान में परिवार ने पीछे के दरवाजे से घुसकर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। 86 लाख का लोन नहीं चुकाया मामला सौमित्र नगर का है, जहां चंद्रकुमार जैन ने एयू बैंक से अपने मकान को गिरवी रखकर 86 लाख 67 हजार रुपए का लोन लिया था। लंबे समय तक लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने संपत्ति को अपने आधिपत्य में लेकर मकान सील कर दिया था। कलेक्टर के आदेश पर बैंक को मिला कब्जा जानकारी के अनुसार, बैंक ने बकाया राशि को लेकर नोटिस जारी किए थे, लेकिन परिवार ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद मामला कलेक्टर तक पहुंचा, जहां से बैंक के पक्ष में आदेश जारी हुआ। तहसीलदार की मौजूदगी में बैंक को मकान का कब्जा दिलाया गया। पीछे के गेट से घुसकर कब्जे की कोशिश आरोप है कि इसके बावजूद जैन परिवार पीछे के रास्ते से मकान में घुस गया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। बैंक अधिकारियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। परिवार के 4 सदस्यों पर केस पुलिस ने शिकायत के आधार पर नवीन कुमार जैन, प्रवीण कुमार जैन, निर्मला जैन और चंद्रकुमार जैन के खिलाफ जबरन कब्जे की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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अब पेट्रोल में होगा बड़ा बदलाव! गाड़ियां चलेंगी ‘शराब वाले फ्यूल’ से

भारत सरकार ने पेट्रोल में 85% तक एथेनॉल मिलाने (E85 Fuel) का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। जानिए इसका आपकी गाड़ी, माइलेज और जेब पर क्या असर पड़ेगा। E85 Petrol: देश में फ्यूल सिस्टम बदलने की तैयारी भारत में अब पेट्रोल का खेल बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत न सिर्फ E85 बल्कि E100 (100% एथेनॉल) फ्यूल को भी शामिल करने की तैयारी है, यानी आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह “अल्कोहल बेस्ड फ्यूल” पर चल सकती हैं। क्या है E85 Fuel? (Simple भाषा में समझें) अब तक देश में E20 लागू हो चुका है, लेकिन सरकार इससे आगे बढ़कर E85 की दिशा में काम कर रही है। सरकार ऐसा क्यों कर रही है? इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण हैं: 👉 तेल आयात पर निर्भरता कम करना👉 पेट्रोल खर्च घटाना👉 पर्यावरण को कम नुकसान (कम कार्बन उत्सर्जन)👉किसानों को फायदा (एथेनॉल गन्ना/मक्का से बनता है) भारत पहले ही E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब अगला कदम E85 है। क्या आपकी गाड़ी में चलेगा E85? यह सबसे बड़ा सवाल है 👇 ❌ अभी की ज्यादातर गाड़ियां E85 के लिए तैयार नहीं हैं✔ इसके लिए Flex Fuel Vehicles (FFV) चाहिए होंगी✔ कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी लानी पड़ेगी यानी तुरंत बदलाव नहीं होगा, लेकिन आने वाले सालों में नई गाड़ियां इस हिसाब से डिजाइन होंगी। क्या होंगे इसके असर? गाड़ियों पर असर पेट्रोल पंप पर बदलाव आपकी जेब पर असर Auto कंपनियों की चिंता भी बढ़ी ऑटो इंडस्ट्री इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं है। कंपनियों का कहना है कि: आगे क्या होगा? E85 Fuel भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।लेकिन सच यह भी है कि यह बदलाव धीरे-धीरे ही लागू होगा। 👉 अभी के लिए घबराने की जरूरत नहीं👉 लेकिन भविष्य में गाड़ी खरीदते समय “Flex Fuel” जरूर ध्यान में रखें

दलबदल मामले में हाईकोर्ट की सख्ती, 720 दिन की देरी पर सवाल

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की है, जिसमें उनकी विधायकी खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा और मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। “90 दिन में फैसला होना चाहिए, 720 दिन क्यों लगे?” चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है। ऐसे में 720 दिन बीत जाने के बाद भी फैसला नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाई जाए। स्पीकर के पास लंबित है मामला महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की सुनवाई विधानसभा स्पीकर के समक्ष जारी है और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। बीजेपी कार्यक्रम में दिखने के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, निर्मला सप्रे ने 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बीजेपी के मंच पर नजर आई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। 5 जुलाई 2024 को उमंग सिंघार ने स्पीकर के समक्ष याचिका लगाकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। जब इस पर फैसला नहीं हुआ, तो नवंबर 2024 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए 12वीं बोर्ड के नतीजे

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल कुल 83.04% छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 43 छात्रों ने जगह बनाई है। जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर बेमेतरा जिले की छात्रा ओमनी वर्मा रहीं, जिन्होंने 98.20% अंक हासिल किए।तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिले के छात्र कृष महंत रहे, जिनके 97.80% अंक आए। इन जिलों के छात्रों का दबदबा रायगढ़, जशपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और कांकेर जैसे जिलों के छात्रों ने टॉप-10 में जगह बनाई है। इससे साफ है कि छोटे शहरों के छात्र भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टॉपर्स को मिलेंगे 1.5 लाख रुपए राज्य सरकार ने टॉपर्स को 1.5 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। टॉपर जिज्ञासु वर्मा ने बताया कि वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता एक किराना दुकान चलाते हैं। टॉप-10 स्टूडेंट्स लिस्ट (CGBSE 12th 2026) इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट सहित कुल 9 वेबसाइट्स पर देख सकते हैं। (स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना रोल नंबर तैयार रखें) 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
E85 Petrol

Petrol vs Ethanol: E85 Petrol Launch से बदल जाएगा India का Fuel System

भारत के फ्यूल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। केंद्र सरकार ने E85 Petrol(85% Ethanol + 15% Petrol) को लेकर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर यह लागू होता है, तो आने वाले समय में हमारी गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल के बजाय ज्यादा “ग्रीन फ्यूल” पर दौड़ती नजर आ सकती हैं। यह सिर्फ एक टेक्निकल बदलाव नहीं है—बल्कि इसका असर आपकी जेब, किसानों की आय और देश की ऊर्जा नीति तक पड़ेगा। क्या है E85 Petrol? (Simple समझें) E85 एक हाई एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल है, जिसमें: अभी भारत में E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन E85 उससे कहीं आगे का स्टेप माना जा रहा है। सरकार का प्लान क्या है? सरकार चाहती है कि भारत धीरे-धीरे पेट्रोल-डिपेंडेंसी से बाहर निकले। इसी दिशा में: फिलहाल यह ड्राफ्ट स्टेज में है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। क्यों जरूरी है E85? (Big Reasons) 1. Import Bill होगा कम भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। एथेनॉल बढ़ने से यह खर्च कम हो सकता है 2. Pollution में कमी Ethanol एक क्लीनर फ्यूल है इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को राहत मिलेगी 3. Farmers को सीधा फायदा क्या आपकी Car E85 पर चल पाएगी? यहीं पर सबसे बड़ा ट्विस्ट है। हर गाड़ी E85 पर नहीं चल सकती मतलब साफ है—नई टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां ही इस बदलाव का पूरा फायदा उठा पाएंगी। आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

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