दुनिया का ध्यान अब ग्रीनलैंड (Greenland) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आर्कटिक (Arctic) की बर्फ पिघल रही है और इस छोटे से बर्फीले इलाके ने वैश्विक राजनीति और आर्थिक रणनीति में अपनी जगह बना ली है। कभी शांत, दूर-दराज और उपेक्षित माना जाने वाला यह क्षेत्र आज अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के लिए रणनीतिक और आर्थिक मोर्चा बन गया है। बर्फ पिघलना और नए अवसर ग्रीनलैंड की बर्फ के तेज़ी से पिघलने का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है। इससे: खनिजों का खजाना: Rare Minerals ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम, कोबाल्ट, निकल और यूरेनियम जैसे खनिज पाए जाते हैं। ये आधुनिक दुनिया की तकनीक और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के लिए जीवनदायिनी हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल, मिसाइल सिस्टम और सेमीकंडक्टर उद्योग इन खनिजों पर निर्भर हैं। यही वजह है कि बड़ी शक्तियाँ इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। महाशक्तियों की बढ़ती दिलचस्पी अमेरिका (USA) अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड सिर्फ डेनमार्क का हिस्सा नहीं, बल्कि उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा और आर्कटिक में रणनीतिक ताकत का आधार है। थ्यूल स्पेस बेस (Thule Space Base) जैसे सैन्य अड्डे अमेरिका की पकड़ मजबूत करते हैं। रूस (Russia) रूस ने आर्कटिक में नए सैन्य ठिकाने, परमाणु पनडुब्बियाँ और रडार सिस्टम स्थापित किए हैं। ग्रीनलैंड पर किसी अन्य देश का प्रभाव रूस के लिए चुनौतीपूर्ण है। चीन (China) चीन खुद को “Near-Arctic State” कहता है और निवेश, खनिज दोहन और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। बढ़ता सैन्य और सुरक्षा खतरा आर्कटिक अब ‘नो-मैन ज़ोन’ नहीं रहा। बर्फ पिघलने से मिसाइल और सैन्य गतिविधियों के लिए सबसे छोटा रास्ता खुल गया है। बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ किसी भी गलती या मिसअंडरस्टैंडिंग से वैश्विक संघर्ष का कारण बन सकती हैं। ग्रीनलैंड के सामने चुनौतियाँ ग्रीनलैंड की आबादी कम है, लेकिन संसाधन बहुत हैं। आर्थिक विकास और विदेशी निवेश की ज़रूरत है, लेकिन महाशक्तियों के मोहरे में बदलने का डर भी है। इसके अलावा स्थानीय आबादी और पर्यावरण पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रीनलैंड अब सिर्फ बर्फीला क्षेत्र नहीं रह गया है। यह वैश्विक राजनीति, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी वर्चस्व की चाबी बन चुका है। जैसे-जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघलेगी, ग्रीनलैंड की महत्वता और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा और तेज़ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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